24/09/2026
सुरभि बेदी बनाम मंजीत कौर (हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट, Cr. MMO 797/2026, निर्णय दिनांक 04.08.2026, न्यायमूर्ति राकेश कैंथला)
परिणाम: याचिका खारिज। सास को साझा घर में रहने का अधिकार है, भले ही घर बहू के स्वामित्व में हो।
तथ्य
मंजीत कौर (सास) ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12, 17, 18, 19 और 22 के तहत अपनी बहू सुरभि बेदी (प्रतिवादी 1) के विरुद्ध आवेदन दायर किया।
परिवार सुरभि के स्वामित्व वाले घर में साथ रहता था, जिसमें वे 08.09.2024 को रहने गए थे। झगड़ों के बाद सुरभि ने एक किरायेदार (प्रतिवादी 2) बिठा दिया, और मंजीत व उनके पति को 07.11.2025 को बेदखल कर दिया गया।
सुरभि ने रिश्ते और किरायेदारी, दोनों को स्वीकार किया। उनका कहना था कि घर उनका है, मंजीत और उनके पति केवल अनुज्ञप्तिधारी (licensee) थे, और उन्होंने उसके साथ दुर्व्यवहार किया।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मंजीत का संयुक्त कब्जा बहाल किया, और अपर सत्र न्यायाधीश ने अपील में इसे बरकरार रखा। इसके बाद सुरभि ने यह याचिका दायर की।
याचिकाकर्ता का तर्क: घर उसका है, इसलिए वह "साझा घर" नहीं है। सास घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत बहू के विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर सकती। उसने कृष्ण कुमार बनाम नवनीत (पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, 2018) पर भरोसा किया।
न्यायालय का तर्क
साझा घर (धारा 2(s)): सतीश चंदर आहूजा बनाम स्नेहा आहूजा (2021) पर भरोसा करते हुए न्यायालय ने कहा कि जिस घर में पक्षकार घरेलू संबंध में साथ रहे हों, वह साझा घर है, चाहे उसका मालिक कोई भी हो। प्रतिवादी के अपने उत्तर में भी साथ रहना स्वीकार किया गया था।
एस.आर. बत्रा बनाम तरुणा बत्रा (2007): आहूजा में कहा गया कि इस मामले में सही कानून नहीं बताया गया था। घर का पति का होना या पति द्वारा किराए पर लिया गया होना आवश्यक नहीं है।
प्रभा त्यागी बनाम कमलेश देवी (2022): घरेलू संबंध में रहने वाली प्रत्येक महिला, जिनमें सास या बहू भी शामिल हैं, को साझा घर में रहने का अधिकार है, चाहे उसका उस घर में कोई स्वामित्व या हित हो या न हो।
धारा 17(1) यह अधिकार घरेलू हिंसा न होने पर भी संरक्षित करती है।
धारा 17(2) तब लागू होती है जब महिला पीड़ित व्यक्ति हो। उसे विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के बिना बेदखल या बहिष्कृत नहीं किया जा सकता।
यह अधिकार केवल वास्तविक निवास तक सीमित नहीं है, रचनात्मक निवास (constructive residence) भी इसमें शामिल है।
कृष्ण कुमार का निर्णय अनुसरणीय नहीं: यह आहूजा से पहले का है और बत्रा पर आधारित है, इसलिए इसका अनुसरण नहीं किया जा सकता।
निर्णय: सास घरेलू संबंध में है, और सुरभि के स्वामित्व के बावजूद वह घर साझा घर है। सुरभि उसे घर किसी तीसरे व्यक्ति को किराए पर देकर बेदखल नहीं कर सकती थी, और संयुक्त कब्जे की बहाली को बरकरार रखा गया। न्यायालय को अपनी अंतर्निहित अधिकारिता (धारा 528 BNSS / 482 CrPC) में हस्तक्षेप करने योग्य कोई त्रुटि नहीं मिली।