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16/08/2022

पिता का गोत्र पुत्री को क्यों प्राप्त नहीं होता ? गोत्र क्या है ?

#स्त्री रज के रूप में XX गुणसूत्र का स्राव करतीं हैं जबकि #पुरूष वीर्य के रूप में मे कभी X तो कभी Y स्राव करता है । इंटरकोर्स के समय पुरुष यदि X गुणसूत्र स्राव किया तो X से X मिलकर #पुत्री का रूप ग्रहण करता है। वहीं यदि पुरूष Y गुणसूत्र स्राव करता है तो X से Y मिलकर #पुत्र का रूप ग्रहण करता है। "अर्थात् पुत्री या पुत्र का होना पुरूष पर निर्भर है स्त्री पर नहीं"
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जब XX अर्थात् पुत्री गुणसूत्र मे एक माता का और एक पिता का आता है यह संयोग एक गांठ की रचना करता है जिसे cross over कहते हैं और xy गुण सूत्र मे अर्थात् पुत्र मे y गुण सूत्र केवल पिता से ही आता है क्योंकि माता मे यह नहीं है तथा दोनों असमान होने से पूर्ण cross over नहीं होता, केवल 5% तक होता है और 95% ऐसे ही रहता है। इसलिए महत्वपूर्ण y गुणसूत्र है और यह निश्चित ही पिता से आया है। बस इसी y गुणसूत्र का सम्बंध गोत्र से है। चूंकि y गुणसूत्र स्त्रियों मे नहीं होता इसलिए विवाह के पश्चात स्त्रियों को उनके पतियों का गोत्र दिया जाता है।वैदिक संस्कृति मे एक ही गोत्र मे विवाह नहीं होता क्योंकि सगोत्र होने से वे बहिन भाई होते है अर्थात
उनके पूर्वज एक ही थे।
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आनुवांशिक विज्ञान के अनुसार यदि समान गुण धर्म वाले दो व्यक्तियों का विवाह हो तो संतान विकृत होगी।ऐसे दम्पति की संतान मे कोई नयापन न होने से रचनात्मकता का अभाव होता है। ऐसी सन्तान मे अनुवांशिक दोष मानसिक विकलांगता, अपंगता आदि रोग आते है. इसलिए शास्त्रों मे सगोत्र विवाह निषिद्ध है।

इस गोत्र का संवाहक यानी उत्तराधिकार पुत्री को एक पिता न कर दे इसलिए विवाह से पहले कन्या दान कराया जाता है। गोत्र मुक्त कन्या का पाणिग्रहण कर भावी वर अपने गोत्र मे उस कन्या को स्थान देता है।अब यदि पुत्र है तो 95% पिता और 5% माता।और यदि पुत्री है तो 50% माता और 50% पिता का सम्मिलन है। फिर पुत्री की पुत्री हुई तो यह DNA 50% का आधा अर्थात् 25% रह जायेगा। यदि फिर पुत्री हो तो फिर आधा रह जाएगा इस प्रकार छः पीढी तक यह 1% रह जायेगा। सातवीं पीढी मे न के बराबर होगा इसीलिए माता की छः पीढी मे विवाह निषेध है।
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एक बात और माता पिता कन्यादान करते हैं तो इसका अर्थ यह नहीं कि कन्या कोई वस्तु है बल्कि यह है कि दूसरे की कुलवधु बनने के लिए उसे गोत्र मुक्त होना चाहिए। DNA मुक्त तो नहीं हो सकती क्योंकि भौतिक शरीर मे वे DNA बने रहते हैं, इसलिए माता का रिश्ता बना रहता है केवल पिता के गोत्र का त्याग किया जाता है ।तभी वह भावी वर को वह वचन देती है कि वह उसके कुल की मर्यादा का पालन करेगी। उसके गोत्र व DNA को करप्ट नहीं करेगी, वर्णशंकर नहीं करेगी। कहा गया है कि विवाह माता की छः पीढी और पिता के गोत्र में नहीं करना चाहिए।

कोर्ट ने   को सील करने का आदेश दिया, शिवलिंग को संरक्षित किया जाये, वाराणसी के डीएम, कमिश्नर और सीआरपीएफ कमाडेंट को शिवल...
17/05/2022

कोर्ट ने को सील करने का आदेश दिया, शिवलिंग को संरक्षित किया जाये, वाराणसी के डीएम, कमिश्नर और सीआरपीएफ कमाडेंट को शिवलिंग का संरक्षण करने के आदेश कोर्ट ने दिए

लीगल सॉल्यूशन पॉइंट की ओर से आपको रामनवमी की हार्दिक बधाई संग ढ़ेर सारी शुभकामनाएं
10/04/2022

लीगल सॉल्यूशन पॉइंट की ओर से आपको रामनवमी की हार्दिक बधाई संग ढ़ेर सारी शुभकामनाएं

07/04/2022

सुप्रीम कोर्ट ने दिया राज्य सरकारों को निर्देश-

क्रिमिनल केस में आरोपी बरी तो पुलिस अफसरों को दें सजा: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि क्रिमिनल केस में आरोपी के बरी होने का मतलब है जस्टिस डिलीवरी सिस्टम की नाकामी। दूसरा पहलू यह भी है कि किसी निर्दोष के खिलाफ मुकदमा चलाया गया। यह नहीं होना चाहिए।
राज्य सरकारें आरोपियों के बरी होने के मामलों की समीक्षा करें। यदि अभियोजन या जांच से जुड़े पुलिस अफसरों ने गलती की है तो उन्हें दंडित किया जाए। जस्टिस सीके प्रसाद और जेएस खेहर की बेंच ने कहा कि राज्य सरकारें ६ माह में अफसरों की ट्रेनिंग की व्यवस्था करें। ताकि किसी भी निर्दोष के खिलाफ झूठा मुकदमा न चलें। न्याय सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के गृह विभाग आरोपी के बरी होने के हर मामले से जुड़े आदेश और रिकॉर्ड जुटाए। पता लगाए कि जांच और अभियोजन के दौरान क्या गलतियां हुई।

बेंच के मुताबिक यह देखा जाए कि गलती जान-बूझकर की गई या इसमें अफसर का दोष नहीं था। यदि गलती जान-बूझकर की गई है तो उस अफसर को सजा मिलनी चाहिए। इन केसों से जुड़े विश्लेषण को जूनियर जांच और अभियोजन अधिकारियों के ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल किया जाए। यह काम छह महीने में होना चाहिए।

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01/01/2022

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सिक्के और सरकारी टिकटों से संबंधित अपराधइस अध्याय में आई.पी.सी. की धारा 230 से 263A शामिल है और सिक्का और सरकारी टिकटों ...
04/12/2021

सिक्के और सरकारी टिकटों से संबंधित अपराध

इस अध्याय में आई.पी.सी. की धारा 230 से 263A शामिल है और सिक्का और सरकारी टिकटों से संबंधित अपराधों से संबंधित है। इन अपराधों में नकली सिक्के बनाना या बेचना या सिक्के रखने के लिए साधन या भारतीय सिक्के शामिल हो सकते हैं, नकली सिक्के का आयात या निर्यात करना, जाली मोहर लगाना, नकली मोहर पर कब्जा करना, किसी भी पदार्थ को प्रभावित करने वाले किसी भी झटके को रोकना सरकार के नुकसान का कारण बन सकता है। सरकार, पहले से ज्ञात स्टैम्प का उपयोग कर रही है, आदि।

कानून संबंधित किसी भी समस्या के लिए फोन करें
हीरा झा
094728 77946
LLB, MA

16/06/2021

अदालत में किसी आरोपी की ज़मानत लेने वाले व्यक्ति पर क्या जिम्मेदारियां आ सकती हैं

दंड प्रक्रिया संहिता के अध्याय 33 में ज़मानत से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं। ज़मानत का अर्थ विस्तृत है, परंतु आपराधिक विधि में ज़मानत से तात्पर्य है- 'किसी अपराध में किसी व्यक्ति को न्यायालय में पेश कराने की जिम्मेदारी लेना।'
इससे सरल शब्दों में ज़मानत को परिभाषित नहीं किया जा सकता है। अदालत में अभियुक्त को समय-समय पर पेश कराने एवं जब भी न्यायालय अभियुक्त को न्यायालय में प्रस्तुत होने के लिए आदेश करें, तब उसके प्रस्तुत होने की गारंटी लेने वाले व्यक्ति को जमानतदार अर्थात प्रतिभू (Surety) कहा जाता है।
आपराधिक विधि में किसी अपराध में किसी अभियुक्त की जमानत लेने पर कुछ दायित्व ज़मानतदार व्यक्ति पर भी होते हैं।
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436, 437, 438 और धारा 439 के अंतर्गत न्यायालय द्वारा बंदी व्यक्ति को ज़मानत पर छोड़े जाने के प्रावधान है।
प्रतिभू (Surety) प्रतिभू का अर्थ है ज़मानतदार अर्थात ऐसा व्यक्ति जो अभियुक्त के न्यायालय में पेश होने की जिम्मेदारी ले रहा है। जब कोई व्यक्ति इस तरह का दायित्व लेता है तो न्यायालय उससे किसी एक निश्चित धनराशि का बंधपत्र न्यायालय मांगता है। प्रतिभू दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 441(ए) के अंतर्गत यह घोषणा करता है की वह अभियुक्त को जब भी आवश्यक हो या न्यायालय द्वारा बुलाया जाए, तब न्यायालय में पेश करेगा। ऐसी घोषणा के अंतर्गत प्रतिभू का दायित्व होता है की वह अभियुक्त को लाकर अदालत में पेश करे। न्यायालय द्वारा निश्चित की गई एक धनराशि का बंधपत्र प्रतिभू द्वारा प्रस्तुत कर दिया जाता है। बंधपत्र के ज़ब्त कर लिए जाने के परिणाम इस मामले में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 सबसे महत्वपूर्ण धारा है, जो यह उल्लेख करती है कि ज़मानतदार के दायित्वों से क्या परिणाम होते हैं। धारा 446 के अंतर्गत यदि बंधपत्र को ज़ब्त कर लिया जाता है तो ऐसे बंधपत्र में जितनी धनराशि का उल्लेख होता है, इतनी धनराशि की वसूली के लिए न्यायालय को ऐसा अधिकार मिल जाता है जैसा अधिकार जुर्माना वसूल करने के लिए होता है। समाधानप्रद रूप से यह साबित हो जाता है कि बंधपत्र ज़ब्त हो चुका है तो ऐसी परिस्थिति में न्यायालय बंधपत्र की जो राशि है उसकी वसूली के एक नवीन वाद की रचना करती है। यदि ज़मानतदार द्वारा जितनी धनराशि का बंधपत्र अपने ज़मानत पत्र में दिया था, उसे शास्ति के रूप में जमा नहीं करता है तो ऐसी परिस्थिति में न्यायालय द्वारा 6 माह तक का कारावास जमानतदार को दिया जा सकता है। न्यायालय किन्हीं विशेष कारणों से बंधपत्र की राशि को कम कर सकता है या फिर उसको आधा कर सकता है, परंतु ऐसे कारणों का स्पष्ट वर्णन किया जाना होगा। ज़मानतदार की मृत्यु हो जाने पर किसी प्रकरण में कोई व्यक्ति किसी अभियुक्त की ज़मानत लेता है और ज़मानतपत्र में एक निश्चित धनराशि का उल्लेख करता है, जिसे बंधपत्र के रूप में न्यायालय को सौंपता है और ज़मानतदार की मृत्यु हो जाती है, ऐसी स्थिति में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 446 उपधारा (4) के अंतर्गत में जिस संपदा का उल्लेख किया गया है जैसे कोई रजिस्ट्री या कोई फिक्स डिपॉज़िट इत्यादि हो तो वह उन्मोचित हो जाती है और किसी भी संपदा पर कोई दायित्व नहीं रह जाता है। ज़मानतदार के जीवित होते हुए ही केवल संपदा पर दायित्व रहता है। यदि ज़मानतदार की मृत्यु हो जाती है तो ऐसी परिस्थिति में ज़मानतदार की संपदा पर दायित्व नहीं होगा। अभियुक्त को न्यायालय द्वारा पुनः नया ज़मानतदार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने का आदेश किया जाता है यदि अभियुक्त नया ज़मानतदार नहीं पेश कर पाता है तो उसे गिरफ्तारी वारंट जारी कर कारावास भेज दिया जाता है।

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आप सभी को लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।संकट कटे मिटे सब पीड़ा जउ सुमिरै हनु...
27/04/2021

हनुमान जयंती के पावन अवसर पर आप सभी को लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं।

संकट कटे मिटे सब पीड़ा जउ सुमिरै हनुमत बलबीरा

लीगल सोलुशन पॉइन्ट की ओर से आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं , भगवान राम आप के परिवारजनों को स्वास्थ्य रखें।
21/04/2021

लीगल सोलुशन पॉइन्ट की ओर से आप सभी को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं , भगवान राम आप के परिवारजनों को स्वास्थ्य रखें।

लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से आप सभी को होली हार्दिक शुभकामनाएं
29/03/2021

लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से आप सभी को होली हार्दिक शुभकामनाएं

लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से आप सभी को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
22/03/2021

लीगल सोलुशन पॉइंट की ओर से आप सभी को बिहार दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥ #महाशिवरात्रि की हार...
11/03/2021

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥
#महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर आप सबों के सुख, शान्ति एवं समृद्धि की कामना करता हूँ।

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Jhanjharpur
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