Adv Arjun Chandna

Adv Arjun Chandna A human for the Nation First, RssThinker,Social Activist, blogger & Investigate person.. Sujan Singh Gurjar (Farmer)
•Mother-Mrs.

Advocate- Arjun singh gurjar(Adv arjun chandna)
(an introduction)
•Name- Arjun Singh Gurjar (Chandna)
•Father- Mr. Geeta Bai Gurjar
•Date of Birth-07-07-1996
•Birthplace- Village Garda, Panchayat Asalpur, post-borkheri(gujran),block Aklera326039.
•work Place - Jhalawar (Rajasthan-india),

Dedicated to public service through journalism for 10 years.(Newspaper - Correspondent in Rajasthan Patrika fr

om 2011 - Assistant Editor in Dainik Bhaskar till 2021)

•Academic Life-
•Graduate in Arts stream from Kota University (BA),
• Master of Arts (MA),&
• Bachelor of Laws (LL.B),
• Graduate in Journalism, from Vardhman Kota Open University (BJMC),

•Social life-
•Trained volunteers of Rashtriya Swayamsevak Sangh(RSS), Sangh age-20 years, (since childhood), former pracharak- (Dungarpur-Chittor prant), liability event, ghatnayak to 2005 from block secretary (karyvaah) till 2022.and social worker.

•Currently working-
•Advocate in Aklera (Jhalawar))

 #रिमांड क्या होता है? #अपराधिक मामलों में Remand (रिमांड) का मतलब होता है —  #किसी आरोपी को जाँच या न्यायिक प्रक्रिया क...
26/05/2026

#रिमांड क्या होता है?
#अपराधिक मामलों में Remand (रिमांड) का मतलब होता है — #किसी आरोपी को जाँच या न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अदालत के आदेश से पुलिस या जेल की अभिरक्षा में भेजना।
#जब पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है और 24 घंटे के भीतर जाँच पूरी नहीं हो पाती, तब उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करके रिमांड मांगी जाती है।
रिमांड के मुख्य प्रकार
1. Remand (पुलिस रिमांड)
इसमें आरोपी पुलिस की हिरासत में रहता है।
पुलिस उससे पूछताछ, बरामदगी, साक्ष्य जुटाने आदि का कार्य करती है।
मुख्य बातें
#मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होती है।
प्रारम्भिक 15 दिनों के भीतर ही दी जा सकती है।
आरोपी को पुलिस #थाने/कस्टडी में रखा जाता है।
2. Remand (न्यायिक रिमांड)
इसमें आरोपी को #जेल भेज दिया जाता है और वह #न्यायिक अभिरक्षा में रहता है।
#मुख्य बातें
आरोपी जेल में रहता है, पुलिस हिरासत में नहीं।
पुलिस पूछताछ सीधे नहीं कर सकती।
#गंभीर अपराधों में अक्सर न्यायिक रिमांड दी जाती है।
BNSS में प्रावधान
पहले यह प्रावधान की धारा 167 में था, अब

के स्थान पर में धारा 187 लागू होती है।
रिमांड की अवधि
#प्रारम्भिक कुल पुलिस रिमांड सामान्यतः 15 दिन तक।
उसके बाद न्यायिक रिमांड।
#जाँच पूरी करने की अधिकतम अवधि:
सामान्य अपराध: 60 दिन
#गंभीर अपराध (10 वर्ष/आजीवन/मृत्युदंड): 90 दिन
यदि समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को “डिफॉल्ट बेल” का अधिकार मिल सकता है।
#सरल उदाहरण
मान लीजिए चोरी के मामले में पुलिस ने किसी व्यक्ति को पकड़ा और अभी सामान बरामद करना बाकी है, तो पुलिस अदालत से Remand मांग सकती है।
लेकिन यदि पूछताछ पूरी हो गई और केवल मुकदमा चलना बाकी है, तो आरोपी को Remand में जेल भेजा जाता है।



✍️⚖️🧑‍🎓

"एक निमंत्रण है, तो दूसरा सख्त आदेश! क्या आप जानते हैं समन और वारंट का असली फर्क?" ारंट  #कानूनी_ज्ञान     #कानून_की_बात...
25/05/2026

"एक निमंत्रण है, तो दूसरा सख्त आदेश! क्या आप जानते हैं समन और वारंट का असली फर्क?"
ारंट

#कानूनी_ज्ञान



#कानून_की_बात

10/02/2026

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सरकार से वीडीए/क्रिप्टोकरेंसी को वैध बनाने और उन्हें एक अलग परिसंपत्ति वर्ग के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया है, साथ ही स्पष्ट नियमन और नीतिगत स्पष्टता की मांग की है।

राजनीति काजल की कोठरी है। काजल की कोठरी में धवल वस्त्र पहनकर प्रवेश करना कोई चमत्कार नहीं है, चमत्कार है काजल की कोठरी स...
05/02/2026

राजनीति काजल की कोठरी है। काजल की कोठरी में धवल वस्त्र पहनकर प्रवेश करना कोई चमत्कार नहीं है, चमत्कार है काजल की कोठरी से उजले व्यक्तित्व के साथ बेदाग वापस लौटना। ये चमत्कार वही कर सकते हैं जिनमें प्रामाणिकता कूट कूट कर भरी हो। जो निर्लिप्त, निष्काम, निर्दोष हो। संघ के प्रचारक श्री हितानन्द शर्मा जी की पांच साल बाद बीजेपी से संघ में वापसी हुई। जैसे गए थे वैसे ही, बल्कि व्यक्तित्व में और निखार के साथ लौटे हैं।

यूं तो संघ के प्रचारकों में ध्येयनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण रहता ही है। लेकिन राजनीति का क्षेत्र बड़े ही आकर्षण का क्षेत्र होता है। आज के परिदृश्य की राजनीति, वह भी सत्ता के संगठन की राजनीति का क्षेत्र तो और भी जोखिम भरा है। यहां षड्यंत्र, आरोप, प्रलोभन, अहंकार, भ्रम, राग, द्वेष जैसे विकारों के लिए पर्याप्त आशंकाएं या यूं कहें कि संभावनाएं होती हैं। ऐसे में इन विकारों से प्रभावित हुए बिना कार्य करना एक कठिन चुनौती है।

श्री हितानन्द जी इस चुनौती पूर्ण क्षेत्र में अपनी भूमिका का सार्थक निर्वाह कर वापस लौटे हैं। संघ ने उन्हें मध्य क्षेत्र (मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़) का सह बौद्धिक प्रमुख का दायित्व सौंपा है। संघ की सीधी वर्किंग में वापसी होना ही उनकी ध्येयनिष्ठा और प्रामाणिकता का पर्याय है। वास्तव में जैसा कि उनका पिंड है, मुझे लगता है कि राजनीति में पांच साल बिताना उनके लिए आसान नहीं रहा होगा।

बेहद सरल, अंतर्मुखी, संकोची और सीधे सपाट व्यक्तित्व के धनी श्री हितानन्द शर्मा जी को उनके अप्रभावित, अविचलित, शांत व्यक्तित्व के कारण ही संघ ने बीजेपी में भेजा होगा। संघ को भी विश्वास होगा कि राजनीति के क्षेत्र में माया मोह में पड़कर एक प्रचारक कम नहीं होगा। बल्कि और निखर कर लौटेगा। वैसा ही हुआ भी। संगठनकर्ताओं में यही दूरदृष्टी होती है।

वर्ना यह कहने में कोई परहेज नहीं है कि आजकल कई लोग आरएसएस को पॉलिटिकल फील्ड में एंट्री का शॉर्ट रूट समझने लगे हैं। यह बात और है कि ऐसे लोगों को संघ भी कुछ समय बाद ताड़ लेता है और उचित मार्ग दिखा देता है। ऐसे विचित्र दौर में श्री हितानन्द शर्मा जी जैसे व्यक्तित्व न केवल संगठन की पूंजी में शामिल हैं बल्कि संघ को समझने का माध्यम भी हैं।

पूर्ण विश्वास है कि संघ कार्य को विस्तार देने में उनकी भूमिका पुनः सार्थक होगी और कार्यकर्ताओं में उनका व्यक्तित्व और सानिध्य संघ को अंदर से समझने में सहायक होगा। शुभकामनाएं। 🚩🚩🙏

31/01/2026

"ना रुके, ना थके, ना झुके"
शतक: ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल का सफर' की पूरी टीम को टीजर के सफल लॉन्च पर पूज्य सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी की ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

एक ऐसे संगठन की कहानी को बड़े पर्दे पर लाना, जिसने भारतीय समाज और राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना में एक सदी तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, अपने आप में एक सराहनीय प्रयास है। उम्मीद है कि यह फिल्म दर्शकों को इतिहास के उन अनछुए पहलुओं से परिचित कराएगी जो अब तक जनमानस से दूर थे।
निर्देशक आशीष मल्ल और निर्माता वीर कपूर को इस साहसी प्रोजेक्ट के लिए ढेरों शुभकामनाएँ। हमें विश्वास है कि यह फिल्म भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय लिखेगी।

यह नवगठित भैरव (BHAIRAV) बटालियन की कुछ तस्वीरें हैं,पिछली बार मैने जब badge और प्रतिकात्मक तस्वीरें डाली थी ,तो कुछ लोग...
17/01/2026

यह नवगठित भैरव (BHAIRAV) बटालियन की कुछ तस्वीरें हैं,पिछली बार मैने जब badge और प्रतिकात्मक तस्वीरें डाली थी ,तो कुछ लोगों ने डीएम में कहा कि मैडम ये भैरव‌ नही हैं।

सच कहूं तो मैं पहले उनकी परेड,कामो और कुछ डिटेल्स पता करना चाहती थी।आधी अधूरी जानकारी ही थी तब मेरे पास।

मैने जो तस्वीरें डाली हैं उसमें खड़ा हर जवान छह फ़ुट से ऊँचा, चौड़े कंधों वाला, चट्टान-सी काया लिए हुए है।

अगर कभी भी किसी स्पेशल फोर्स के जवान से हाथ मिलाइएगा, तो ऐसा लगेगा मानो पत्थर से बना हाथ थाम लिया हो।

ये जो डेजर्ट कैमोफ्लाज में दिख रहे जवान 2 BRV (राजपूताना राइफल्स) के हैं, और सामान्य भारतीय सेना कैमोफ्लाज में 4 BRV (सिख लाइट इन्फैंट्री) के।

2 BRV और 4 BRV के कंपनी कमांडरों की तस्वीरें ख़ास तौर पर किसी का भी ध्यान खींच लेती हैं।

ये वो अफ़सर हैं जो भारतीय सेना की सबसे अधिक अलंकृत और गौरवशाली रेजिमेंटों से आकर इस रेजिमेंट में पहुँचे हैं। ऐसे में उनसे उम्मीदें भी आसमान छू रही हैं और भारतीय सेना इन्हें पूरे ज़ोर-शोर से आगे बढ़ा रहा है।

अभी आपने वेनुजुएला में जो डेल्टा फोर्स का आपरेशन देखा ,मुझे लग रहा कि इन्हे स्पेशल इसी की तरह तैयार किया जा रहा है ,क्योंकि घातक और पारा एसएफ के साथ एक और ऐसी ही टीम की जरूरत भारतीय सेना को है।

अभी जो आर्मी डे परेड कल हुआ है उसके लिए लगभग महीने पहले से एक जैसे रूटिन में ये जवान सुबह 4 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक लगातार चार किमी मार्च करते थे।

इनकी सुबह की शुरुआत हार्डकोर मॉर्निंग पीटी से होती है, उसके बाद ड्रिल उस्तादों की कड़ी परख, और फिर अंत में 3 से 4 किलोमीटर का मार्च रोजाना चाहे मौसम कोई भी हो, परिस्थिती कुछ भी है।

ड्रील उस्तादों का तो आपको पता ही है ,सबके रोंगटे खड़े होते हैं ,उनके पीटी परेड से।
सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं—जिस शरीर ने सुबह से खुद को निचोड़ दिया हो, वही शरीर अनुशासन में ढला हुआ, एक लय में क़दम से क़दम मिलाकर आगे बढ़ता है। यह सिर्फ़ कसरत या ड्रिल नहीं होती, यह शरीर और मन दोनों की लिमिटेड सीमा को रोज़ तोड़ने की प्रक्रिया है ताकि ये सीमा इनफीनिटी तक पहुंच जाए।

सच में स्पेशल फोर्स के जवानों की स्टैमिना और ताक़त वाक़ई हैरान कर देने वाली होती है। थकान उनके चेहरे पर नहीं दिखाई ही नही देती, बल्कि उन्होने उसे मस्तिष्क के किसी कोने के भीतर दबी रहती है, क्योंकि सामने सिर्फ़ एक ही चीज़ होती है ड्यूटी फर्स्ट..
यही वो raw and brutal ट्रेनिंग है जो एक आम सिपाही को भैरव बनाती है। इसके बाद उनकी आँखों में जो सख़्ती और संकल्प दिखाई देता है, वही भैरव की असली पहचान है,जो दुश्मन पर काल भैरव जैसा टूट पड़ेगा।

अभयम् भैरव:

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Jhalawar
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