19/10/2025
"नरक चतुर्दशी", "रूप चतुर्दशी" एवं "छोटी दीपावली" का यह पावन उत्सव केवल बाह्य दीपों का ही नहीं, अपितु अन्तर्बोध की ज्योति प्रज्वलित करने का पर्व है।
यह पर्व स्मरण कराता है कि जैसे दीपक अन्धकार का नाश करता है, वैसे ही आत्म-ज्योति अज्ञान का क्षय कर देती है।
भगवान् से प्रार्थना है कि यह दिव्य पर्व हमारे जीवन में अन्तर्बाह्य प्रकाश का प्रसार करे, अविद्या का अन्धकार मिटे, और प्रत्येक क्षण ब्रह्मानुभूति की दीप्ति से आलोकित हो।
सत्य का अनुभव ही जीवन की परम सिद्धि है। “ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः” इस स्मृति से आत्मज्योति प्रज्वलित करें। अज्ञान का अंधकार मिटे, अन्तर्वाह्य प्रकाश फैले । "रूप चतुर्दशी", "छोटी दीपावली" की हार्दिक, मंगलमय एवं शाश्वत शुभकामनाएँ।
❤️🌹🙏 राधे राधे 🙏🌹❤️
अगर आपके पास दूसरों को खुशी देने की ज़रा सी भी क्षमता है, तो उसका पूरा इस्तेमाल करो .
दुनिया को छोटी-छोटी खुशियों की बहुत ज़रूरत है,
चोट पहुंचाने वाले तो हर जगह मौजूद हैं.
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