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हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: तलाक से पहले पति का घर छोड़ने वाली महिला दोबारा वहां रहने का अधिकार खो देती हैतलाक के लिए अपने...
10/10/2022

हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: तलाक से पहले पति का घर छोड़ने वाली महिला दोबारा वहां रहने का अधिकार खो देती है

तलाक के लिए अपने पति का घर छोड़ने वाली महिला बाद में ससुराल में रहने का अधिकार भी खो देती है। भले ही तलाक के खिलाफ उसकी याचिका घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत लंबित हो। बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने यह फैसला सुनाया। Justice Sandipkumar C. More की बेंच ने मामले में महिला की ससुराल पक्ष की याचिका को बरकरार रखते हुए निचली अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें उसे अपने घर में स्नान, शौचालय, बिजली वगैरह के उपयोग के साथ-साथ निवास का पूरा अधिकार दिया गया था।

उमाकांत बोंद्रे और उनकी पत्नी शोभा ने अतिरिक्त सेशन जज, उदगीर कोर्ट के फरवरी 2018 के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उनकी पूर्व बहू साक्षी बोंद्रे को निवास का अधिकार दिया था जबकि उसने अपने पति सूरज बोंड्रे से तलाक ले लिया था। इस जोड़े की शादी जून 2015 में हुई थी, लेकिन एक साल बाद, उनके बीच विवादों के बाद, साक्षी ससुराल छोड़कर अपने माता-पिता के साथ रहने चली गई।

निचली कोर्ट के फैसले को चुनौती
बाद में, नवंबर 2017 में, एक उदगीर मैजिस्ट्रेट ने उन्हें वैकल्पिक आवास व्यवस्था करने के लिए 2,000 रुपये प्रति माह और अतिरिक्त 1,500 रुपये प्रति माह का अंतरिम रखरखाव का आदेश दिया था। अपनी याचिका में, वरिष्ठ बोंद्रे दंपति ने निचली अदालत के आदेशों पर सवाल उठाया था, खासकर जब घर उमाकांत एच. बोंद्रे (ससुर) के नाम पर था और तलाक (जुलाई 2018 में मंजूर की गई) के खिलाफ साक्षी बोंद्रे की याचिका पहले हाई कोर्ट के समक्ष लंबित है।

जस्टिस मोरे ने फैसला सुनाया कि घरेलू हिंसा अधिनियम के सेक्शन 17 के तहत, निवास के अधिकार की अनुमति केवल तभी दी जाती है जब महिला तलाक से पहले साझा (पति के) घर में रहती है। ऐसे में साक्षी बोंद्रे पहले के निवास आदेश का सहारा नहीं ले सकतीं, जब उनकी शादी हाई कोर्ट से पारित तलाक की डिक्री की ओर से भंग कर दी गई थी, और विशेष रूप से तब जब उन्होंने चार साल पहले ही अपने साझा घर को छोड़ दिया था।

तलाक से बहुत पहले छोड़ दिया था ससुराल

न्यायाधीश ने कहा, ‘इन परिस्थितियों में, वह बेदखली को रोकने की राहत की भी हकदार नहीं है क्योंकि वह साझा घर के पोजेशन में नहीं है।’ साक्षी बोंड्रे के व

Arresting Rules: पुलिस नहीं कर सकती आपको मनमाने तरीके से गिरफ्तार, आपके पास हैं ये कानूनी अधिकारLaw: वकीलों के मुताबिक, ...
08/10/2022

Arresting Rules: पुलिस नहीं कर सकती आपको मनमाने तरीके से गिरफ्तार, आपके पास हैं ये कानूनी अधिकार

Law: वकीलों के मुताबिक, पुलिस को आपराधिक मामलों में भी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तारी न सिर्फ सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21और 22 में बताए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है.

What is Arresting Rules in Law: पुलिस का काम किसी भी एरिया में लॉ एंड ऑर्डर को बनाए रखना है. वह क्राइम कंट्रोल के लिए भी काम करती है. हालांकि समय-समय पर पुलिस की कार्य़प्रणाली पर भी सवाल उठते रहते हैं. कई मामलों में देखा गया है कि पुलिस ने नियमों को ताक पर रखकर किसी शख्स कि गिरफ्तारी की. बाद में इसे लेकर पुलिस की आलोचना होती है या फिर कोर्ट की तरफ से कार्रवाई के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन तब तक पीड़ित बेवजह कई तरह की सजा भुगत चुका होता है. आज हम बता रहे हैं कानून में बताए ऐसे अधिकार जिनके जरिये आप पुलिस की मनमानी कार्रवाई से बच सकते हैं.

पुलिस के लिए इन गाइडलाइंस का पालन करना जरूरी

कानूनी जानकार और वकील कहते हैं कि पुलिस किसी को अपने मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं कर सकती. उसे आपराधिक मामलों में भी आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तारी न सिर्फ सीआरपीसी का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20, 21और 22 में बताए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है. वकीलों ने गिरफ्तारी को लेकर कुछ गाइडलाइंस भी बताईं.

अगर पुलिस किसी शख्स को गिरफ्तार करने गई है तो उसे गिऱफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी को पुलिस की वर्दी में होना जरूरी है साथ ही उसकी नेम प्लेट में उसका नाम भी साफ-साफ लिखा हो.

सीआरपीसी की धारा 57 कहती है कि पुलिस किसी भी शख्स को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में नहीं रख सकती है. उसे इससे ज्यादा के हिरासत के लिए सीआरपीसी की धारा 56 के तहत मैजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी होगी.

सीआरपीसी की धारा 50 (1) कहती है कि पुलिस को गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसकी अरेस्टिंग का कारण भी बताना होगा.

सीआरपीसी की धारा-41बी में बताया गया है कि गिरफ्तारी से पहले अरेस्ट मेमो तैयार करना जरूरी है. इसमें अरेस्टिंग करने वाले पुलिस अफसर की रैंक, अरेस्टिंग की टाइमिंग और प्रत्यक्षद

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