Manish Dinkar Advocate

Manish Dinkar Advocate i am advocate practicing in jaipur

elected as joint secretary in the Advocates bar association jaipur

महासचिव, विधिक जागृति संस्थान

20/06/2020

विरोध

NI एक्ट की धारा 138 और अन्य आर्थिक अपराधोंं को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के केंद्र के प्रस्ताव का विरोध

छोटे आर्थिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के केंद्र क्योकि 19 अलग-अलग अधिनियमों में निहित 39 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर का प्रस्ताव, "अपराधियों के मन को निर्दोष व्यक्तियों को धोखा देने के लिए प्रोत्साहित करेगा और लोगों के मन में बिल्कुल कोई डर नहीं होगा।

केंद्र सरकार ने धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव दिया है, जो कि निश्चित रूप से चेक के बेईमानी के मामलों की पेंडेंसी को कम करके अदालतों से हटा देगा, लेकिन यह अपने अधिनियमन के पीछे अंतिम उद्देश्य को भी पराजित करेगा।

एक और तो कुछ समय पूर्व केंद्र सरकार चैक से संबंधित कानून को सख्त करने की वकालत करते हुए एक्ट में संशोधन किया"आपराधिक मुकदमेबाजी और कारावास का डर न केवल चेक के समय पर भुगतान करने, बल्कि न्यायिक प्रणाली के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सर्वोपरि कारक है। एक तरफ सरकार ने हाल ही में एनआई एक्ट को अधिक प्रभावी और शक्तिशाली बनाने के लिए कुछ धारा 143A और 148 जोड़ी हैं और अब ऐसा क्या हो गया की कानून ही खत्म करने की सिफारिश की जा रही है जबकि यह निर्विवादित है कि उधार भी तब ही मिलेगा जब उसकी वसूली के लिए सख्त प्रावधान हो यदि देने वाले को यह भय नही की नही चुकाने पर उसे सजा होगी तो 50 प्रतिशत से अधिक लोग पैसा नही चुकाएंगे औऱ देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो जाएगी या फिर देश कुछ चुनिंदा लोगो के हाथ मे आ जायेगा जिनके पास धन होगा।
ताकि शिकायतकर्ताओं को चेक के उपयोग को मजबूत करने और अन्य परक्राम्य से उन्हें अलग करने के उद्देश्य से शिकायतकर्ताओं को निवारण प्रदान किया जा सके।

इस कारण एक अधिवक्ता होने और दी बार एसोसिएशन जयपुर का पूर्व सचिव होने के नाते इस तरह के कानून के संशोधन का विरोध करता हूं औऱ समस्त राष्ट्र के सभी वकीलों और कानूनविदों से अनुरोध करता हूं की वे भी इस कानून का विरोध केंद्र सरकार को दर्ज करवाये।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने बुधवार को अपने सभी हितधारकों से कई आर्थिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के प्रस्ताव पर टिप्पणी आमंत्रित की थी।

*सरकार ने निम्नलिखित धाराओं के अंतर्गत आने वाले अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रस्ताव किया है।*
धारा 12, बीमा अधिनियम, 1938। धारा 29, SARFAESI अधिनियम, 2002। धारा 16 (7), 32 (1), पीएफआरडीए अधिनियम, 2013। धारा 58 बी, आरबीआई अधिनियम, 1934। धारा 26 (1), 26 (4), भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007। धारा 56 (1), नाबार्ड अधिनियम, 1981। धारा 49, एनएचबी अधिनियम, 1987। धारा 42, राज्य वित्तीय निगम अधिनियम .951। धारा 23, क्रेडिट सूचना कंपनी (विनियमन) अधिनियम, 2005 धारा 23, फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम, 2011 धारा 37, अधिनियम, अधिनियम, 2006। धारा 36 क (2), 46, बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 धारा 30, सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972। धारा 40, एलआईसी अधिनियम, 1956। धारा 21, अनियमित जमा योजना अधिनियम, 2019 पर प्रतिबंध। धारा 76, चिट फंड अधिनियम, 1982। धारा 47, डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961। धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881। सेक्शन 4 और 5, प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स (बैनिंग) एक्ट, 1978

NI एक्ट की धारा 138 और अन्य आर्थिक अपराधोंं को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के केंद्र के प्रस्ताव का दिल्ली बार काउंंसिल...
14/06/2020

NI एक्ट की धारा 138 और अन्य आर्थिक अपराधोंं को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के केंद्र के प्रस्ताव का दिल्ली बार काउंंसिल ने विरोध किया

बार काउंसिल ऑफ दिल्ली ने छोटे आर्थिक अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के केंद्र सरकार के प्रस्ताव का विरोध .....

06/06/2020

~_*अब तो कोर्ट खुलनी चाहिए*
_~

*जबकि सारे सरकारी विभाग 100 ℅ उपस्थिति के साथ खुल चुके, व्यापारिक प्रतिस्टान खुल चुके सब जगह भीड़ नजर आ रही है तो कोर्ट को खोलने में क्या दिक्कत है या न्यायिक अधिकारियों को फ्री की तनख्वाह लेने का शोख पड़ गया जिसकी बानगी हाई कोर्ट जजेज द्वारा आज की मीटिंग को पोस्पांड करना लगता है क्योकि अब हर वकील की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है अब कोर्ट बन्द करने की वकालत वो ही वकील करेंगे जिनके पास या तो वकालत के अलावा दुसरे व्यापार है या जो घर से सक्षम है वर्ना वकालत से अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करने वाले हर छोटे और बड़े वकील यही चाहते हैं कि कोर्ट खुले।*

*इसलिए मेरी हमारी बार के सभी पदाधिकारियों से निवेदन है कि वे सभी वकीलों की आर्थिक स्थिति को देख कर जल्द से जल्द कोर्ट खुलवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए।*

06/06/2020
https://youtu.be/cEHqlIlSZVQ
22/05/2020

https://youtu.be/cEHqlIlSZVQ

In a series of lecture conducted by The Bar Council of Rajasthan, Hon'ble Dr Justice Pushpendra Singh Bhati, Judge, Rajasthan High Court Jodhpur- "Fundamenta...

https://youtu.be/Aim8CB_eChY
22/05/2020

https://youtu.be/Aim8CB_eChY

Land Acquisition : Interpretation of Section 24 of The Right to Fair Compensation, Transparency in Land Acquisition and Rehabilitation and Resettlement Act 2...

https://youtu.be/OU9Mgq-3lOo
22/05/2020

https://youtu.be/OU9Mgq-3lOo

In an attempt towards digitalization, The Bar Council of Rajasthan has organised a series of lecture- Here Hon'ble Mr Justice Sandeep Mehta explains about "G...

manish dinkar
13/05/2020

manish dinkar

Address

Jaipur
302001

Telephone

9314102016

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Manish Dinkar Advocate posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Manish Dinkar Advocate:

Share