विधिक जाग्रति

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22/05/2020

निशुल्क विधिक सहायता



यदि आप जयपुर शहर के निवासी हैं आपके साथ या आपके आसपास किसी असहाय या कमजोर के साथ कोई अन्याय हो रहा है, या आप वकील करने में असमर्थ है, या किसी नाबालिक बच्चे से अवैध रूप से कार्य करवाया जा रहा है तो आप विधिक जागृति संस्था से संपर्क करे हमारी संस्था आपकी हरसंभव सहायता करेगी औऱ आपको निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाएगी।

11/12/2019

निशुल्क विधिक सहायता

समाज के हर व्यक्ति को न्यायिक। प्रणाली में न्याय प्राप्त करने का अधिकार है और हमारे संविधान के अनुच्छेद 39 a भी गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगो को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाता है

लेकिन आज भी बहुत से लोग न्याय के लिए कोर्ट का सहारा इस लिए नही ले पाते क्योकि उन्हें इन सभी का ज्ञान नही है और उन्हें अपने अधिकारों का भी ज्ञान नही है और इस कारण वे अन्याय को सहन करते रहते हैं,

लेकिन विधिक जागृति एवं सामाजिक विकास संस्थान असहाय, गरीब, पिछड़ी महिला, बच्चो, बुजुर्गो को निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाने और उन्हें न्याय मिले इस हेतु जयपुर, राजस्थान में लगातार कार्यरत हैं ।

यदि आप जयपुर शहर के निवासी हैं या जयपुर शहर में रहते हैं औऱ आपके साथ या आपके आसपास किसी असहाय या कमजोर के साथ कोई अन्याय हो रहा है, या आप वकील करने में असमर्थ है, या किसी नाबालिक बच्चे से अवैध रूप से कार्य करवाया जा रहा है तो आप विधिक जागृति संस्था से संपर्क करे हमारी संस्था आपकी हरसंभव सहायता करेगी औऱ आपको निशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध करवाएगी।

कौन कौन व्यक्ति विधिक सहायता पाने का हकदार है:-

1. वह व्यक्ति जो जयपुर शहर का निवासी हैं या जयपुर में रह रहा है।

2. वह व्यक्ति जो मानव दुर्व्यवहारों से या बेगारों से सताया गया है।

3. स्त्री या बालक है।

4. मानसिक रूप से अस्वस्थ या अन्यथा असमर्थ है।

5. वह व्यक्ति जो अनापेक्षित अभाव जैसे बहु-विनाश, जातीय हिंसा, अत्याचार, बाढ़-सूखा, औद्योगिक विनाश की दशाओं के अधीन सताया हुआ है, या

6. कोई औद्योगिक कर्मकार या,

7. अभिरक्षा में है जिसके अंतर्गत अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम 1956 के अंतर्गत किसी संरक्षण गृह में या किशोर मनश्चिकित्सीय अस्पताल परिचर्या गृह में रखा गया व्यक्ति

8. जिसकी आर्थिक स्थिति अधिवक्ता नियुक्त करने की नही हो ।

कार्यालय

B-14, क्रिस्टल मॉल, बनीपार्क, जयपुर

मनीष दिनकर, मोबाईल-9314102016
महासचिव विधिक जागृति संस्था
पूर्व सयुक्त सचिव
दी बार एसोसिएशन जयपुर

राजेश शर्मा, मोबाईल-9024884869

https://mylegalrightinindia.blogspot.com/2019/12/blog-post_8.html
08/12/2019

https://mylegalrightinindia.blogspot.com/2019/12/blog-post_8.html

सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत अब बेटे के साथ ही बहू और दामाद को भी बुजुर्ग की देखभाल के लिए जिम्मेदार बनाया गया है जिन ब.....

आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार
01/12/2019

आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार

क्या आपके पिता की संपत्ति में आपका अधिकार है? भारतीय हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (हिन्दू सक्सेशन एक्ट) , 1956 में सम्पति...

हैदराबाद की 26 वर्षीय प्रियंका रेड्डी एक वेटनरी डॉक्टर थी। 30 किलोमीटर की दूरी तय कर वह हर दिन अपना फर्ज़ निभाने शम्शाबा...
30/11/2019

हैदराबाद की 26 वर्षीय प्रियंका रेड्डी एक वेटनरी डॉक्टर थी। 30 किलोमीटर की दूरी तय कर वह हर दिन अपना फर्ज़ निभाने शम्शाबाद हॉस्पिटल जाती थी। वह हैदराबाद-बेंगलुरु नेशनल हाईवे स्थित टोंडुपल्ली टोल प्लाजा पर अपना टू-व्हीलर पार्क करती थी और वहां से कैब लेकर अस्पताल तक जाती थी। मतलब अपने काम को वो कितनी गंभीरता और शिद्दत से कर रही थी, ये उसकी इस कोशिश से ही ज़ाहिर होता है। एक लोवर मीडिल क्लास फैमिली की लड़की होगी, इसीलिए इतनी मेहनत करके अपने दिन की शुरुआत करती थी। थोड़ी पैसे वाली होती तो अपनी कार से जाती, कैब से जाती, लेकिन नहीं स्कूटी से जाती थी, और स्कूटी को एक जगह खड़ा करके फिर कैब से अपना आगे का सफर तय करती थी। लेकिन वो नहीं जानती थी, कि जिस शिद्दत से वो अपना काम कर रही है, उससे कई गुना बड़ी दरिंदगी लिए कुछ लोग उसकी ज़िंदगी को अपने बाप की प्रॉपर्टी समझ एक बार में जला कर खतम कर देंगे।

किसी को शौक़ नहीं होता कि वो रात के 9:30 बजे 30 किलोमीटर का सफर तय करके घर पहुंचे, लेकिन कुछ लोग अपनी ड्यूटी पैशन के लिए करते हैं, तो कुछ ज़रूरत के लिए... और कभी-कभी दोनों के लिए।

अपनी ज़िंदगी में एक समय में एक साथ एक औरत पहले से ही अनगिनत लड़ाईयां लड़ रही होती है, लेकिन ये बात उन्हें समझ नहीं आती जो झुंड में आते हैं और जानवरों की तरह नोच कर एक पल में उसकी दुनिया खतम कर देते हैं। पहले तो घूरेंगे, फिर प्लानिंग करेंगे, फिर उसकी मर्ज़ीं के बिना उसे इधर-उधर छूयेंगे, फिर रेप करेंगे और अंत में जला कर मार भी देंगे... जलाकर नहीं मारेंगे तो गला घोंट देंगे... गला नहीं घोंटेंगे तो अंदर रॉड डाल देंगे... रॉड नहीं डालेंगे तो आंतें बाहर निकाल लेंगे... मतलब रेप भी करेंगे और जान भी ले लेंगे... इन्हें ये नहीं पता कि जो ज़िंदगी देता है, वो भी ज़िंदगी नहीं ले सकता... फिर ये किस अधिकार से किसी के साथ ये सब कर जाते हैं?
कौन हैं ये लोग? इनकी मांओं ने क्या खाकर इन्हें पैदा किया होता है? ये कौन से स्कूल में पढ़े होते हैं? कैसे लोगों के बीच बड़े हुए होते हैं? कहां से आते हैं? औरत की कोख से ही पैदा होते हैं ना, या शैतान की कोख से?

पैर के नीचे एक चिंटी भी दिख जाती है, तो हम पैर हटा लेते हैं या चिंटी को उठाकर कहीं किनारे रख देते हैं, ये लोग नजाने कैसे चलता-फिरता शरीर खत्म करने से नहीं हिचकते।

खबर तो आप सबने भी पढ़ी होगी, कि कैसे 26 साल की प्रियंका का रेप करके उसे कैरोसिन डाल कर जला दिया। इन्हें क्या लगता है, औरत को दर्द नहीं होता? तकलीफ नहीं होती?
मोमबत्ती जलाते हुए हल्के से उंगली जल जाती है, तो 2 दिन तक जलन होती है... गरम चाय/कॉफी पीने के बाद जली हुई जीभ 3 दिन तक कोई नया स्वाद नहीं पहचान पाती, तो सोच कर देखें उसे कितनी तकलीफ होती होगी, जिसे ज़िंदा जला दिया जाता है। रूह कांप जाती है... रोंगटे खड़े हो जाते हैं...

औरत का हर दिन कई नई चुनौतियां साथ लेकर शुरू होता है... वो अपनी सारी चुनौतियों से तकलीफों से लड़ाई-झगड़ों से खुद को बनाये और बचाये रखने की ज़िद से बड़े आराम से जीत सकती है, वो भी बहुत कुछ कर सकती है अगर अपने शरीर को बचाये रखने की एक एक्सट्रा लड़ाई के लिए उसे एफर्ट ना मारना पड़े। हमारी आधे से ज्यादा ज़िंदगी तो गिद्ध निगाहों से खुद को बचाने में ही निकल जाती है... हम भी बेखौफ जंगलों में घूमना चाहते हैं... अकेले समुंदर को चखना चाहते हैं... बेपरवाह नीले आसमान में उड़ना चाहते हैं... लेकिन कैसे? पहले शरीर को बचाये रखने की लड़ाई से उबर लें।

परसों दिल्ली में जली थी, कल हैदराबाद में जली, आज कहीं और जलेगी, परसों कहीं और जलेगी... ऐसे ही जलती रहेगी... लेकिन, हम हमेशा बोलेंगे, हर बार बोलेंगे... कुछ कर पायें या न कर पायें... ये सब बंद हो या ना बंद हो... इन्हें सज़ा मिले या ये अवारा कुत्तों की तरह बेखौफ सड़कों पर घूमें... हमें हर बार बोलना चाहिए। पिछली बार बोला, कुछ हुआ नहीं... रेप तो तब भी हुए अब भी हो रहे हैं... लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम चुप हो जायेंगे। हमें बोलते रहना चाहिए... लिखते रहना चाहिए... कहीं तो आवाज़ पहुंचेगी और ना भी पहुंचे, तो भी बोलेंगे... तो भी लिखेंगे।

02/01/2015

पुलिस सिस्टम को ऑनलाइन करके राजस्थान की पुलिस ने सराहनीय कार्य किया है जिसके लिए सभी पुलिस अधिकारी बधाई के पात्र है ।

02/02/2014

कानून की पालना करना हमारा धर्म है यदि हम हमारे धर्म को नहीं निभा सकते तो हमें किसी पर आरोप लगाने का हक़ नहीं है।

25/01/2014

देश से अपराध को समाप्त करना है तो इसका प्रारंभ अपनी गली मोहल्ले से करो।

25/01/2014
21/01/2014

दहेज़ के लिए पत्नी को मारने या प्रताड़ित करने में सहयोग करने वाला पुरुष नपुंसक होता हैं जो शरीर से तो मर्दानगी दिखा नहीं सकता पीट कर मर्द होने की कोशिश करता हैं।

19/01/2014

हमारे देश की विडंबना की बदमाशो के पास रिवाल्वर और देश की रक्षा के लिए कार्यरत पुलिस के पास डंडे और उन्हें भी चलाने का आर्डर नहीं।

16/01/2014

अपने अधिकारों को पहचाने और उन की मांग करे।

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