Advocate Narendra Singh Rathore

Advocate Narendra Singh Rathore Represent clients in criminal and civil litigation and other legal proceedings, draw up legal docume

04/11/2017

भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री की पूर्व भारतीय प्रधानमंत्रीगण से तुलना

क्या ये तुलना वाक़ई वास्तविकता है ?

01/11/2017

जन गण मन सुनिये पूरा जन गण मन आप सभी के लिये जिसे आज तक सरकार ने हम से छिपा कर रखा।

क़ानून जागरूक की रक्षा करता है। और आपके क़ानूनी अधिकारो के बारे में जानकारी आपको मिलेगी यहाँ से:-https://www.panchayatti...
21/06/2017

क़ानून जागरूक की रक्षा करता है।
और आपके क़ानूनी अधिकारो के बारे में जानकारी आपको मिलेगी यहाँ से:-
https://www.panchayattimes.com/

*जानिए IPC में धाराओ का मतलब .....**धारा 307* = हत्या की कोशिश *धारा 302* = हत्या का दंड*धारा 376* = बलात्कार*धारा 395* ...
07/04/2017

*जानिए IPC में धाराओ का मतलब .....*
*धारा 307* = हत्या की कोशिश
*धारा 302* = हत्या का दंड
*धारा 376* = बलात्कार
*धारा 395* = डकैती
*धारा 377* = अप्राकृतिक कृत्य
*धारा 396* = डकैती के दौरान हत्या
*धारा 120* = षडयंत्र रचना
*धारा 365* = अपहरण
*धारा 201* = सबूत मिटाना
*धारा 34* = सामान आशय
*धारा 412* = छीनाझपटी
*धारा 378* = चोरी
*धारा 141* = विधिविरुद्ध जमाव
*धारा 191* = मिथ्यासाक्ष्य देना
*धारा 300* = हत्या करना
*धारा 309* = आत्महत्या की कोशिश
*धारा 310* = ठगी करना
*धारा 312* = गर्भपात करना
*धारा 351* = हमला करना
*धारा 354* = स्त्री लज्जाभंग
*धारा 362* = अपहरण
*धारा 415* = छल करना
*धारा 445* = गृहभेदंन
*धारा 494* = पति/पत्नी के जीवनकाल में पुनःविवाह0
*धारा 499* = मानहानि
*धारा 511* = आजीवन कारावास से दंडनीय अपराधों को करने के प्रयत्न के लिए दंड।
▫▪▫▪▫▪▫▪
हमारेे देश में कानूनन कुछ ऐसी हकीक़तें है, जिसकी जानकारी हमारे पास नहीं होने के कारण हम अपने अधिकार से मेहरूम रह जाते है।

तो चलिए ऐसे ही कुछ
*पांच रोचक फैक्ट्स* की जानकारी आपको देते है,
जो जीवन में कभी भी उपयोगी हो सकती है.

*(1) शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-

कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.

*(2.) सिलेंडर फटने से जान-माल के नुकसान पर 40 लाख रूपये तक का बीमा कवर क्लेम कर सकते है*-

पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी के तहत अगर किसी कारण आपके घर में सिलेंडर फट जाता है और आपको जान-माल का नुकसान झेलना पड़ता है तो आप तुरंत गैस कंपनी से बीमा कवर क्लेम कर सकते है. आपको बता दे कि गैस कंपनी से 40 लाख रूपये तक का बीमा क्लेम कराया जा सकता है. अगर कंपनी आपका क्लेम देने से मना करती है या टालती है तो इसकी शिकायत की जा सकती है. दोषी पाये जाने पर गैस कंपनी का लायसेंस रद्द हो सकता है.

*(3) कोई भी हॉटेल चाहे वो 5 स्टार ही क्यों ना हो… आप फ्री में पानी पी सकते है और वाश रूम इस्तमाल कर सकते है*-

इंडियन सीरीज एक्ट, 1887 के अनुसार आप देश के किसी भी हॉटेल में जाकर पानी मांगकर पी सकते है और उस हॉटल का वाश रूम भी इस्तमाल कर सकते है. हॉटेल छोटा हो या 5 स्टार, वो आपको रोक नही सकते. अगर हॉटेल का मालिक या कोई कर्मचारी आपको पानी पिलाने से या वाश रूम इस्तमाल करने से रोकता है तो आप उन पर कारवाई कर सकते है. आपकी शिकायत से उस हॉटेल का लायसेंस रद्द हो सकता है.

*(4) गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-

मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.

*(5) पुलिस अफसर आपकी शिकायत लिखने से मना नहीं कर सकता*

आईपीसी के सेक्शन 166ए के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी आपकी कोई भी शिकायत दर्ज करने से इंकार नही कर सकता. अगर वो ऐसा करता है तो उसके खिलाफ वरिष्ठ पुलिस दफ्तर में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. अगर वो पुलिस अफसर दोषी पाया जाता है तो उसे कम से कम *(6)*महीने से लेकर 1 साल तक की जेल हो सकती है या फिर उसे अपनी नौकरी गवानी पड़ सकती है.

*इन रोचक फैक्ट्स को हमने आपके लिए ढूंढ निकाला है*.

ये वो रोचक फैक्ट्स है, जो हमारे देश के कानून के अंतर्गत आते तो है पर हम इनसे अंजान है. हमारी कोशिश होगी कि हम आगे भी ऐसी बहोत सी रोचक बाते आपके समक्ष रखे, जो आपके जीवन में उपयोगी हो।

*इस मैसेज को आगे भी भेजना और अपने पास सहेज कर रखना, आपके कभी भी ये अधिकार काम आ सकते हैं।*

✍संविधान से अधिकार तक✍

INSPIRATION Angels and spirits like to contact us through various methods, such as playing a recurring song on the radio...
16/02/2017

INSPIRATION


Angels and spirits like to contact us through various methods, such as playing a recurring song on the radio that may have special significance, answering a prayer, flipping to a certain page in a book we’re reading, or even directing our attention to repeating numbers on a clock or sign, such as 11:11.

At first, this might seem like a silly coincidence, but by looking further into it, you will find that it has a powerful spiritual message hidden within.

More and more people seem to notice these repeating numbers on the clock, on roadside billboards, signs, and other places lately, which only provides further truth that a massive shift in consciousness and awareness is taking place. This phenomenon basically occurs to remind us of the profound synchronicities and cosmic shifts occurring during this beautiful time on the planet, and also brings our attention to our present thoughts and feelings. The underlying intention of our angels bringing our awareness to 11:11 is to make us more conscious of ourselves, and remind us that we always have guidance and a greater wisdom to rely on anytime we feel stuck, scared, or frustrated.


According to Doreen Virtue, a well-known angel therapist and psychic medium between the spirit world and human world, seeing repeating numbers, especially 11:11, means you should focus on keeping your thoughts positive, because your desires will manifest instantly into form. Put all your attention on what you desire instead of what you fear, and your angels will continue to reward you.

The more 1’s you see on a clock, sign, or anything else with numbers, the stronger the connection between yourself and your spirit guides or angels. Millions of people all over the world can attest to seeing these numbers more often, which only suggests that more of us have begun our journeys to becoming Lightworkers, or healers for the planet. Since the Earth is in such a state of disarray outwardly, so many humans have been called upon in order to bring back peace and harmony to the planet, making our Earth a true Garden of Eden on which we can all thrive and enjoy the human experience.

According to the Mayan Calendar, the turning of ages began on December 21, 2012 at 11:11, marking a New Age on our planet – a literal shift in consciousness from the Dark Age to the Golden Age. Another interesting thing about 11:11 is that the numbers add up to four, which is the number for transformation and the dissolving of the ego. Many healers and spiritual leaders on Earth interpret 11:11 to mean that the ascended masters have come back to the planet to aid us in this grand healing and help bring Earth back into alignment once again.


Any time you see numbers repeating themselves, specifically 11:11, your angels want you to know that you are on the right path, and that they will protect you no matter what adversities you face. During this time, we must become masters of ourselves, instead of succumbing to the negativity and chaos around us. We have literally created this world due to a lack of self-control, so now our masters have reminded us that we must reclaim our internal power and once again learn to govern ourselves, learning to coexist with all beings on the planet.

This is a very exciting time here on Earth, despite what you may see going on around you. As the grand healing and transformation continues to unfold, small changes will soon amount to much more significant changes as the veil is lifted and more people are awakened to our Oneness. It might seem difficult right now, but continue to trust in the angels, and know that they have your best intentions at heart.


We are all one family, and we are in this together. Don’t look outside yourself for any answers; it will only lead to more confusion and feelings of disempowerment. Trust in the power of the universe to help you heal, and anytime you notice 11:11, monitor your thoughts and make sure that your vibration matches what you want to see in your physical reality.

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09/02/2017

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इसलिए अंत तक अच्छाई मत छोड़ो

अंग्रेजों ने सभी हुनरमंद जातियों को नियम बनाकर समाप्त करना शुरू किया | बंगाल में कई कालीन बनाने वाले तथा बुनकरों के हाथ ...
22/12/2016

अंग्रेजों ने सभी हुनरमंद जातियों को नियम बनाकर समाप्त करना शुरू किया | बंगाल में कई कालीन बनाने वाले तथा बुनकरों के हाथ कटवा दिए तथा इसी तरह कही बच्चो पर शोषण के नाम पर तो कही महिलाओं पर शोषण के नाम पर कई सारी जातियों के पुश्तैनी काम को बंद करवा दिया | गुरुकुल जिनमे इन सबकी शिक्षा दी जाती थी उन्हें मेकाले ने बंद करवा दिया तथा अमान्य घोषित कर दिया और बोल दिया जो इनमे पढेंगे उनकी डिग्री मान्य नहीं होगी और उन्हें कोई नौकरी नहीं मिलेगी | अब चूँकि व्यापार अंग्रेजो ने छीन लिया था तो नौकरी ही एकमात्र साधन थी | वह भी गुरुकुल शिक्षा से मिलनी बंद हो गयी तो लोगों ने गुरुकुल में पढना छोड़ दिया इससे भारत का असली इतिहास , कला तथा संस्कृति एवं संस्कार इन सभी चीजों से बच्चो का नाता टूटता चला गया और उन्हें मजबूरन अंग्रेजी कान्वेंट स्कुल को अपनाना पड़ा जिसका पूरा पाठ्यक्रम अंग्रेजों ने भारत विरोधी बनाया था | इन स्कुलो में अंग्रेजों को आर्य द्रविड़ थ्योरी , महिलाओं पर अत्याचार, हिन्दू मुसलमान , जातियों पर अत्याचार यह सब बाते बच्चो के मन में बैठाने का माध्यम मिल गया तथा बचपन से जो पढाया गया उसके बाद बच्चा जिंदगी भर उसी को सच मानने लगा तथा एक ऐसी पीड़ी तैयार हो गयी जो उनकी पढाई बातो को सच मानती थी और बूढ़े लोगों या संतो या उनके माँ बाप को मुर्ख समझती थी क्योंकि वो अंग्रेजी शिक्षा में नहीं पढ़े लिखे थे | इसी कारण भारत के लोग स्वयं के ऊपर गर्व करना , अभिमान करना भूलते चले गए एवं अंग्रेजों के प्रति हीन भावना से ग्रसित हो गए | उन्हें विदेश से आई हार बात तथा वस्तु सही लगने लगी एवं देश की चीजे पिछड़ी तथा असभ्य और अंग्रेजों का मकसद पूरा हो गया , जो की मानसिक रूप से गुलाम काले अंग्रेजों की इस पीड़ी ने आज़ादी के बाद तक जारी रखा |

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
अब आते हैं जातिवाद की बात पर तो जैसा की हम ऊपर जान चुके हैं के जाति और वर्ण क्या थे तो अब अंग्रेजों ने किस तरह लोगों को जातियों में तोडा यह समझते हैं | अंग्रेजों ने सबसे पहले तो जातियों के व्यापार को नष्ट किया जैसा की ऊपर वर्णित है | उसके बाद कई जातियां भुखमरी की हालत में आ गयी | इसका एक कारण अंग्रेजों का अनाज और किसानो पर अतिरिक्त कर लगा देना भी था, जिसे वसूलने भी किसी भारतीय को रखा जाता था जिन्हें जमीदार कहते थे ताकि भारतीय गरीब इनसे नफरत करने लगें जबकि सारा धन जाता अंग्रेजों पर था | कई बार अंग्रेजों ने अनाज को छुपाकर मानव निर्मित अकाल भी भारत में फैलाये जिससे करोडो लोगों की जान गयी तथा द्वितीय एवं प्रथम विश्व युद्ध में भारत का सारा अनाज इन्होने अपनी सेना को खाने तथा अंग्रेजों के खाने के लिए भेज दिया जिससे भारत में अकाल से करोडो लोगों की मृत्यु हो गयी |[iii] इस अकाल में मरे हुए लोगों की संख्या हिटलर के द्वारा मारे गए यहूदियों से भी ज्यादा थी पर इसका जिक्र इतिहास में कम ही होता है | कारण वही अंग्रेजो के प्रति इतिहासकारों की स्वामिभक्ति | इन कारणों से फैली गरीबी में कई जातियां बहुत गरीब हो गयी तथा कुछ तब भी अपनी मेहनत या अंग्रेजों की अनदेखी के कारण बचे रह गए | अब इन सभी ने मिलकर अंग्रेजों के प्रति विरोध शुरू कर दिया एवं आज़ादी की लड़ाई छेड़ दी | इससे डरकर अंग्रेजों ने इन्हें बांटने के लिए फूट डालो नीति का सहारा लेते हुए यह प्रचारित करना शुरू किया के जो जातियां अमीर हैं वो ऊँची जाती के लोग हैं तथा जो गरीब हैं वो नीची जाती के लोग हैं | इसके बाद अंग्रेजों ने लोगों को बताया के जो ऊँची जाती के लोग हैं इन्होने नीची जाती के लोगों को दबाया तथा इनका शोषण किया जिसके कारण यह गरीब हैं | उसी वक़्त अंग्रेजों ने जनगणना करवाकर गरीबों को एस.सी., एस.टी. एवं अमीर जातियों को जनरल केटेगरी का बना दिया और तब से इन दोनों तबको में जो आग लगी है वो आज तक नहीं बुझ पायी | ब्राह्मणों की किताबों जैसे मनुस्मृति आदि में मैक्स मुलर से बदलाव करवाकर शूद्रों के प्रति नफरत भर दी जिसकी तयारी पहले से ही कर ली गयी थी | इसी तरह शुद्रों के कई नेता ब्रिटेन और अमरीका में पढ़ाकर तैयार कर दिए गए जिनके मन में जमीदारों और ब्राह्मणों के प्रति नफरत भर दी गयी | इसके बाद हर जाती में चार वर्ण होने की जगह जातियां ही चार मानी जाने लगी तथा वर्ण पैदा होने के हिसाब से तय होने लगा | भारतियों ने भी अंग्रेजी स्कुल में जो पढाया उसी को सच मान कर कभी असलियत जानने का प्रयास नहीं किया जिन्होंने किया उनकी बाते मानी नहीं गयी और इस तरह अंग्रेजों ने शुद्र जाती बनाकर पैदा होते से ही किसी को अशुद्ध घोषित कर दिया , तो किसी को पैदा होते से ही ब्रह्म ज्ञानी | जबकि पहले वाल्मीकि, कबीर , चन्द्रगुप्त मौर्या, गौतम बुद्ध आदि कई ऐसे लोग थे जिन्होंने जन्म किसी और रूप में लिया बाद में कर्म से कुछ और बन गए थे | पर लोगों ने इसका अध्ययन करने की जगह अंग्रेजों के झूठ को ही सच मान लिया तथा ब्राह्मण श्रेष्ठ और शुद्र नीचे माने जाने लगे | बाद में महात्मा गाँधी ने जो की इस सत्य को समझ चुके थे के अंग्रेज क्या कर रहे हैं शुद्रों के नेता को एवं ऊँची जाती के हिन्दुओं को समझाने का प्रयास किया मगर किसी ने उनकी बात नहीं मानी, उन्होंने शूद्रों को नया नाम हरिजन भी दिया पर उसका कोई फायदा नहीं हुआ बाद में वही शुद्र , हरिजन हुए फिर दलित और आज भी भारत में ऊँची और नीची जाती का संघर्ष जारी है | जबकि सभी अपने पुराने हुनर को भूलते जा रहे हैं और अंग्रेजी शिक्षा को श्रेष्ठ मान कर अपने ही धर्म को गालियाँ दे रहे हैं जिसके विषय में वो कुछ भी नहीं जानते | असल में धर्म और कुछ नहीं उस स्थान पर रहने वालों के रहने का तरीका होता है जिसे उस स्थान के लोगों ने सदियों में विकसित किया होता है | पर लोग उसे जातिप्रथा आदि से जोड़कर छोड़ रहे हैं | तथा आज मेरे जैसे कुछ लोग जाती प्रथा का समर्थन करदें तो तलवारें खिच जाती हैं एवं सभी बुद्धिजीवी इसका एकसुर में विरोध करने लगते हैं तथा जाती प्रथा को नष्ट करने की बात होने लगती है |

जबकि है इसका बिलकुल विपरीत , पूरा भारत जातियों पर टिका है | आज भी कई जातियां ही हैं जो भारत का व्यापार संभाल रही हैं तथा इन्ही जातियों से परिवार भी जुड़े हुए हैं और परिवार से समाज तथा समाज से धर्म एवं राष्ट्र | यदि जातियां नष्ट होंगी तो भारत की एकता नष्ट हो जायेगी तथा समस्त व्यापार का ढांचा चरमरा जायेगा | अतः जरुरत जातिप्रथा को नष्ट करने की नहीं है बल्कि इसे इसके असली स्वरुप में लाने की है |

आज भारत की हालत वैसी ही है जैसी की रामायण में हनुमान जी की श्राप मिलने के बाद हो गयी थी | सूरज निगलने वाले हनुमान जी को श्राप मिला था के वो अपनी सारी शक्तियों को भूल जायेंगे तथा उन्हें पता ही नहीं रहेगा वो क्या हैं | इसके बाद हनुमान जी शक्तिहीन होकर कई साल वनों में भटकते रहे | जब श्री राम ने आकर उन्हें पुनः शक्तियों का आभास करवाया तब उसी हनुमान ने समुद्र लाँघ कर सोने की लंका जला दी थी | भारत को भी आज ऐसे ही अपने खोये हुए आत्मविश्वास को जगाने की आवश्यकता है |

यदि भारत यह कर सका तो हम विश्व गुरु का सपना जरुर साकार कर लेंगे अन्यथा दलित ब्राह्मण की लड़ाई अनंतकाल तक चलेगी | फैसला भारत को करना है आपको करना है |

आपने फिल्मों में देखा होगा, कभी अदालत में किसी ऐसे केस में गए होंगे जहां मौत की सजा सुनाई जा रही हो, वहां भी देखा होगा, ...
21/12/2016

आपने फिल्मों में देखा होगा, कभी अदालत में किसी ऐसे केस में गए होंगे जहां मौत की सजा सुनाई जा रही हो, वहां भी देखा होगा, आपने देखा होगा कि किसी अपराधी को फांसी की सजा सुनाने के बाद जज साहब अपनी कलम तोड़ देते हैं।
भारत में अंग्रेजों के आगमन के साथ ही फांसी की सजा देना भी शुरू हुआ। पुराने जमाने में परम्परा कलम तोड़ने की थी, क्योंकि तब इंक पेन मौजूद नहीं थे और कलम को स्याही में डुबाकर मौत के फरमान पर दस्तख़त किए जाते थे। वक्त बदलने के साथ लकड़ी की कलम की जगह इंक पेन ने ले ली, पर फांसी की सजा सुनाने के बाद कलम तोड़ना अब भी जारी है।
क्या आप जानते हैं कि मौत के फरमान पर हस्ताक्षर करने के बाद जज कलम क्यों तोड़ देते हैं? इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। ऐसा कोई कानून नहीं है कि आपको सजा सुनाने के बाद कलम तोड़नी ही है, न ही ऐसा किसी रूल बुक में लिखा हुआ है। दरअस्ल इसके पीछे कुछ खास वजह हैं।
1. सबसे बड़ा कारण तो ये है कि ये परम्परा सैकड़ों सालों से चली आ रही है। अंग्रेजी काल में किसी जज ने फांसी की सजा मुकर्रर करने के बाद कलम तोड़ी थी और उसके बाद कलम तोड़ने की इस परम्परा को सब निभा रहे हैं ।
2. कलम तोड़ना एक सिम्बाॅलिक काम भी है। कलम तोड़ने के पीछे वजह हो सकती है कि जिस कलम ने किसी शख्स से जीने का हक ही छीन लिया हो, उस कलम को दोबारा कभी यूज़ न किया जाए।
3. फांसी की सजा के कागज पर हस्ताक्षर करने के बाद जज खुद को किसी की जिन्दगी छीन लेने के अपराध से मुक्त करना चाहते हैं। इसलिए भी कलम तोड़ने की परम्परा चली आ रही है।broken pen
4. कलम तोड़ने से व्यक्ति को दी गई मौत की सजा पर दुख भी प्रकट किया जाता है। कोई भी जज मौत की सजा तब ही देता है जब शख्स के अपराध के लिए कोई दूसरी सजा कम लग रही हो, लेकिन किसी का जीवन छीन लेने की आत्मग्लानि से बचने के लिए जज कलम तोड़ते हैं।
5. फांसी के फरमान पर साइन करने के बाद कलम इसलिए भी तोड़ दी जाती है कि जज को अपने फैसले पर दोबारा विचार न करना पड़े। किसी भी सजा पर दोबारा विचार के लिए उसी जज की अदालत में अपील नहीं की जाती, यदि की भी जाती है तो फिर मामला बड़ी बेन्च को सौंपा जाता है, जिसमें दो या दो से ज्यादा जज शामिल होते हैं।

10/12/2016

https://www.facebook.com/Justice4minakshi/

We are with Minakshi ji.

This page is created to get justice for Minakshi Kanwar, Her Husband murdered her, We are brothers of her and willtake justice. Please join us and help us.

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