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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह आरोपी फुरकान को 50 हजार का मुआवजा दे क्योंकि पुलिस ने आरो...
22/03/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह आरोपी फुरकान को 50 हजार का मुआवजा दे क्योंकि पुलिस ने आरोपी की ज़मानत याचिका का विरोध करने के लिए उसके आपराधिक इतिहास के बारे में गलत जानकारी दी थी।
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Advocate Narendra joshi & Associate
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पैसा देना अपराध नहीं है।पैसा मांगना भी अपराध नहीं है।आप किसी को  #पैसा उधार देते हैं … समय आता है वापस मांगने का… उधार ल...
22/03/2026

पैसा देना अपराध नहीं है।
पैसा मांगना भी अपराध नहीं है।

आप किसी को #पैसा उधार देते हैं … समय आता है वापस मांगने का… उधार लेने वाला व्यक्ति कहता है “पैसा मत मांगो… नहीं तो मैं #सुसाइड कर लूंगा।”

अब तक ऐसे मामलों में सबसे बड़ा डर यही रहता था कि अगर सामने वाला सच में कुछ कर ले, तो उधार देने वाला ही फंस जाएगा — धारा 306 IPC (अब BNS में समकक्ष 108 प्रावधान) के तहत।

लेकिन अब इस भ्रम पर #सुप्रीम_कोर्ट ने साफ लाइन खींच दी है।

हाल ही में . (आदेश दिनांक 10.03.2026 SLP (Crl.) No(s). 4644/2025) में सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही—

अगर आपने किसी को वैध रूप से लोन दिया है या आपसे किसी प्रकार से कोई रकम किसी निवेश के लिए ली है
और आप सिर्फ उसका पैसा वापस मांग रहे हैं
और सामने वाला व्यक्ति खुद अपनी मर्जी से सुसाइड कर लेता है, भले ही वह आपके खिलाफ सुसाइड नोट छोड़ जाए

तो मात्र पैसे की मांग करना “abetment of suicide” नहीं माना जाएगा।

कोर्ट ने साफ कहा कि
“उकसाना (instigation)” और “कानूनी हक मांगना” दो अलग चीजें हैं।
अगर कोई व्यक्ति अपने व्यक्तिगत तनाव, दबाव या परिस्थिति में ऐसा कदम उठाता है, तो उसका पूरा दोष उधार देने वाले पर नहीं डाला जा सकता।

इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने तक को #खारिज कर दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि—
हर सुसाइड नोट अपने आप में सच्चाई का प्रमाण नहीं होता, और हर आरोप कानूनन अपराध नहीं बनता।

सीधी बात:
पैसा देना अपराध नहीं है।
पैसा मांगना भी अपराध नहीं है।
और किसी के गलत निर्णय की जिम्मेदारी आपको सिर्फ इसलिए नहीं दी जा सकती क्योंकि आपने अपना हक मांगा।





पुलिस की ज्यादती पर प्रमुख कानूनी नियम:​BNS की धारा 115 और 117 (पुरानी IPC 323, 325): यदि पुलिस स्वेच्छा से चोट पहुँचाती...
17/03/2026

पुलिस की ज्यादती पर प्रमुख कानूनी नियम:
​BNS की धारा 115 और 117 (पुरानी IPC 323, 325): यदि पुलिस स्वेच्छा से चोट पहुँचाती है, तो उन पर मारपीट का केस दर्ज हो सकता है।
​BNS की धारा 198 (पुरानी IPC 166): यदि कोई लोक सेवक (पुलिस) कानून की अवज्ञा करता है जिससे किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचती है, तो उसे सजा हो सकती है।
​गाली-गलौज (BNS 352): शांति भंग करने के इरादे से अपमान करना अपराध है।
​डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य: सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के अनुसार, गिरफ्तारी या पूछताछ के दौरान पुलिस को अपना नाम और पद स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य है।
​शिकायत कहाँ करें?
​SP या SSP ऑफिस: लिखित शिकायत सीधे जिले के पुलिस कप्तान को दें।
​Police Complaints Authority (PCA): हर राज्य में पुलिस शिकायत प्राधिकरण होता है जहाँ पुलिस के दुर्व्यवहार की शिकायत की जा सकती है।
​न्यायालय (Magistrate): आप सीधे वकील के माध्यम से मजिस्ट्रेट के सामने धारा 223 BNSS (पुरानी CrPC 200) के तहत निजी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

ई-चालान और साइबर फ्रॉड...
17/03/2026

ई-चालान और साइबर फ्रॉड...

धारा 323 (IPC Section 323) – साधारण मारपीट (Simple Hurt)​धारा 504 (IPC Section 504) – अपमान (Insult)​धारा 506 (IPC Secti...
17/03/2026

धारा 323 (IPC Section 323) – साधारण मारपीट (Simple Hurt)
​धारा 504 (IPC Section 504) – अपमान (Insult)
​धारा 506 (IPC Section 506) – आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation)

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11/03/2026

पुलिस दवाब नहीं डाल सकती... जानिये क्या कहता है CRPC 50 () Close
पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए है....
ना की डराने धमकाने के लिए.. नियम जाने

वायरल गर्ल मोनालिसा ने केरल के एक मंदिर में की मुस्लिम बॉयफ्रेंड से शादी।
11/03/2026

वायरल गर्ल मोनालिसा ने केरल के एक मंदिर में की मुस्लिम बॉयफ्रेंड से शादी।

सवाल - यदि भाई पैतृक संपत्ति को बेचकर स्वयं के लिए एवं अपने पुत्र के नाम से जमीन खरीद कर भाइयों को पैतृक संपत्ति से वंचि...
27/05/2025

सवाल -

यदि भाई पैतृक संपत्ति को बेचकर स्वयं के लिए एवं अपने पुत्र के नाम से जमीन खरीद कर भाइयों को पैतृक संपत्ति से वंचित करता है तो इसके निराकरण के लिए क्या नियम होना चाहिए?

आमतौर पर एयू फाइनेंस या अन्य फाइनेस कंपनियां आमजन की संपत्तियों लोन की किश्तें नहीं चुकाने पर प्रॉपर्टी को भारी हर्जाना ...
27/05/2025

आमतौर पर एयू फाइनेंस या अन्य फाइनेस कंपनियां आमजन की संपत्तियों लोन की किश्तें नहीं चुकाने पर प्रॉपर्टी को भारी हर्जाना लगा कर सीज/कुर्क करती है...

आज एक प्रकरण में उसी एयू फाइनेंस/आवास फाइनेंस से पुराने प्रकरण में कुर्की वारंट जारी होने के पश्चात परिवादी को ब्याज सहित हर्जाना भी मिला।

यह कंपनिया जनता को बहुत परेशान करती है पर खुद पर आती है तो पैसे देने में इनको तकलीफ होती है...

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