27/05/2022
अभिनव सोच ! थोड़ा सा टाइम निकाल कर पढ़ना जरूर
प्यारे युवाओं, खासकर 18-30 उम्र वालों.
आज दिल पसीजा है तुम्हारे लिए लिखने को.
मुझे पता है तुम लम्बी पोस्ट के चक्कर में नहीं पड़ते ! तुमको दो मिनट का कोई चमत्कारी विडियो या कोई reel चाहिए पर मेरे पास वह चोकलेट नहीं है. इसलिए इस पोस्ट को यहीं छोड़कर आगे बढ़ जाओ....>>>>>>
प्यारों, तुम राजस्थान की आबादी का दो तिहाई हिस्सा हो. तुमको अवॉयड करना मेरे लिए संभव नहीं है. सार्वजनिक जीवन की उथलपुथल भी तुमसे ही है...यह और बात कि अक्सर तुम अपनी ऊँगली को काटकर तुम्हारे अरमानों के कातिल के हाथ मजबूत कर देते हो और फिर रोते रहते हो.
तुम्हें एक अदद कांस्टेबल या पटवारी की नौकरी के लिए दूर दूर यात्राएं करते, धक्के खाते देखता हूँ तो पीड़ा होती है. जैसे वह तुम नहीं हो, मैं हूँ. तुम्हें माँ-बाप को दिलासे देते देखता हूँ तो बैचेनी होती है. अबकी बार नहीं तो अबकी बार हो जायेगा सिलेक्शन. और तुम्हारे मां बाप पेट काट काटकर तुम्हारे रहने का इंतजाम, पढ़ाई का इंतजाम करते हैं तो उन पर भी तरस आता है. कितना बड़ा जुआ ....18 लाख में 3 हजार लेने हैं ! बाकी को निराश होना है. उनको पेपर लीक के बहाने अपनी तथाकथित असफलता छुपानी है.
राजस्थान जैसे पिछड़े प्रदेश में ही यह हाल है, उधर नीचे दक्षिण में गुजरात होते हुए आगे जाओ तो इतना बुरा हाल नहीं है. सरकारी नौकरी से इतर भी जीवन है, मौके हैं. कोई छोटा मोटा काम भी कांस्टेबल, पटवारी के वेतन और रिश्वत से अधिक पैसा दे देता है. वहां तो जो काम धंधा नहीं कर पाता है, वह मजबूरी में सरकारी नौकरी करता है, खासकर कम वेतन वाली....जिसे तुम 'मोक्ष' समझ बैठे हो. मुझे सूरत में पता चला कि वहां की फेक्ट्रियों में गुजराती लड़के लड़कियां मजदूर या मुनीम का काम करना पसंद नहीं करते ! उनके भीतर 'मालिक' का भाव है ! नौकरी का मजा नहीं, ऐसा कहते हैं वो. तुम कहते हो, कैसी भी एक नौकरी मिल जाए.
जिस समाज का युवा निराश औरर थका होता है, वह समाज कभी भी समृद्ध, शांत और खुश नहीं रह सकता है, यह मैं जानता हूँ. तुम्हारी निराशा का नुकसान इस समाज और राजस्थान को तुमसे कहीं ज्यादा है. युवा अवस्था कोई निराश होने की होती है ? समुद्र लांघ जाये, पहाड़ चीर दे युवा ऊर्जा. लेकिन उसका उपयोग हो, उसका मार्गदर्शन हो, उसको मोटीवेट किया जाए, उसको आगे बढ़ने के अनेक अवसर दिए जाएँ. अभिनव राजस्थान मैंने उसी हिसाब से रचा है. तीन वर्ष मेरा काम चला तो तुम कहोगे कि नहीं, अभी जॉब नहीं करना है, खेलना है, नाचना है, पढ़ना है, रिसर्च करना है. जॉब तो जेब में है !
बाकी वर्तमान वोट बाजार के मदारियों के पास बहलाने के खेल हैं तुम्हारे लिए. कोई करोड़ों लाखों जॉब देने का झांसा देगा, कोई बेरोजगारी भत्ते से तुम्हें जिन्दा रखने की हाँ भर देगा, कोई कच्ची नौकरी को पक्का करना का झूठ चासनी में लपेटकर परोसेगा, कोई तुम्हारी जात खतरे में बता देगा.....मिलना कुछ नहीं है, अभी तक मिला कुछ नहीं है.
हमारी योजना एकदम स्पष्ट है- नो झांसा. नो फ़ोकट का माल. मेहनत करने के अवसर होंगे अभिनव राजस्थान में. दस बीघे में दस लाख रूपये की पैदावार होगी, सौ बकरियां पालने वाला करोड़पति होगा, लोहे का, चमड़े का, कपड़े का, लकड़ी का, काम करने वाला जर्मनी, दुबई, ऑस्ट्रेलिया माल भेजेगा.......सब काम पूरी योजना से, तथ्यों के साथ. हवा में कुछ नहीं.
इसके लिए मुझे खूब सारे वोट चाहियें, जो अभी 'राजनीति' की 'समझ' रखने वालों को नजर नहीं आते हैं, वे कहते हैं आपकी बात अच्छी है पर आप जीत नहीं सकते ! जबकि हमारी जीत में उनकी भी जीत है !
पर मुझे आज हमारे पक्ष में तीन करोड़ वोट EVM से टकराते दिखाई दे रहे हैं. इतने दिमागों में हमारा प्रोग्राम घुस जायेगा इसी साल के अंत तक.
इसलिए तुम निराश मत होवो. मुझे पता है तुम परेशान हो, मेरे परिवार के हो तुम, बस, इन्तजार करो ...........और अभी विश्वास हो जाये तो इस साल बड़ी संख्या में मेरे साथ आओ....कुछ करामात तो मैं चुनाव से पहले कर दूंगा.....अहिंसक तरीके से, दिमाग से.....जैसे फसल बीमा, मेंहदी, नमक और गौवंश के मामले में मैं करने वाला हूँ. मेरे साथ राजस्थान के The Best पांच सौ साथी काम कर रहे हैं जो विद्वान हैं, समर्पित हैं.
आज ऐसे ही दिल आ गया तुम लोगों पर ....कभी कभी तुम्हें मोबाइल में माथा मारते देखता हूँ तो गुस्सा आता है जैसे ....लेकिन पिछले दिनों कांस्टेबल परीक्षा की अव्यवस्था देखि, शहीद स्मारक पर तुम लोगों को तपते देखा तो आज कुछ लिख दिया है.........
मेरी बातें बोर करने वाली होती हैं, इनसे बचा करो....लेकिन बच नहीं पाओ तो समझ जाना कि राजस्थान एक करवट ले रहा है....अभिनव के लिए.
अभिनव अशोक,
अभिनव राजस्थान पार्टी