13/04/2022
वक़ालत, एक ऐसा पेशा जिसे बहुत ही सम्मान और उच्च नजरिये से देखा जाता है, और देखा भी क्यों न जाये हर एक अधिवक्ता अपने क्लाइंट्स के लिए जी जान लड़ाने को तैयार रहता है, बताई हुई फीस और फ़ाइल देकर क्लाइंट तो फ्री हो जाता है, पर एक अधिवक्ता को हर तारीख पर फ़ाइल के साथ तैयार रहने की टेंशन दे जाता है, रंगीन दुनिया में काले लिबाज़ को ओढ़े हुए अधिवक्ता फाइलों को एक कोर्ट से दूसरे कोर्ट लेकर दौड़ते रहते है, अपनी ख्वाइशें, अपने सपने, अपना सुख, सब उस फाइलों में ही दबा रह जाता है, हाथ में रहती है तो फाइलें, कुछ अधिवक्ता है जो अच्छे तरीके से इस पेशे में रहते हुए अपनी सभी इच्छाएं पूरी कर रहे है, पर उन अधिवक्ताओ की संख्या ज्यादा है जो रोज की होने वाली कमाई पर निर्भर है, कोई भी सरकार हो केंद्र की या राज्य की किसी की नजर हम अधिवक्ताओ की तरफ जाती ही नही है, हर सरकार नई नई योजनाएं सभी के लिए शुरू करती है, पर अधिवक्ताओं के हिस्से में आती है तो सिर्फ फाइलें, घर परिवार का मोह हमसे कम हो जाता है, और अधिवक्ता घर परिवार को एक तरीके से छोड़े ही बैठे होते है, एक एक मुकद्दमा सालों साल चलता है, और अगर कोई मुकद्दमा जीत भी जाये तो जीत की खुशी भी क्लाइंट्स को समझ नही आती, समाज का ये एक पढा लिखा तबका जो विधिक बौद्धिक नैतिक सामाजिक सभी तरह का ज्ञान रखता है खुद ही अपने हिस्से के लिए लड़ नही पाता है, मैं सभी चुनी हुई राज्य सरकारों से या केंद्र सरकार से विनती करूँगा कि वकील है हम इस समाज की सबसे मजबूत कील है हम, हमे कमजोर न करे बल्कि हमे और भी ज्यादा मजबूत बनाये जिससे हम इस समाज को एक अंधेरे और गर्त में जाने से बचा सके।🙏