Legal Awareness by Yogendra Tiwari

Legal Awareness by Yogendra Tiwari Advocate Yogendra Tiwari is a distinguished legal practitioner specializing in criminal cases, civil cases, family law, and property law.

With extensive experience in both the High Court and District Courts across Madhya Pradesh.

दहेज प्रताड़ना की समस्या भारतीय समाज में एक गंभीर कुरीति है, जिसके समाधान के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए को लागू ...
12/12/2024

दहेज प्रताड़ना की समस्या भारतीय समाज में एक गंभीर कुरीति है, जिसके समाधान के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए को लागू किया गया। इस प्रावधान का उद्देश्य था कि महिलाओं को दहेज के लिए होने वाले उत्पीड़न से सुरक्षा दी जाए और उनके अधिकार सुनिश्चित किए जाएं। हालांकि, समय के साथ इस कानून का व्यापक रूप से दुरुपयोग होने लगा है। कई मामलों में यह देखा गया है कि पारिवारिक विवादों में महिलाएं इस प्रावधान का इस्तेमाल झूठे आरोप लगाकर पुरुषों और उनके परिवारों को प्रताड़ित करने के लिए करती हैं। इससे न केवल निर्दोष पुरुषों का मानसिक और सामाजिक उत्पीड़न होता है, बल्कि परिवारों का विघटन भी होता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। अरणेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 498ए के तहत सीधे गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए और मामले की गहन जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। राजेश शर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2017) में यह निर्णय हुआ कि परिवार कल्याण समितियां बनाई जाएं, जो शिकायत की सत्यता की जांच करें। इसके अलावा, सोशल एक्शन फोरम फॉर मैनवूमन (2018) मामले में कोर्ट ने दोहराया कि धारा 498ए का उद्देश्य महिलाओं की रक्षा करना है, लेकिन इसके दुरुपयोग पर रोक लगाना आवश्यक है।

यह स्पष्ट है कि इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के लिए कानूनी संशोधन और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता है। झूठे मामलों पर सख्त दंड का प्रावधान किया जाना चाहिए और मध्यस्थता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही, जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना होगा। इस कानून का उद्देश्य तभी सफल होगा, जब इसे सही तरीके से लागू किया जाएगा और इसका उपयोग न्याय दिलाने के लिए होगा, न कि प्रतिशोध के लिए।

28/11/2024
IN BNSS 2023
20/09/2024

IN BNSS 2023

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, नहीं मिल पाया स्टे...अब चार नवंबर को सुनवाईShri Krishna ...
17/09/2024

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद: मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, नहीं मिल पाया स्टे...अब चार नवंबर को सुनवाई
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17 Sep 2024
श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह प्रकरण में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर कोई स्टे नहीं दिया। मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की शरण में गया था। सुप्रीम कोर्ट में अब इस पर चार नवंबर को सुनवाई होगी। कहा है कि रिट का परीक्षण किया जाएगा। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि यह रिट इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बेंच में पहले होनी चाहिए थी। इसका भी परीक्षण होगा।

एक अगस्त को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह विवाद को सुनवाई योग्य माना था। कोर्ट ने शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन के स्वामित्व को लेकर हिंदू पक्षकारों की ओर से दाखिल सभी 15 सिविल वादों को सुनने योग्य मानते हुए मुस्लिम पक्ष की पांचों आपत्तियां खारिज कर दीं। ईदगाह कमेटी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

अपील दाखिल कर कहा गया है कि हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष के दावों को जो सुनवाई योग्य माना है वह गलत है। मुस्लिम पक्ष के इस प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय की गई थी। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह एवं पक्षकार आशुतोष पाण्डेय के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार को कोई स्टे नहीं दिया। कहा है कि इस परीक्षण होगा और चार नवंबर अगली तारीख तय कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट में कोर्ट संख्या2 में जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार इस मामले को सुना।

हिंदू पक्षकारों की दलीलें
ईदगाह का पूरा ढाई एकड़ क्षेत्र श्रीकृष्ण विराजमान का गर्भगृह है, वह हिस्सा भी जिसमें शाही ईदगाह मस्जिद है।
शाही ईदगाह मस्जिद कमेटी के पास भूमि का कोई ऐसा रिकॉर्ड नहीं है।
श्रीकृष्ण मंदिर तोड़कर शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण किया गया है।
बिना स्वामित्व अधिकार के वक्फ बोर्ड ने बिना किसी वैध प्रक्रिया के इसे वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया है।

मुस्लिम पक्ष की दलील
जमीन पर दोनों पक्षों के बीच 1968 में समझौता हुआ है। 60 साल बाद समझौते को गलत बताना ठीक नहीं है। लिहाजा, मुकदमा चलने योग्य नहीं है।
उपासना स्थल अधिनियम 1991 के तहत भी मुकदमा सुनवाई योग्य नहीं है।

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17/08/2024

आगरा। घर में घुसकर तमंचे के बल पर दुष्कर्म का आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी हो गया।

पीड़िता पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दिए अपने पूर्व बयान से मुकर गई। कोर्ट में अपने बयान में कहा कि दारोगा के कहने पर बयान दर्ज कराए थे।

घटना 18 नवंबर, 2022 की है। जगनेर थाना क्षेत्र की महिला ने गांव के आरोपित राकेश पर मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि राकेश ने घर में घुसकर जबरन तमंचे के बल पर दुष्कर्म किया। उसके शोर मचाने पर पहुंचे परिजनों को आरोपी के भाई नेमीचंद ने तमंचा लहराते धमकी दी।

पुलिस ने राकेश और उसके भाई के विरुद्ध आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया। अभियोजन की ओर से मुकदमे की वादी ने पीड़ित महिला, उसकी जेठानी, भतीजा की पत्नी और डाक्टर को गवाही के लिए कोर्ट में पेश किया।

पीड़िता अपने पूर्व बयान से मुकर गई। कहा कि दारोगा के कहने पर मजिस्ट्रेट के सामने राकेश के विरुद्ध बयान दिया था। दरोगा ने कहा था जो मैं कह रहा हूं, वही बयान देना। अन्यथा तुझे और तेरे पति को बंद कर दूंगा।

महिला ने कहा कि उसके साथ कोई दुष्कर्म नहीं हुआ है। कोर्ट ने वादी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई का आदेश देते हुए आरोपी राकेश को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

17/08/2024

नाबालिग को जमानत से तबतक इनकार नहीं, जब तक', सुप्रीम कोर्ट ने खारिज किया हाईकोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को नाबालिगों को जमानत देने के संबंध में अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी आपराधिक मामले में नाबालिग को जमानत देने से तब तक इनकार नहीं किया जा सकता, जब तक कि अदालत यह सुनिश्चित न कर ले कि नाबालिग का किसी ज्ञात अपराधी से संबंध होने की आशंका है या वह नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में हो सकता है या फिर उसकी रिहाई से न्याय का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजस्थान उच्च न्यायालय और किशोर न्याय बोर्ड के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें एक नाबालिग को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। आरोपी पर एक नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि आक्षेपित आदेश रद्द किए जाते हैं।।। और अपील स्वीकार की जाती है।
बिना जमानतदार के रिहा करने के आदेश
पीठ ने ये भी कहा कि अपराध का आरोप झेल रहा नाबालिग एक साल से अधिक समय से हिरासत में है, इसलिए उसे बिना किसी जमानतदार के जमानत पर रिहा किया जाए। न्यायालय ने कहा, “हालांकि, क्षेत्राधिकार वाला किशोर न्याय बोर्ड, जूरिडिक्शन प्रोबेशन ऑफिसर को नाबालिग को निगरानी में रखने और उसके आचरण के बारे में बोर्ड को समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए उचित निर्देश जारी करेगा।”
15 अगस्त 2023 को पुलिस ने पकड़ा था
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लड़के को 15 अगस्त, 2023 को हिरासत में लिया गया और किशोर देखभाल गृह भेज दिया गया। मामले में आरोप पत्र 25 अगस्त, 2023 को दाखिल किया गया। हिरासत के बाद से उसने किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12(1) के तहत दो बार जमानत याचिका दायर की, लेकिन उसकी अर्जी खारिज कर दी गई और यहां तक कि उच्च न्यायालय ने भी जमानत देने से इनकार करने के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी।

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Near Misspa Mission School, Jai Prakash Nagar, Adhartal
Jabalpur
482004

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