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हाईकोर्ट का फैसला: समझौते के आधार पर नहीं रद्द की जा सकती है POCSO Act में दर्ज FIRनाबालिग से दुष्कर्म के बाद उससे विवाह...
03/10/2022

हाईकोर्ट का फैसला: समझौते के आधार पर नहीं रद्द की जा सकती है POCSO Act में दर्ज FIR

नाबालिग से दुष्कर्म के बाद उससे विवाह का वादा कर समझौते के आधार पर POCSO Act में दर्ज FIR को रद्द करने से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इन्कार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act में दर्ज FIR को समझौते के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। याचिका दाखिल करते हुए लुधियाना निवासी एक व्यक्ति ने 23 जुलाई, 2019 को POCSO Act में दर्ज FIR को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की थी।

FIR के अनुसार शिकायतकर्ता की नाबालिग बेटी स्कूल का कुछ सामान लेने बाजार गई थी। इस दौरान याचिकाकर्ता ने उससे दुष्कर्म किया। शिकायत के आधार पर पुलिस इस मामले में जांच कर रही है। इसी बीच याची ने बताया कि लड़की की आयु विवाह योग्य हो चुकी है और याची उससे विवाह कर चुका है। दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और ऐसे में इस FIR को रद्द किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act बच्चों के बाल यौन शोषण के लिए बना है। अगर इस प्रकार बालिग होने पर विवाह की स्थिति में FIR को रद्द करने की अनुमति दी गई तो एक्ट का ध्येय समाप्त हो जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO Act Special Act है और ऐसे में इसे समझौते के आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने कहा, अबॉर्शन के लिए महिला को पति की मंजूरी लेने की जरूरत नहींकेरल हाईकोर्ट ने 1 मामले की सुनवाई की। इस दौरान...
02/10/2022

हाईकोर्ट ने कहा, अबॉर्शन के लिए महिला को पति की मंजूरी लेने की जरूरत नहीं

केरल हाईकोर्ट ने 1 मामले की सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर कोई गर्भवती महिला गर्भपात कराना चाहती है, तो उसे ऐसा करने के लिए अपने पति की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि medical termination of pregnancy act में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है

जिसके तहत महिला को गर्भपात करने के लिए अपने पति की अनुमति लेनी पड़े। इसका कारण ये है कि महिला ही गर्भावस्था और प्रसव के दर्द और तनाव को सहन करती है। कोर्ट ने यह आदेश कोट्टायम की एक 21 वर्षीय युवती की ओर से दायर याचिका पर सुनाया। इसमें युवती ने medical terms के अनुसार गर्भपात की अनुमति मांगी थी। गर्भवती महिला कानूनी रूप से तलाकशुदा या विधवा नहीं है।

क्या कहा कोर्ट ने?

जस्टिस VG Arun ने कहा कि युवती के अपने पति के साथ कोई रिश्ता नहीं है। क्योंकि युवती ने इस संबंध में अपने पति के खिलाफ 1 आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। इसमें कहा गया था कि युवती के पति ने उसके साथ रहने की कोई इच्छा नहीं दिखाई। लिहाजा कोर्ट ने माना कि यह उसके वैवाहिक जीवन में भारी बदलाव के समान है।

'युवा पीढ़ी विवाह को बुराई के रूप में देख रही'
हाल ही में केरल हाईकोर्ट की पीठ ने तलाक के लिए पति की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की थी। कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि युवा पीढ़ी विवाह को बुराई के रूप में देख रही है। पीठ ने कहा कि इसीलिए live-in संबंध बढ़ रहे हैं। जस्टिस ए मोहम्मद मुस्ताक और जस्टिस सोफी थॉमस की पीठ ने तलाक की अर्जी पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि युवा पीढ़ी विवाह को बुराई के रूप में देख रही है। मुक्त जीवन का आनंद लेने के लिए लोग शादी के बंधन से बचते हैं और इसीलिए live-in रिलेशन बढ़ रहे हैं।

माननीय जस्टिस यूयू ललित ने भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली ।भारत की माननीय राष्ट्रपति श्री द्रौपदी मुर्म...
27/08/2022

माननीय जस्टिस यूयू ललित ने भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली ।

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्री द्रौपदी मुर्मू जी ने 27 अगस्त, 2022 से जस्टिस यूयू ललित को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई।

49वें सीजेआई के रूप में न्यायमूर्ति ललित का अपेक्षाकृत कम कार्यकाल 74 दिनों का होगा। वह 8 नवंबर, 2022 को सेवानिवृत्त होंगे। जस्टिस ललित 13 अगस्त 2014 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में अपनी नियुक्ति से पहले सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडेवोकेट थे।
उनके पिता जस्टिस यूआर ललित सीनियर एडवोकेट थे और बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश रहे। जस्टिस ललित संविधान पीठ के फैसले के बहुमत की राय का हिस्सा थे, जिसमें तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया गया था। उन्होंने उस पीठ का भी नेतृत्व किया जिसने श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन को त्रावणकोर शाही परिवार से अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासनिक समिति को सौंपने का आदेश दिया था।

  🇮🇳आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर मेरे ऑफिस  ""श्री जागेश्वर नाथ लॉ चेंबर ""में हर घर तिरंगा घर-घर तिरंगा अभियान के अ...
15/08/2022

🇮🇳
आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर मेरे ऑफिस ""श्री जागेश्वर नाथ लॉ चेंबर ""में हर घर तिरंगा घर-घर तिरंगा अभियान के अंतर्गत झंडा वंदन किया ।

76वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। 🇮🇳

#स्वतंत्रता_दिवस


भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने अपने उत्तारधिकारी के तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के लिए आज न्यायमूर्ति यूयू ललित के...
04/08/2022

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने अपने उत्तारधिकारी के तौर पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के लिए आज न्यायमूर्ति यूयू ललित के नाम की सिफारिश की है. जस्टिस ललित देश के 49वें CJI होंगे. मुख्य न्यायाधीश रमना इसी महीने सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

14/07/2022

मुस्लिम कानून के अनुसार यौवन की उम्र POCSO ACT पर लागू नहीं- दिल्ली HC ने 16 साल की उम्र के बलात्कार के लिए प्राथमिकी रद्द करने से इनकार किया

दिल्ली हाई कोर्ट Delhi High Court ने 16 साल और 5 महीने की बच्ची से रेप R**e के मामले में आईपीसी IPC की धारा 376, 406, 377 और 506, पोक्सो एक्ट POCSO Act की धारा 6 और दहेज निषेध कानून की धारा 4 के तहत दर्ज प्राथमिकी और चार्जशीट को रद्द करने से इनकार कर दिया है।

आरोपी इमरान ने पीड़िता के घर पहुंचा और पीड़िता के माता-पिता से पीड़िता के साथ शादी की गुहार लगाई। पीड़िता के माता-पिता ने इस शर्त पर सहमति जताई कि शादी तभी होगी जब पीड़िता बारहवीं कक्षा पास कर लेगी। लड़की के पिता के पास दहेज के रूप में आरोपी के पास पैसे और कीमती सामान हैं, लेकिन सगाई के बाद आरोपी ने पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए, उसके बाद पीड़िता से शादी करने से इनकार कर दिया और पीड़िता के साथ-साथ उसके माता-पिता को भी गालियां दीं।

आरोपी की ओर से अधिवक्ता नासिर अहमद पेश हुए जबकि राज्य के लिए एएससी राजेश महाजन पेश हुए।

आरोपी पक्ष की दलील

आरोपी ने तर्क दिया कि उसने पीड़िता से शादी करने से कभी इनकार नहीं किया और आज भी वह पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार और तैयार है। हालांकि, अदालत में मौजूद पीड़िता के माता-पिता ने कहा कि उन्हें पीड़िता की शादी आरोपी से कराने में कोई दिलचस्पी नहीं है. आरोपी ने यह भी तर्क दिया कि उसने पीड़िता के पिता द्वारा उसे दिए गए पैसे वापस कर दिए हैं। आरोपी ने तर्क दिया कि “पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के प्रावधान वर्तमान मामले पर लागू नहीं हैं, क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार, पीड़िता बालिग है क्योंकि उसने यौवन प्राप्त कर लिया है”।

अभियोजन की दलील-

अभियोजन पक्ष ने यह कहते हुए तर्क का विरोध किया कि “धारा 6 पॉक्सो अधिनियम धार्मिक विशिष्ट नहीं है, बल्कि आयु विशिष्ट है। पॉक्सो अधिनियम का उद्देश्य बच्चों को यौन अपराधों से रोकना है। यह उम्र है जो वर्तमान मामले में महत्वपूर्ण है और वर्तमान मामले में पीड़िता 18 वर्ष से कम आयु का था”।

कोर्ट ने कहा-

दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद, न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि “मैं श्री महाजन के साथ सहमत हूं कि पॉक्सो 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण और शोषण से बचाने के लिए एक अधिनियम है। यह प्रथागत कानून विशिष्ट नहीं है बल्कि अधिनियम का उद्देश्य है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए है।

POCSO अधिनियम के उद्देश्य के बयान में कहा गया है कि अधिनियम का उद्देश्य बच्चों की कोमल उम्र को सुरक्षित करना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनके साथ दुर्व्यवहार न हो और उनके बचपन और युवाओं की रक्षा की जाए शोषण”।

कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, “उपरोक्त कारणों से, मैं याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज करता हूं कि मुस्लिम कानून के अनुसार जब से पीड़िता यौवन की उम्र हासिल कर चुकी है तो पॉक्सो एक्ट लागू नहीं होगा।”

कोर्ट ने कहा की उपरोक्त कारणों से, मैं याचिकाकर्ता के इस तर्क को अस्वीकार करता हूं कि मुस्लिम कानून के अनुसार जब से पीड़िता यौवन की आयु प्राप्त कर चुकी है, POCSO अधिनियम की कठोरता लागू नहीं होगी।

केस टाइटल – IMRAN VERSUS STATE OF DELHI THROUGH COMMISSIONER OF DELHI POLICE & ORS.
केस नंबर – W.P.(CRL) 1449/2022 & CRL.M.A. 12616/2022
कोरम – HON’BLE MR. JUSTICE JASMEET SINGH

इस निर्णय से न्यायालय पर जनता का विश्वास बड़ेगा |
02/06/2022

इस निर्णय से न्यायालय पर जनता का विश्वास बड़ेगा |

[हनुमान चालीसा विवाद] मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने नवनीत राणा और रवि राणा को जमानत दी।मुंबई की स्पेशल कोर्ट (Mumbai Special ...
04/05/2022

[हनुमान चालीसा विवाद] मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने नवनीत राणा और रवि राणा को जमानत दी।

मुंबई की स्पेशल कोर्ट (Mumbai Special Court) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackery) के निजी आवास के बाहर हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) का जाप करने पर देशद्रोह की प्राथमिकी में निर्दलीय सांसद नवनीत राणा (Navneet Rana) और उनके पति विधायक रवि राणा (Ravi Rana) को जमानत दी। 23 अप्रैल को, खार पुलिस ने राणा को आईपीसी की धारा 153 (ए) (धर्म, नस्ल आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), और 124 ए (देशद्रोह) के अलावा बॉम्बे पुलिस अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

मानत अर्जी का विरोध करते हुए मुंबई पुलिस ने दावा किया कि हनुमान चालीसा का जाप करने के पीछे उनका इरादा राज्य में कानून-व्यवस्था को इस हद तक बिगाड़ना था कि महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी सरकार को भंग करने की सिफारिश की जा सके। यह ध्यान दिया जा सकता है कि शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की लंबे समय से सहयोगी रही थी। हालांकि, पिछले चुनाव के दौरान इसने एनसीपी और कांग्रेस (एमवीए) के साथ गठबंधन किया।

एसपीपी प्रदीप घरात द्वारा प्रतिनिधित्व की गई पुलिस ने आगे दावा किया कि यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि सरकार हिंदू विरोधी है, अन्य धर्मों के लिए नफरत बढ़ाती है और दरार पैदा करती है। उन्होंने कहा कि 23 अप्रैल, 2022 को गिरफ्तार किए जाने तक दंपति के साक्षात्कार, 'लोकतांत्रिक देश में कानून द्वारा अनुमत निष्पक्ष आलोचना की सीमा को पार कर गए' और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 ए (देशद्रोह) के दायरे में हैं क्योंकि वे सार्वजनिक अव्यवस्था पैदा करने का इरादा है।

इसके विपरीत, रिजवान मर्चेंट एंड एसोसिएट्स के माध्यम से दायर जमानत याचिका में दंपति ने दावा किया कि उनका हिंसा को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं था और सरकार आलोचना के लिए "अतिसंवेदनशील" और अभेद्य होने का जोखिम नहीं उठा सकती है। अधिवक्ता रिजवान मर्चेंट के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा के नेतृत्व में बचाव पक्ष ने लाउड स्पीकर, पशु वध और बलात्कार की सोच और वास्तव में अपराध करने के बीच अंतर का उपयोग करके धार्मिक जाप नहीं करने का उल्लेख किया।

सुनवाई के अंत में हल्के स्वर में पोंडा ने कहा कि सब कुछ टाला जा सकता था, अगर सीएम ने कहा होता कि वे हनुमान चालीसा की भी पूजा करेंगे।

पोंडा ने कहा, "अगर राज्य के शीर्षस्थ ने कह दिया होता तो कि आओ और मैं भी हनुमान चालीसा पढ़ूंगा तो क्या हो जाता? कुछ नहीं। उन्हें लोकलुभावन वोट मिलता कि वह इतने महान हिंदू हैं।"

पोंडा ने शनिवार को कहा कि आईपीसी की धारा 124ए लागू नहीं होता है, खासकर जब से उन्होंने हनुमान चालीसा की पूजा नहीं की।
एडवोकेट पोंडा ने कहा, "जो सजा दी जानी चाहिए वह एक विचार है। यह किसी की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा है। अगर किसी के घर के बाहर किसी जानवर को मारने का विचार आता है तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है। लेकिन जहां हर कोई हिंदू है और कोई सिर्फ हनुमान चालीसा पढ़ना चाहता है। " वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने तर्क दिया कि ऐसा नहीं था कि मस्जिद के बाहर पाठ की योजना बनाई गई थी।

भारत सरकार भी judicial system में technology की संभावनाओं को डिजिटल इंडिया मिशन का एक जरूरी हिस्सा मानती है।उदाहरण के तौ...
30/04/2022

भारत सरकार भी judicial system में technology की संभावनाओं को डिजिटल इंडिया मिशन का एक जरूरी हिस्सा मानती है।

उदाहरण के तौर पर, e-courts project को आज mission mode में implement किया जा रहा है।

- पीएम श्री जी।

कार में एक्सीडेंट होने की स्थिति में  एयरबैग एक बेहद जरूरी सिक्योरिटी फीचर के रूप में काम करता है. लेकिन, कई बार ऐसा भी ...
24/04/2022

कार में एक्सीडेंट होने की स्थिति में एयरबैग एक बेहद जरूरी सिक्योरिटी फीचर के रूप में काम करता है. लेकिन, कई बार ऐसा भी देखा गया है कि कुछ एक्सीडेंट होने के बाद भी एयरबैग नहीं खुले हैं. इससे कार में बैठे लोगों को बहुत ज्यादा चोट आई है. एक मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर एक्सीडेंट होने की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा में लगे एयरबैग नहीं खुलते हैं तो ऐसे में कंपनियों को जुर्माना देना होगा ।

पथराव करके उपद्रव फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर बुलडोजर कार्यवाही के विरोध में लगी याचिका 'मध्यप्रदेश हाईकोर्ट' द्वारा ...
21/04/2022

पथराव करके उपद्रव फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर बुलडोजर कार्यवाही के विरोध में लगी याचिका 'मध्यप्रदेश हाईकोर्ट' द्वारा खारिज कर दी गई है।

प्रदेश की शांति और सद्भाव की रक्षा के सम्मान में माननीय उच्च न्यायालय के इस निर्णय का हृदय से स्वागत है..!!

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