17/11/2020
"मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।" - आज़ादी की लड़ाई में दमनकारी अंग्रेज़ों की अहंकारी लाठियों से बुरी तरह चोटिल लाला लाजपत राय के यह शब्द उनके उपनाम ‘पंजाब केसरी’ को अंत तक सार्थक सिद्ध करते गए। चोटिल अवस्था में भी यह क्रांतिकारी तेवर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इंधन बना और कालान्तर में यह कथन बिलकुल सटीक सिद्ध हुआ। सन् 1928 में आज ही के दिन पंजाब केसरी की शहादत के बाद भारत के वीर बेटों भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु इत्यादि के नेतृत्व में पूरा देश अंग्रेज़ी शासन के ख़िलाफ़ प्रत्यक्ष बग़ावत पर उतर आया और फिर दो दशकों से भी कम समय में देश आजाद हो गया। पुण्यतिथि पर आपकी शहादत को कृतज्ञ राष्ट्र का कोटि-कोटि नमन 🙏! वैचारिक क्रांति की अग्निशिखा प्रज्वलित करने के लिए अख़बार “पंजाब केसरी” की स्थापना और आर्य समाज के प्रचार-प्रसार में भी आपका योगदान अतुलनीय है 🙏🇮🇳