16/11/2020
::: अमेरिका से सीख लेने की आवश्यकता है राष्ट्रवादी खेमे को ....
डोनाल्ड ट्रम्प का नाम अमेरिका के सर्वकालिक उत्तम में से एक और ऐतिहासिक राष्ट्रपति का हो सकता था ... अमेरिका - उत्तर कोरिया - दक्षिण कोरिया सन्धि करने की बात चीत ... इजराइल - अरब अमीरात - बहरीन सम्बन्ध जिसमें जल्द ही सऊदी तक सम्मिलित होने के कगार पर था ... कंपनीयाँ जो अमरीका से माइग्रेट होकर कभी कनाडा - मैक्सिको - चीन आदि चली गयी थीं उनमे से तीन हज़ार के ऊपर ट्रम्प के कार्यकाल में वापस अमेरिका आ गयी थी .... Trump ने किसी भी देश पर कभी हमला नहीं किया उल्टा इराक - अफगानिस्तान से अपने सैनिक वापस बुलाने पर काम किया ....
लेकिन गलती ट्रम्प से हुई कि अपने बोल के कारण इतने काम के बाद भी वो Politically correct नहीं रहे ... अपने हाव भाव, बोल बचन और communist मीडिया से सीधे भिड़ जाने की शैली ने उनको Politically Incorrect बनाकर ऐसे प्रस्तुत कर दिया जैसे वो नल्ले नकारा हों ... अमेरीका में ट्रम्प विरोधी से बात कीजिए - उनमे से अधिकतर वो सिर्फ ट्रम्प के बोल बचन के कारण विरोधी दिखेगा, जब उनको ऊपर वाले बात बताइये तो वो मानेगा लेकिन फिर वही बोल बचन ... पोलिटिकल करेक्ट होने के कारण बराक हुसैन ओबामा लीबिया को मटियामेट करने और दुनिया भर में २८००० से ऊपर बम मारने के बाद भी नोबेल शांति पुरस्कार ले जाते हैं और आज तक प्रत्येक वर्ग के दुलारे हैं, उनका इस हर काम में हमराही Biden चुनाव जीत जाता है .... जबकि इतने काम के बाद भी Political Incorrect बोल बचन के कारण ट्रम्प हार जाते हैं ....
अतः अपने बोल बचन से Political correct रहना आवश्यक है - न सिर्फ नेता को बल्कि समर्थक को भी ... This is the value of being politically correct.
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भारत में मोदी विरोधी कम्युनिस्ट मीडिया को देखिये कि उन्होंने कितने जतन न किये मोदी को परास्त करने के .... मोदी जी ने कभी भी politically Incorrect prove होने का साजो सामान कम्युनिस्ट गैंग के हाथ न लगने दिया .... वैसे तो comparision बेकार है लेकिन भारत में महाराष्ट्र के ऊधो का हरकत देखिए, आज अर्नब गोस्वामी में लोग राष्ट्रीय नायक देखने लगे हैं ... जबकि कभी मीडिया में कम्युनिस्टों के आँख के तारे रहे अजित अंजुम, अभिसार, पुण्यप्रसून अपने एक एजेण्डा से सटे हुए इतने repetitive हो गए कि नौकरी गयी और frustrate होकर Youtuber बन गए लेकिन मोदी जी ने एक शब्द न खर्च किये इन पर जबकि इन लोगों ने कितनी अति न पार कर दी, बाकी राजदीप, बर्खा, रवीश जैसी अन्य अपने विश्वसनीयता के zero बिन्दु पर खड़े हैं ... ये अंतर है political correct और incorrect रहने का ...
एक कड़ी बात कहना चाहूंगा - अगर आप यह सोच कर सोश्यल मीडिया पर लगे रहते हैं, कि इधर विपक्ष के किसी गिरोह ने आप पर पलटवार किया और उधर पीएम मोदी दक्षिण भारतीय फिल्मों के हीरो की तरह लूंगी बांधे अपना सारा काम काज छोड़ कर आपको छुड़ाने पुलिस थाने में पहुंच जायेंगे, थानेदार को अइयो रास्कला ... कहते हुए, तो भगवान के लिए अपने काम धंधे में ही समय दीजिये. राष्ट्र का कार्य आपके और मेरे बिना भी कमोवेश चलता रहा था, चलता रहेगा भी.
It is important to be politically correct ..... इस बात को ट्रम्प नहीं जानते थे लेकिन मोदी जी को इस पर कोई संदेह नहीं .... एक अर्नब के जेल जाने से कभी भी भाजपा को वोट न देने का कसम, मोदी को नपुन्सक, लाशों की राजनीती करने वाला, अर्नब की लाश सूट करती है आदि और न जाने क्या क्या बोलने वाले लोग एक politically incorrect कदम होने पर ego के चरम पर ले जाकर अपने ही पैर पे कुल्हाड़ी मार लेंगे ये पता है मोदी को .... अभी भी राष्ट्रवादी खेमा इतना mature नहीं हुआ - ये बात मोदी को बहुत अच्छे से पता है और उससे अधिक विरोधी और लेफ्ट लिबरल तथा कम्युनिस्ट गैंग को भी पता है ...
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