Rajwardhan Gawde

Rajwardhan Gawde Lawyer Practicing at Indore High Court
Standing Counsel for Central Govt. of India
Panel Lawyer for State of M.P.

प्रौढ प्रताप पुरंदर क्षत्रिय कुलावंतस... सिहांसनाधीश्वर...  योगीराज... श्रीमंत श्री छत्रपती शिवाजी महाराज की जय…🙏🚩🧡
19/02/2024

प्रौढ प्रताप पुरंदर क्षत्रिय कुलावंतस...
सिहांसनाधीश्वर... योगीराज...
श्रीमंत श्री छत्रपती शिवाजी महाराज की जय…🙏🚩🧡



Pranam Bhaiya.. Wish You a very Happy Birthday.. Keep Inspiring Us.. 🎉🎉🙏Pushyamitra Bhargav
02/01/2024

Pranam Bhaiya.. Wish You a very Happy Birthday.. Keep Inspiring Us.. 🎉🎉🙏

Pushyamitra Bhargav

बस रोना है ..ब्रजभूषण ने शोषण किया है … FIR दर्ज करे नहीं तो आंदोलन ख़त्म नहीं होगा FIR हो गई ।चार्जशीट फाइल नहीं हो रही...
24/12/2023

बस रोना है ..

ब्रजभूषण ने शोषण किया है … FIR दर्ज करे नहीं तो आंदोलन ख़त्म नहीं होगा

FIR हो गई ।

चार्जशीट फाइल नहीं हो रही .. फाइल करवायें नहीं तो आंदोलन होगा ।

चार्जशीट फाइल हो गई ।

चुनाव करवायें जो कोर्ट की निगरानी में हो .. नहीं तो आंदोलन होगा ।

चुनाव कोर्ट की निगरानी में हो गये ।

इस बीच कमिटी भी बनी, मीडिया ट्रायल भी हुए, अनावश्यक आंदोलन भी हुए, संविधान और क़ानून का हवाला दे कर जो हो सकता था सब किया गया ।

अब कह रही है किसी महिला को अध्यक्ष बनाओ, वो भी कोई और बनेगी तो कहेगी मुझे बनाओ । आपने मेडल दिया तो उसके पीछे देश ने आपको प्रोत्साहन, सारी व्यवस्थाएँ दी । मेडल के बाद करोड़ों रुपये दिये । वो भी लौटायेंगी ? या बस रोना है …



जो निश्छल है, जो अडिग है, जिनकी मौन साधना का परिणाम,जिनके त्याग, पराक्रम का प्रमाण ये विजय है …-राजवर्धन गावड़े
03/12/2023

जो निश्छल है,
जो अडिग है,
जिनकी मौन साधना का परिणाम,
जिनके त्याग, पराक्रम का प्रमाण
ये विजय है …

-राजवर्धन गावड़े




वोट प्रदेश के अनवरत विकास के लिए । वोट राष्ट्र के लिये …
17/11/2023

वोट प्रदेश के अनवरत विकास के लिए ।

वोट राष्ट्र के लिये …




ये साधारण दिखने वाली तस्वीर है पर है नहीं । विचार कीजिए क्या रिश्ता है इनका चंद्रयान या उसकी सफलता से ? लेकिन रिश्ता है ...
14/07/2023

ये साधारण दिखने वाली तस्वीर है पर है नहीं ।
विचार कीजिए क्या रिश्ता है इनका चंद्रयान या उसकी सफलता से ?
लेकिन रिश्ता है इस भूमि से, इस भूमि से, इसके गौरव से, इसकी सफलता से, हम सब चाहे जाने, अनजाने हमारे चन्द्रयान की सफलता को ले कर उत्साहित तो है ।

संघर्ष अवश्य सफल होगा ।
वो आज नहीं तो कल होगा …




भुतहा सी नज़र होने वाली यह बंद फैक्ट्री है रानीबाग उत्तराखण्ड में एचएमटी की. किसी समय यह भारत का वक्त बताती थी. भारत की ...
20/04/2023

भुतहा सी नज़र होने वाली यह बंद फैक्ट्री है रानीबाग उत्तराखण्ड में एचएमटी की. किसी समय यह भारत का वक्त बताती थी. भारत की इकमात्र घड़ी कंपनी थी, भारत सरकार का उपक्रम थी. कभी इसकी घड़ी लेने के लिए सालों की वेटिंग होती थी.

इस कंपनी के पास भारत के सर्वश्रेष्ठ डिज़ायनर थे, इंजीनियर थे. बस नहीं थी तो इच्छा शक्ति समय के साथ चलने की, ग्राहकों को भगवान मानने की. सारी दुनिया क्वार्ट्ज़ टेक्नोलॉजी में आ चुकी थी लेकिन एचएमटी की ज़िद थी कि वह मैन्युअल चाभी भरने वाली घड़ियाँ ही बनायेंगे. उसमे भी डिमांड सप्लाई का गैप इतना कि ग्राहकों को सालों इंतज़ार करना पड़ता था, रिश्वत देनी पड़ती थी.

कंपनी का मैनेजमेंट सब तरह से कमाता था. ग्राहकों से ब्लैक में पैसा ले कर. पॉवर फ़ुल लोगों को समय से घड़ी देकर एहसान कर और सबसे ज्यादा क्वार्ट्ज़ की इलेक्ट्रॉनिक घड़ियाँ न बना कर अवैध रूप से विदेशी कंपनियों को मार्केट का हिस्सा देकर. एक समय भारत में बिकने वाली अस्सी प्रतिशत घड़ियाँ अवैध रूप से भारत आती थीं. मज़ेदार बात थी कि उन घड़ियों के विज्ञापन आदि भी होते थे, फुल ऑफिस थे, बस वैध तरीक़े से भारत में बिक नहीं सकती थीं. ग्राहक भी वही ख़रीदते, दुकानदार भी वही बेचते, बस भारत सरकार का भ्रम था कि भारत में हम केवल एचएमटी की घड़ी ही बिकने देंगे.

फिर एंट्री हुई टाटा की. टाइटन कंपनी आई. उन्होंने डिसाइड किया कि वह केवल इलेक्ट्रॉनिक घड़ी बनायेंगे. एचएमटी के पास उनसे मुक़ाबले की रण नीति यह कि हम सरकारी हैं सरकार से बोल किसी प्राइवेट कंपनी को न आने देंगे. पर टाटा भी इतने हल्के न थे. टाइटन ने एचएमटी से ही रिआटायर्ड अधिकारी, इंजीनियर लिए. और पचास साल पुरानी कंपनी एचएमटी ने केवल एक साल के अंदर अपनी बादशाहत खो दी और टाइटन नंबर एक कंपनी हो गई. बस तीन सालों के अंदर एचएमटी की घड़ी भारत में कोई मुफ़्त ख़रीदने वाला न बचा.

आज यह फैक्ट्री अपने गुजरे कल के इतिहास की गवाह है. गवाह है कि जो व्यवसाय के साथ नहीं चलता है, ग्राहकों का सम्मान नहीं करता है एक दिन वह मिट्टी में मिल ही जाता है. भले ही कभी उसकी मोनोपोली रही हो.

2 मिनट का मौन इसको सिख मानने वालों के लिए!2.4 करोड़ सिख हैं भारत मे ।उसमे 95% तो ऐसे गुरु के भक्त है जो शीश कटा सकते है,...
28/02/2023

2 मिनट का मौन इसको सिख मानने वालों के लिए!

2.4 करोड़ सिख हैं भारत मे ।
उसमे 95% तो ऐसे गुरु के भक्त है जो शीश कटा सकते है, जेल चले जाते है, फ्लाइट छोड़ देते है और आम दिनचर्या में कई त्याग करते है ना पग उतारते हैं ना बाल कटाते हैं और ना कृपान हटाते हैं ।

जिस सिक्ख क़ौम के त्याग की मिसाले दे दे कर इतिहास थकता नहीं उसका एक धड़ा इसे अपना नेता मान रहा और बाक़ी समाज चुप्पी साधे है ??

मौन ना रहो .. प्रतिकार करो .. आने वाली नस्ले तुमसे जवाब ज़रूर माँगेगी …



आज ही तरह सर्द वो, आज 20 दिसंबर की ही रात थी, (20 दिसम्बर 1704), "गुरु गोबिंद सिंह जी" ने अपने परिवार और 400 अन्य सिखों ...
20/12/2022

आज ही तरह सर्द वो, आज 20 दिसंबर की ही रात थी, (20 दिसम्बर 1704), "गुरु गोबिंद सिंह जी" ने अपने परिवार और 400 अन्य सिखों के साथ आनंदपुर साहिब का किला छोड़ दिया और निकल पड़े..

उस रात भयंकर सर्दी थी और मावठे की बारिश हो रही थी..

सेना 25 किलोमीटर दूर सरसा नदी के किनारे पहुंची ही थी कि मुग़लों ने रात के अंधेरे में ही आक्रमण कर दिया...
बारिश के कारण नदी में उफान था..
कई सिख शहीद हो गए... कुछ नदी में ही बह गए...
इस अफरातफरी में परिवार बिछुड़ गया..
माता गूजरी और दोनों छोटे साहिबजादे गुरु जी से अलग हो गए... दोनो बड़े साहिबजादे गुरु जी के साथ ही थे..

उस रात गुरु जी ने एक खुले मैदान में शिविर लगाया .. अब उनके साथ दोनो बड़े साहिबजादे और 40 सिख योद्धा थे ...
शाम तक आपने चौधरी रूप चंद और जगत सिंह की कच्ची गढ़ी में मोर्चा सम्हाल लिया..
अगले दिन जो युद्ध हुआ उसे इतिहास में "2nd Battle Of Chamkaur Sahib" के नाम से जाना जाता है..

उस युद्ध में दोनों बड़े साहिबजादे और 40 अन्य सिख योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए...

उधर दोनो छोटे साहिबजादे जो 20 कि रात को ही गुरु जी से बिछुड़ गए थे माता गुर्जरी के साथ सरहिंद के किले में कैद कर लिए गए थे..

सरहिन्द के नवाब ने दबाव डाला कि धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल कर लो नही तो दीवार में जिंदा चुनवा दिया जाएगा..
दोनो साहिबज़ादों ने हंसते हंसते मौत को गले लगा लिया पर धर्म नही छोड़ा..

गुरु साहब ने सिर्फ एक सप्ताह के भीतर यानी 22 से 27 दिसम्बर के बीच अपने 4 बेटे देश-धर्म की खातिर वार दिए....
माता गूजरी ने दोनो बच्चों के साथ ये ठंडी रातें सरहिन्द के किले में, ठिठुरते हुए गुजारी थीं..

बहुत सालों तक.. जब तक कि पंजाब के लोगों पे इस आधुनिकता का बुखार नही चढ़ा था.. ये एक सप्ताह यानि कि 20 से ले के 27 दिसम्बर तक लोग शोक मनाते थे और जमीन पे सोते थे ..

हम स्मरण कराते रहेंगे के आज हिन्दुओं और सिखों ने इस कुर्बानी को भुला दिया है ...

नई पीढ़ी अब शाम को सर पे हरी पगड़ी पहनकर PDP, वामपंथ और कांग्रेस की प्रवक्ता बन कर टीवी पर इस्लाम की पैरवी करती है...

हमारे जैसे कई और हैं जो, ये कुर्बानियां नहीं भूले हैं.. और इसीलिए शायद हमें सांप्रदायिक बुलाया जाता है ..

जो बोले सो निहाल ..
सत श्री अकाल ..

पत्रकार विशाल वर्मा जी की वॉल से






यह जो दीवार पर लिखा हुआ है, वह हमारी सभ्यता और संस्कृति है ।मूल में राम व धर्म के प्रति भाव जागरण आज शहर के बाहर तक सीमि...
28/11/2022

यह जो दीवार पर लिखा हुआ है, वह हमारी सभ्यता और संस्कृति है ।
मूल में राम व धर्म के प्रति भाव जागरण आज शहर के बाहर तक सीमित रह गया ।

आज आधुनिकता ने द्वार पर - "कुत्ते से सावधान" लिखना सिखा दिया है !

हिंदुत्व की अवधारणा के अनुरूप हमें यह समझना ही होगा के हमारी मानसिकता कैसी होनी चाहिए.. धर्म का मार्ग अपनाना चाहिए, या आधुनिकता का ओछा प्रदर्शन .. !

साभार- अनिल जी डागा





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