07/07/2026
Court केवल दस्तावेजों को नहीं, बल्कि जीवन के वास्तविक स्तर और सामाजिक परिस्थितियों को देखता है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय का एक और महत्वपूर्ण निर्णय⚖️
🔹 मामला: CRR-512-2026 (MPHC - Indore Bench)
🔹 मुख्य कानूनी सिद्धांत: भरण-पोषण (Maintenance) के मामलों में 'आय छुपाई जा सकती है, लेकिन सामाजिक स्टेटस नहीं'.
मुख्य बातें:
सिर्फ FIR ही काफी है: कोर्ट ने माना कि यदि पत्नी बच्चे की देखभाल कर रही है और पति के खिलाफ FIR दर्ज है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि वह बिना किसी ठोस कारण के अलग रह रही है.
साबित करने का भार (Burden of Proof): कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह एक सामाजिक कल्याण की कानूनी प्रक्रिया है, इसलिए पति की आय साबित करने का पूरा बोझ सिर्फ पत्नी पर नहीं डाला जा सकता.
योग्यता बनाम अधिकार: पत्नी के पास इंजीनियरिंग की डिग्री होने मात्र से उसे भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब वह 10 साल के बच्चे की देखभाल कर रही हो.
परिणाम: हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को पलटते हुए पत्नी और बच्चे दोनों के लिए ₹30,000 - ₹30,000 (कुल ₹60,000/माह) का भरण-पोषण मंजूर
"The source of income may be concealed, but the status cannot be concealed."
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इन्दौर बेंच) ने भरण-पोषण (Section 125 CrPC) को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है:
1️⃣ स्टेटस ही पैमाना है: पति अपनी असल आय छिपा सकता है, लेकिन समाज में उसका रहन-सहन और शैक्षणिक योग्यता (जैसे M.Tech/MBA) उसके वास्तविक स्तर को बयां कर देती है.
2️⃣ डिग्री होने से हक खत्म नहीं होता: पत्नी के पास इंजीनियरिंग की डिग्री होने का मतलब यह नहीं कि वह खुद का खर्च उठाने में सक्षम है, खासकर तब जब वह बच्चे की परवरिश कर रही हो.
3️⃣ कोर्ट का रुख: केवल पति द्वारा 'विवाह बहाली' (Restitution of Conjugal Rights) का मुकदमा दायर करने से पत्नी का भरण-पोषण का दावा खारिज नहीं किया जा सकता.
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