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एक सच्ची घटना आई सामने बाप बेटे का अद्भुत प्रेम बहु ससुर के पास आकर बोली " पापा जी  मैंने आपके बेटे को दस बार फोन कर दिय...
05/02/2026

एक सच्ची घटना आई सामने बाप बेटे का अद्भुत प्रेम

बहु ससुर के पास आकर बोली " पापा जी मैंने आपके बेटे को दस बार फोन कर दिये। ना फोन उठाया और ना वापस फोन किया। ससुर ने पूछा " कोई जरूरी काम था क्या उससे??" बहु बोली " मेरी कमरदर्द की गोलियां खत्म हो गई है। वही मंगंवानी थी।" ससुर गुस्से मे बोले " आने दे उसको। बहुत दिन हो गए। आज खबर लेता हूँ।" इत्तेफाक से थानेदार बेटा उसी समय घर आ गया। साथ मे उसका एक दोस्त भी था। बाप ने बेटे को पास बुलाया फिर जूता लेकर पीटना शुरू कर दिया। " बहु सुबह से फोन कर रही है। उठाया क्यों नही तूने। तू थानेदार घर से बाहर है समझा।" थानेदार बेटा मुस्कराते हुए बाप से पिट रहा था और उधर दोस्त की आँखों मे आंसू आ गए थे। ।" बाप से आठ दस जुते। खाने के बाद बेटा बोला " आइंदा ख्याल रखूँगा बापूजी। लग रही है अब रहने दो। " बापूजी ने थक कर पिटाई बन्द कर दी फिर बहु से कहा" बेटा आइंदा ऐसी हरकत करे तो बताना। इसकी सारी खुम्मारी उतार दूंगा। मनमानी जरा भी नही चलने दूंगा। बहु पति को जीभ दिखाकर मुस्कराते हुए अंदर चली गई। " थानेदार बेटा अपने दोस्त के साथ वापस बाहर चला गया। रास्ते मे थानेदार बोला " बाप से पिट कर तो मै आया हूँ तू उदास क्यों है? दोस्त बोला " साले तू पिट कर नही आया। स्वर्ग का आनन्द लेकर आया है। इस उम्र मे बाप की पिटाई कहाँ नशीब होती है? तुझे पिटते देख कर मुझे मेरा बाप याद आ गया। अब इस दुनिया मे नही है। काश होते तो मुझे भी उनकी डांट मिल जाती। मै भी तेरी तरह हँसते हुए उनसे मार खाता। जिसको भी अपने पीता जी की मार से भी प्यार है वो शेयर कर दो जी 🙏🙏



12/01/2026
आइए जानते जो लड़कियां कहती मेरा अब्दुल  ऐसा नहीं पहले तो सारे मुस्लिम एक जैसे होते उनका टारगेट हे हिंदू लड़की इसलिए सावध...
06/01/2026

आइए जानते जो लड़कियां कहती मेरा अब्दुल ऐसा नहीं पहले तो सारे मुस्लिम एक जैसे होते उनका टारगेट हे हिंदू लड़की इसलिए सावधान
रहो हिंदू लड़कियों एक अब्दुल ऐसा बता दो जिसने हिंदू लड़की शादी की और पूरे अधिकार दिए हो अरे जो अपनी मुस्लिम लड़कियों को नहीं छोड़ते इस धर्म में आप केवल बच्चे पैदा करने के लिए चाहे ससुर करे या मामा ,या भाई ,या देवर या आपके अब्दुल दोस्त बस शरीर की प्यास बुझाना यह इस्लाम यह कुरान कहती हे सुधर जाओ हिंदू लड़कियों.…...

"ध्वनि के नीचे दबा सत्य"कुछ रातें केवल समय नहीं होतीं वे चेतना की परीक्षा होती हैं।जब अंधकार गाढ़ा होता है, तब वह सिर्फ ...
04/01/2026

"ध्वनि के नीचे दबा सत्य"

कुछ रातें केवल समय नहीं होतीं वे चेतना की परीक्षा होती हैं।
जब अंधकार गाढ़ा होता है, तब वह सिर्फ रोशनी की कमी नहीं दर्शाता, बल्कि यह बताता है कि भीतर बहुत कुछ ऐसा है जिसे देखा नहीं जाना चाहिए था, पर देखा गया। ऐसी रातों में हवा भी खाली नहीं होती उसमें स्मृतियाँ तैरती हैं, अधूरे निर्णय, और वे इच्छाएँ जो कभी शब्द नहीं बन पाईं।

कुछ संरचनाएँ केवल ईंट, लकड़ी या पत्थर से नहीं बनतीं। वे मनुष्य की भावनाओं से निर्मित होती हैं भय, लालसा, प्रतीक्षा और अपराधबोध से। जब कोई भीतर प्रवेश करता है, तो वह किसी जगह में नहीं, बल्कि एक विचार–क्षेत्र में प्रवेश करता है, जहाँ समय सीधा नहीं चलता, बल्कि परतों में खुलता है।

ध्वनि वहाँ साधारण अनुभव नहीं रहती।
वह सूचना बन जाती है।

हर ध्वनि एक कंपन है, और हर कंपन एक प्रभाव। सामान्य जीवन में हम ध्वनि को सुनते हैं, लेकिन कुछ स्थितियों में ध्वनि हमें बदलती है। वह स्मृति को छूती है, नसों में उतरती है, और सोच के ढाँचे को मोड़ देती है। यही कारण है कि कुछ सुर सुकून देते हैं, और कुछ असहनीय पीड़ा।

कला, जब करुणा से कट जाती है, तो वह अभिव्यक्ति नहीं रहती वह प्रयोग बन जाती है।
और जब प्रयोग का विषय मनुष्य स्वयं हो, तब रेखा बहुत पतली हो जाती है: रचना और विनाश के बीच।

प्रेम भी ऐसा ही है।

प्रेम हमेशा सुरक्षा नहीं चाहता। कुछ प्रेम पूर्ण समर्पण चाहते हैं यहाँ तक कि स्वयं के अंत की कीमत पर। ऐसा प्रेम मुक्त नहीं करता, बल्कि अपने भीतर खींच लेता है। वह कहता है: अगर तुम सब कुछ नहीं खो सकते, तो तुमने कुछ पाया भी नहीं।
ऐसी सोच में पीड़ा साधन बन जाती है, और सहमति स्वयं का त्याग।

यहीं से जन्म लेता है वह अंधा क्षेत्र, जहाँ सौंदर्य और आत्म-विनाश एक ही भाषा बोलते हैं।

जब ध्वनि, भावना और संरचना एक साथ काम करती हैं, तो परिणाम केवल मानसिक नहीं रहते वे भौतिक हो जाते हैं। कंपन ज़मीन तक पहुँचता है। संरचनाएँ प्रतिक्रिया देती हैं। छुपे हुए तंत्र जागते हैं। ऐसा नहीं लगता कि कुछ टूट रहा है बल्कि ऐसा लगता है कि कुछ पूरा हो रहा है, जैसे किसी लंबे समय से रुके हुए वाक्य का अंतिम शब्द मिल गया हो।

नीचे जो खुलता है, वह गहराई केवल भौगोलिक नहीं होती।
वह स्मृति की गहराई होती है।

वहाँ जमा रहते हैं वे प्रयास, जो अधूरे रह गए। वे अभिव्यक्तियाँ, जो सीमा पार कर गईं। वे जीवन, जिन्हें किसी उद्देश्य के नाम पर वस्तु बना दिया गया। हवा में एक कंपन बना रहता है जैसे याद दिलाने के लिए कि जो कभी महसूस किया गया, वह कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता।

ध्वनि यहाँ समाप्त नहीं होती।
वह रूप बदलती है।

और तब यह स्पष्ट हो जाता है कि सत्य कोई निष्कर्ष नहीं है। सत्य एक अनुभव है।
और हर अनुभव की एक कीमत होती है मानसिक स्थिरता, सरलता, या वह मासूम विश्वास कि सब कुछ समझ में आ सकता है।

कुछ सत्य ऐसे होते हैं, जिन्हें जान लेने के बाद व्यक्ति पहले जैसा नहीं रह सकता।
इसलिए नहीं कि वे डरावने हैं, बल्कि इसलिए कि वे बहुत सटीक होते हैं।

अंत में कोई समाधान नहीं बचता।
केवल एक चेतावनी: जब कला संवेदना छोड़ देती है,
जब प्रेम विनाश को स्वीकार कर लेता है,
और जब ध्वनि चेतना पर शासन करने लगती है
तब जो जन्म लेता है, वह अमर हो सकता है,
लेकिन मानव नहीं रहता।

और ऐसी अवस्थाएँ कभी समाप्त नहीं होतीं।
वे अगली आवृत्ति में बदल जाती हैं
किसी और समय, किसी और के भीतर।
तुलसी देवा ✒️✒️

ऐतिहासिक और दार्शनिक विमर्श:कहा जाता है कि प्रेम और वफ़ादारी का आधार 'भरोसा' होता है, लेकिन जब इस भरोसे की जगह 'संदेह' ल...
04/01/2026

ऐतिहासिक और दार्शनिक विमर्श:
कहा जाता है कि प्रेम और वफ़ादारी का आधार 'भरोसा' होता है, लेकिन जब इस भरोसे की जगह 'संदेह' ले लेता है, तो जन्म होता है पाबंदियों का। एक प्राचीन कथा के अनुसार, एक बादशाह ने अपनी अनुपस्थिति में बेगम की वफ़ादारी पर शक होने के कारण लोहे का एक अभेद्य सुरक्षा कवच बनवाया और उसे ताले में जड़ दिया। बादशाह को लगा कि उसने 'वफ़ादारी' को लोहे की जंजीरों में कैद कर लिया है, लेकिन कहानी का अंत कुछ और ही बयां करता है।
1. बुद्धि और दृढ़ संकल्प के आगे लोहा भी फेल
बादशाह के युद्ध पर जाते ही बेगम ने अपनी बुद्धिमानी और आत्म-नियंत्रण का परिचय दिया। उसने अपने आहार और जीवनशैली में ऐसा बदलाव किया कि वजन कम होते ही वह उस 'सुरक्षित' कवच से बाहर निकल गई। यह इस बात का प्रमाण है कि इंसान की शारीरिक बनावट पर पहरा लगाया जा सकता है, लेकिन उसकी इच्छाशक्ति और युक्ति पर नहीं।
2. चालाकी और वापसी का मनोवैज्ञानिक खेल
बेगम ने न केवल उस बंधन को तोड़ा, बल्कि बादशाह की वापसी की खबर मिलते ही वापस वही स्थिति (वजन बढ़ाकर कवच पहनना) धारण कर ली। यह हिस्सा मनोवैज्ञानिक रूप से बहुत गहरा है। यह दर्शाता है कि जबरन थोपी गई सुरक्षा व्यवस्था अक्सर 'धोखे' को और अधिक परिष्कृत (Sophisticated) बना देती है। जब किसी पर हद से ज्यादा अविश्वास किया जाता है, तो वह व्यक्ति वफ़ादार होने के बजाय 'बेहतर अभिनेता' बनना सीख जाता है।
3. वफ़ादारी: एक आंतरिक गुण, न कि बाहरी व्यवस्था
इस प्रसंग से निकलने वाला सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि दुनिया का सबसे मजबूत लोहा और सबसे जटिल ताला भी किसी की नीयत को बांध नहीं सकता।
निगरानी की सीमा: सीसीटीवी कैमरे, पहरेदार या लोहे के कवच—ये सभी शरीर को रोक सकते हैं, मन को नहीं।
भरोसे की नींव: सच्ची वफ़ादारी डर से नहीं, बल्कि सम्मान और प्रेम से पैदा होती है। जहाँ डर होता है, वहां केवल आज्ञाकारिता का मुखौटा होता है, वफ़ादारी नहीं।
4. समकालीन समाज के लिए सबक
आज के डिजिटल युग में भी, जहाँ हर चीज पर 'ट्रैकिंग' और 'पासवर्ड' का पहरा है, यह कहानी प्रासंगिक है। चाहे वह निजी रिश्ते हों या पेशेवर कार्यस्थल, यदि नीयत साफ नहीं है, तो तकनीक का कोई भी ताला उसे सुरक्षित नहीं रख सकता।
संपादकीय टिप्पणी:
बादशाह का वह लोहे का कवच आज भी उन लोगों के लिए एक सबक है जो सोचते हैं कि बंदिशें लगाकर किसी के चरित्र को नियंत्रित किया जा सकता है। यह कथा हमें याद दिलाती है कि "वफ़ादारी का सबसे सुरक्षित ताला 'संस्कार' और 'चरित्र' के भीतर होता है, लोहार की दुकान पर नहीं।"

31/12/2025

मूर्ख बगुला और नेवला (एक शिक्षाप्रद कहानी)

बहुत समय पहले की बात है। एक घना जंगल था। उस जंगल के एक विशाल वटवृक्ष की खोल (तने के अंदर) में बहुत से बगुले रहते थे। यह वृक्ष नदी के किनारे स्थित था, इसलिए बगुलों को भोजन और पानी की कोई कमी नहीं थी। वे सुख-शांति से अपने परिवार के साथ रहते थे।

लेकिन उसी वटवृक्ष की जड़ों में एक काला, क्रूर साँप भी अपना बिल बनाकर रहता था। वह अत्यंत चालाक और हिंसक था। जब भी बगुलों के अंडों से बच्चे निकलते, वह साँप चुपचाप बिल से निकलता और बगुले के नन्हें बच्चों को खा जाता। यह दृश्य बार-बार दोहराया जाता रहा, जिससे बगुले अत्यंत दुःखी और परेशान हो गए।

इनमें से एक बूढ़ा बगुला तो इस दुख से इतना व्यथित हो गया कि उसने भोजन करना छोड़ दिया और एक दिन उदास होकर नदी किनारे बैठ गया। उसकी आँखों में आँसू थे और चेहरा चिंता से मलिन था।

उसी समय वहीं पास में एक केकड़ा पानी से बाहर निकला। उसने बगुले की यह हालत देखी और पूछा, “मामा! क्या बात है? आज इतने दुःखी क्यों हो? आँखों में आँसू क्यों हैं?”

बगुला बोला, “भैया! दुःख की बात यह है कि हर बार जब मेरे बच्चे पैदा होते हैं, तभी यह दुष्ट साँप उन्हें खा जाता है। मैं बहुत परेशान हूँ। कोई उपाय नहीं सूझता। कृपया कोई रास्ता बताओ जिससे उस साँप का नाश हो सके।”

केकड़ा बचपन से बगुले से चिढ़ता था। बगुला जब छोटा था, तब वह केकड़े का शिकार करने की कोशिश करता था। आज उसे बदला लेने का अवसर मिला था। उसने मन में सोचा — “इस बगुले को ऐसा उपाय बताऊँगा जिससे साँप का तो नाश होगा ही, साथ ही इस बगुले और इसके साथियों का भी अंत हो जाएगा।”

केकड़ा बोला, “मामा! यदि साँप से छुटकारा पाना चाहते हो तो एक सरल उपाय है। नेवला साँप का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। तुम मांस के कुछ टुकड़े नेवले के बिल के पास डाल दो और फिर मांस की एक पंक्ति साँप के बिल तक बना दो। नेवला उन टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचेगा और वहाँ साँप को देखकर अवश्य ही उसे मार डालेगा।”

बगुले को यह बात बहुत अच्छी लगी। उसने उसी दिन योजना के अनुसार मांस के टुकड़े पहले नेवले के बिल के पास और फिर साँप के बिल तक डाल दिए। योजना पूरी तरह सफल रही। नेवले ने मांस के टुकड़ों को खाते-खाते साँप के बिल तक पहुँचा और जैसे ही साँप को देखा, उससे युद्ध कर उसे मार डाला।

बगुला अत्यंत प्रसन्न हुआ कि अब उसके बच्चों को कोई खतरा नहीं रहेगा। लेकिन यह खुशी अधिक देर तक नहीं टिकी। साँप के मरने के बाद नेवले को वहाँ बार-बार मांस की आशा होने लगी। उसने उसी वटवृक्ष की ओर ध्यान दिया और वहाँ रहने वाले बगुलों को भी अपना शिकार बना लिया।

कुछ ही दिनों में नेवले ने उस वृक्ष पर रहने वाले लगभग सभी बगुलों को मार डाला। बगुला जिसे पहले जीत समझ बैठा था, अब अपने सारे साथियों की मृत्यु देखकर पछताने लगा।

कहानी से सीख:
किसी समस्या को हल करने से पहले उसके परिणामों और दुष्परिणामों पर विचार अवश्य करना चाहिए। केवल वर्तमान लाभ को देखकर जल्दबाजी में किया गया निर्णय भविष्य में भारी हानि का कारण बन सकता है।नैतिक शिक्षा:
"बिना सोचे-विचारे किया गया उपाय, कभी-कभी विनाश का कारण बन जाता है।"जोहार झारखण्ड जय झारखण्ड जय तेलंगाना 🙏🙏

18/06/2024

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18/06/2024

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