Advocate Dharmender Sharma

Advocate Dharmender Sharma Adv. Dharmnder Sharma Distt. & Session Court Palwal , Fariabad. Deals in all kind of Criminal,Civil, MACT & ,HMA Cases.

*पेड़ों पर झूले**सावन की फुहार*मुबारक हो आपको *तीज का त्योहार* *हरियाली तीज* की हार्दिक शुभकामनाएं  🌹🙏  🙏 🙏।। सुप्रभात ।...
11/08/2021

*पेड़ों पर झूले*
*सावन की फुहार*
मुबारक हो आपको
*तीज का त्योहार*

*हरियाली तीज* की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🙏

🙏 🙏।। सुप्रभात ।।🙏🙏

Stay Safe, Stay Healthy

Best Regards:-

*Dharmender Sharma Adv*

आप सभी को गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।
30/11/2020

आप सभी को गुरु नानक देव जी के 551वें प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

आप सभी को धर्मेंद्र शर्मा एडवोकेट की ओर से स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!
15/08/2020

आप सभी को धर्मेंद्र शर्मा एडवोकेट की ओर से स्वतंत्रता दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!

युवा विकास संघ की ओर से आप सभी को नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाये  । यह वर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो। प्रेसक :-       ...
01/01/2020

युवा विकास संघ की ओर से आप सभी को नववर्ष 2020 की हार्दिक शुभकामनाये । यह वर्ष आप सभी के लिए मंगलमय हो।
प्रेसक :-
धर्मेन्द्र शर्मा एडवोकेट

01/09/2019

1 आबादी देह→ गॉंव का बसा हुआ क्षेत्र ।
2 मौजा→ ग्राम
3 हदबस्त →त्हसील में गॉंव का सिलसिलावार नम्बर ।
4 मौजा बेचिराग →बिना आबादी का गॉंव ।
5 मिसल हकीयत→ बन्दोबस्त के समय विस्तारपूर्वक तैयार की गई जमाबन्दी ।
6 जमाबन्दी→ भूमि की मलकियत व बोने के अधिकारों की पुस्तक ।
7 इन्तकाल →मलकियत की तबदीली का आदेश ।
8 खसरा गिरदावरी→ खातेवार मलकियत,बोने व लगान का रजिस्टर ।
9 लाल किताब →गॉंव की भूमि से सम्बन्धित पूर्ण जानकारी देने वाली पुस्तक ।
11 शजरा नसब→ भूमिदारों की वंशावली ।
12 पैमाईश →भूमि का नापना ।
13 गज →भूमि नापने का पैमाना ।
14 अडडा →जरीब की पडताल करने के लिए भूमि पर बनाया गया माप ।
15 जरीब →भूमि नापने की 10 कर्म लम्बी लोहे की जंजीर ।
16 गठठा →57.157 ईंच जरीब का दसवां भाग ।
17 क्रम →66 ईंच लम्बा जरीब का दसवां भाग ।
18 क््रास →लम्ब डालने के लिए लकडी का यन्त्र ।
19 झण्डी →लाईन की सीधाई के लिए 12 फुट का बांस ।
20 फरेरा→ दूर से झण्डी देखने के लिए बांस पर बंधा तिकोना रंग बिरंगा कपडा ।
21 सूए →पैमाईश के लिए एक फुट सरिया ।
22 पैमाना पीतल →म्सावी बनाने के लिए पीतल का बना हुआ ईंच ।
23 म्ुसावी→ मोटे कागज पर खेतों की सीमायें दर्शाने वाला नक्शा ।
24 शजरा→ खेतों की सीमायें दिखाने वाला नक्शा ।
25 शजरा किस्तवार→ टरैसिंग क्लाथ या टरैसिंग पेपर पर बना हुआ खेतों का नक्शा
26 शजरा पार्चा→ कपउे पर बना खेतों का नक्शा ।
27 अक्स शजरा →शजरे की नकल (प्रति)
28 फिल्ड बुक →खेतों के क्षेत्रफल की विवरण पुस्तिका ।
29 बीघा →40ग40 वर्ग करम त्र4 बीघे का खेत ।
30 मुरब्बा→ 25 किलों की समूह यानि 200 कनाल
31 मुस्ततील→ 25 एकड का समूह यानि 200 कनाल
32 इस्तखराज →नम्बर की चारों भुजाओं की लम्बाई व चौडाई क्षेत्रफल निकालना
33 रकबा→ खेत का क्षेत्रफल
34 किस्म जमीन →भूमि की किस्म
35 जमीन सफावार →खेतों का पृष्ठवार जोड
36 थ्मजान खातावार →जेतवार जोड
37 मिजान कुलदेह→ गॉंव के कुल क्षेत्रफल का जोड
38 जोड किस्मवार →गॉंव की भूमि का किस्मवार जोड
39 गोशा →खेत का हिस्सा
40 त्तीमा →खेत का बांटा गया भाग
41 व्तर →कर्ण
42 बिसवांसी →57.157 ईंच कर्म का वर्ग
43 बिसवा→ 20 बिसवांसी
44 बिघा →20 बिसवा
45 म्रला →9 सरसाही बारबर 30-1@4 वर्ग गज त्र1@20
46 क्नाल →20 मरले 605त्र वर्ग गज त्र1@8 एकड
47 एकड →एक किला (40 करमग 36 करम) 4 बीघे- 16 बिसवेत्र(4840 वर्ग गज)
49 शर्क →पूर्व
50 गर्व→ प्श्चिम
51 जनूब→ दक्षिण
52 शुमाल→ उत्तर
53 खेवट→ मलकियत का विवरण
54 खतौनी→ कशतकार का विवरण
55 पत्ती तरफ ठोला→ गॉंव में मालकों का समूह
56 गिरदावर(कानूनगो)→ पटवारी के कार्य का निरीक्षण करने वाला
57 दफतर कानूनगो →तहसील कार्यालय का कानूनगो
58 नायब दफतर कानूनगो→ सहायक दफतर कानूनगो
60 सदर कानूनगो→ जिला कार्यालय का कानूनगो ।
61 वासल वाकी नवीस→
राजस्व विभाग की वसूली का लेखा रखने वाला कर्मचारी
62 मालिक→ भूमि का भू-स्वामी
63 कास्तकार→ भूमि को जोतने वाला एवं कास्त करने वाला ।
64 मालक कब्जा →मालिक जिसका शामलात में हिस्सा न हो ।
65 मालक कामिल→ मालिक जिसका शामलात में हिस्सा हो
66 शामलात →सांझाी भूमि
67 शामलात देह→ गॉंव की शामलात भूमि
68 शामलात पाना →पाने की शामलात भूमि
69 शामलात पत्ती →पत्ती की शामलात भूमि
70 शामलात ठौला →ठोले की शामलात भूमि
71 मुजारा→ भूमि को जोतने वाला जो मालिक को लगान देता हो ।
72 मौरूसी →बेदखल न होने वाला व लगान देने वाला मुजारा
73 गैर मौरूसी →बेदखल होने योग्य कास्तकार
74 छोहलीदार →जिसको भूमि दान दी जावे ।
76 नहरी →नहर के पानी से सिंचित भूमि ।
77 चाही नहरी→ नहर व कुएं द्वारा सिंचित भूमि
78 चाही →क्ुएं द्वारा सिंचित भूमि
79 चाही मुस्तार →खरीदे हुए पानी द्वारा सिंचित भूमि ।
80 बरानी→ वर्षा पर निर्भर भूमि ।
81 आबी →नहर व कुएंे के अलावा अन्य साधनों से सिंचित भूमि ।
82 बंजर जदीद→ चार फसलों तक खाली भूमि ।
83 बंजर कदीम →आठ फसलों तक खाली पडी भूमि ।
84 गैर मुमकिन →कास्त के अयोग्य भूमि ।
85 नौतौड→ कास्त अयोग्य भूमि को कास्त योग्य बनाना ।
86 क्लर →शोरा या खार युक्त भूमि ।
87 चकौता →नकद लगान ।
88 सालाना →वार्षिक
90 बटाई →पैदावार का भाग ।
91 तिहाई →पैदावार का 1@3 भाग ।
92 निसफी→ पैदावार का 1@2 भाग ।
93 पंज दुवंजी→ पैदावार का 2@5 भाग ।
94 चहाराम →पैदावार का 1@4 भाग ।
95 तीन चहाराम→ पैदावार का 3@4 भाग ।
97 मुन्द्रजा→ पूर्वलिखित (उपरोक्त)
98 मजकूर→ चालू
99 राहिन →गिरवी देने वाला ।
100 मुर्तहिन →गिरवी लेने वाला ।
101 बाया →भूमि बेचने वाला ।
102 मुस्तरी →भूमि खरीदने वाला ।
103 वाहिब →उपहार देने वाला ।
104 मौहबईला →उपहार लेने वाला ।
105 देहिन्दा→ देने वाला ।
106 गेरिन्दा →लेने वाला ।
107 लगान→ मुजारे से मालिक को मिलने वाली राशी या जिंस
108 पैमाना हकीयत →शामलात भूमि में मालिक का अधिकारी ।
109 सरवर्क →आरम्भिक पृष्ठ ।
110 इण्डैक्स→ पृष्ठ वार सूची ।
115 नक्शा कमीबेशी →पिछली जमाबन्दी के मुकाबले में क्षेत्रफल की कमी या वृद्वि
118 वाजिबुलअर्ज→ ग््रामवासियों के ग्राम सम्बन्धी रस्में रीति रिवाज ।
119 थ्वरासत→ उत्तराधिकार ।
121 मुतवफी →मृत्क
122 हिब्बा →उपहार ।
123 बैयहकशुफा →भूमि खरीदने का न्यायालय द्वारा अधिकार ।
124 श्रहन बाकब्जा →कब्जे सहित गिरवी ।
125 आड रहन →बिला कब्जा गिरवी ।
127 रहन दर रहन →मुर्तहिन द्वारा कम राशि में गिरवी रखना ।
128 सैंकिण्ड रहन →राहिन द्वारा मुर्तहिन के ईलावा किसी अन्य के पास गिरवी रखना ।
129 फकुल रहन →गिरवी रखी भूमि को छुडा लेना ।
133 तबादला →भूमि के बदले भूमि लेना ।
134 बैय →जमीन बेच देना
138 पडत सरकार →राजस्व रिकार्ड रूम में रखी जाने वाली प्रति ।
139 पडत पटवार→ रिकार्ड की पटवारी के पास रखी जाने वाली प्रति ।
140 मुसन्ना→ असल रिकार्ड के स्थान पर बनाया जाने वाला रिकार्ड ।
141 फर्द →नकल
142 फर्द बदर →राजस्व रिकार्ड में हुई गलती को ठीक करना ।
143 मिन →भाग
144 गिरदावरी →खेतों का फसलवार निरीक्षण ।
145 जिंसवार →फसलवार जिंसों का जोड
147 फसल खरीफ →सावनी की फसल
148 खराबा→ प््रााकृिितक आपदा से खराब हुई फसल ।
149 फसल रबी→ आसाढी की फसल ।
150 पुख्ता औसत झाड→ पैदावार के अनुसार पक्की फसल
151 साबिक→ भूतपूर्व, पूर्व,पुराना ।
152 हाल →वर्तमान, मौजूदा ।
153 बदस्तूर →जैसे का तैसा(पूर्ववत)
154 तकावी →फसल ऋण ।
155 कुर्की →अटैचमैन्ट
156 दसतक →राईट आफ डिमाण्ड
157 नीलाम →खुली बोली द्वारा बेचना ।
158 बिला हिस्सा →जिसमें भाग न हो ।
159 मिन जानिब →की ओर से ।
160 बनाम→ के नाम ।
161 जलसाआम →जनसभा ।
162 बशनाखत →की पहचान पर ।
163 पिसर या वल्द →पुत्र
164 दुखतर→ सुपुत्री
165 वालिद→ पिता
166 वालदा →माता
167 बेवा →विधवा
168 वल्दीयत →पिता का नाम
169 हमशीरा→ बहन
172 हद→ सीमा
173 हदूद→ सीमायें
174 सेहहदा →तीन गॉंवों की एक स्थान पर मिलने वाली सीमाओं पर पत्थर
175 बखाना कास्त →कास्त के खाने में दर्ज ।
176 सकूनत→ निवास स्थान
177 महकूकी →काटकर दोबारा लिखना
178 मसकूकी →बिना काटे पहले लेख पर दोबारा लिखना
179 बुरजी→ सरवेरी सर्वेक्षण का पत्थर
180 चक तशखीश →बन्दोबस्त के दौरान भूमि की पैदावार के अनुसार तहसील की भूमि का निरधारण
181 दो फसली →वर्ष में दो फसलें उत्पन्न करने वाली भूमि
183 मेण्ड →खेत की सीमा
184 गोरा देह भूमि →गॉंव के साथ लगती भूमि
185 हकदार→ मालिक भूमि
186 इकरारनामा →आपसी फैसला
190 खुशहैसियत अ→च्छी हालत
191 महाल →ग्राम
192 कलां →बडा
193 खुर्द →छोटा
194 जदीद →नया
195 मालगुजारी →भूमिकर
196 तरमीम→ बदल देना
197 गोत→ वंश का गोत्र
198 जमां →भूमि कर
199 झलार →नदी नाले से पानी देने का साधन
201 कारगुजारी →प्रगति रिपोर्ट
202 खाका →प्रारूप

By Shiv Kumar Garg Advocate Palwal

24/07/2019

In a cheque bounce case, the Chhattisgarh High Court has observed that since the loan amount was within the capacity of the complainant who was getting regular salary, judgments on source of income would not apply.

16/01/2019

Supreme Court ruled that RTI fee no more than Rs 50. The SC bench said that public authorities cannot ask for more than Rs5 for each page for photocopying charge, & motive need not to be disclosed while filing out the form.



IN THE SUPREME COURT OF INDIA

CIVIL APPELLATE/ORIGINAL JURISDICTION

WRIT PETITION (CIVIL) NO.194 OF 2012



COMMON CAUSE PETITIONER(S)

VERSUS

HIGH COURT OF ALLAHABAD & ANR. RESPONDENT(S)

WITH

T.C.(C) No. 129 of 2013

W.P.(C) No. 238 of 2014

T.C.(C) No. 32 of 2014

W.P.(C) No. 40 of 2016

W.P.(C) No. 205 of 2016

SLP(C) No. 30659 of 2017



O R D E R

W.P.(C) No.194 of 2012, W.P.(C) No. 238 of 2014, W.P.(C)

No. 40 of 2016 & W.P.(C) No. 205 of 2016 :



Heard learned counsel for the parties. Challenge in these set of writ petitions is to the Rules framed under Section 28 of the Right to Information Act, 2005 (in short “the Act”).

First objection of the petitioners is that the charges for the application fee and per page charges for the information supplied should be reasonable.

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We are of the view that, as a normal Rule, the charge for the application should not be more than Rs.50/- and for per page information should not be more than Rs.5/-. However, exceptional situations may be dealt with differently. This will not debar revision in future, if situation so demands.

Second objection is against requiring of disclosure of motive for seeking the information. No motive needs to be disclosed in view of the scheme of the Act.

Third objection is to the requirement, in the Allahabad High Court Rules, for permission of the Chief Justice or the Judge concerned to the disclosure of information. We make it clear that the said requirement will be only in respect of information which is exempted under the scheme of the Act.


As regards the objection that under Section 6(3) of the Act, the public authority has to transfer the application to another public authority if information is not available, the said provision should also normally be complied with except where the public authority dealing with the application is not aware as to which other authority will be the appropriate authority.

As regards Rules 25 to 27 of the Allahabad High Court Rules which debar giving of information with regard to the matters pending adjudication, it is clarified that the same may be read consistent with Section 8 of the Act, more particularly sub-section (1) in Clause (J) thereof.

Wherever rules do not comply with the above observations, the same be revisited as our observations are based on mandate of the Act which must be complied with.

The writ petitions are disposed of in above terms.

SLP(C) No. 30659/2017 :

In view of order passed in W.P.(C) No.194 of 2012, the special leave petition is disposed of. The award of cost imposed by the High Court 1is set aside.

T.C.(C) No. 129/2013 & T.C.(C) No. 32/2014

In view of order passed in W.P.(C) No.194 of 2012, the transfer cases are disposed of.
.........................J.

[ADARSH KUMAR GOEL]
.........................J.

[UDAY UMESH LALIT]

NEW DELHI

20th March, 2018

28/12/2018

क्या कोई हिन्दू व्यक्ति जीवन साथी के जीवित रहते दूसरा विवाह कर सकता है ?
इसका जवाब है नहीं. हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(1) के अनुसार प्रथम विवाह के पक्षकार के जीवित रहते दूसरा विवाह मान्य नहीं होगा | यह विवाह कानून के प्रतिकूल तथा निष्प्रभावी माना जाएगा, सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा है. कि यदि कोई जीवन साथी के जीवित रहते दूसरा विवाह करता है. तो ऐसा विवाह हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 11, धारा 17, के अनुसार अकृत एवं शुन्य माना जायेगा एवं उस पर द्विविवाह , धोखाधड़ी और क्रूरता के लिए मुकदमा चलाया जा सकेगा, साथ ही वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा 494 (Section 494 of Indian penal code) व 495 (Section 495 of Indian penal code) के अंतर्गत दंडनीय होगा, जिसके लिए सजा एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा।
यमुनाबाई अनंतराव आवध बनाम अनंतराव शिवराम आवध के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऐसा विवाह हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 5 के शर्तो का उल्लघन है, जो कि प्रारंभ से ही शुन्य माना जाता है |
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5(1) (Section 5(i) of The Hindu Marriage Act, 1955) के मुताबिक हिंदू केवल एक शादी कर सकता है। यह कानून लागू होने से पूर्व कोई हिंदू एक से अधिक विवाह कर सकता था। लेकिन कानून लागू होने के उपरांत वैध विवाह के लिए हिन्दू विवाह अधिनियम की शर्तो को पूरा करना आवश्यक है |
अपवाद– निम्न परिस्थतियो में किया गया द्विविवाह अपराध नहीं होगा-
यदि किसी व्यक्ति के जीवन काल में पति या पत्नी में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है, तो वह न्यायालय की मंजूरी से दुसरा विवाह कर सकते है| सात वर्षो तक दोनों में से किसी एक की अनुपस्थिति, जिसके जीवित होने की कोई जानकारी नहीं सुनी हो, और क्षेत्राधिकार न्यायालय द्वारा प्रथम विवाह को शुन्य घोषित कर दिया गया हो, या तलाक की आज्ञाप्ति के आधार पर पहले विवाह को भंग कर दिया हो, और जिस पक्षकार से विवाह कर रहा है, उसे उपरोक्त तथ्य पता हो, उपरोक्त परिस्थितियों में दुसरा विवाह अपराध नहीं होगा |

27/12/2018
23/12/2018

9 RIGHTS OF AN ACCUSED IN CRIMINAL PROCEEDINGS
The three segments of Criminal Justice System viz., the police, the judiciary and the correctional institutions ought to function in harmonious and cohesive manner. But in practice, one often finds that it is not the case. The police, instead of protecting and promoting human rights, are often found to violate them. A person in custody of the police, an under-trial or a convicted individual does not lose his human and fundamental rights by virtue of incarceration. The Criminal laws in India also support aspects of arrest of an accused person and provides various rights to accused/arrested persons. There are some provisions which expressly and directly create important rights in favour of the accused/arrested person.

In all criminal prosecutions, the accused shall enjoy the right to a speedy and public trial, by an impartial jury of the State and district where in the crime shall have been committed. introspection.

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The following are the rights of an accused during trail:

1. Accused supposed to be innocent until the opposing is proved beyond reasonable doubt.

2. Nature and cause of the accusation to be informed to him.

3. Every stage of the proceeding from the prosecution to proclamation of the judgment accused to be present and defend in person by counsel.

4. . Silence of accused should not prejudice him in any manner.

5. Should not compel the accused to be a witness against himself.

6. Cross-examination and confrontment of witnesses against accused during the trail. Either party may utilize as part of its evidence the testimony of a witness who is deceased, out of or cannot with due diligence be found in, unavailable, or otherwise unable to testify, given in another case or proceeding, judicial or administrative, involving the same parties and subject matter, the adverse party having the opportunity to cross-examine him.

7. Should not impose any compulsory process issued to secure the attendance of witnesses and production of other evidence in his behalf.

8. Should have quick, impartial and public trial.

9. Accused can appeal in all cases in the manner prescribed by the law

04/10/2018

★ सितंबर में आए सुप्रीम कोर्ट के 10 ऐतिहासिक फैसले, इस तरह आपकी जिंदगी पर डालेंगे असर :–

1.सबरीमाला में हर उम्र की महिलाओं को एंट्री का अधिकार---

— सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला में स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में एक खास आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी शुक्रवार को हटा दी और मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी. न्यायालय ने कहा कि एक आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने वाली सदियों पुरानी यह हिन्दू परंपरा गैरकानूनी और असंवैधानिक है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश से रोकना लैंगिक आधार पर भेदभाव है और यह परिपाटी हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है।

2.विवाहेतर संबंध अपराध की श्रेणी से बाहर-----

— विवाहेतर संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इससे संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को ‘पुरातन’ और ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए निरस्त कर दिया. न्यायालय ने कहा कि यह महिलाओं को ‘संपत्ति’ के तौर पर मानता है और उन्हें उनकी ‘यौन स्वायत्तता’ से वंचित करता है. एक ऐतिहासिक फैसले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के साथ-साथ सीआरपीसी की धारा 198 के व्यभिचार से संबंधित हिस्से को निरस्त कर दिया. सीआपीसी की धारा 198 विवाह से जुड़े अपराधों में मुकदमा से संबंधित है. इस फैसले के साथ भारत चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है जिन्होंने व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखने वाले दंडात्मक प्रावधान को खत्म कर दिया है।

3.समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं----

— दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं रहे. धारा-377 के तहत दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया. इस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट ने गैरसंवैधानिक करार दिया है.सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि धारा 377 अतार्किक और मनमानी वाला धारा है।

4.दहेज उत्पीड़न में होगी तुरंत गिरफ्तारी-----

— दहेज प्रताड़ना मामले में पति और उनके परिजनों को तुरंत गिरफ्तारी से मिले सेफगार्ड को खत्म कर दिया गया है. पहले दहेज प्रताड़ना मामला दर्ज होने के बाद मामले को परिवार कल्याण कमिटी के पास भेजने और तब तक गिरफ्तारी पर रोक का प्रावधान किया था. बेंच ने परिवार कल्याण कमिटी बनाए जाने और तब तक गिरफ्तारी पर रोक के प्रावधान को निरस्त कर दिया।

5.अयोध्या मामला-----

— सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने 1994 के उस फैसले को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को सौंपने से इंकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. इसके साथ ही राजनैतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या भूमि मालिकाना हक से संबंधित मुख्य विवाद पर शीर्ष अदालत के 29 अक्तूबर से सुनवाई करने का रास्ता साफ हो गया है. कोर्ट ने कहा कि पहले की टिप्पणी अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान ‘भूमि अधिग्रहण’ के सीमित संदर्भ में की गई थी. शीर्ष अदालत ने 2-1 से बहुमत के फैसले में साफ कर दिया कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद पर फैसला करने के लिये यह प्रासंगिक नहीं है. इस मामले में फैसले का 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले काफी उत्सुकता से इंतजार रहेगा।

6.प्रमोशन में आरक्षण-----

— सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण के बारे में संविधान पीठ का नागराज मामले में 2006 का फैसला सात सदस्यों की संविधान पीठ को भेजने से इंकार कर दिया. नागराज प्रकरण में 2006 के फैसले अनुसूचित जातियों (एससी) एवं अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को नौकरियों में तरक्की में आरक्षण देने के लिए शर्तें तय की गई थीं. न्यायालय ने कहा कि 2006 के फैसले को सात सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है. इसके साथ ही संविधान पीठ ने केंद्र सरकार का यह अनुरोध भी ठुकरा दिया कि एससी/एसटी को आरक्षण दिए जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया. संविधान पीठ ने एकमत से कहा कि प्रमोशन में कोटा देने के लिए उनके पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं होगी।

7.आधार पर क्या है कोर्ट का फैसला-----

— सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन उसने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया. हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल फोन का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं. कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई, नीट, यूजीसी आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं और स्कूलों में दाखिले के लिए भी यह अनिवार्य नहीं है. पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह अवैध आव्रजकों को आधार नंबर नहीं दे।

8.दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक से इनकार-----

— सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने से रोक लगाने से इनकार कर दिया और कानून बनाने का काम संसद के पाले में डाल दिया।

9.जनप्रतिनिधियों के बतौर वकील प्रैक्टिस पर रोक से इनकार-----

— सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एमएलए और एमपी को देश भर की अदालतों में बतौर वकील प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए।

10.कोर्ट कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग-----

— चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग कराने का आदेश भी दिया।

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