Advocate in haridwar

Advocate in haridwar Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Advocate in haridwar, Haridwar.

22/03/2026

मैंने अपने वर्षों को गिना और पाया कि अब मेरे पास जीने के लिए कम समय बचा है, जितना मैं अब तक जी चुका हूँ।
मैं उस बच्चे की तरह महसूस करता हूँ जिसने मिठाइयों का एक पैकेट जीता था:
पहली मिठाई उसने आनंद से खाई, लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि कुछ ही बची हैं,
तो उसने उन्हें और भी गहराई से जीना शुरू कर दिया।

अब मेरे पास उन अंतहीन बैठकों के लिए समय नहीं है,
जहाँ नियमों, प्रक्रियाओं और आंतरिक व्यवस्थाओं पर चर्चा होती रहती है,
जानते हुए भी कि कुछ हासिल नहीं होगा।

अब मेरे पास उन बेवजह के लोगों को सहन करने का समय नहीं है,
जो अपनी उम्र के बावजूद अब तक परिपक्व नहीं हुए हैं।

मेरा समय बहुत कम है:
मुझे सिर्फ सार चाहिए,
मेरी आत्मा को जल्दी है।
अब मेरे पास मिठाइयाँ ज़्यादा नहीं बची हैं।

मैं ऐसे लोगों के साथ रहना चाहता हूँ
जो सच में इंसान हों,
जो अपनी गलतियों पर हँसना जानते हों,
जो अपनी सफलताओं से अहंकारी न बनें,
और जो अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हों।

यही सच्ची मानव गरिमा की रक्षा करता है
और हमें सच्चाई और ईमानदारी की ओर ले जाता है।
यही वो सार है जो जीवन को जीने लायक बनाता है।

मैं अपने आसपास उन लोगों को चाहता हूँ
जो दिलों को छूना जानते हों,
जो जीवन के कठोर थपेड़ों से सीखकर
कोमलता के स्पर्श से आगे बढ़े हों।

हाँ, मुझे जल्दी है—
जल्दी है उस तीव्रता से जीने की,
जो केवल परिपक्वता ही दे सकती है।

मैं अपने बची हुई मिठाइयों को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहता।
मुझे यकीन है कि वे अब तक खाई हुई मिठाइयों से भी ज्यादा स्वादिष्ट होंगी।

मेरा लक्ष्य है कि मैं अंत तक संतुष्ट रहूँ,
अपने प्रियजनों और अपनी अंतरात्मा के साथ शांति में रहूँ।

हमारी ज़िंदगी दो बार मिलती है—
और दूसरी तब शुरू होती है
जब हमें एहसास होता है कि हमारे पास केवल एक ही ज़िंदगी है।

~ मारियो राउल डी मोराइस अंद्रादे
(साभार)

18/03/2026
07/03/2026

आपके जीवन में दो सबसे महत्वपूर्ण दिन है वह दिन है जब आप पैदा हुए,
और वह दिन जब आपको पता चलता है कि ऐसा क्यों हुआ ।

05/07/2025

एक बूढ़े आदमी की ज़ुबान काँप रही थी
उसे नहीं पता था सेक्शन क्या होता है, IPC क्या होता है।
बस उसने कहा बेटा, सच कह रहा हूँ
उसके सच के लिए कोई गवाह नहीं था तब मैंने पहली बार महसूस किया था ,सबूतों के बिना सच का खड़ा होना मुश्किल है
कानून सबूत मांगता है… और कई बार सच्चाई के पास कुछ नहीं होता।🙏🏻

30/06/2024

हमेशा अच्छे लोगों के साथ ही बुरा क्यों होता है?
एक आम निष्कर्ष तो यही हैं कि अगर आप शेर को नहीं छेड़ते तो इसका मतलब यह नहीं कि शेर भी आपको नहीं खायेगा | तो फिर क्या यह संसार हमेशा से इसी तरह संचालित होता आया हैं ? शायद हाँ | इससे जुडी एक रोचक कहानी हैं -

एक बार किसी जंगल में एक लड़का नदी किनारे घूम रहा था, तभी उसने एक दुखी और हताश स्वर में किसी के रोने की आवाज़ सुनी | उसने देखा की एक मगरमच्छ जाल में उलझा हुआ है और मदद के लिए पुकार लगा रहा हैं | वह लड़का उसकी मदद करना चाहता था परन्तु उसे उस पर संदेह भी था |

मगरमच्छ: कृपया मेरी मदद करो, मुझे बचा लो, मुझे रिहा कर दो |

लड़का : अगर मैं आपकी मदद करता हूँ तो आप आज़ाद होते हुए ही मुझे खा लेंगे |

मगरमच्छ (रोते हुए): मैं उस व्यक्ति को कैसे खा सकता हूँ जिसने मेरी जान बचाई? इस विशाल वन में बहुत से जीव जंतु हैं जिन्हे मैं खा सकता हूँ | आप विश्वास रखे मैं आपको कोई हानि नहीं पहुँचाऊँगा और सदैव आपका ऋणी रहूंगा।

(लड़के को दया आ गई और उसने जाल काटना शुरू कर दिया। जैसे ही मगरमच्छ का सिर जाल से बाहर आया तो उसने लड़के के पैर को अपने जबड़े में जकड लिया | )

मगरमच्छ: मैं बहुत दिनों से भूखा हूँ, तुम एक अच्छे शिकार हो |

लड़का: यह क्या बकवास हैं, लानत हैं तुम पर | मेरी भलाई का अच्छा सिला दे रहे हो तुम !

मगरमच्छ: मैं क्या कर सकता हूँ? यही दुनिया का दस्तूर है!

लड़का (रोते हुए): यह तो पूर्णतः अनुचित हैं, यह अन्याय हैं |

मगरमच्छ: अनुचित से क्या मतलब है तुम्हारा ! किसी से भी पूछ लो, वे तुम्हे बताएंगे कि यह संसार कैसे संचालित होता है। अगर वे मुझे गलत साबित करते हैं, तो मैं तुम्हे जाने दूंगा।

लड़के ने पास के पेड़ पर एक पक्षी को देखा और उससे पूछा,“ क्या आपको लगता है कि मगरमच्छ की हरकतें उचित हैं? क्या यही दुनिया का तरीका है - अन्याय से भरा हुआ? ”

वह पक्षी पूरी घटना को देख रही थी, उसने तुरंत जवाब दिया कि मगरमच्छ सही हैं। उसने बताया की कैसे उसने बहुत मेहनत से एक घोंसला बनाया और अपने अंडे दिए, और फिर एक दिन एक सांप ने आकर सारे अंडे निगल लिए और उसकी मेहनत बेकार चली गयी| उसने कहा की निःसंदेह यह दुनिया एक उचित जगह नहीं हैं| इतना कह कर वह उड़ गयी|

मगरमच्छ: सुना तुमने (यह कह कर मगरमच्छ ने अपनी पकड़ और मजबूत कर दी)

लड़का: रुको |

(लड़के ने पास ही एक गधे को चरते देखा और उससे भी वही प्रश्न किया )

गधा: दुर्भाग्य से, मगरमच्छ सही है| जब मैं छोटा था, मेरे मालिक ने मेरी पीठ पर बोझ लाद दी और मुझसे अधिकतम काम लिया। मैंने उसे वर्षों तक ईमानदारी से सेवा दी। अब जब मैं बूढ़ा और कमजोर हो गया, तो उसने मुझे यह कहते हुए मुझे जंगल में छोड़ दिया कि वह मुझे खाना नहीं दे सकता। अब कभी भी कोई शेर मुझे अपना शिकार बना सकता हैं| तो, हाँ, मगरमच्छ सही है। इस संसार में बहुत अन्याय, असमानता और अनुचितता है। ”

मगरमच्छ: अब बहुत हो गया, मुझे भूख लगी हैं| तुम ईश्वर से अपनी अंतिम प्रार्थना कर लो|

लड़का: मुझे एक अंतिम अवसर दो| मुझे उस खरगोश से भी यह पूछने दो |

मगरमच्छ: तुमने मुझे बचाया है, मैं तुम्हे एक अंतिम मौका देता हूँ।

(सवाल पूछे जाने पर, खरगोश का जवाब पक्षी और गधे से पूरी तरह से अलग था)

खरगोश: यह पूरी तरह बकवास है! ऐसा बिलकुल नहीं है। दुनिया एक पूरी तरह से उचित जगह है।

मगरमच्छ: यह क्या बकवास हैं, मुर्ख खरगोश ! बेशक, यह दुनिया एक अनुचित जगह है। मुझे देखो ! मैं बिना किसी गलती केइस जाल में फंस गया था।

खरगोश: ऐसा लग रहा हैं जैसे कोई मुँह में पान रख कर बातें कर रहा हो | स्पष्ट और जोर से बोलो |

मगरमच्छ: मैं तुम्हारी चालाकी समझ रहा हूँ, मैं स्पष्ट रूप से बोलने के लिए अपना मुँह खोलूँगा और लड़का बच जाएगा।

खरगोश: तुम मूर्ख हो या क्या? क्या तुम भूल गए कि तुम्हारी पूंछ कितनी मजबूत है? यदि वह भागने की कोशिश करता है, तो वह मर जाएगा।तुम यहाँ के आसपास सबसे ताकतवर जानवर हो |

(मगरमच्छ इस झूठी प्रशंसा से खुश हो गया और तर्क जारी रखने के लिए अपना मुंह खोल दिया)

खरगोश (चिल्लाते हुए): भागो लड़के भागो, दूर भाग जाओ |

(और लड़का आज़ाद होते ही पूरी ताकत लगा कर भाग गया )

मगरमच्छ:धोखेबाज! तुमने मेरा खाना छीन लिया। यह बहुत अनुचित है!

खरगोश: उचित- अनुचित की बात तुम ना ही करो तो बेहतर होगा |

लड़का गाँव भाग गया और सभी पुरुषों को इकट्ठा कर लिया जो अपने भाले और तलवार लेकर आए और मगरमच्छ को मार डाला। उनका पालतू कुत्ता, जो उनके साथ आया था, खरगोश को देखा और उसका पीछा किया।

“अरे! अरे! ”लड़का चिल्लाया, और अपने कुत्ते को पकड़ने की कोशिश की। इस खरगोश ने मेरी जान बचाई हैं। उस पर हमला मत करो। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी, कुत्ते ने खरगोश की कोमल गर्दन में अपने नुकीले दांत दफन कर दिए थे। खरगोश अब फर की बेजान गेंद से ज्यादा कुछ नहीं था।

लड़का: शायद मगरमच्छ सही था | दुनिया अनहोनी और अनिश्तिता से भरी हुई हैं | यही जीवन हैं |

आप कितने आध्यात्मिक या अच्छे है, इसका इस बात से कोई संबंध नहीं हैं की आपको कितना कष्ट सहना होगा | किसी के आध्यात्मिक विकास का मतलब यह नहीं है कि वह प्रकृति के नियमों के दायरे से बाहर है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई लड़का है, मगरमच्छ हैं, गधा हैं या खरगोश, जीवन में कोई गारंटी नहीं है। और शायद, यह अनिश्चितता ही हमारे जीवन को साहसिक बनाती है।

अच्छा या महान होना आपको शारीरिक या मानसिक रोगों से बचा नहीं सकता है।

अच्छा होने का मतलब यह नहीं है कि आप सड़क दुर्घटना का शिकार नहीं हो सकते।

अच्छा होने से आपके शेयर की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ता है |

अच्छा होने मात्र से आप किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं हो सकते |

यदि आप किसी से बहुत प्यार करते हैं और वफादार हैं तो भी इसकी कोई गारंटी नहीं की आपका साथी आपको धोखा नहीं दे सकता |

फिर सवाल तो यही उठता हैं कि क्या हमें बुरा होना चाहिए ? जी बिलकुल नहीं | अच्छाई हमें चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करने की ताकत देती है | हमारी चुनौतियां हमें परखती हैं और उससे हमारा एक दृष्टिकोण निर्धारित होता हैं। बेशक हमारी अच्छाई हमें जीवन के कष्टों से नहीं बचा सकती परन्तु हमारा दृषिकोण हमे उस कष्ट की अवस्था में भी सम्बल प्रदान कर सकता हैं | एक उचित दृष्टिकोण के होने से आप कष्ट की अवस्था में भी दुःख का अनुभव नहीं करेंगे, आपको परेशान करने की कोशिश अवश्य की जा सकती हैं परन्तु कोई आपको कुचल नहीं पायेगा |

अच्छाई प्रार्थना हैं, ध्यान हैं, एक तप हैं | अच्छाई ही साक्षात् ईश्वर हैं, अतः हर परिस्थिति में अच्छा बने रहना ही उचित हैं |

आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा--"सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।" आइंस्ट...
15/08/2023

आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा--"सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।"

आइंस्टीन हैरान !!!

उन्होंने कहा- "ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं जानते।आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।

ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच पर चढ़ गया।और भाषण देने लगा...

उपस्थित विद्वानों ने जोर-शोर से तालियां बजाईं।

उस समय एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा - "सर, क्या आप उस सापेक्षता की परिभाषा को फिर से समझा सकते हैं ?"

असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!!

इस बार वाहन चालक पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वे हैरान रह गए...

ड्राइवर ने जवाब दिया- "क्या यह आसान बात आपके दिमाग में नहीं आई ?

मेरे ड्राइवर से पूछिए,---वह आपको समझाएगा।

नोट : "यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी..!!

जब इलाहाबाद, दिल्ली ,मुखर्जीनगर  कोटा या किसी अन्य शहर मे तैयारी के लिए कोई छात्र घर से पहली बार निकलता है तब उसके माता-...
05/08/2023

जब इलाहाबाद, दिल्ली ,मुखर्जीनगर कोटा या किसी अन्य शहर मे तैयारी के लिए कोई छात्र घर से पहली बार निकलता है तब उसके माता-पिता यही कहते है कि बेटा मेरे पास पैसा कम है मन से पढ़ना ।

इलाहाबाद में 10×10 का कमरा भी आज 3000 प्रति माह के हिसाब से मिलता है पढ़ने वाले इलाहाबाद में अपनी किताब ख़रीदने के लिए ऑटो से नही बल्कि पैदल चलते है ताकि 20 रुपया किराए का बच गया तो दो टाइम सब्जी खरीद लूंगा।
शांतिपुर, फाफामऊ,तेलियरगंज, सलोरी , गोबिंदपुर , राजापुर , बघाड़ा जैसे किसी स्थान पर रहते रहते सर का आधा बाल झड़ जाता है , चेहरे की रौनक धंस जाती है माथे पर तनाव की लकीरें साफ दिखाई देने लगती है। दो टाइम के बजाय एक टाइम खाना बनता है ताकि इससे पैसा बचेगा तो कोई फार्म भर सकूँगा ।

क्योकि घर से पैसा बहुत लिमिट में मिलता है कभी कभी बाहर की मिठाई खाने का मन हुआ तो चीनी खा कर अनुभव करना पड़ता है कि हमने रसमलाई खा लिया है।

बहुत ही सँघर्ष और तप जैसी जिंदगी इलाहाबाद जैसे शहर में जीने के बाद जब कोई भर्ती आती है तब 1000 पद के लिए लाखों आवेदन आता है। पढ़ने वाले के घर से फोन आता है कि बेटा इस भर्ती में बढ़िया से पढ़ना घर वालो की उम्मीदों के बोझ ने फिर से टेंशन दे दिया फिर भी लाखों लोगों को पीछे धकेल के परीक्षा में पास हुआ घर परिवार समाज और स्वयं को लगता है कि अब इसकी नौकरी मिल गयी है कोई टेंशन की बात नही है बस ज्वैनिग तो रह गयी है दोस्तो और रिस्तेदार को पार्टी भी दे दिया फिर दो साल तक इंतजार कर रहे है कि अब ज्वैनिग होगी लेक़िन उसी बीच नया आदेश आता है कि भर्ती की परीक्षा रद्द हुआ।

क्या महसूस हुआ होगा उस पास छात्र के ऊपर...
दस साल से पढ़ाई कर रहे है कोई भर्ती आती नही है एक भर्ती आ गयी पास भी हुआ अब उसको रद्द करना क्या न्यायोचित है.?

आटा गर्मी में गूथते समय पसीना इस कदर गिरता है जैसे लगता है कि शरीर से चिल्का झील का पानी निकल रहा है।
सर का बाल तख्त पर , टेबल पर , कुर्सी पर ऐसे गिरते है जैसे किसी नाई का दुकान है।
रोटियां बनाते बनाते जिंदगी रोटी जैसी हो जाती है। , पढ़ाई करने वाले छात्र घर पर ही रोटी- सब्जी - चावल- दाल सब एक साथ खाने को पाता है रूम पर तो कभी एक साथ नही बनता है। बनेगा भी कैसे क्योकि घर से इतना पैसा नही मिलता है।

जब गैस भराना होता है। तो दोस्तो से या बगल वाले भैया से उधार लेना पड़ता है ।। जिस दिन रूम का किराया देना पड़ता है उस दिन लगता है।। कि मानो आज किसी को कलेजे का टुकड़ा देना पड़ रहा हो।।

(जीवन के अनुभव और दर्द समेटे हुई पोस्ट )

10/11/2022

जंगल में शेर शेरनी शिकार के लिये दूर तक गये अपने बच्चों को अकेला छोडकर।

जब देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे.

उसी समय एक बकरी आई उसे दया आई और उन बच्चों को दूध पिलाया फिर बच्चे मस्ती करने लगे.

तभी शेर शेरनी आये. बकरी को देख लाल पीले होकर शेर हमला करता,

उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।

अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे, जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।

अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेडो के पत्ते खाती थी।

यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी को पूछा तब उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।

चील ने यह सोचकर कि एक प्रयोग मैं भी करती हूँ,
चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार ।

चील ने उनको पकड पकड कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.

बच्चे भीगे थे सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली.

काफी समय बाद चील उडकर जाने लगी तो हैरान हो उठी चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।

चील ने यह घटना बकरी को सुनाई तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग क्यों? ?

बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा....
उपकार करो,
तो शेरों पर करो
चूहों पर नही।
क्योंकि कायर कभी उपकार को याद नही रखते और बहादुर कभी उपकार नही भूलते ।(बहुत ही गहरी बात है समझो तो ठीक )
😃😀😀😀😀

Address

Haridwar

Telephone

+919917078406

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Advocate in haridwar posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share