Advocate Lalit Gupta

Advocate Lalit Gupta Advocate

15/08/2022

मौत की आयी थी मौत
इसलिए मौत मेरे पास आकर
चली गई द्वंद करके
आसक्तियाॅं पहनकर मेरी
रथी जीवन सारथी अव्यक्ता
फिर जीता जीवनरथी
अलख समक्ष रणभागी मौत
"मैं"फिर लौट आया अपने निरंजन में
✍️ ललित

23/04/2022

उम्मीद नहीं बाकी,फिर इंतज़ार कौन करे,
नहीं रहे हमसायां मुश्किलों मैं कोई, अब सबके लिए खुद को, बेआराम कोन करे!
नहीं गले लगाया,हमको कभी कीसीने ,
अब जहाँ के लिए मुलाज़मत कौन करे
सबब् चाप अपने पीड़ाओं समेत ,
तब बेमतलब अश्क़या तिजारत कौन करे !!

12/03/2022

जिनका छूटना तय है,वे क्रमशःअलग हो,
जिनका मिलना असंभव है,उनकी स्मृतिया विदा ले,
जहाँ लौट कर नहीं जाना, वहाँ के रास्ते भूल जाये,
जिनके समीप की भी प्रत्याशा, नहीं वे दूर हो,
यही निरापद मोक्ष है

27/02/2022

नंदी शाश्वत प्रतीक्षा के प्रतीक है, सनातन संस्कृति में प्रतीक्षा को सबसे बड़ा गुण माना गया है , नंदी जो प्रतीक्षारत बैठना और प्रतीक्षा करना जानते है, यहि स्वाभाविक ध्यान है। नंदी जानते नहीं है कि शिव कब दर्शन देगें। वह आशा या अपेक्षा नहीं कर रहे है। वह बस प्रतीक्षा कर रहे है। वह हमेशा प्रतीक्षारत करेगा। वह गुण ग्रहणशीलता के सार है।
मंदिर जाने के पहले बैठने की नंदी गुणवत्ता होनी चाहिए। प्राप्त करने का प्रयत्न कर सकते हैं,इन प्रयत्नों के बीच केवल प्रतीक्षारत, ... ......
# लेखन......ललित गुप्ता,

21/11/2021

विवाह समारोह को पारिवारिक होना चाहिए . ज्यादातर वैवाहिक समारोह में दुल्हा- दुल्हन ने एक दूसरे की शक्ल तक नही देखी होती है! अक्सर विवाह समारोहों मे जाना-आना होता है पर यह ख्याल कभी नहीं आता और ना ही कभी सोचने की कोशिश करते हैं की विवाह युगल कैसा है !लगभग हर विवाह समारोह में ज्यादातर उन्हें बुलाया जाता है जिसे आपके विवाह में कोई रुचि नही होती है , जो केवल विवाह युगल का नाम भी बुलावा पत्र के माध्यम से जानते हैं! केवल आपकी पद- प्रतिष्ठा जानती है .. और स्वादिष्ट और विविधता पूर्ण व्यञ्जनों का स्वाद लेने आये होते है! पारिवारिक जन, बहुत नजदीकी रिश्तेदारों , कुछ बहुत नजदीकी मित्रों के अलावा किसी विवाह मे किसी को रुचि नही होती ! सब ताम - झाम , पंडाल, झालर , सैकड़ों पकवान , आर्केस्ट्रा , दहेज का मंहगा सामान सामाजिक बीमारी की तरह है जो समाज को गलत प्रेरणा देता है लोग इसे देखते हैं और ऐसा अपने जीवन में करने की प्रेरणा पाते हैं चाहे उनकी वजह से किसी को खुद को नीलाम करना पड़े !
फालतू का दिखावा करने में अपने जीवन भर की कमाई लुटा देते हैं उधार लेते हैं ओर फिर पूरा जीवन चुकाने में लगाते हैं और विवाह मे आमंत्रित सीधे भोजन करके , लिफाफा पकड़ा कर निकल लेते है विवाह समारोहों के लाखों का ताम झाम उनकी आँखों में बस थोड़ी देर के लिए दिखाई पड़ता है किंतु इस अपव्यय और दिखावे कि किश्तें जीवन भर चुकाते पड़ती है समाज को इस प्रवृति पर जरूर विचार कर रोकना चाहिए!
✒:-ललित गुप्ता, अधिवक्ता,

19/09/2021

//हरिगोविंद://
बेटियाँ को विदा होना ही पड़ता हैं,
पर स्मृतियां महसूस होती है,
पुस्ताखा में रखी किताबों की जिल्दों ओर झलारों पर लिखे रंगीन हर्फ़ों की कलमकारी से सपनों को बनते-बनाते ओर बुनते हुए बनी रंगीन फूलकारीयों में!
घर की एक ही दीवार पर करीने से ट़गे किरमिची-फलक पर उकेरी रंगकारी के एक गोशे पर खामोशी से लिखे लक़ब के नर्म एहसासों से!
निशानियां रह जाती है,बेटियाँ विदा हो जाती हैं!
रिवायाती असबाब खरीद सजाती है रसोई को,ओर सजाती है, बैठक को उनकी इंतिख़ाबी सलीके से ... पर फिर भी बेटियाँ विदा हो जाती हैं!
सूने हुये कमरों से बोसा भी अभी सुवासित है!
पूजा के आले के गोशे छापी-अंगुलीयों के टोटम ग़ैरमामूली एहसास कराते हैं!
दीवारों पर छापी खुरची और खोदी निशानियाँ भी अभी तक ताजा है....पर फिर भी घरोदौं को पनीली आँखों में भर,दहलीज़ लांघ जाती है....
बेटियाँ विदा हो जाती हैं!
मुस्कुराती तस्वीरें भी हैं कुछ अजीब सी तस्वीरें के साथ चित्रपंजी में, ओर है कुछ धूल लगी वैजयंतीयां;तमगे के साथ, गुड़ियाऔ को पहनाई हुई पुरानी साड़ी निशानीयां भी है , लुढ़के हुये खिलौने भीआले में बाकी, है जो रोशनार से वाबस्ता !
पर फिर भी बेटियाँ को विदा किया जाता हैं!
बेटियाँ ,चावल उछाल ,बिना पलटे विदा हो जाती हैं!
बेटियाँ विदा हो जाती हैं.
✍Lalit Gupta, advocate gwalior
(my poetry)

28/04/2020

अति पिछड़ा वर्ग के हितों पर विमर्श:-
आरक्षण लाभ नहीं, सामाजिक जिम्‍मेदारी है!आजादी के बाद अति पिछड़ों हेतू राजनीति में सामाजिक न्याय पहली बार मुद्दा तब बना जब जननायक कर्पूरी ठाकुर द्वारा मंडल कमीशन के गठन से भी आठ साल पहले जून 1971 में श्री मुंगेरीलाल की अध्‍यक्षता में एक आयोग का गठन किया था इस आयोग का मुख्‍य काम पिछड़ी जातियों की पहचान, उनकी सामाजिक व शैक्षणिक स्थिति का अध्‍ययन और आरक्षण के स्‍वरूप के संबंध में सिफारिश करना था। इस आयोग ने फरवरी, 1976 में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। आयोग ने पिछड़ा वर्ग में 128 जातियों को सम्मिलित किया था। इनमें से 94 जातियों को अति पिछड़ी जाति की श्रेणी में रखा था।
उस समय अति पिछड़ी जातियों की आबादी करीब 38 फीसदी बताई गई थी। 1977 में जब कर्पूरी ठाकुर दूसरी बार बिहार के मुख्‍यमंत्री बने तब उन्‍होंने अक्‍टूबर, 1978 में मुंगेरीलाल आयोग की सिफारिशों को लागू करने की घोषणा की और उसी साल 10 नवंबर को आरक्षण लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई। तकनीकी भाषा में पिछड़ी जातियाें के लिए एनेक्‍चर-2 और अति पिछड़ी जातियों के लिए एनेक्‍चर-1 शब्‍द का इस्‍तेमाल किया गया।कर्पूरी ठाकुर द्वारा इस पहल का तब बिहार में खूब विरोध हूआ था।
आरक्षण का लाभ उठा रहे लोगों को आरक्षण को लाभ नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्‍मेदारी के बतोर भी समझना होगा। संवैधानिक प्रावधानों के साथ नियम-कानून की जानकारी भी जरूरी है।आरक्षण का जो लाभ मिला है, तो उसमें एक बड़ी भूमिका उन जातियों की भी है जो आरक्षण के वस्तविक लाभ से वंचित रहे इसलिए उन जातियों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी तथा सरोकार को भी समझना होगा। अपने लोगों के साथ भावनात्‍मक संबंध बनाकर नहीं रखेंगे तो हमारी लड़ाई कमजोर हो जाएगी।बड़ी चुनौती बौद्धिक बेईमानी से उत्पन्न वंचना है।हमारे नेता संविधान एवं संवैधानिक अधिकारों को नहीं समझते हैं। जनता उन्‍हें समाज की सेवा के लिए चुनती है और वो खुद अपनी सेवा में जुट जाते हैं।
शीर्ष पर बैठ बैठकर ये जातिवार जनगणना के विरोधी रहे हैं, क्‍योंकि उन्‍हें डर है कि आंकड़े उजागर हुए तो उनके आधिपत्‍य को चुनौती मिलेगी। अति पिछड़ों के मुद्दों को चुनावी घोषणा-पत्र में शामिल करबाने हेतु काम करने व अति पिछड़ों के मुद्दों को शामिल करने की समाचीन अवश्यकता का है अति पिछड़ी जातियों को सशक्‍त बनाने और उनमें अधिकार बोध पैदा करने के लिए लगातार प्रयत्‍नशील होने व मुंगेरीलाल आयोग की सिफारिशाें को लागू करवाने के लिए जागरण उसी का हिस्‍सा था जिससे कि अति पिछड़ी जातियों के लोग अपने अधिकार को लेकर चेतनशील हो अपने मुद्दों पर विमर्श करे!
इस दिशा में पहला प्रावधान कर्पूरी ठाकुर ने किया था लेकिन उनके इस निर्णय ने अति पिछड़ों के लिए आरक्षण के प्रश्न को राजनीतिक प्रश्न बना दिया ! जननायक कर्पूरी ठाकुर अपनी सादगी ओर अति पिछड़ों के लिए आरक्षण के लिए की गई वौधिक पहल हेतु याद किये जाते है।
टिप्पणियों का स्वाग

15/09/2019

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