18/05/2022
places-of-worship-act-1991
उपासना स्थल अधिनियम , 1991 प्रावधान और महत्त्व चर्चा में क्यों ? हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय अयोध्या विवाद मामले ( Ayodhya verdict ) में उपासना स्थल ( विशेष प्रावधान ) अधिनियम , 1991 ( Places of Worship ( Special Provisions ) Act , 1991 } का उल्लेख किया , जो स्वतंत्रता के समय मौजूद धार्मिक उपासना स्थलों को बदलने ( Conversion of Religious Places ) पर रोक लगाता है यह अधिनियम बाबरी मस्जिद ( वर्ष 1992 ) के विध्वस से एक वर्ष पहले सितंबर 1991 में पारित किया गया था ।
उद्देश्य : • इस अधिनियम की धारा 3 ( Section 3 ) के तहत किसी पूजा के स्थान या उसके एक खंड को अलग धार्मिक संप्रदाय की पूजा के स्थल में बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है । • यह अधिनियम राज्य पर एक सकारात्मक दायित्य ( Positive Obligation ) भी प्रदान करता है कि वह स्वतंत्रता के समय मौजूद प्रत्येक पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र को बनाए रखे । • सभी धर्मों में समानता बनाए रखने और संरक्षित करने के लिये विधायी दायित्व राज्य की एक आवश्यक धर्मनिरपेक्ष विशेषता ( Secular Feature ) है यह भारतीय संविधान की मूल विशेषताओं में से एक है छूट ( Exemption ) • अयोध्या में विवादित स्थल को अधिनियम से छूट दी गई थी इसलिये इस कानून के लागू होने के बाद भी अयोध्या मामले पर मुकदमा लड़ा जा सका ।
• यह अधिनियम किसी भी पूजा स्थल पर लागू नहीं होता है जो एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक या प्राचीन स्मारक हो अथवा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम , 1958 ( Archaeological Sites and Remains Act , 1958 ) द्वारा कवर एक पुरातात्विक स्थल है दंड अधिनियम की धारा 6 में अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर जुर्माने के साथ अधिकतम तीन वर्ष की कैद का प्रावधान है।