Legal Solutions

Legal Solutions REGISTERED TRADEMARK ATTORNEY
& Legal Consultant
CONTACT TO REGISTER YOUR BUSINESS, START-UP, SHOP.

An initiative to discuss various social issues related to development of society ,nation and humanity. An initiative to think out of the box without any hesitation for the welfare of humanity. We are not assuring to make the change suddenly but it doesn't mean that we will not point out the wrong .

30/11/2022

Be wise:
don't litigate let's mitigate

16/05/2022

Why litigate
let's MEDIATE

We
LEGAL SOLUTIONS

Are here to provide free professional family mediation services.

30/03/2022

Contact us for free online family mediation.

REGISTER YOUR TRADEMARK & make your BUSINESS, START-UP, SHOP or Brand Name legally yours.WE LEGAL SOLUTIONS A highly ded...
25/08/2021

REGISTER YOUR TRADEMARK & make your BUSINESS, START-UP, SHOP or Brand Name legally yours.

WE LEGAL SOLUTIONS
A highly dedicated team of professional legal service provider are now available online and at your doorstep too,
Call, visit or Invite us .
https://trademarksolutions.business.site/

कश्मीर से कन्याकुमारीभारत माता एक हमारी : डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जीरावी नदी के उपर बना हुआ पुल पंजाब और जम्मू कश्मीर ...
07/07/2021

कश्मीर से कन्याकुमारी
भारत माता एक हमारी : डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी

रावी नदी के उपर बना हुआ पुल पंजाब और जम्मू कश्मीर राज्य को जोड़ता है। हजारों सवारी गाड़ियाँ , हजारों लोग रोजाना गुजरते हैं उस पुल के उपर से होकर... बिना किसी परमिट के , बिना किसी अनुमति पत्र के।

परंतु बात उन दिनों की है जब जम्मू कश्मीर राज्य में प्रवेश करने के लिए परमिट लेना अनिवार्य था।
ऐसे में माँ भारती का एक सपूत डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने परमिट व्यवस्था को समाप्त कराने का प्रण लिया था।

उन्होंने नेहरू जी से एक सवाल किया था -- "जब आप कहते हो कि जम्मू कश्मीर का भारत में 100% विलय हो चुका है तो फिर ये परमिट क्यों ? "

नेहरू निरूत्तर हो गये थे.......

इसके पहले मुखर्जी ने एक सभा में सिंह गर्जना करते हुए कहा था -- " जम्मू काश्मीर में एक निशान , एक विधान और एक प्रधान होना चाहिए , और इसे लागू करवाने के लिए यदि मेरे प्राण भी चले जाए तो मैं सहर्ष तैयार हूँ। "

मई 1953 में परमिट व्यवस्था के खिलाफ राज्य में बिना परमिट लिए प्रवेश करने का उन्होंने निर्णय किया।

8 मई को वे दिल्ली से एक पैसेंजर ट्रेन से माधोपुर (पंजाब) के लिए निकले , रास्ते में ट्रेन जहाँ भी रूकती हजारों की संख्या में लोग उस योद्धा के दर्शन के लिए आते ।
.. माधोपुर में बीस हजार लोग उनके स्वागत के लिए खड़े थे । उन्हें संबोधित करने के बाद वे कुछ साथियों के साथ आगे बढ़े।

जैसे ही रावी के पुल के आधे हिस्से को पार किया पुलिस ने उनसे कहा -- " मि. मुखर्जी , यू आर अंडर अरेस्ट ,,, आप काश्मीर में बिना परमिट के नहीं जा सकते हैं।"
मुखर्जी साहब ने मुस्कराते हुए अटल जी की तरफ देखा और कहा - " गो एंड टेल द पिपल आॅफ इंडिया आई हैव एंटर्ड जम्मू एंड काश्मीर"

अटल जी की आँखें नम थी।

मुखर्जी साहब ने हाथ में लिए तिरंगे को जेब में डाला और दूसरा हाथ अटल जी के कंधे पर रखते हुए कहा - " मेरे साथ यह तिरंगा भी बिना परमिट के काश्मीर जा रहा है ... जाओ यह खुशखबरी लोगों को दे देना।"
मुखर्जी साहब को गिरफ्तार करके काश्मीर ले जाया गया , एक छोटे से कमरे में कैद करके रखा गया ...जहाँ बुनियादी सुविधाओं का नितांत अभाव था।
चालीस दिनों के बाद जून 1953 में देश के इस महान सपूत ने संदेहास्पद परिस्थितियों में अपने नश्वर शरीर का त्याग कर दिया।

मुखर्जी साहब का यूँ चले जाना किसी को समझ में नहीं आया था... सारा राष्ट्र शोक संतप्त हो गया था।
उस समय अखबारों में एक आलेख छपा था जिसका शीर्षक था -- " वह सफेद पुड़िया क्या थी " ??

डॉ मुखर्जी की बेटी सबिता मुखर्जी अपने पति के साथ उस स्थान पर गई जहाँ एक जेलनुमा कमरे में मुखर्जी साहब को रखा गया था।

वहाँ सबिता की मुलाकात एक पंजाबी हिन्दू नर्स से हुई जो उस समय ड्यूटी पर थी।

उसने बताया था कि एक डॉक्टर ने उससे कहा था कि यदि इनका दर्द , इंजेक्शन से ठीक ना हो तो यह पुड़िया दे देना।
इतना कहते ही वो नर्स रोने लगी और आगे कहा कि -- " मैंने दी ..और फिर मुखर्जी साहब हमेशा के लिए सो गये "।
डॉ मुखर्जी ने देश की खातिर अपना बलिदान दे दिया था ...परमिट व्यवस्था खत्म हो चुकी थी ...तिरंगा काश्मीर पहुँच चुका था।

आज 6 जुलाई है , डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्मदिन है।

जनसंघ के संस्थापक डॉ मुखर्जी 1901 में पैदा हुए थे.... और 1953 में उन्होंने अपना बलिदान दिया था।

माँ भारती के इस सपूत के जन्मदिन के अवसर पर मैं उन्हें बारम्बार नमन करता हूँ।

© संजय दुबे जी की पोस्ट Rashmi Mandpe जी की वाल से साभार


   हिन्दुओं के विवाह रात्रि में क्यों होने लगे।क्या कभी आपने सोचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं,...
20/06/2021



हिन्दुओं के विवाह रात्रि में क्यों होने लगे।

क्या कभी आपने सोचा है कि हिन्दुओं में रात्रि को विवाह क्यों होने लगे हैं, जबकि हिन्दुओं में रात में शुभकार्य करना अच्छा नहीं माना जाता है क्योंकि ये निशाचरी समय होता है।

रात को देर तक जागना और सुबह को देर तक सोने को, राक्षसी प्रवृति बताया जाता है। रात में जागने वाले को निशाचर कहते हैं।

केवल तंत्र सिद्धि करने वालों को ही रात्रि में हवन व यज्ञ की अनुमति है।

वैसे भी प्राचीन समय से ही सनातन धर्मी हिन्दू दिन के प्रकाश में ही शुभ कार्य करने के समर्थक रहे हैं। तब हिन्दुओं में रात की विवाह की परम्परा कैसे पड़ी?

कभी हम अपने पूर्वजों के सामने यह सवाल क्यों नहीं उठाते हैं या स्वयं इस प्रश्न का हल क्यों नहीं खोजते हैं?

वास्तविकता यह है कि भारत में सभी उत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं संस्कार दिन में ही किये जाते थे चूंकि ये सनातनी परम्परा है। सीता और द्रौपदी का स्वयंवर भी दिन में ही हुआ था। शिव विवाह से लेकर संयोगिता स्वयंवर (बाद में पृथ्वीराज चौहान द्वारा संयोगिता की इच्छा से उनका अपहरण) आदि सभी विवाह कार्यक्रम दिन में ही हुए थे।

प्राचीन काल से लेकर मुगलों के आने तक भारत में विवाह दिन में ही हुआ करते थे। मुस्लिम आक्रमणकारियों के भारत पर हमले करने के बाद ही, हिन्दुओं को अपनी कई प्राचीन परम्पराएं तोड़ने को विवश होना पड़ा था।

मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा भारत पर अतिक्रमण करने के बाद भारतीयों पर बहुत अत्याचार किये गये। यह आक्रमणकारी हिन्दुओं के विवाह के समय वहां पहुंचकर लूटपाट मचाते थे। अकबर के शासन काल में, जब अत्याचार चरमसीमा पर थे, मुगल सैनिक हिन्दू लड़कियों को बलपूर्वक उठा लेते थे और उन्हें अपने आकाओं को सौंप देते थे।

भारत के ज्ञात इतिहास में सबसे पहली बार रात्रि में विवाह सुन्दरी और मुंदरी नाम की दो ब्राह्मण बहनों का हुआ था, जिनका विवाह दुल्ला भट्टी ने अपने संरक्षण में ब्राह्मण युवकों से कराया था।
उस समय दुल्ला भट्टी ने अत्याचार के खिलाफ हथियार उठाये थे। दुल्ला भट्टी ने ऐसी अनेकों लड़कियों को मुगलों से छुड़ाकर, उनका हिन्दू लड़कों से विवाह कराया।

उसके बाद मुस्लिम आक्रमणकारियों के आतंक से बचने के लिए हिन्दू रात के अँधेरे में विवाह करने पर मजबूर होने लगे। लेकिन रात्रि में विवाह करते समय भी यह ध्यान रखा जाता है कि नाचना गाना, दावत, जयमाला, आदि भले ही रात्रि में हो जाए लेकिन वैदिक मन्त्रों के साथ फेरे प्रातः पौ फटने के बाद ही हों।

पंजाब से प्रारम्भ हुई परंपरा को पंजाब में ही समाप्त किया गया।
फिल्लौर से लेकर काबुल तक महाराजा रणजीत सिंह का राज हो जाने के बाद उनके सेनापति हरीसिंह नलवा ने सनातन वैदिक परम्परा के अनुसार दिन में खुले आम विवाह करने और उनको सुरक्षा देने की घोषणा की थी।
हरीसिंह नलवा के संरक्षण में हिन्दुओं ने दिनदहाड़े - बैंडबाजे के साथ विवाह शुरू किये।
तब से पंजाब में फिर से दिन में विवाह का प्रचालन शुरू हुआ। पंजाब में अधिकांश विवाह आज भी दिन में ही होते हैं।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र, कर्नाटक, केरल, असम, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा एवम् अन्य राज्य भी धीरे धीरे अपनी जड़ों की ओर लौटने लगे हैं। अब इन प्रदेशों में दिन में विवाह होते हैं।
हरीसिंह नलवा ने मुसलमान बने हिन्दुओं की घर वापसी कराई, मुसलमानों पर जजिया कर लगाया, हिन्दू धर्म की परम्पराओं को फिर से स्थापित किया, इसीलिए उनको “पुष्यमित्र शुंग” का अवतार कहा जाता है।

सभी विवाह सर्वश्रेष्ठ ब्रह्ममुहूर्त में ही संपादित किये जाते हैं। ध्रुवतारा को स्थिरता के प्रतीक रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो ब्रह्ममुहूर्त में ही सबसे अच्छा दृष्टिगोचर होता है।

लेकिन साक्षी सूर्य के प्रतीक स्वरूप अग्नि को ही माना जाता है। इसीलिए अग्नि के ही चारों ओर फेरे लिए जाने की विधि है।

आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी अपनी पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश में रात्रि विवाह का पूर्ण खण्डन किया है। पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के अनुसार भी हिन्दू गायत्री परिवार में विवाह दिन में ही सम्पन्न किये जाते हैं।

आज भी, हम भारतीय विशेषकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं बिहार के लोग आज भी इसे एक परंपरा मानकर चला रहे हैं। वास्तव में हम गुलामी की मानसिकता से उबरना ही नहीं चाहते हैं।

अतः आप सुह्रद मित्रो से विनम्र निवेदन है कि इस प्रथा पर आप एक बार अवश्य विचार करें एवं अपनी पुरानी धुरी पर अवश्य वापस लौटें।

श्री राम जय राम जय जय राम,प्रभु श्री राम से विनम्र प्रार्थना है किदीपोत्सव सम्पूर्ण जगत के लिए कल्याणकारी हो।   #दीपावली
11/11/2020

श्री राम जय राम जय जय राम,
प्रभु श्री राम से विनम्र प्रार्थना है कि
दीपोत्सव सम्पूर्ण जगत के लिए कल्याणकारी हो।


#दीपावली

17/09/2020

प्रधानमंत्री के नाते नहीं,
भारत वर्ष के जन नेता के नाते पूरे देश और विदेशों में भी बसे भारतियों की ओर से आपको जनम दिन की अनंत शुभकामनाएं।
आप शतायु हों।

Respectful birthday felicitations to a leader who has, for the first time, made 1.38 billion Indians, not mere citizens or voters, but the real stakeholders of the destiny of our country - from Jan Dhan to Mudra to Start Up to Swatch to Atma Nirbhar Bharat 🙏
Ram Madhav ji

 #श्रीकृष्णजन्माष्टमी की शुभकामनाएं
11/08/2020

#श्रीकृष्णजन्माष्टमी की शुभकामनाएं

Address

Gorakhpur
273001

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Legal Solutions posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share