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23/03/2026
पति की आय के एक चौथाई से अधिक गुजारा भत्ता नहीं, इलाहाबाद HC ने खारिज की याचिका ⚖️📢इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्याय...
17/03/2026

पति की आय के एक चौथाई से अधिक गुजारा भत्ता नहीं, इलाहाबाद HC ने खारिज की याचिका ⚖️📢

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय मुजफ्फरनगर के प्रधान न्यायाधीश द्वारा 14 फरवरी, 2025 को पारित गुजारा भत्ता तय करने के आदेश के खिलाफ दायर वह आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी है जिसमें गुजारा भत्ता संशोधित करने की मांग थी।

न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की एकलपीठ ने नीता त्यागी की याचिका खारिज करते हुए कहा है कि ट्रायल कोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप की कोई ठोस वजह नहीं है। याची के अधिवक्ता का तर्क था कि पहले परिवार न्यायालय ने तीन हजार रुपये प्रति माह का अंतरिम गुजारा भत्ता निर्धारित किया था। वर्तमान में निर्धारित प्रतिमाह दो हजार रुपये गुजारा भत्ता अत्यंत कम है।

कोर्ट ने रिकार्ड में पाया कि परिवार न्यायालय ने प्रतिवादी (पति अमित कुमार त्यागी) के 19 अक्टूबर, 2017 को सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने तथा पिता की मेडिकल दुकान पर काम करने का तथ्य भी ध्यान में रखा है। इसके अनुसार उसे पांच हजार रुपये प्रतिमाह मिलता है। पत्नी के इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य नहीं मिला कि पति के पास 40 बीघा कृषि भूमि है और इससे वह पर्याप्त आय अर्जित करता है।

कोर्ट ने कहा, पुनरीक्षणकर्ता की आय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रजनेश बनाम नेहा और कुलभूषण कुमार (डा) के मामलों में जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए परिवार अदालत द्वारा निर्धारित गुजारा भत्ते की राशि पहले से ही उचित है। प्रतिवादी की कुल मासिक आय जो पांच हजार रुपये है का 25 प्रतिशत 1250 रुपये प्रति माह होता है। इस प्रकार दो हजार रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता उचित व यथार्थवादी है।

The Supreme Court today asked the Union Government and the Reserve Bank of India why details of the bank accounts of dec...
17/03/2026

The Supreme Court today asked the Union Government and the Reserve Bank of India why details of the bank accounts of deceased persons could not be disclosed to heirs for them to access unclaimed funds.

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🚫 नशा मुक्त भारत 🇮🇳“हाँ ज़िंदगी को, ना नशे को”नशा सिर्फ शरीर को नहीं,परिवार, समाज और भविष्य को भी बर्बाद करता है।👉 आज ही...
17/03/2026

🚫 नशा मुक्त भारत 🇮🇳

“हाँ ज़िंदगी को, ना नशे को”
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टोल फ्री हेल्पलाइन: 1933

⚖️ ध्यान रखें:

नशीले पदार्थों का सेवन और तस्करी
दोनों ही गैरकानूनी और दंडनीय अपराध हैं।

🛑 अगर कहीं भी नशे से जुड़ी गतिविधि दिखे,
तो तुरंत सूचना दें — आपकी पहचान सुरक्षित रहेगी।

📢 जारी जनहित में
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
गृह मंत्रालय, भारत सरकार

सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला ⚖️इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण...
17/03/2026

सिर्फ रिश्तेदारी के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं: इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला ⚖️

इलाहाबाद हाइकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल इस आधार पर जब्त नहीं की जा सकती कि वह किसी गैंगस्टर का रिश्तेदार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संपत्ति जब्ती के लिए अपराध और संपत्ति के बीच सीधा संबंध (नेक्सस) साबित होना जरूरी है। जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने मंसूर अंसारी की अपील स्वीकार करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश रद्द कर दिया। मंसूर अंसारी, कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के चचेरे भाई हैं।

मामले में जिला मजिस्ट्रेट द्वारा मंसूर अंसारी की दुकानों और भवन को 'बेनेमी संपत्ति' बताते हुए जब्त किया गया, जिसे गाजीपुर के विशेष न्यायालय (गैंगस्टर एक्ट) ने भी सही ठहराया। हाइकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1986 के तहत संपत्ति जब्त करने की शक्ति असीमित नहीं है। इसके लिए यह साबित करना आवश्यक है कि संबंधित व्यक्ति ने गैंग के सदस्य या संचालक के रूप में किसी अपराध से अर्जित धन से संपत्ति बनाई।

अदालत ने कहा, “सिर्फ आरोप या संदेह के आधार पर संपत्ति जब्त नहीं की जा सकती। अपराध और संपत्ति के बीच स्पष्ट संबंध होना अनिवार्य है।” कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्वास करने का कारण (Reason to Believe) केवल शक या अंदाजे पर आधारित नहीं हो सकता बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए। इस मामले में अदालत ने पाया कि राज्य ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि संपत्ति अपराध से अर्जित धन से बनाई गई।

अदालत ने यह भी कहा कि कानून के तहत यह जरूरी नहीं है कि संपत्ति वापस पाने के लिए व्यक्ति खुद अपनी आय का स्रोत साबित करे। पहले राज्य को यह सिद्ध करना होगा कि संपत्ति अपराध से जुड़ी है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मंसूर अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। हाइकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल मुख्तार अंसारी का रिश्तेदार होने के आधार पर संपत्ति जब्त करना पूरी तरह गलत है। अदालत ने जिला मजिस्ट्रेट और स्पेशल कोर्ट के आदेशों को मनमाना और बिना आधार बताते हुए रद्द कर दिया और राज्य सरकार को तत्काल संपत्ति मुक्त करने का निर्देश दिया।

⚖️  भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi शामिल थे, ने कानूनी शिक्षा की अवधि को लेकर दाखिल...
17/03/2026

⚖️ भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi शामिल थे, ने कानूनी शिक्षा की अवधि को लेकर दाखिल जनहित याचिका (PIL) पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं।

यह याचिका अधिवक्ता Ashwini Kumar Upadhyay द्वारा दायर की गई है, जिसमें 5-साल के इंटीग्रेटेड कानून पाठ्यक्रम को 4-साल करने तथा कानूनी शिक्षा के ढांचे की समीक्षा के लिए एक Legal Education Commission / Expert Committee गठित करने की मांग की गई है।

🔎 कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां:

👉 न्यायपालिका कानूनी शिक्षा जैसे नीतिगत मामलों में अपने विचार “थोप” नहीं सकती।
👉 इस विषय पर शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों, बार, नीति-विश्लेषकों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श आवश्यक है।
👉 अगर विश्वविद्यालय स्वयं कोर्स की अवधि कम करना चाहते हैं, तो वे संबंधित नियामक संस्थाओं के साथ मिलकर निर्णय ले सकते हैं — इसके लिए हर बार न्यायिक आदेश जरूरी नहीं।

📚 याचिकाकर्ता की दलील:

🔹अधिकांश पेशेवर कोर्स 4-साल के हैं, जबकि कानून की पढ़ाई 5-साल की है।
🔹लंबी अवधि के कारण प्रतिभाशाली छात्र और मध्यम वर्गीय परिवार आर्थिक व समय संबंधी दबाव महसूस करते हैं।
🔹National Education Policy 2020 के अनुरूप कानूनी पाठ्यक्रम की अवधि व सिलेबस की समीक्षा जरूरी बताई गई।

🏛️ कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

पीठ ने मामले को अप्रैल 2026 में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

📄 केस डिटेल्स:
ASHWINI KUMAR UPADHYAY v. UNION OF INDIA & ORS.
Writ Petition (Civil) No. 453/2025

⚠️ इससे पहले भी इसी याचिकाकर्ता द्वारा 3-साल के एलएलबी की मांग वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है, यह कहते हुए कि विधि पेशे में परिपक्वता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

💬 आप क्या सोचते हैं —
क्या 5-साल का कानून कोर्स सही है या इसे 4-साल किया जाना चाहिए?

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17/03/2026

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17/03/2026

गलतियां इंसान से होती हैं, लेकिन गलती करके भाग जाना आपको अपराधी बनाता है। सड़क पर मानवता दिखाएं, कानून आपकी मदद करेगा।
सुप्रभात! 🤝🛣️



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⚠️ Disclaimer: यह जानकारी केवल जागरूकता के लिए है। इसे कानूनी सलाह न मानें। हर केस के तथ्य अलग होते हैं, इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले विशेषज्ञ वकील से सलाह लें।

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17/03/2026

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