10/04/2021
*BREAKING NEWS ABOUT 4 LABOUR CODES* BY SK GUPTA , Advocate , Supreme Court, [email protected]
Please ask PPT on all 4 Codes : [email protected]
*जुलाई से बदल जाएगी आपकी सैलरी, नया श्रम कानून लागू होने के बाद होंगे ये बदलाव*
श्रम कानून को जुलाई महीने से लागू कर दिया जाएगा. इसके तहत चारों कोड्स को फाइनल करने के लिए राज्यों को दो महीने की डेडलाइन दी गई है.
चारों कानूनों के लिए एक ही साथ नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.
नौकरीपेशा लोगों के लिए एक जरूरी खबर है. जुलाई से आपकी सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव होने वाला है. केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने सभी राज्यों को अगले दो महीने में लेबर कोड्स से जुड़े नियमों को फाइनल करने के लिए डेडलाइन तय की है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नये श्रम कानूनों को लागू करने के लिए जुलाई महीने की डेडलाइन तय की गई है. मतबल जुलाई महीने से नये श्रम कानून लागू कर दिए जाएंगे. केंद्र सरकार की ओर से एक साथ ही सभी चारों लेबर कोड्स का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.
इंडस्ट्री वाले राज्यों को जून तक की डेडलाइन
अगर जुलाई से नये लेबर कानून लागू हो जाते हैं तो नौकरीपेशा लोगों की सैलरी स्ट्रक्चर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे. इसके लिए केंद्र ने राज्यों को अब दो महीने का समय दिया है. जिन राज्यों में इंडस्ट्रीज हैं, उनके लिए यह डेडलान जून महीने तक के लिए ही होगी.
क्या होंगे बदलाव?
नये लेबर कोड्स के तहत किसी भी कर्मचारी की सैलरी में अलाउंस 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता है. नया कानून लागू होने के बाद बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी होगी और मिनिमम वेज नियम लागू होगा. सभी कर्मचारियों के लिए बीमा का रास्ता भी खुल जाएगा. ये चारों श्रम कानून लेबर कोड, सोशल सिक्योरिटी, इंडस्ट्रियल रिलेशन और OSH से जुड़े कानून हैं. संसद के दोनों सदनों में इसे पारित किया जा चुका है. सभी चारों कानूनों को एक ही साथ लागू किया जाएगा.
वेज कोड किसी भी संस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए भी लागू होगा. इसके तहत कर्मचारियों की सैलरी और बोनस से जुड़े प्रावधानों में बदलाव होंगे. इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि हर इंडस्ट्री, बिज़नेस, ट्रेड आदि में एक ही स्तर के काम करने वाले कर्मचारियों को एक समान सैलरी मिलेग.
सोशल सिक्योरिटी के तहत सोशल सिक्योरिटी और मैटर्निटी लाभ से जुड़े सभी 9 कानूनों को एक में शामिल किया गया है.
इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड के तहत इंडिस्ट्रियल डिस्प्युट एक्ट, 1947, ट्रेड यूनियन एक्ट, 1926 और इंडस्ट्रियल एम्प्लॉयमेंट एक्ट, 1946 को एक कानून में शामिल किया गया है. इस कोड के लागू होने के बाद देश में कारोबारी माहौल को बेहतर करने में मदद मिलेगी. इंडस्ट्रीज पर श्रम अनुपालन का बोझ कम हो सकेगा.
ओएसएच कोड के तहत वर्कर्स के स्वास्थ्य और सुरक्षा को रगुलेट किया जाएगा. किसी भी संस्थार में 10 या इससे ज्यादा कर्मचारियों की संख्या है तो वहां इस कोड का पालन करना अनिवार्य होगा.
राज्यों के पास भी हैं श्रम कानून को लेकर अधिकार
श्रम मंत्रालय ने पहले ही इन सभी कोड्स के ड्राफ्ट नियमों को तैयार कर लिया था. इसके बाद आम लोगों से सुझाव मांगे गए थे. चूंकि, भारतीय संविधान में लेबर से जुड़े कानूनों को कनकरेंट लिस्ट में शामिल किया गया है, ऐसे में राज्यों के पास अधिकार है कि वे हिसाब से इस कानून को तैयार कर सकें.