legal awareness by Anju Tomar

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14/03/2026
Kya aapke Cheque bounce case mai bhi 82/83 ho gya hai ??? To jane ab kya kare....Cheque Bounce Case (Section 138 NI Act)...
07/03/2026

Kya aapke Cheque bounce case mai bhi 82/83 ho gya hai ??? To jane ab kya kare....Cheque Bounce Case (Section 138 NI Act) में अगर 82/83 हो जाए तो क्या करें?

बहुत लोग डर जाते हैं जब कोर्ट से 82/83 CrPC जारी हो जाता है।
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।

अगर Section 138 NI Act के केस में 82/83 हो गया है, तो सबसे पहले आरोपी को उसी कोर्ट में surrender करना होता है जहाँ से order जारी हुआ है।

उसके बाद वकील के माध्यम से:
1️⃣ Surrender application
2️⃣ 82/83 cancel कराने की application
3️⃣ Bail application

लगाई जाती है।

याद रखें – Section 138 NI Act एक bailable offence है, इसलिए अधिकतर मामलों में कोर्ट से बेल मिल जाती है, अगर आरोपी आगे कोर्ट में उपस्थित रहने का भरोसा देता है।

📌 इसलिए 82/83 आने पर छुपने की बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना ही सही रास्ता है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि फैमिली कोर्ट में व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है. कोर्ट ने अडल्ट...
28/02/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि फैमिली कोर्ट में व्हाट्सएप चैट को सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है. कोर्ट ने अडल्ट्री के एक मामले में निचली अदालत का आदेश रद्द कर केस दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया. जस्टिस मदन पाल सिंह ने कहा कि 'फैमिली कोर्ट अधिनियम की धारा 14 के तहत ऐसा कोई भी सबूत लिया जा सकता है जो विवाद सुलझाने में मदद करे, भले ही वो भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत न हो. कोर्ट ने दोनों पक्षों को सबूत पेश करने की अनुमति देने को कहा ।

Code of Criminal Procedure की धारा 125 के अनुसार:अगर पति अपनी पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा रहा है,तो पत्नी कोर्ट में...
28/02/2026

Code of Criminal Procedure की धारा 125 के अनुसार:
अगर पति अपनी पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं उठा रहा है,
तो पत्नी कोर्ट में Maintenance (भरण-पोषण) के लिए आवेदन कर सकती है।
#किनको Maintenance मिल सकता है?
# पत्नी (भले साथ न रह रही हो, लेकिन वैध कारण हो)
# नाबालिग बच्चे
# विकलांग/निर्भर बच्चे
# माता-पिता

23/02/2026

Namaskar,
आज हम बात करेंगे IPC की धारा 209 के बारे में।
Indian Penal Code की धारा 209 के अनुसार,
अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठा दावा कोर्ट में करता है,
तो यह एक अपराध है।
अगर आपको पता है कि आपका दावा गलत है,
फिर भी आप किसी को परेशान करने या गलत तरीके से पैसा लेने के लिए केस करते हैं,
तो आपको 2 साल तक की सजा, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
ध्यान रखिए —
सिर्फ केस हार जाना अपराध नहीं है,
लेकिन जानबूझकर झूठा केस करना अपराध है।
ऐसी ही कानूनी जानकारी के लिए मेरे पेज को फॉलो करें

Agar police aapko bina warrant k ghar se utha le jaati hai (kuch serious cases chhodkar), to aap apne adhikar ke baare m...
20/02/2026

Agar police aapko bina warrant k ghar se utha le jaati hai (kuch serious cases chhodkar), to aap apne adhikar ke baare me pooch sakte hain.
👉 Aapko arrest ka reason batana police ki zimmedari hai.

18/02/2026

Namste, Main ek advocate hoon aur is page ka maksad hai aap sabko simple language me kanooni jaankari dena.

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