Wise Legal Insight LLP

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31/07/2022

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Wise Legal Insight LLP is a Limited Liability Partnership Law Firm based in Delhi / NCR with its registered office in Ghaziabad. The law firm is headed by its Director , Mr. Sunil Jain , Advocate who has a Master's Degree in Law from Chaudhary Charan Singh University , Meerut . The Law Firm has

23/05/2022

रात में आपका टिकट चेक नही कर सकते अधिकारी, रेल यात्रियों से जुड़ा ये नियम जानिए आप भी

हम सभी अक्सर ट्रेन का सफर करते हैं, ऐसे में जरूरी है कि हमें रेल नियमों की पूरी जानकारी हो. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) लगातार अपनी सेवाओं को अपडेट कर रहा है.

इसी के साथ ही रेलवे के कई नियम भी हैं, जिनसे हमारा सफर सुखद, सुरक्षित और आरामदायक बनता है. इन नियमों के पालन से यात्रा आसान होती है. यहां हम आपको भारतीय रेलवे के ऐसे ही एक नियम के बारे में बता रहे हैं.

अक्सर रेल यात्रियों को शिकायत रहती थी कि उनके सो जाने के बाद टीटी टिकट चेक करने आते हैं और उन्हें नींद के बीच में जागना पड़ता है. यात्रियों की इस समस्या को दूर करने के लिए और सफर को आरामदायक और सुविधाजनक बनाने के लिए रेलवे ने नियम बनाया है कि रात के 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक यात्रियों के सोते वक्त टीटी टिकट चेक नहीं कर सकता. लेकिन ध्यान रखें कि रेलवे का यह नियम उन यात्रियों पर लागू नहीं होता, जिनकी यात्रा रात के 10 बजे के बाद शुरू होती है.

मिडिल बर्थ के लिए रेलवे का नियम

रात 10 बजे से 6 के बीच मिडिल बर्थ वाला यात्री सीट पर आराम से सो सकता है. इस बीच आपका सहयात्री आपके सोने पर आपत्ति नहीं जता सकता है. यानी अगर कोई यात्री रात 10 से पहले मिडिल बर्थ वाली सीट को खोलना चाहता है तो अन्य यात्री उसे ऐसा करने से रोक सकते हैं, लेकिन रात 10 से सुबह 6 के बीच मिडिल बर्थ वाला यात्री बिना रोक टोक अपनी सीट पर सो सकता है.

10 बजे के बाद ईयर फोन इस्तेमाल करना होगा

यात्रा के दौरान अक्सर लोग मोबाइल फोन पर गाने सुनते हैं या वीडियो देखते रहते हैं, जिसकी वजह से अन्य यात्रियों को काफी परेशानी होती है. ऐसे में यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने नियम बनाया है कि रात के 10 बजे के बाद यात्री बिना ईयर फोन के मोबाइल पर गाने और वीडियो नहीं सुन सकते हैं.

भारतीय रेल इंजन की है इतनी कीमत

भारतीय रेल के इंजन को बनाने में 20 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है. चूंकि, भारतीय रेल के इंजन देश में ही बनाए जाते हैं, इसलिए इसकी कीमत इतनी कम है. भारतीय रेल में मुख्य रूप से दो प्रकार के इंजन इलेक्ट्रिक और डीजल का प्रयोग किया जाता है. आइये जानते हैं इनके बारे में.

आपक बता दें कि भारत में वर्तमान में कुल 52 फीसदी ट्रेनें डीजल से संचालित की जाती हैं. जिसे इलेक्ट्रिक ट्रेक पर रखने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और जिससे अक्सर रेल के संचालन में देरी हो जाती थी.

रेलवे द्वारा इस डुअल मोड वाले इंजनों के निर्माण से लोकोमोटिव को बदलने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती. क्योंकि इलेक्ट्रिक ट्रेक पर उसी डीजल इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है. आपको बता दें कि एक डुअल मोड वाले लोकोमोटिव की लागत अठारह करोड़ रुपये के आसपास आती है, जबकि एक 4500 एचपी डीजल लोकोमोटिव की लागत लगभग 13 करोड़ रुपये आती है. जहां तक इसके वजन और रफ्तार की बात है, डुअल मोड लोकोमोटिव डीजल लोकोमोटिव के मुकाबले भारी है और ये 135 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति से चलता है ।

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Sunil Jain

27/04/2022

UAPA: गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम

सबसे पहले आपको बता दें कि UAPA का फुल फॉर्म Unlawful Activities (Prevention) Act होता है. इसका मतलब है- गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम. इस कानून का मुख्य काम आतंकी गतिविधियों को रोकना होता है. इस कानून के तहत पुलिस ऐसे आतंकियों, अपराधियों या अन्य लोगों को चिह्नित करती है, जो आतंकी ग​तिविधियों में शामिल होते हैं, इसके लिए लोगों को तैयार करते हैं या फिर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं.

इस मामले में एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को काफी शक्तियां होती है. यहां तक कि एनआईए महानिदेशक चाहें तो किसी मामले की जांच के दौरान वह संबंधित शख्स की संपत्ति की कुर्की-जब्ती भी करवा सकते हैं.

1967 में आया कानून, 2019 में संशोधन के बाद और मजबूत हुआ

यूएपीए कानून 1967 में लाया गया था. इस कानून को संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत दी गई बुनियादी आजादी पर तर्कसंगत सीमाएं लगाने के लिए लाया गया था. पिछले कुछ सालों में आतंकी गतिविधियों से संबंधी POTA और TADA जैसे कानून खत्म कर दिए गए, लेकिन UAPA कानून अब भी मौजूद है और पहले से ज्यादा मजबूत है.

अगस्त 2019 में ही इसका संशोधन बिल संसद में पास हुआ था, जिसके बाद इस कानून को ताकत मिल गई कि किसी व्यक्ति को भी जांच के आधार पर आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. पहले यह शक्ति केवल किसी संगठन को लेकर थी. यानी इस एक्ट के तहत किसी संगठन ​को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाता था. सदन में विपक्ष को आपत्ति पर गृहमंत्री अमित शाह का कहना था कि आतंकवाद को जड़ से मिटाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए यह संशोधन जरूरी है.

इस कानून के तहत किसी व्यक्ति पर शक होने मात्र से ही उसे आतंकवादी घोषित किया जा सकता है. इसके लिए उस व्यक्ति का किसी आतंकी संगठन से संबंध दिखाना भी जरूरी नहीं होगा. आतंकवादी का टैग हटवाने के​ लिए उसे कोर्ट की बजाय सरकार की बनाई गई रिव्यू कमेटी के पास जाना होगा. हालांकि बाद में कोर्ट में अपील की जा सकती है.

बड़ा है इस कानून का दायरा

UAPA कानून के प्रावधानों का दायरा बहुत बड़ा है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल अपराधियों के अलावा एक्टिविस्ट्स और आंदोलनकारियों पर भी हो सकता है. UAPA के सेक्शन 2(o) के तहत भारत की क्षेत्रीय अखंडता पर सवाल करने को भी गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल किया गया है. हालांकि एक्टिविस्ट आपत्ति जताते रहे हैं कि महज सवाल करना गैरकानूनी कैसे हो गया? इस कानून के तहत 'भारत के खिलाफ असंतोष' फैलाना भी कानूनन अपराध है. हालांकि असंतोष को पूरी तरह परिभाषित नहीं किया गया है.

कानून की कई धाराओं में कठोर प्रावधान

UAPA में धारा 18, 19, 20, 38 और 39 के तहत केस दर्ज होता है. धारा 38 तब लगती है जब आरोपी के आतंकी संगठन से जुड़े होने की बात पता चलती है. धारा 39 आतंकी संगठनों को मदद पहुंचाने पर लगाई जाती है.

इस एक्ट के सेक्शन 43D (2) में किसी शख्स की पुलिस कस्टडी की अवधि दोगुना करने का प्रावधान है. इस कानून के तहत पुलिस को 30 दिन की कस्टडी मिल सकती है. वहीं न्यायिक हिरासत 90 दिन की भी हो सकती है. बता दें कि अन्य कानूनों में अधिकतम अवधि 60 दिन ही होती है.

अग्रिम जमानत मिलना संभव नहीं

जानकार बताते हैं कि अगर किसी शख्स पर UAPA के तहत केस दर्ज हुआ है, तो उसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती. यहां तक कि अगर पुलिस ने उसे छोड़ दिया हो तब भी उसे अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती. दरअसल, कानून के सेक्शन 43D (5) के मुताबिक, कोर्ट शख्स को जमानत नहीं दे सकता, अगर उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया केस बनता है.

गैरकानूनी संगठनों, आतंकवादी गैंग और संगठनों की सदस्यता को लेकर इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है. सरकार द्वारा घोषित आतंकी संगठन का सदस्य पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा मिल सकती है. लेकिन कानून में ‘सदस्यता’ की कोई स्पष्ट परिभाषा नहीं है. कई एक्टिविस्टों पर इस कानून के तहत केस दर्ज हो चुके हैं.

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Sunil Jain

16/04/2022

Section 439 CRPC

Section 376D IPC

Bail

Petitioner is behind bars for more than six months Oral allegations levelled in the FIR of one of the victims, a woman, having been dragged on the street, have not been substantiated by any medical evidence, much less gang r**e of the woman Similarly placed co-accused non-applicant has been allowed bail - Parties are at loggerheads over the matrimonial dispute Culpability, if any, shall be determined at the trial which is not likely to conclude in the near future Petitioner is ordered to be released on regular bail.

[Para 4]

Naveen vs State of Haryana

CRM-M 12740/19 26/03/19

[ FATEH JJ ]

[ PUNJAB & HARYANA HIGH COURT ]

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Sunil Jain

16/04/2022

Hindu Marriage Act Section 13(1)(i)

Divorce petition

Allegation of wife having ‘voluntary sexual in*******se with respondent no.2 beyond marriage Sexual in*******se beyond the marriage is broadly called adultery, but the said provision does not require the proof of living in adultery or in adulterous life It is the sexual in*******se, even a single sexual in*******se would be adequate to invoke that provision for dissolving a marriage Divorce should have been granted on the solitary ground as resorted to by the appellant Decree of divorce would be maintained however appeal filed for limited purpose allowed.

[Paras 15 and 16]

Budhi vs Usha

FA 9/17 09/12/20

[ S.G. CHATTOPADHYAY JJ ]

[ TRIPURA HIGH COURT ]

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Sunil Jain

जी - हुजूरी से निजातऐसे और पोस्ट देखने के लिए और The Legal Insight से जुड़ने के लिए क्लिक करें 👇👇
15/04/2022

जी - हुजूरी से निजात

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Sunil Jain

14/04/2022

वाहन के हस्तांतरण के साथ ही इन्षुरेन्स का भी होता है हस्तांतरण, बीमा क्लेम के लिए कंपनी बाध्य : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पिछले दिनों एक अहम फैसला (Decision) सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर आपने किराए पर गाड़ी (Car on Rent) ली है तो उसका बीमा (Insurance) भी ट्रांसफर माना जाएगा. अगर किराये पर लेने के बाद गाड़ी हादसे का शिकार हो जाता है तो इंश्योरेंस कंपनी को मुआवजा (Compensation) देना होगा. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के सामने सवाल था कि अगर वाहन इंश्योर्ड है और उस एग्रिमेंट के तहत कॉरपोरेशन वाहन को तय रूट पर चला रहा है और अगर इस दौरान कोई हादसा हो जाता है तो मुआवजा देने के लिए बीमा कंपनी जिम्मेदार होगी या कॉरपोरेशन या फिर वाहन मालिक? सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एग्रिमेंट के तहत कॉरपोरेशन वाहन मालिक की तरह है क्योंकि उस वाहन की कमांड उसके पास है. ड्राइवर या कंडक्टर उसके मातहत काम कर रहे हैं. ऐसे में वाहन के साथ बीमा पॉलिसी भी ट्रांसफर मानी जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनी को लेकर सुनाया अहम फैसला
बता दें कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के सामने यूपी स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन के साथ एक मालिक का एग्रिमेंट से जुड़ा मामला आया था. एग्रिमेंट के मुताबिक वाहन मालिक ने यूपी ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन को बस किराये पर दी थी. किराये की अवधि के दौरान बस मालिक ने इंश्योरेंस करा रखा था. बस 25 अगस्त 1998 के एक हादसे का शिकार हो गई. इस हादसे में एक शख्स की जान चली गई. परिजनों ने मोटर एक्सिडेंट क्लेम ट्रब्यूनल में अर्जी दे कर मुआवजा मांगा. ट्रिब्यूनल ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह परिजनों को 1.82 लाख मुआवजे के साथ 6 प्रतिशत ब्याज भी दे.

क्या था मामला

लेकिन, बीमा कंपनी इस फैसले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि थर्ड पार्टी मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी को नहीं है, क्योंकि बस किराये पर यूपी ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन चला रहा था. इसके बाद कॉरपोरेशन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी.

सुप्रीम कोर्ट ने लंबी सुनवाई को बाद बुधवार को इस केस में फैसला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि अगर गाड़ी मालिक से कोई कंपनी या संस्था किराये पर लेती है तो वाहन के साथ उसके थर्ड पार्टी इंश्योरेंस भी ट्रांसफर माना जाएगा. एग्रिमेंट के अवधि के दौरान अगर गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होती है तो बीमा कंपनी मुआवजा देने से बच नहीं सकती है.

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Sunil Jain

09/04/2022

आवश्यक टोल फ्री नंबर
_________________________
विद्युत सेवा 1912

पुलिस सेवा 112

अग्नि सेवा 101

एमबुलैस सेवा 102

यातायात पुलिस 103

आपदा प्रबंधन 108

चाइल्ड लाइन 1098

रेलवे पूछताछ 139

भ्रष्टाचार विरोधी 1031

रेल दुर्घटना 1072

सड़क दुर्घटना 1073

सी एम सहायता लाइन 1076

क्राइम सटायर 1090

महिला सहायता लाइन 1091

पृथ्वी भूकम्प 1092

बाल शोषण सहायता 1098

किसान काल सेन्टर 1551

नागरिक काल सेन्टर 155300

ब्लड बैंक 9480044444

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Sunil Jain

Address

Chamber No 899 District Sessions Court Raj Nagar District Centre Ghaziabad. Mobile No : 7065070070
Ghaziabad
201002

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Tuesday 10:30am - 5pm
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