02/05/2026
⚖️ **न्यायमूर्ति ए.के. सिकरी का बड़ा बयान: भारत में मध्यस्थता की चुनौतियाँ और सच्चाई**
भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति **ए.के. सिकरी** ने मध्यस्थता (Arbitration) और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्ट और बेबाक विचार रखे।
🔹 **सुप्रीम कोर्ट बनाम मध्यस्थता**
सुप्रीम कोर्ट के पास संविधान से जुड़ी व्यापक शक्तियाँ होती हैं, जबकि मध्यस्थता पूरी तरह अनुबंध (Contract) और पक्षकारों के समझौते तक सीमित रहती है। मध्यस्थ न्यायाधिकरण को केवल उसी दायरे में निर्णय देना होता है जो समझौते में तय किया गया है।
🔹 **सेवानिवृत्त न्यायाधीश ही क्यों बनते हैं मध्यस्थ?**
न्यायमूर्ति सिकरी के अनुसार, लोगों का विश्वास एक बड़ा कारण है। व्यापारिक संस्थाएँ मानती हैं कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश निष्पक्ष और संतुलित निर्णय देंगे। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि तकनीकी मामलों में इंजीनियर जैसे विशेषज्ञ भी कई बार बेहतर मध्यस्थ हो सकते हैं।
🔹 **मध्यस्थता फैसलों को अदालत में चुनौती**
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब कोई व्यक्ति मध्यस्थ बनता है तो उसे पहले से पता होता है कि उसके निर्णय को **धारा 34** के तहत अदालत में चुनौती दी जा सकती है। इसलिए यह प्रक्रिया प्रणाली का ही हिस्सा है।
🔹 **सरकार द्वारा बड़े अनुबंधों में मध्यस्थता क्लॉज हटाना**
10 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी अनुबंधों से मध्यस्थता प्रावधान हटाने के फैसले को उन्होंने जल्दबाज़ी बताया। उनका कहना है कि इससे विदेशी निवेशकों का विश्वास कम हो सकता है।
🔹 **भारत में सबसे बड़ी समस्या – फैसलों का प्रवर्तन (Enforcement)**
अंतरराष्ट्रीय निवेशक भारत से इसलिए हिचकते हैं क्योंकि यहाँ मध्यस्थता निर्णयों के प्रवर्तन में काफी समय लग जाता है। अनिश्चितता और देरी भारत को वैश्विक मध्यस्थता केंद्र बनने से रोकती है।
🔹 **AI और मध्यस्थता**
उन्होंने कहा कि AI केवल सहायक हो सकता है, निर्णय लेने का अधिकार पूरी तरह मध्यस्थ के पास ही होना चाहिए। AI का उपयोग सारांश बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष मानव द्वारा ही निकाला जाना चाहिए।
🔹 **भारत में मध्यस्थता बन गई है मुकदमेबाजी का एक और स्तर?**
इस पर उन्होंने माना कि भारत में अक्सर मध्यस्थता के बाद भी धारा 34, धारा 37 और फिर सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाता है। हालांकि, कई मामलों में समझौते भी हो जाते हैं, लेकिन इस पर ठोस अध्ययन की जरूरत है।
📌 **निष्कर्ष:**
न्यायमूर्ति सिकरी के अनुसार, भारत में मध्यस्थता व्यवस्था मजबूत हो रही है, लेकिन **देरी, अनिश्चितता और अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप** जैसी चुनौतियों को हल किए बिना भारत का अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र बनना अभी दूर का लक्ष्य है।