Vinod kumar mehta

Vinod kumar mehta Abc

25/02/2019

Jai jai shree Radhe

13/09/2018
ज़माने में आये हो तो जीने का हुनर भी रखना..दुश्मनों से कोई खतरा नहीं बस अपनो पे नजर रखना.!!
26/07/2017

ज़माने में आये हो तो जीने का हुनर भी रखना..

दुश्मनों से कोई खतरा नहीं बस अपनो पे नजर रखना.!!

अच्छा हुआ खुदा ने मेरे नसीब मैं कुछ दर्द लिख दिए       वरना कुछ लोग जिंदगी में हंस नहीं पाते.....✍विनोद मैहता
04/01/2017

अच्छा हुआ खुदा ने मेरे नसीब मैं
कुछ दर्द लिख दिए
वरना
कुछ लोग जिंदगी में हंस नहीं पाते.....✍विनोद मैहता

मिटटी भी जमा की और खिलौने भी बनाकर देखे,जिन्दगी कभी न मुस्कुराइ बचपन की तरह !!
26/11/2016

मिटटी भी जमा की और खिलौने भी बनाकर देखे,
जिन्दगी कभी न मुस्कुराइ बचपन की तरह !!

06/09/2016
02/04/2016

थोडी बहुत कद्र तो इंसानों की
कर ले यार
जनाजे में कांधे किराये पर नहीं
मिला करते....

17/03/2016

👉!!जीवन में आने वाली हर चुनौती को स्वीकार करे।👈

👆अपनी पसंद की चीजों के लिये खर्चा करें।👆

👆इतना हंसिये के पेट दर्द हो जाये।👆

👆आप कितना भी बुरा नाचते हो ,फिर भी नाचिये।उस खुशी को महसूस किजिये।👆

👆फोटोज् के लिये पागलों वाली पोज् दिजिये।बिल्कुल छोटे बच्चे बन जाइये।👆

👌हर पल को खुशी से जीने को ही जिंदगी कहते है।👌
👆"जिंदगी है छोटी," हर पल में खुश रहो👆
👆काम में खुश रहो,"आराम में खुश रहो👆
👉"आज पनीर नहीं," दाल में ही खुश रहो👈

👆"आज गाड़ी नहीं," पैदल ही खुश रहो 👆

👆"जिस को देख नहीं सकते," उसकी आवाज से ही खुश रहो👆
👉"जिसको पा नहीं सकते,"उसको सोच कर ही खुश रहो👈
👌"बीता हुआ कल जा चुका है," उसकी मीठी याद में ही खुश रहो👌
👆"आने वाले कल का पता नहीं," इंतजार में ही खुश रहो 👆
😄"हंसता हुआ बीत रहा है पल," आज में ही खुश रहो😄
👍"जिंदगी है छोटी," हर हाल में खुश रहो👍

17/03/2016

दो भाई थे ।
आपस में बहुत प्यार था।
खेत अलग अलग थे आजु बाजू।
:
बड़ा भाई शादीशुदा था ।
छोटा अकेला ।
:
एक बार खेती बहुत अच्छी हुई अनाज बहुत हुआ ।
:
खेत में काम करते करते बड़े भाई ने बगल के खेत में छोटे भाई को खेत देखने का कहकर खाना खाने चला गया।
:
उसके जाते ही छोटा भाई सोचने लगा । खेती तो अच्छी हुई इस बार अनाज भी बहुत हुआ। मैं तो अकेला हूँ, बड़े भाई की तो गृहस्थी है। मेरे लिए तो ये अनाज जरुरत से ज्यादा है । भैया के साथ तो भाभी बच्चे है ।
उन्हें जरुरत ज्यादा है।
:
ऐसा विचारकर वह 10 बोरे अनाज बड़े भाई के अनाज में डाल देता है। बड़ा भाई भोजन करके आता है ।
:
उसके आते ही छोटा भाई भोजन के लिए चला जाता है।
:
भाई के जाते ही वह विचारता है ।
मेरा गृहस्थ जीवन तो अच्छे से चल रहा है...
:
भाई को तो अभी गृहस्थी जमाना है... उसे अभी जिम्मेदारिया सम्हालना है... मै इतने अनाज का क्या करूँगा...
:
ऐसा विचारकर उसने 10 बोरे अनाज छोटे भाई के खेत में डाल दिया...।
:
दोनों भाईयों के मन में हर्ष था...
अनाज उतना का उतना ही था और हर्ष स्नेह वात्सल्य बढ़ा हुआ था...।
:
सोच अच्छी रखो प्रेम बढेगा...
:
दुनिया बदल जायेंगी
जैसी जिसकी भावना वैसा फल पावना...।।🏻🏻

जुबां खामोश,आँखों मे नमी होगी,यही बस मेरी दस्तान-ऐ-जिन्दगी होगी..❣मेरे कान्हा❣भरने को तो हर जख्म भर जाऐगा कैसे भरेगी वो ...
14/03/2016

जुबां खामोश,आँखों मे नमी होगी,
यही बस मेरी दस्तान-ऐ-जिन्दगी होगी..
❣मेरे कान्हा❣
भरने को तो हर जख्म भर जाऐगा
कैसे भरेगी वो जगह जहा उसकी कमी होगी..
🌹 राधे राधे राधे राधे राधे राधे 🌹
❣दीवाना राधे का••••........👏🏻
❣➰➰➰➰विनोद मैहता✍🏻
🍀🌹🌹🍀🌹🌹🍀🌹🌹

09/03/2016

आज तक का सबसे सुदंर मैसेज .........ये पढने के बाद एक "आह" और एक "वाह" जरुर निकलेगी...

कृष्ण और राधा स्वर्ग में विचरण करते हुए
अचानक एक दुसरे के सामने आ गए

विचलित से कृष्ण-
प्रसन्नचित सी राधा...

कृष्ण सकपकाए,
राधा मुस्काई

इससे पहले कृष्ण कुछ कहते
राधा बोल💬 उठी-

"कैसे हो द्वारकाधीश ??"

जो राधा उन्हें कान्हा कान्हा कह के बुलाती थी
उसके मुख से द्वारकाधीश का संबोधन कृष्ण को भीतर तक घायल कर गया

फिर भी किसी तरह अपने आप को संभाल लिया

और बोले राधा से ...

"मै तो तुम्हारे लिए आज भी कान्हा हूँ
तुम तो द्वारकाधीश मत कहो!

आओ बैठते है ....
कुछ मै अपनी कहता हूँ
कुछ तुम अपनी कहो

सच कहूँ राधा
जब जब भी तुम्हारी याद आती थी
इन आँखों से आँसुओं की बुँदे निकल आती थी..."

बोली राधा -
"मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ
ना तुम्हारी याद आई ना कोई आंसू बहा
क्यूंकि हम तुम्हे कभी भूले ही कहाँ थे जो तुम याद आते

इन आँखों में सदा तुम रहते थे
कहीं आँसुओं के साथ निकल ना जाओ
इसलिए रोते भी नहीं थे

प्रेम के अलग होने पर तुमने क्या खोया
इसका इक आइना दिखाऊं आपको ?

कुछ कडवे सच , प्रश्न सुन पाओ तो सुनाऊ?

कभी सोचा इस तरक्की में तुम कितने पिछड़ गए
यमुना के मीठे पानी से जिंदगी शुरू की और समुन्द्र के खारे पानी तक पहुच गए ?

एक ऊँगली पर चलने वाले सुदर्शन चक्रपर भरोसा कर लिया
और
दसों उँगलियों पर चलने वाळी
बांसुरी को भूल गए ?

कान्हा जब तुम प्रेम से जुड़े थे तो ....
जो ऊँगली गोवर्धन पर्वत उठाकर लोगों को विनाश से बचाती थी
प्रेम से अलग होने पर वही ऊँगली
क्या क्या रंग दिखाने लगी ?
सुदर्शन चक्र उठाकर विनाश के काम आने लगी

कान्हा और द्वारकाधीश में
क्या फर्क होता है बताऊँ ?

कान्हा होते तो तुम सुदामा के घर जाते
सुदामा तुम्हारे घर नहीं आता

युद्ध में और प्रेम में यही तो फर्क होता है
युद्ध में आप मिटाकर जीतते हैं
और प्रेम में आप मिटकर जीतते हैं

कान्हा प्रेम में डूबा हुआ आदमी
दुखी तो रह सकता है
पर किसी को दुःख नहीं देता

आप तो कई कलाओं के स्वामी हो
स्वप्न दूर द्रष्टा हो
गीता जैसे ग्रन्थ के दाता हो

पर आपने क्या निर्णय किया
अपनी पूरी सेना कौरवों को सौंप दी?
और अपने आपको पांडवों के साथ कर लिया ?

सेना तो आपकी प्रजा थी
राजा तो पालाक होता है
उसका रक्षक होता है

आप जैसा महा ज्ञानी
उस रथ को चला रहा था जिस पर बैठा अर्जुन
आपकी प्रजा को ही मार रहा था
आपनी प्रजा को मरते देख
आपमें करूणा नहीं जगी ?

क्यूंकि आप प्रेम से शून्य हो चुके थे

आज भी धरती पर जाकर देखो

अपनी द्वारकाधीश वाळी छवि को
ढूंढते रह जाओगे
हर घर हर मंदिर में
मेरे साथ ही खड़े नजर आओगे

आज भी मै मानती हूँ

लोग गीता के ज्ञान की बात करते हैं
उनके महत्व की बात करते है

मगर धरती के लोग
युद्ध वाले द्वारकाधीश पर नहीं, i.
प्रेम वाले कान्हा पर भरोसा करते हैं

गीता में मेरा दूर दूर तक नाम भी नहीं है,
पर आज भी लोग उसके समापन पर " राधे राधे" करते है". 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Good afternoon•••
17/02/2016

Good afternoon•••

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