07/05/2021
झारखंड में वर्तमान संक्रमण की स्थिति में सारे न्यायालय में vertual mode से कार्य चल रहा है, झारखंड हाई कोर्ट के द्वारा एक नोटिस के माध्यम से कहा गया है कि 26.04.2021 के बाद फ़ाइल किये गए नई मामले यदि अत्यंत आवश्यक है तभी सुनवाई होगी। परन्तु इन सबों के बीच झारखंड बार कौंसिल के द्वारा वकीलों और सपोर्ट स्टाफ पर फिजिकल और vertual दोनों ही माध्यम से केस की फाइलिंग और सुनवाई पर यह कहते हुए रोक लगा दी गई कि इससे संक्रमण का खतरा है। फिजिकल माध्यम से तो समझ आता है की संक्रमण फैल सकता है, परन्तु vertual mode पर पाबंदी लगाने के पीछे का तर्क समझ नही आया। वकील न्याय प्रणाली का एक अभिन्न अंग है और न्याय प्रणाली शाषण व्यवस्था/सरकार की तीन अंगों में से एक है। ऐसा नही है कि इस संक्रमण की स्थिति में लोगो के अधिकार का हनन नही हो रहा है, पुलिस किसी को गिरफ्तार नही कर रही है, समाज मे अपराध रुक गया है, इसके अलावे भी कई ऐसे बातें है जिसको लेकर लोगों को कोर्ट जाना पड़ता है। 2019 में झारखंड हाई कोर्ट में 9451 अग्रिम जमानत याचिका दायर हुई थी वहीं पिछले वर्ष मात्र 7832 अग्रिम जमानत याचिका दायर हुई, इस वर्ष अभी तक मात्र 323 अग्रिम जमानत याचिका दायर हुई है। वही रेगुलर बेल जहां पिछले वर्ष 12182 फ़ाइल हुई थी वहीं इस वर्ष मात्र 5666 बेल एप्लिकेशन फ़ाइल हुए है। झारखंड हाई कोर्ट में औसतन हर वर्ष 6 से 7 हजार रिट याचिका दायर होती थी वहीं 2020 में मात्र 4446 रीट याचिका दायर हुए ओर इस वर्ष अबतक मात्र 1877 रिट याचिका दायर हुआ है। क्रिमिनल रिट जहां 400 के आस पास दायर होती थी वही इस वर्ष अब तक मात्र 117 क्रिमिनल रिट फ़ाइल हुए है। क्रिमिनल अपील हर वर्ष जहां औसतन 2500 फ़ाइल होता था वहीं इस वर्ष मात्र 226 क्रिमिनल अपील फ़ाइल हुआ है। रोजाना न्यूज़ पेपर में पढ़ने को मिलता है कि समाज मे अपराध हो रहे है और पुलिस भी लोगो को पकड़ कर जेल भेज रही है। किसी भी अभियुक्त का यह पहला अधिकार है कि उसे अपने पसंद का वकील मिले जो उसे उचित कानूनी सलाह दे और उसकी बेल और केस की कार्यवाई को ले कर कदम उठाये। वर्तमान परिस्थिति में जिस प्रकार कुछ अस्पताल औऱ डॉक्टरों के द्वारा जनता को चिट किया जा रहा है और परेशान किया जा रहा है, कोर्ट की भूमिका अहम हो जाती है और ऐसी परिस्थिति में वकीलों की काम नही करने देना, व्यक्ति के न्याय तक पहुंच को रोकने के बराबर है। कहा जाता है न्याय में देरी न्याय नहीं मिलने के बराबर है। कम से कम वकीलों को vertual mode से काम करने की अनुमति होनी चाहिए।