22/08/2026
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के अनुसार, यदि कोई जातिसूचक गाली या अपमानजनक टिप्पणी किसी बंद कमरे, निजी घर या ऐसी बंद जगह पर की जाती है जहाँ आम लोग मौजूद न हों और उसे सुनने या देखने की स्थिति में न हों, तो वह SC/ST Act (अत्याचार निवारण अधिनियम) की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत 'पब्लिक व्यू' (सार्वजनिक दृष्टि या सुनवाई) की कानूनी आवश्यकता को पूरा नहीं करती है, इसलिए उस विशेष कानून के तहत इसे अपराध नहीं माना जाएगा।
मुख्य बिंदु 👇
● पब्लिक व्यू की शर्त: SC/ST एक्ट लागू होने के लिए घटना का ऐसी जगह होना जरूरी है जो सार्वजनिक निगाहों या लोगों के बीच हो।
● बंद कमरा: यदि अपमान निजी तौर पर चारदीवारी के भीतर बिना गवाहों के हुआ है, तो एससी/एसटी एक्ट की धाराएं लागू नहीं होतीं।
●अन्य धाराएं: हालांकि एससी/एसटी एक्ट हट सकता है, लेकिन भारतीय न्याय संहिता (या पुरानी आईपीसी) के तहत सामान्य आपराधिक धाराओं (जैसे मारपीट या धमकी) के तहत कार्रवाई जारी रह सकती है।