08/07/2026
"वाहवाही के लिए नहीं लगा सकती गैंगस्टर एक्ट" — इलाहाबाद हाईकोर्ट का सिस्टम पर चाबुक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अपनी पीठ थपथपाने या महिमामंडन के लिए पुलिस किसी भी नागरिक पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इस टिप्पणी के साथ बस्ती निवासी उस्मान के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। साथ ही कोर्ट ने विवेचक और थाना प्रभारी से चार हफ्तों में जवाबी हलफनामा तलब किया है।
कोर्ट ने कहा, गैंगस्टर एक्ट सामान्य धाराओं की अपग्रेडेड कॉपी नहीं है, जिसे हर मामले में लगा दिया जाए। सिर्फ पुलिस की छवि सुधारने या आंकड़े बेहतर दिखाने के लिए किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करना कानून की मंशा के बिल्कुल विपरीत है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट एक अत्यंत कठोर कानून है, जिसका इस्तेमाल सोच-समझकर और ठोस साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए, और इसीलिए इसके तहत कार्रवाई की एक विस्तृत प्रक्रिया बनाई गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
याची के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एवं असामाजिक क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(1) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया कि गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही विधि के अनुरूप नहीं की गई तथा पुलिस ने दुर्भावना (mala fide) से केवल अपनी उपलब्धि या छवि दिखाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की।
हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया निम्न महत्वपूर्ण बातें कही—
गैंगस्टर एक्ट सामान्य आपराधिक धाराओं का विस्तार नहीं है।
इसे हर मुकदमे में यांत्रिक ढंग से नहीं लगाया जा सकता।
पुलिस अपनी वाहवाही या आंकड़े सुधारने के लिए गैंगस्टर एक्ट का उपयोग नहीं कर सकती।
यदि केवल पुलिस की "क्रेडेंशियल्स" (छवि/उपलब्धि) बढ़ाने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया है, तो यह न्यायिक परीक्षण का विषय है।
गैंगस्टर एक्ट अत्यंत कठोर कानून है।
इसलिए इसके प्रयोग से पहले अधिनियम में निर्धारित सभी वैधानिक शर्तों और प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
ठोस सामग्री और स्वतंत्र संतुष्टि आवश्यक है।
केवल पहले से दर्ज मुकदमों के आधार पर किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित नहीं किया जा सकता; यह भी दिखाना होगा कि वह व्यक्ति संगठित अपराध या गैंग के माध्यम से अवैध लाभ प्राप्त कर रहा है।
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
याची की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई।
विवेचक (Investigating Officer) तथा थाना प्रभारी से चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा मांगा।
राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि गैंगस्टर एक्ट लगाने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन कैसे किया गया।
इस आदेश का कानूनी महत्व
यह आदेश दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों को रेखांकित करता है—
कठोर दंडात्मक कानूनों का दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासनिक विवेक (discretion) भी न्यायिक समीक्षा के अधीन है।
अर्थात, यदि पुलिस बिना पर्याप्त आधार, केवल गंभीरता दिखाने या प्रदर्शन सुधारने के लिए गैंगस्टर एक्ट लगाती है, तो उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है।
अधिवक्ताओं के लिए उपयोगिता
यदि किसी अभियुक्त के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है, तो इस आदेश के आधार पर निम्न बिंदुओं पर चुनौती दी जा सकती है—
गैंग चार्ट की वैधता।
सक्षम अधिकारी की वास्तविक संतुष्टि (Subjective Satisfaction)।
अधिनियम की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन।
क्या वास्तव में संगठित अपराध और अवैध आर्थिक लाभ के साक्ष्य हैं।
क्या केवल पूर्व के मुकदमों के आधार पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया है।