06/01/2026
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हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 "वैवाहिक अधिकारों की बहाली" (Restitution of Conjugal Rights) से संबंधित है, जो पति या पत्नी में से किसी एक को यह अधिकार देती है कि यदि दूसरा पक्ष बिना किसी उचित कारण के उससे अलग रहता है, तो वह जिला न्यायालय में याचिका दायर कर उसे वापस आने का आदेश दे सके, ताकि पति-पत्नी साथ रह सकें, हालांकि इसे जबरदस्ती लागू नहीं किया जा सकता. यह धारा पति-पत्नी के बीच सहवास (cohabitation) और प्रेम-स्नेह को बहाल करने का प्रयास करती है.
उद्देश्य: पति-पत्नी के बीच एक साथ रहने और दांपत्य सुख (conjugal bliss) को फिर से स्थापित करना.
कब लागू होती है: जब कोई पति या पत्नी बिना किसी वैध कारण (without reasonable cause) के दूसरे को छोड़ देता है और उससे अलग रहता है.
प्रक्रिया: पीड़ित पक्ष जिला न्यायालय (District Court) में याचिका दायर करता है, जिसमें बताया जाता है कि दूसरे पक्ष ने बिना किसी उचित कारण के उससे संबंध विच्छेद कर लिया है.
न्यायालय की भूमिका: अदालत मामले की जाँच करती है, सुलह (counselling) कराने की कोशिश करती है, और यदि ज़रूरी हो तो वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश (decree) दे सकती है.
सीमा: इस आदेश को शारीरिक बल से लागू नहीं किया जा सकता.