Saurabh Singh Naagvanshi Adv.

Saurabh Singh Naagvanshi Adv. ◾विधिक जानकारी/Legal Knowledge
👉 "मुफ्त कानूनी अपडेट्स के लिए पेज को लाइक और फॉलो करें"/Get free legal updates - like and follow the Page!"

पति द्वारा पत्नी को नौकरी छोड़ने और अपनी इच्छा और शैली के अनुसार रहने के लिए मजबूर करना क्रूरता के समान है: मध्य प्रदेश ...
25/11/2024

पति द्वारा पत्नी को नौकरी छोड़ने और अपनी इच्छा और शैली के अनुसार रहने के लिए मजबूर करना क्रूरता के समान है: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय।

उक्त मामले में माननीय उच्च न्यायालय ने जोर देते हुए स्पष्ट कहा कि पति या पत्नी साथ रहना चाहते हैं या नहीं, यह उनकी "इच्छा" है। हालांकि उनमें से कोई भी एक दूसरे को जीवनसाथी की पसंद के अनुसार नौकरी करने या न करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

व्यथित हूं.......✍️कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज की एक स्नातकोत्तर (पीजी) द्वितीय वर्ष की छात्रा के भयावह बलात्कार और...
17/08/2024

व्यथित हूं.......✍️

कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज की एक स्नातकोत्तर (पीजी) द्वितीय वर्ष की छात्रा के भयावह बलात्कार और वीभत्सतापूर्ण हत्या की हालिया घटना देशभर को एक बार पुनः निर्भया निर्मम कांड की याद दिलाते हैं। इंसाफ और न्याय की गूंज देश के हर कोने में तेज होती जा रही है।

▪️मामले को सीबीआई के हवाले किए जाने से पूर्व कोलकाता पुलिस ने 'संजय रॉय' नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया जो कोलकाता पुलिस के लिए हीं सिविक वांलटियर का काम करता था। पर क्या इस मामले में कोई और भी है जो संजय रॉय के साथ इस भयावह कृत्य में शामिल है? फिलहाल ये सवाल हम सब के साथ साथ सीबीआई के लिए भी एक राज का विषय बना हुआ है।

▪️प्रथम वाक्या मृतक डॉक्टर के मां-बाप को अस्पताल प्रशासन द्वारा कथित तौर पर ये बताया गया कि मृतक ने आत्महत्या की है, जो सरासर बेबुनियाद एवं मनगढ़ंत कहानी जान पड़ता है।और तो और पीड़िता के रिश्तेदारों को शव देखने से पहले अस्पताल प्रशासन द्वारा अस्पताल के बाहर तीन घंटे तक का असहाय इंतजार करना पड़ता है। वो तो धन्य है फोरेंसिक जांच रिपोर्ट का जिसने मृतक डॉक्टर के साथ महज़ रेप नहीं बल्कि एक भयावह गैंग रेप होने की पुष्टि की। आखिर जान-बूझकर इस जघन्य और हिंसक कृत्य पर पर्दा डालने की जरूरत हीं क्या थी जब सच्चाई से प्रशासन पूर्णतया अवगत था।

▪️कथित अस्पताल के तीसरे मंजिल के जिस सेमिनार हॉल में इस विभत्स और जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया था नियमतः उसे सील किया जाना चाहिए था लेकिन प्रशासन द्वारा सेमिनार हॉल को बिना सील किए ही ऊक्त घटना स्थल पर कंस्ट्रक्शन/रिपेयरिंग का कार्य भी शुरू कर दिया गया। आखिर इतनी भी जल्दी क्या थी।
तो मामला साफ़ है यहां सबूतों से छेड़छाड़ करने की भी पुरजोर कोशिश की गई है। ऐसे परिवेश में एक निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना कहां तक तर्कसंगत है?

▪️कड़ी में आगे बढ़ते हुए अगर कथित घटना में सीबीआई जांच की बात करें तो इस सीबीआई जांच की मांग को सरकार ने नहीं बल्कि माननीय कोलकाता उच्च न्यायालय ने हरी झंडी दिखाई वो भी प्रशासन और सरकार को आड़े हाथों लेने के पश्चात।
👉फिलहाल जहां उक्त घटना के बाद पश्चिम बंगाल समेत देशभर के तमाम अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं वहीं इस घटना को लेकर पक्ष/विपक्ष और तमाम राजनीतिक दलों की राजनीतिक छींटाकशी भी चरम पर है।

हो भी क्यों न! आखिर जो बेबस और लाचार पीड़ित परिवार की बेटी/बहन मरी वो कौन सी इनके घर परिवार से ताल्लुक रखती थी। तो राजनीति करना तो निःसंदेह बनता ही है।।

**e

◼️ ओवरबुकिंग के चलते फ्लाइट में बोर्डिंग से इनकार करने पर वैकल्पिक फ्लाइट के साथ साथ क्षतिपूर्ति रिफंड पाने का अधिकार!! ...
30/06/2023

◼️ ओवरबुकिंग के चलते फ्लाइट में बोर्डिंग से इनकार करने पर वैकल्पिक फ्लाइट के साथ साथ क्षतिपूर्ति रिफंड पाने का अधिकार!!

◼️ पेट्रोल भरवाते समय मशीन में 0 देखने के अलावा पेट्रोल या डीजल की डेंसिटी भी जरूर देख लें।👉 सरकार ने पेट्रोल और डीजल की...
28/06/2023

◼️ पेट्रोल भरवाते समय मशीन में 0 देखने के अलावा पेट्रोल या डीजल की डेंसिटी भी जरूर देख लें।
👉 सरकार ने पेट्रोल और डीजल की शुद्धता के मानक तय किए हुए हैं। पेट्रोल की डेंसिटी अगर 730 से 800 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (kg/m3) के बीच है तो यह शुद्ध माना जाएगा, वहीं अगर डीजल की डेंसिटी 830 से 900 kg/m3 के बीच होती है तो शुद्ध माना जायेगा।
🫵कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 के मुताबिक, हर ग्राहक को पेट्रोल की शुद्धता मापने का अधिकार है.

◼️बंद पिंजरे में तोते को पालना वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 49 और 51 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। शिकाय...
10/06/2023

◼️बंद पिंजरे में तोते को पालना वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम,1972 की धारा 49 और 51 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। शिकायत पर आपके विरुद्ध केस दर्ज़ किया जा सकता है।ऐसे अपराध के लिए दोषी व्यक्ति को डेढ़ से तीन वर्ष तक की सजा और 25 हजार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।

◼️Keeping a parrots in closed cages is an offense under sections 49 and 51 of the Wildlife Protection Act, 1972.A case can be registered against you on the complaint. The person guilty of such an offence can be sentenced to one and a half to three years of imprisonment and a fine of up to 25 thousand rupees.

◼️ सर्विस या प्रोडक्ट से आहत उपभोक्ता अपनी शिकायत पंजीकृत करने के लिए उपभोक्ता फोरम के शिकायत केंद्र के टॉल फ्री नंबर 18...
07/06/2023

◼️ सर्विस या प्रोडक्ट से आहत उपभोक्ता अपनी शिकायत पंजीकृत करने के लिए उपभोक्ता फोरम के शिकायत केंद्र के टॉल फ्री नंबर 1800-11-4000 या 14404 या 1915 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अन्यथा दिए गए नंबर 8800001915 पर एसएमएस के माध्यम से भी अपनी शिकायत पंजीकृत करा सकते हैं। इसके अलावा उपभोक्ता चाहें तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन की वेबसाइट https://consumerhelpline.gov.in पर भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं ।।

◼️ Consumers aggrieved by the sërvicés or product can register their complaint by calling the toll free number 1800-11-4000 or 14404 or 1915 of the Consumer Forum's complaint center, otherwise, they can also register their complaint through SMS on the given number 8800001915.
Apart from this, if a consumer want, then they can also register their complaint through the website of National Consumer Helpline ie.. https://consumerhelpline.gov.in

In 2007, the Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 was implemented by the Central Government....
01/06/2023

In 2007, the Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 was implemented by the Central Government.Under which parents and senior citizens are allowed to live their lives peacefully.In this Act, it is clearly said that if the child ignores their parents, or tortures their parents, then the parents can evict their child from their property.
Under this Act, any Aggrieved parents' may make a complaint application against their abused children to the concerned Deputy Commissioner and District Magistrate.Or they can file a petition against their children in the SDM court.After hearing from the SDM court, such children are evicted from their property.

केंद्र सरकार द्वारा 2007 में माता-पिता और वरिष्ठ
नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम (मेंटेनेंस एण्ड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एण्ड सीनियर सिटिजन एक्ट, 2007 को लागू किया गया।जिसके अन्तर्गत माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों को शांति से उनके जीवन जीने का अधिकार प्रदान किया गया। ऐसे में, इस कानून में कहा गया है कि यदि संतान माता-पिता की अनदेखी करता है, या उन्हें प्रताड़ित करता है तो माता-पिता अपने संतान को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं।
इस अधिनियम के तहत कोई भी पीड़ित (माता-पिता) डिप्टी कमिश्नर और जिला अधिकारी को एप्लिकेशन के माध्यम से दुर्व्यवहार करने वाले बच्चों के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं, या फिर एसडीएम कोर्ट में अपने बच्चों के खिलाफ वाद दायर कर सकते हैं। एसडीएम की ओर से सुनवाई के बाद ऐसी संतान को उनकी संपत्ति से बेदखल कर दिया जाता है।।

◼️आज के समय में परिवारों को एक दूसरे से संपत्ति के संबंध में लड़ते देखा जाना आम बात हो गया है।जहां हिस्सेदारों के बीच आपस...
31/05/2023

◼️आज के समय में परिवारों को एक दूसरे से संपत्ति के संबंध में लड़ते देखा जाना आम बात हो गया है।जहां हिस्सेदारों के बीच आपसी सहमति से संपत्ति का बंटवारा हो गया होता है वहां तो सरलतापूर्वक संपत्ति का बंटवारा हो जाता है।हिस्सेदार भी अपने अपने हिस्से के संबंध में विभाजन लेख बनवाकर सब रजिस्ट्रार के पास अपने हिस्से की संपत्ति रजिस्टर्ड करवा लेते हैं।लेकिन
जहां संपत्ति का बंटवारा नहीं हुआ होता है, वहां स्थिति विवाद की निःसंदेह बन हीं जाती है।कुछ हिस्सेदार अपने हिस्से से अधिक हिस्सा मांगते हैं, तो कुछ हिस्सेदार सारी संपत्ति अकेला हीं हड़पना चाहते हैं।
▪️👉ऐसी स्थिति में पुलिस को शिकायत पत्र देने और सब रजिस्ट्रार के समक्ष आपत्ति प्रस्तुत करने से भी आप किसी हिस्सेदार को संपत्ति बेचने से नहीं रोक सकते हैं।इसलिए जो उचित कानूनी प्रक्रिया है, वो ये है की जो भी हिस्सेदार संपत्ति बेचने से किसी पारिवारिक सदस्य को रोकना चाहते हैं, वो अपने क्षेत्र की सिविल कोर्ट के समक्ष बंटवारे का एक सिविल सूट दायर करवा दें।इसी सिविल सूट के साथ साथ तत्काल कार्यवाही हेतु एक स्टे एप्लिकेशन भी फाइल करवा दें।इस स्टे एप्लिकेशन में अगर आप चाहें तो संपत्ति को अवैध रूप से बेचने वाले हिस्सेदार या फिर हिस्सेदारों के साथ क्षेत्र के संबंधित सब रजिस्ट्रार को भी पक्षकार बना सकते हैं।
🧑‍⚖️न्यायालय वादी और प्रतिवादी 👬 द्वारा पेश किए गए सबूतों और तथ्यों को प्रथम दृष्टया देखती है, फिर दोनों पक्षकारों की बहस को सुनती है।और इसके उपरांत यदि न्यायालय को यह लगता है कि अंतिम निर्णय आने तक संपत्ति को बेचने से स्टे किया जा सकता है, तब न्यायालय ऐसा आदेश पारित करते हुए संपत्ति को बेचने पर रोक लगा देती है।।

◼️➖संपत्ति के कागज़ात गुम हो जाने पर घबराने और परेशान होने की अब जरूरत नहीं; तीन चरणों में जानिए पूरी प्रक्रिया🫵😊◼️➖Now ...
29/05/2023

◼️➖संपत्ति के कागज़ात गुम हो जाने पर घबराने और परेशान होने की अब जरूरत नहीं; तीन चरणों में जानिए पूरी प्रक्रिया🫵😊

◼️➖Now there is no need to panic and worry about the lost property papers; Know the whole process in just three steps🫵😊

◼️👉माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा है, की माता-पिता👪 के जीवित रहने पर बेटे का उनक...
28/05/2023

◼️👉माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट कहा है, की माता-पिता👪 के जीवित रहने पर बेटे का उनकी संपत्ति🏨🏬 पर कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। बेटा न तो संपत्ति पर दावा कर सकता है न हीं संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग कर सकता है ।।

◼️👉The Hon'ble Bombay High Court while hearing a petition has clearly held that the Son has no statutory right over the property 🏨🏬of their parents👪 when they are alive.They can neither claim the property nor they demand any share in their property.


🫵भारतीय मोटर वाहन अधिनियम 1932 के मुताबिक, एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (सहायक उप-निरीक्षक) (एएसआई) के रैंक का ट्रैफिक पुल...
27/05/2023

🫵भारतीय मोटर वाहन अधिनियम 1932 के मुताबिक, एक असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (सहायक उप-निरीक्षक) (एएसआई) के रैंक का ट्रैफिक पुलिस कर्मी ही ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने के लिए आप पर जुर्माना लगा सकता है।एएसआई, सब-इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के पास आपको मौके पर जुर्माना लगाने का अधिकार है।कोई सिपाही या ट्रैफिक कांस्टेबल सिर्फ इनकी मदद के लिए मौजूद होते हैं।इनके पास आपके वाहन से चाबी निकालने या आपके वाहन के टायरों की हवा निकालने का अधिकार नहीं होता है।।🤷

🫵As per the Indian Motor Vehicles Act 1932, only a traffic police official of the rank of a charged sub-inspector (assistant sub-inspector) can fine you for violating a traffic rules.ASI, Sub-Inspector and Inspector have the authority to fine you on the spot.Any traffic constable is there only to help them.They do not have the authority to remove the keys from your vehicle or to deflate the tires of your vehicle.🤷


◼️👉वर्चुअल शिकायतों और शून्य प्राथमिकी: महिलाओं का अधिकार:अगर किसी कारणवश एक पीड़ित महिला👩‍🦰 थाने नहीं जा पाती है, तो ईम...
26/05/2023

◼️👉वर्चुअल शिकायतों और शून्य प्राथमिकी: महिलाओं का अधिकार:

अगर किसी कारणवश एक पीड़ित महिला👩‍🦰 थाने नहीं जा पाती है, तो ईमेल या पंजीकृत डाक के माध्यम से उसे उपायुक्त या पुलिस आयुक्त स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी🧑‍✈️ को संबोधित कर एक लिखित शिकायत📝 ईमेल या पंजीकृत डाक के माध्यम से भेजनी होगी।यह हर महिला का विशेषाधिकार है।
इसके अतिरिक्त, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देशित "जीरो एफआईआर" के तहत एक महिला🧕 अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी पुलिस स्टेशन से अपनी पुलिस शिकायत दर्ज करा सकती है।कोई भी पुलिस स्टेशन🏤 इस आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकता है, कि घटित मामला उनके क्षेत्र /क्षेत्राधिकार में नहीं आता है।प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, शिकायत को अपेक्षित अधिकार क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में स्थानांतरित कर दिया जायेगा ।।

◼️👉Women Right To Virtual Complaints and Zero FIR:

A woman👩‍🦰 has the privilege of lodging a complaint via email or registered post If, for some reason, she is not able to go to the police station. She has to send a written complaint📝 through an email or registered post addressing the senior police officer🧑‍✈️ of the level of Deputy Commissioner or Commissioner of Police.

Additionally, a women🧕 can register her police complaint from any police station🏤 as per their convenience under the Zero FIR ruling by Hon'ble Supreme Court.No police station can deny registering the FIR on the pretext that it doesn't come under their area/jurisdiction.After the FIR is lodged, the complaint can be transferred to the police station of the requisite jurisdiction.


Address

Dwarka Mor
Delhi
110059

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Saurabh Singh Naagvanshi Adv. posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Saurabh Singh Naagvanshi Adv.:

Share

Category