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A proud moment as defense counsel 😊⚖️ 110 BNS (308 IPC)  reduced to 115(2) BNSS  (323 IPC). Arguments on charge argued b...
22/05/2026

A proud moment as defense counsel 😊⚖️ 110 BNS (308 IPC) reduced to 115(2) BNSS (323 IPC). Arguments on charge argued by me.”

22/05/2026

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में, एक 85 साल की महिला और उसके बेटे के साथ इलाज के लिए आए एक डॉक्टर और हॉस्पिटल के सिक्योरिटी स्टाफ ने कथित तौर पर बुरा बर्ताव किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बेटे ने प्लास्टर लगाने से पहले अपनी मां के घायल हाथ का एक्स-रे करवाने के लिए कहा। कहा जा रहा है कि इसी बात पर बहस हुई, जिसके दौरान डॉक्टर ने कथित तौर पर बेटे को थप्पड़ मार दिया।

16/05/2026

हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant के एक बयान को लेकर बड़ा विवाद हुआ।

सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ बेरोज़गार युवाओं पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ युवा “cockroaches (तिलचट्टों)” की तरह होते हैं, जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और फिर वे सोशल मीडिया, मीडिया, RTI एक्टिविस्ट आदि बनकर “सिस्टम पर हमला” करने लगते हैं। 

यह टिप्पणी उस समय आई जब अदालत एक वकील की “Senior Advocate” बनाए जाने की मांग पर सुनवाई कर रही थी। मुख्य न्यायाधीश ने उस वकील के व्यवहार और सोशल मीडिया पोस्ट पर नाराज़गी जताई थी। 

इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में काफी आलोचना हुई। कई लोगों ने कहा कि देश में पहले से बेरोज़गारी बड़ी समस्या है, ऐसे में युवाओं के लिए इस तरह की भाषा उचित नहीं है। एनसीपी नेता Rohit Pawar ने भी इसे “अस्वीकार्य” बताया। 

बढ़ते विवाद के बाद CJI सुर्या कांत ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी बात को “गलत तरीके से पेश” किया गया। उनका कहना था कि उनका निश

16/05/2026

एक जज बार के प्रधान को ओपन कोर्ट में चुतिया कह कर और हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट जज को प्रधान का बाप दादा बता कर साबुत चला गया, लानत है ।

लगता है अब वकालत छोड़ देनी चाहिए।

जब प्रधान से बतमीजी हो रही है तो सामान्य अधिवक्तयो का क्या होगा! अब भी जवाब ना दिया तो वो दिन दूर नहीं जब ये मुंह पर मूतेंगे
..

16/05/2026

Rohini Court me Judge Rakesh Kumar v vs Rohini court President. Ke beech tikhi bahes dekhne ko mili. .

07/05/2026
07/05/2026

Peak acting

06/05/2026

यह पूरा मामला Supreme Court Bar Association (SCBA) और Andhra Pradesh High Court से जुड़ा है।

🧾 असल घटना
• हाई कोर्ट में एक केस की सुनवाई चल रही थी
• उसी दौरान एक युवा वकील (junior advocate) ने कुछ ऐसा कहा/किया जिससे जज नाराज़ हो गए
• जज ने तुरंत आदेश दिया कि उस वकील को पुलिस कस्टडी में लिया जाए (करीब 24 घंटे के लिए)



😳 आगे क्या हुआ?
• वकील ने कोर्ट में ही माफी मांगी
• लेकिन पहले उसे हिरासत में भेजने का आदेश दे दिया गया
• बाद में जज ने अपना ही आदेश वापस (recall) ले लिया



📢 SCBA क्यों नाराज़ है?
• SCBA का कहना है कि:
• इस तरह से कोर्ट में वकील को तुरंत कस्टडी में भेजना बहुत गंभीर और असामान्य कदम है
• इससे वकीलों की स्वतंत्रता और सम्मान (dignity) पर असर पड़ता है
• इसलिए उन्होंने Chief Justice of India (CJI) से हस्तक्षेप करने की मांग की



⚖️ असली मुद्दा क्या है?
• क्या जज को इतना अधिकार है कि वो तुरंत किसी वकील को हिरासत में भेज दें?
• क्या यह न्याय के सिद्धांत (natural justice) के खिलाफ है?



👉 आसान शब्दों में:
कोर्ट में बहस के दौरान जज नाराज़ हुए

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