वकील साब 360

वकील साब 360 Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from वकील साब 360, Lawyer & Law Firm, Delhi.

17/05/2026

यदि यह सत्य है कि कोर्ट के भीतर एक न्यायिक अधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं से यह कहा गया —
“Supreme Court aur High Court ke judge tumhare baap hain… meri recording kar lo, mera kuch nahi hoga” —
तो यह कथन केवल अभद्र भाषा नहीं, बल्कि न्यायिक मर्यादा, संवैधानिक गरिमा और न्यायपालिका की संस्थागत प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।

न्यायालय वह स्थान है जहाँ संविधान की गरिमा, शिष्टाचार और संयम सर्वोच्च होने चाहिए। किसी भी न्यायिक अधिकारी द्वारा अहंकारपूर्ण, अपमानजनक या डराने वाले शब्दों का प्रयोग न केवल अधिवक्ताओं का अपमान है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी आहत करता है।

बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो मजबूत स्तंभ हैं। यदि अधिवक्ताओं के सम्मान को इस प्रकार चुनौती दी जाएगी, तो यह सम्पूर्ण कानूनी समुदाय की गरिमा पर आघात माना जाएगा।

हम माननीय उच्च न्यायालय से मांग करते हैं कि कथित घटनाक्रम और बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा न्यायिक गरिमा के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए�

02/05/2026

Aakhri saans tak us Maa ne apne bete ka haath nahi chhoda…🥺 ⚠️ Emotional content

⚖️ Live-in रिश्ता टूटा तो क्या हर बार बनता है “रेप का केस”? सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक...
30/04/2026

⚖️ Live-in रिश्ता टूटा तो क्या हर बार बनता है “रेप का केस”? सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक अहम मामले में लिव-इन रिलेशनशिप और बलात्कार के आरोपों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि लंबे समय तक आपसी सहमति से चले रिश्ते के टूटने को सीधे तौर पर अपराध या बलात्कार नहीं माना जा सकता। 📌 केस डिटेल्स: Case: Prosecutrix of Crime No. 27/2025 v. State of Madhya Pradesh Diary No.: 16669/2026 Bench: Justice B.V. Nagarathna & Justice Ujjal Bhuyan Date: 27 April 2026 📖 मामले की पृष्ठभूमि: यह मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ था, जिसमें एक पुरुष के खिलाफ दर्ज रेप की FIR को रद्द कर दिया गया था। महिला ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। दोनों पक्ष लगभग 15 साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहे और उनका एक 7 साल का बच्चा भी है। महिला का आरोप था कि पुरुष ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए, जबकि वह पहले से शादीशुदा था और यह बात छिपाई गई थी। जब महिला ने शादी का दबाव बनाया, तो पुरुष रिश्ता छोड़कर चला गया। ⚖️ कोर्ट में उठे सवाल: जब 15 साल तक आपसी सहमति से रिश्ता रहा और बच्चा भी हुआ, तो अब इसे “रेप” कैसे कहा जा सकता है? जहां Consensual Relationship है, वहां अपराध का सवाल कैसे उठेगा? 💥 सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां: ✔️ लंबे समय तक सहमति से चले रिश्ते को बाद में अपराध नहीं कहा जा सकता ✔️ लिव-इन रिलेशनशिप खत्म करना अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है ✔️ हर मामले को “शादी का झांसा देकर रेप” नहीं माना जा सकता ✔️ ऐसे रिश्तों में विवाह जैसी कानूनी स्थिरता नहीं होती, इसलिए जोखिम होते हैं ✔️ 15 साल बाद शिकायत दर्ज करने पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया 👶 बच्चे के अधिकार: महिला बच्चे के भरण-पोषण के लिए सिविल कानून के तहत राहत ले सकती है और Mediation का सहारा लिया जा सकता है। 📢 ताजा स्थिति: सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है और दोनों पक्षों को मध्यस्थता के जरिए समाधान तलाशने को कहा है। ❗आपकी राय क्या है? क्या ऐसे मामलों में आरोप सही हैं या कानून का दुरुपयोग हो सकता है? 👉 ऐसे ही कानूनी अपडेट के लिए फॉलो करें

**e

29/04/2026

This is what said for Advocates ⚖️ Proud to be in Noble Profession ⚖️ 📍

Address

Delhi

Telephone

+919109124567

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when वकील साब 360 posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to वकील साब 360:

Share