17/05/2026
यदि यह सत्य है कि कोर्ट के भीतर एक न्यायिक अधिकारी द्वारा अधिवक्ताओं से यह कहा गया —
“Supreme Court aur High Court ke judge tumhare baap hain… meri recording kar lo, mera kuch nahi hoga” —
तो यह कथन केवल अभद्र भाषा नहीं, बल्कि न्यायिक मर्यादा, संवैधानिक गरिमा और न्यायपालिका की संस्थागत प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
न्यायालय वह स्थान है जहाँ संविधान की गरिमा, शिष्टाचार और संयम सर्वोच्च होने चाहिए। किसी भी न्यायिक अधिकारी द्वारा अहंकारपूर्ण, अपमानजनक या डराने वाले शब्दों का प्रयोग न केवल अधिवक्ताओं का अपमान है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को भी आहत करता है।
बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो मजबूत स्तंभ हैं। यदि अधिवक्ताओं के सम्मान को इस प्रकार चुनौती दी जाएगी, तो यह सम्पूर्ण कानूनी समुदाय की गरिमा पर आघात माना जाएगा।
हम माननीय उच्च न्यायालय से मांग करते हैं कि कथित घटनाक्रम और बयान की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा न्यायिक गरिमा के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए�