17/01/2026
माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने SHIKSHA KUMARI Versus SANTOSH KUMAR (MAT.APP.(F.C.) 111/2025) में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B और धारा 14(1) के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए यह स्पष्ट किया कि आपसी सहमति से तलाक के मामलों में एक वर्ष की अनिवार्य अवधि तथा छह माह की कूलिंग-ऑफ अवधि को उपयुक्त परिस्थितियों में माफ (waive) किया जा सकता है।
न्यायालय ने कहा कि धारा 13B(1) के अंतर्गत प्रथम मोशन दायर करने से पूर्व निर्धारित एक वर्ष की अवधि को, धारा 14(1) के परंतुक (proviso) का सहारा लेकर, माफ किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, धारा 13B(1) के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि को माफ किए जाने से यह आवश्यक नहीं हो जाता कि धारा 13B(2) के अंतर्गत छह माह की प्रतीक्षा अवधि स्वतः माफ हो जाए; दोनों अवधियों की माफी पर स्वतंत्र रूप से विचार किया जाना आवश्यक है।
यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि एक वर्ष तथा छह माह – दोनों अवधियाँ माफ किए जाने योग्य हैं, तो न्यायालय पर यह कानूनी बाध्यता नहीं है कि वह तलाक की डिक्री के प्रभावी होने की तिथि को स्थगित करे। ऐसी स्थिति में तलाक की डिक्री तत्काल प्रभाव से पारित की जा सकती है।
न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि अवधि की माफी सिर्फ मांग करने मात्र से नहीं दी जा सकती, बल्कि तभी दी जाएगी जब न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो कि याचिकाकर्ता को असाधारण कठिनाई (exceptional hardship) हो रही है अथवा प्रतिवादी की ओर से असाधारण नैतिक पतन (exceptional depravity) के तत्व विद्यमान हैं, साथ ही Pooja Gupta मामले में निर्धारित मानकों पर भी मामले की कसौटी की जाए।
अवधि की यह माफी परिवार न्यायालय तथा उच्च न्यायालय, दोनों द्वारा दी जा सकती है। साथ ही, यदि यह पाया जाता है कि एक वर्ष की अवधि की माफी गलत प्रस्तुतीकरण या तथ्यों के दमन के आधार पर प्राप्त की गई है, तो न्यायालय को यह अधिकार है कि वह तलाक की डिक्री के प्रभावी होने की तिथि को आगे बढ़ा दे या याचिका को किसी भी चरण में खारिज कर दे। हालांकि, ऐसी स्थिति में पक्षकारों को एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद, समान या लगभग समान तथ्यों के आधार पर, पुनः नई याचिका दायर करने का अधिकार सुरक्षित रहेगा।
माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में दिशा निर्देश निर्धारित किया है
57.1 हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B(1) के अंतर्गत प्रथम मोशन प्रस्तुत करने के लिए निर्धारित एक वर्ष की वैधानिक अवधि को, धारा 14(1) के परंतुक को लागू करते हुए, माफ (waive) किया जा सकता है।
57.2 धारा 13B(1) के अंतर्गत एक वर्ष की पृथक्करण अवधि की माफी, धारा 13B(2) के अंतर्गत द्वितीय मोशन दायर करने हेतु निर्धारित छह माह की कूलिंग-ऑफ अवधि की माफी को स्वतः निषिद्ध नहीं करती। धारा 13B(1) के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि तथा धारा 13B(2) के अंतर्गत छह माह की अवधि की माफी पर एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से विचार किया जाना होगा।
57.3 जहाँ न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि धारा 13B(1) के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि तथा धारा 13B(2) के अंतर्गत छह माह की अवधि—दोनों को माफ किया जाना उपयुक्त है, वहाँ न्यायालय विधिक रूप से बाध्य नहीं है कि वह तलाक की डिक्री के प्रभावी होने की तिथि को स्थगित करे, और ऐसी डिक्री को तत्काल प्रभाव से लागू किया जा सकता है।
57.4 ऐसी माफी केवल माँग किए जाने मात्र से नहीं दी जाएगी, बल्कि तभी दी जाएगी जब न्यायालय इस बात से संतुष्ट हो कि याचिकाकर्ता को असाधारण कठिनाई (exceptional hardship) का सामना करना पड़ रहा है और/या प्रतिवादी की ओर से असाधारण नैतिक पतन (exceptional depravity) की परिस्थितियाँ विद्यमान हैं, तथा साथ ही Pooja Gupta प्रकरण में निर्धारित विचारणीय मानकों की कसौटी पर भी मामले को परखा जाए।
57.5 उपर्युक्त प्रकार की माफी परिवार न्यायालय तथा उच्च न्यायालय, दोनों द्वारा प्रदान की जा सकती है।
57.6 जैसा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 14(1) के परंतुक में परिकल्पित है, यदि न्यायालय यह पाता है कि धारा 13B(1) के अंतर्गत एक वर्ष की अवधि की माफी गलत प्रस्तुतीकरण (misrepresentation) या तथ्यों के दमन (concealment) के आधार पर प्राप्त की गई है, तो न्यायालय तलाक की डिक्री के प्रभावी होने की तिथि को उपयुक्त समझे जाने पर आगे बढ़ा सकता है; अथवा जिस किसी चरण पर याचिका लंबित हो, उसे खारिज कर सकता है। तथापि, इससे पक्षकारों के उस अधिकार पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा कि वे एक वर्ष की अवधि समाप्त होने के पश्चात, समान या लगभग समान तथ्यों के आधार पर, धारा 13B(1) के अंतर्गत नई याचिका प्रस्तुत कर सके।
Krishna Kumar Yadav
Advocate
Mob. No. 9415106950