Avinash Kumar

Avinash Kumar Advocate, Delhi High Court
Mediator, Delhi Govt.

अभी-अभी दिल्ली से दिल दहला देने वाला वीडियो देखा।एक पिता ने आग से बचने की कोशिश में अपने दो बच्चों को 9वीं मंज़िल से नीच...
11/06/2025

अभी-अभी दिल्ली से दिल दहला देने वाला वीडियो देखा।
एक पिता ने आग से बचने की कोशिश में अपने दो बच्चों को 9वीं मंज़िल से नीचे फेंका और फिर खुद कूद गया।
तीनों की मौत हो गई।

कहा जा रहा है कि फायर ब्रिगेड कई घंटे बाद पहुंची — पहली कॉल के काफी समय बाद। आपने सीसीटीवी लगवाया, प्राइवेट गार्ड रख लिए, कुत्ता पाल लिया..

तो एक बात और समझ लीजिए:
आग लगने पर भी आप अकेले ही हैं।
फायर ब्रिगेड उतनी ही "कुशल" है जितनी कोई भी सरकारी व्यवस्था।
अगर कॉल रिसीव करने वाला ईमानदार और संवेदनशील हुआ भी, तो भी हो सकता है वह ट्रैफिक में फंसा हो जब तक वह आपके पास पहुंचे।

इसलिए प्लीज़, अपने घर में फायर सेफ्टी में निवेश कीजिए।
अगर संभव हो, तो वॉटर स्प्रिंकलर लगवाएं।
कम से कम एक अग्निशामक (fire extinguisher) तो ज़रूर रखें।
इसे बस खरीदकर भूल मत जाइए — इसे कैसे इस्तेमाल करना है, सीखिए।
सेफ जगह पर एक बार पिन खींचकर स्प्रे करने की प्रैक्टिस ज़रूर करें।

और अगर आप किसी ऊंची इमारत (high-rise) में रहते हैं,
तो एक फोल्डेबल या हुक-टाइप रस्सी वाली एस्केप लैडर ले आइए।
इसे बालकनी में माउंट करें या पास के किसी आसान जगह पर रखें।

जिंदगी अनमोल है — थोड़ा सावधान रहना ज़रूरी है।

जापान एक ऐसा देश है जहां पर जब भी कोई खाने वाली सामान महंगी हो जाती है तो वहां के लोग उसे खाना ही छोड़ देते हैं। और फिर ...
12/07/2024

जापान एक ऐसा देश है जहां पर जब भी कोई खाने वाली सामान महंगी हो जाती है तो वहां के लोग उसे खाना ही छोड़ देते हैं। और फिर वह अपने आप सस्ती हो जाती है क्योंकि कोई पूछता ही नहीं उसको और हमारा देश! यह ऐसा देश है जहां पर जो सामान ज्यादा महंगा होता है लोग उसे खरीद कर अपने आपको बड़ा महसूस करते हैं।
इस समय टमाटर पर चर्चा हो रही है कि टमाटर बहुत महंगा हो गया। टमाटर बहुत महंगा हो गया रे। मैं कहता हूं टमाटर खाना ही छोड़ दो अपने आप सस्ता हो जाएगा।आपको क्या लगता है कि दो-चार 10 दिन टमाटर खाना छोड़ देंगे तो विटामिन की कमी हो जाएगी या फिर आप दुबले हो जाएंगे या फिर आपकी शारीरिक बनावट बदल जाएगी। एक महीना टमाटर खाना छोड़ दीजिए और हां जापान दुनियां का सबसे विकसित देश और औद्योगिकी के मामले में सबसे बड़ा देश ऐसे ही नहीं बना है उसकी सोच बड़ी है।

कैंची धाम ...... .....गया था, तब मंदिर में मेरे अलावा सिर्फ तीन लोग थे। इतनी शांति और इतनी ऊर्जा महसूस हुई कि सुबह गए तो...
03/07/2024

कैंची धाम ......
.....गया था, तब मंदिर में मेरे अलावा सिर्फ तीन लोग थे। इतनी शांति और इतनी ऊर्जा महसूस हुई कि सुबह गए तो शाम को ही लौटे।

इन छह सालों में आज हालत ऐसी हो चुकी है कि मंदिर में बैठना तो दूर की बात है, आप कैंची धाम में पैर भी नहीं रख सकते हैं। क्योंकि इंस्टाग्राम पर दर्जनों वीडियोज ये बता रहें हैं कि भाइयो- बहनों कैंची धाम जाइये, एप्पल और फेसबुक वहीं बने हैं..! आप भी बन जाएंगे।

हालात ये है कि हनीमून मनाने नैनीताल गए लोग भी कैंची धाम चले जा रहें हैं, "बाबू आइफोन लेकर क्या करोगी, जहां आईफोन बना है न, डायरेक्ट वहीं लेकर चलता हूँ।"

खैर...!

नीम करौरी बाबा......

जिस कोसी के किनारे को बाबा ने कभी साधना स्थली बनाई होगी, वहाँ बैठकर आज लोग बियर पी रहें हैं और नदी में उतरकर अश्लील हरकते करते हुए फ़ोटो खींचवा रहें हैं।

मेरे जैसे लोग, जो कई सालों से इस आश्रम को देख रहें हैं, उनसे ये सब देखा नही जाता। महाराज जी अगर आज जिंदा होते तो कैंची धाम बन्द करके कहीं और चल गए होते।"

भारत में धार्मिक पर्यटन अपने सबसे बड़े उफान पर है। पहाड़ की लोकल इकोनॉमी बूस्ट हो रही है। लोकल लोगो के पास पैसे आ रहें हैं, पलायन रुकेगा, रोजगार मिलेगा।

लेकिन हनुमान दास जी का भक्त मन, मेरे इन तमाम बाजारवादी तर्कों से तुष्ट न हुआ। वो कहते रहे कि भैया ये लोग भक्त नहीं हैं। ये चमत्कार की आस में आए हुए लोग हैं। इनको ध्यान और पूजा से मतलब नही है। मंदिर से बाहर निकलते ही ये भक्त नही रहते, उद्दंड हो जातें हैं।

लोगों का यहां आना बुरी बात नही है, बुरी बात है यहां की शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा और इसकी पहचान को नष्ट करना। आप लिखिए कि लोग आएं लेकिन इसकी ऊर्जा को नष्ट न करें। ये हल्ला-गुल्ला करने की जगह नही है, ये आंख बंद करके राम-राम करने और जय हनुमान जी करने की जगह है।

मेरे तो कुछ जानने वाले लोग अपना-अपना काम-धाम छोड़कर पर्ची निकलवाने बाबा बागेश्वर धाम जा चुके हैं।

अब बागेश्वर धाम जाकर उनकी अर्जी तो नही लगी, न ही पर्ची निकली। लेकिन उसी बागेश्वरधाम में आज कई लोग पर्ची निकालने वाले बाबा बन चुके हैं, क्योंकि धीरेंद्र बाबा के पास चार्टर प्लेन से नीचे उतरने का समय नही है।

लेकिन कहना गलत न होगा कि उनके यहां जो भी इकट्ठा हुई भीड़ है..उसे रामकथा और भागवद कथा नहीं सुनना है, उसे अर्जी लगवानी है, बिगड़ा काम बनवाना है।

ये बिगड़ा काम बनाने वाली वही भीड़ है जो चमत्कारों के सहारे जीवन गुजार रही है। वो बागेश्वरधाम नही जाएगी तो किसी चर्च में चली जाएगी।

किसी राम रहीम, आशाराम, किसी भोले बाबा के आश्रमो में रहीम आरती और आशुमल चालीसा गाएगी।

लेकिन कहीं न कहीं जरूर जाएगी....

इस भीड़ को आर्थिक, मानसिक, शारीरिक समस्या से तुरंत मुक्ति चहिये। एक झटके में छुटकारा चाहिए।

तभी तो इस भीड़ को सैंडल पहनकर भोले बाबा अपनी पैरों की धूल बेच देता है। कोई बाबा अपने खेतो में बैगन और मूली उगाकर एक-एक मूली लाखो में खरीदने पर बाध्य कर देता है। ये भीड़ मरती है, लुटती, पीटती है लेकिन बाबा के पास जाती जरूर है।

वो देखती है कि फलाना नेता भी बाबा के चरण में पड़े हुए हैं। फलाना आईएएस अफसर तो चरणामृत पीता है तो हम क्या चीज हैं।

लेकिन उसे समझ नहीं आता कि नेता तो इनके यहां वोट के लिए जाएंगे। अधिकारी जुगाड़ के लिए जाएंगे। बागेश्वर धाम की जरूरत भाजपा और कांग्रेस को होगी , भोले बाबा की जरूरत मायावती और अखिलेश यादव को रहेगी।

लेकिन आपको क्या जरूरत है भाई साहब ?

आपको जरूरत है, मानसिक इलाज़ की।

पूजा पाठ करना है तो सबसे पहले गीता उठाइये... और पढ़िए कि कर्म से बड़ी कोई पूजा नही है, गीता से बड़ा कोई गुरु नही है, न ही कृष्ण से बड़ा कोई उपदेशक है।

ी क्या है? तुर्की के प्रसिद्ध कवि नाजिम हिकमत ने अपने नामचीन चित्रकार मित्र आबिदीन से अनुरोध किया वह 'खुशी' पर एक पेन्टि...
02/06/2024

ी क्या है?

तुर्की के प्रसिद्ध कवि नाजिम हिकमत ने अपने नामचीन चित्रकार मित्र आबिदीन से अनुरोध किया वह 'खुशी' पर एक पेन्टिंग बनायें।

लिहाजा,आबिदीन ने एक चरमराये बिस्तर पर मधुर नींद सोये एक परिवार की पेन्टिंग बनायी।
उस बिस्तर का एक पाया भी टूटा हुआ था और वहाँ दो ईंटे लगा रखी गयी थी। उस जर्जर घर की छत भी चू रही थी। बिस्तर पर घर का कुत्ता भी सुख की नींद सोया था। आबिदीन की यह पेन्टिंग अमर हो गयी।

इस अमर चित्र को गहराई से देखिये और सोचिए कि खुशी वास्तव मे है क्या!!
दरअसल,मुझे तो यह चित्र देखकर लगता है कि खुशी मुसीबतों की अनुपस्थिति नहीं,बल्कि मुसीबत की स्थिति को भी सहज भाव से स्वीकारने में है।
आपके पास जो भी है,उसमें अच्छा देखने की कोशिश करिए,चाहे कैसी भी बुरी स्थिति हो। ऐसी बातों के लिए दुखी होना छोड़ दीजिए,जो आपके नियंत्रण में नहीं।

किसी वृक्ष के पास जाओ, वृक्ष से बातें करें, वृक्ष को छूएं, वृक्ष को गले लगाएं, वृक्ष को महसूस करें, वृक्ष के पास बैठें औ...
04/05/2024

किसी वृक्ष के पास जाओ, वृक्ष से बातें करें, वृक्ष को छूएं, वृक्ष को गले लगाएं, वृक्ष को महसूस करें, वृक्ष के पास बैठें और वृक्ष को भी महसूस होने दें कि आप एक अच्छे आदमी हैं और आपकी आकांक्षा उसे चोट पहुंचाने की नहीं है।
धीरे-धीरे मैत्री बढ़ेगी और आप महसूस करेंगे कि जब आप आते हैं, तत्क्षण वृक्ष की भाव दशा बदलती है। आपको बिलकुल पता चलेगा। जब आप आएंगे तो वृक्ष की छाल पर बहुत ऊर्जा का प्रवाह अनुभव होगा। आपको स्पष्ट बोध होगा कि जब आप वृक्ष को छूते हैं, तो वह बच्चे की तरह, एक प्रियतम की तरह आनंदित होता है। जब आप वृक्ष के पास बैठेंगे तो आपको कई चीजें खयाल में आने लगेंगी और शीघ्र ही आप महसूस करेंगे कि यदि आप उदास हैं और वृक्ष के पास आए हैं, तो वृक्ष की उपस्थिति मात्र से आपकी उदासी खो गई।

और, केवल तभी आप समझ सकेंगे कि हम सब परस्पर निर्भर हैं। हम वृक्ष को आनंदित कर सकते हैं और वृक्ष हमें आनंदित कर सकते हैं। और, यह पूरा जीवन ही परस्पर निर्भर है। इसी निर्भरता को परमात्मा कहता है...

31/03/2024

माननीय सुप्रीम कोर्ट ने याचिका संख्या
CIVIL APPEAL NO. 4103 OF 2022को निस्तारित करते हुए 20 मई 2022 को अपने आदेश मे कहाँ है की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदनों पर 6 महीने में फैसला किया जाए :
अर्थात 6 महीने के अंदर अनुकम्पा आधार पर नियुक्ति कर दी जाय.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदनों पर समयबद्ध तरीके से फैसला किया जाना चाहिए, न कि आवेदन जमा करने की तारीख से छह महीने की अवधि के बाद । सुप्रीम कोर्ट को आशंका थी कि यदि आवेदनों पर शीघ्रता से निर्णय नहीं लिया गया तो ऐसी नियुक्तियों का पूरा उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। ".. अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के उद्देश्य और लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यानी, मृत कर्मचारी के परिवार को सेवा में रहते हुए कर्मचारी की असामयिक मृत्यु पर वित्तीय कठिनाई की स्थिति में रहने और तत्काल मृतक के परिवार को उसकी असामयिक मृत्यु के परिणामस्वरूप वित्तीय सहायता के लिए नीति के तहत प्राधिकरण को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए ऐसे आवेदनों पर जल्द से जल्द विचार और निर्णय लेना चाहिए, लेकिन पूर्ण आवेदन दाखिल करने की तारीख से छह महीने की अवधि से परे ना हो। "

पैराग्राफ 9

9. Before parting with the present order, we are constrained to
observe that considering the object and purpose of appointment on
compassionate grounds, i.e., a family of a deceased employee may be
placed in a position of financial hardship upon the untimely death of the
employee while in service and the basis or policy is immediacy in
rendering of financial assistance to the family of the deceased
consequent upon his untimely death, the authorities must consider and
decide such applications for appointment on compassionate grounds as
per the policy prevalent, at the earliest, but not beyond a period of six
months from the date of submission of such completed applications.
We are constrained to direct as above as we have found that in
several cases, applications for appointment on compassionate grounds
are not attended in time and are kept pending for years together. As a
result, the applicants in several cases have to approach the concerned
High Courts seeking a writ of Mandamus for the consideration of their
applications. Even after such a direction is issued, frivolous or vexatious
reasons are given for rejecting the applications. Once again, the
applicants have to challenge the order of rejection before the High Court
which leads to pendency of litigation and passage of time, leaving the
family of the employee who died in harness in the lurch and in financial
difficulty. Further, for reasons best known to the authorities and on
irrelevant considerations, applications made for compassionate
appointment are rejected. After several years or are not considered at all
as in the instant case.
If the object and purpose of appointment on compassionate
grounds as envisaged under the relevant policies or the rules have to be
achieved then it is just and necessary that such applications are
considered well in time and not in a tardy way. We have come across
cases where for nearly two decades the controversy regarding the
application made for compassionate appointment is not resolved. This
consequently leads to the frustration of the very policy of granting
compassionate appointment on the death of the employee while in
service. We have, therefore, directed that such applications must be
considered at an earliest point of time. The consideration must be fair,
reasonable and based on relevant consideration. The application cannot
be rejected on the basis of frivolous and for reasons extraneous to the
facts of the case. Then and then only the object and purpose of
appointment on compassionate grounds can be achieved.
.......................................

बेरोजगार भारत मनाली की तरफ दिहाड़ी की खोज में जाता हुआ...!!!
29/12/2023

बेरोजगार भारत मनाली की तरफ दिहाड़ी की खोज में जाता हुआ...!!!

!! पूत कपूत तो का धन संचय,          पूत सपूत तो का धन संचय।।सुब्रत रॉय ने दोनों बेटों की शादी में देश विदेश के VVIP इक्ट...
21/11/2023

!! पूत कपूत तो का धन संचय,
पूत सपूत तो का धन संचय।।

सुब्रत रॉय ने दोनों बेटों की शादी में देश विदेश के VVIP इक्ट्ठे किए। बड़े से बड़े नेता, बिजनेसमैन, हीरो, हीरोइन, स्पोर्ट्स पर्सन और समाज के खास व बड़ी शख्सियतों ने शिरकत किया। 2004 में जब दोनों बेटों की शादी एक ही दिन हुई तो 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च (ज़ाया) किए गए। अमिताभ सलमान से लेकर सुष्मिता ऐश्वर्या ने गेट पर खड़े रह कर सबका स्वागत किया। क्रिकेटर्स, जानी मानी हस्तियां खाना खिलाते नजर आईं। बाकी सजावट तो छोड़िए, एक करोड़ रुपए की डिजायनर मोमबत्ती जलाई गई जो डिंपल कपाड़िया की कंपनी पर एहसान जताने के तहत खरीदी गई थी।

वक्त बदला, हालात बदले... और बाप जब कानूनी घेरे और जेल के चक्कर में फंसे तो दोनों बेटा हजारों करोड़ रुपए लेकर विदेश जा बसे।

क़रीब दो दिन इंतज़ार के बावजूद दोनों बेटे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। बेटों ने बड़े ही बेशर्मी और ढिठाई से आने में असमर्थता जता दी। शायद डर हो कि केस मुकदमे की गाज बेटों पर न गिर जाए। अगर गाज गिरनी होगी तो विदेश से भी उठा लिए जाएंगे।

ऐसे मौके के लिए किसी शायर ने लिखा है....

मेरी नमाज़-ए-जनाज़ा पढ़ी है ग़ैरों ने
मरे थे जिन के लिए वो रहे वज़ू करते
बाप दादाओं के धन से प्रेम करने वाले उनसे ही प्रेम करना भूल जाते है 🙏

17/08/2023
Congratulations to fellow certified Mediators ! Heartfelt regards to the Mentors for the excellent training and to Delhi...
05/08/2023

Congratulations to fellow certified Mediators ! Heartfelt regards to the Mentors for the excellent training and to Delhi Dispute Resolution Society (Department of Law Justice & Legislative Affairs- GNCT of Delhi Government Mediation & Conciliation Centres ), for amazing organisation.
It was an honour to have been certified and I am even more Honoured to recieve certification at the hands of Hon'ble Mr. Justice M.L. Mehta, Chairman of DDRS, along with distinguished individuals like Sh. Bharat Parashar, Principal Secretary of Law, Justice & L.A., GNCTD, Sh. Alok Aggarwal, Director of DDRS and other judges.
Thank you Ms. Anuja Saxena, Advisor at DDRS, Ms. Puja Dewan, Additional Director, and Sh. Sharad Kumar Srivastava, Superintendent and Ms. Deepika Mam for trusting me for excellent training.Thanx to graced the ceremony to honor the recipients.

The graceful occasion was impeccably hosted by Ms. Deepeeka Arora, Officiating Supdt., Administration, who ensured the smooth flow of the distribution. The entire team at DDRS, including Sh. Pankaj Sethi, Sh. Yogesh Kumar, Sh. Shrichand Rawat and Sh. Sawan put in dedicated efforts to ensure the day was organized flawlessly.
😊

The two daughters "Mahi" and "Priyanka" want to visit their father's place of work.  To fulfill the wishes of his daught...
04/08/2023

The two daughters "Mahi" and "Priyanka" want to visit their father's place of work. To fulfill the wishes of his daughters, he took them to his place of work . Supreme Court. The two daughters visited their father's workplace and were overwhelmed with joy. Their happiness is boundless today. Father is the Chief Justice of the Supreme Court - Hon'ble D Y Chandrachur .Mother Mrs. Kalpana Chandrachur ,two daughters are sitting in wheel chair. The picture is taken in the Supreme Court complex. Mahi and Priyanka are both differently able. Can't walk without wheelchair. Besides, both are adopted daughters of Chandrachud couple. *THE GREATNESS IN PRACTICE NOT IN THEORY*

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Delhi High Court & District Courts
Delhi
110003

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