26/09/2026
करियर बनाना हर किसी का हक है, जेंडर चाहे जो भी हो! फिर 'वर्किंग वुमन' के लिए शादी रुकावट क्यों?
अपना करियर संवारना और आगे बढ़ना हर किसी का बुनियादी अधिकार है, चाहे वो महिला हो या पुरुष। लेकिन हमारे समाज में अक्सर करियर-ओरिएंटेड लड़कियां शादी को अपने सपनों के बीच की एक रुकावट मानती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है— 'डबल बर्डन' । शादी के बाद एक कामकाजी महिला से यह उम्मीद की जाती है कि वह ऑफिस में भी 100% दे और घर का पूरा कामकाज भी अकेले ही संभाले।
क्या था मद्रास हाई कोर्ट का ताज़ा मामला? हाल ही में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने इसी अहम मुद्दे पर एक बेहद प्रोग्रेसिव फैसला सुनाया है। यह मामला 2011 में शादी करने वाले एक डॉक्टर दंपती के तलाक का था। इस केस में पत्नी एक वर्किंग वुमन थी, जिस पर नौकरी के साथ-साथ घर के कामकाज का भारी दबाव था। पति का घरेलू जिम्मेदारियों में बिल्कुल हाथ न बंटाना ही इस शादी के टूटने की असली वजह बना।
कोर्ट ने समाज को दिखाया आईना: इस फैसले के दौरान जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस एम.डी. सुमति ने एक ऐतिहासिक टिप्पणी की। जजों ने साफ कहा कि महिलाओं पर पड़ने वाला यह 'दोहरा दबाव' ही आजकल शादियां टूटने का सबसे बड़ा कारण है और जब तक इस असली वजह को हाईलाइट नहीं किया जाएगा, यह समस्या ठीक नहीं होगी।
समाधान बताते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब महिलाएं अपने करियर पर फोकस कर रही हैं, तो 'होममेकर' की भूमिका को जेंडर-न्यूट्रल होना चाहिए। जजों ने कहा— "अगर समाज में एक 'Housewife' की भूमिका हो सकती है, तो एक 'House-husband' की भूमिका भी हो सकती है। इसे अब समाज में एक 'न्यू नॉर्मल' बन जाना चाहिए।"
अब वक्त आ गया है कि घर के काम को सिर्फ महिलाओं की ड्यूटी मानना बंद किया जाए। एक सफल शादी वही है, जहां जिम्मेदारियां भी बराबर बांटी जाएं।
आप मद्रास हाई कोर्ट के इस विचार पर क्या सोचते हैं? क्या हमारा समाज इस बदलाव के लिए तैयार है? अपनी राय कमेंट्स में बताएं! 👇
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