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24/06/2026

अगर आपके घर में बेटी, बहन या पत्नी हैं, जो अकेले कैब में सफर करती हैं- तो यह आर्टिकल उनके लिए है।

कैब में अकेली? डरें नहीं

कैब बुक करने से लेकर मंजिल पर पहुंचने तक, सुरक्षा के लिए इन बातों का रखें ध्यान

बेंगलुरु में हाल ही में कैब में फंसी एक महिला की हिम्मत ने बड़ी अनहोनी को टाल दिया, लेकिन इस घटना ने कैब में अकेले सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आज के दौर में पढ़ाई, जॉब, नाइट शिफ्ट या किसी इमरजेंसी की वजह से महिलाओं का अकेले कैब में सफर करना आम है। ऐसे में सतर्क और तैयार रहना अहम है, न कि डर कर घर बैठ जाना। अकेले सफर करते समय किन बातों का रखें ध्यान? 14 लाख से ज्यादा लड़कियों को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देने वालीं और राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित कई सम्मान हासिल कर चुकीं लेडी सिंघम के नाम से मशहूर दिल्ली पुलिस की सब इंस्पेक्टर किरण सेठी से बात कर जानकारी दे रहे हैं वरुण आनंद

बीते दिनों बेंगलुरु में 27 साल की प्रज्ञा (बदला हुआ नाम) देर रात कैब से घर लौट रही थीं। ड्राइवर ने रास्ता बदला, सुनसान जगह गाड़ी रोकी और पिछली सीट पर आकर छेड़छाड़ की कोशिश की। प्रज्ञा घबराईं नहीं। उन्होंने हिम्मत से काम लिया। पति को फोन किया और जोर से चिल्लाने लगीं। ड्राइवर घबराकर भागने लगा, लेकिन प्रज्ञा ने दौड़कर उसका कॉलर पकड़ लिया। प्रज्ञा की बहादुरी से उस रात एक बड़ी अनहोनी होने से बच गई, लेकिन यह सवाल भी खड़े कर गई कि कैब में अकेले सफर करने वाली महिलाओं को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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कैब में बैठने से पहले
नंबर याद रखें: किसी एक घर वाले का नंबर ज़रूर याद रखें। इंटरनेट न होने या अपना फोन न होने की स्थिति में काम आएगा।
इमरजेंसी बटन: फोन चाहे एंड्राॅइड हो या एपल दोनों में इमरजेंसी नंबर के बटन को ऐक्टिव रखें।
स्क्रीनशॉट शेयर करें: कैब बुक होने पर बुकिंग का स्क्रीनशॉट अपने सबसे करीबी रिश्तेदारों या दोस्तों से शेयर करें।
फोटो लें: कैब की नंबर प्लेट, ड्राइवर की फोटो क्लिक कर उसे भी अपनों से शेयर करें।
क्रॉस-चेक करें: यह ज़रूर चेक कर लें कि कैब के ऐप पर गाड़ी का जो नंबर है, वही कैब लेने आई है या नहीं?
लाइसेंस मांगें: कैब का नंबर अलग हो या ऐप की जगह कोई प्राइवेट टैक्सी बुक की हो तो ड्राइवर से लाइसेंस मांगें और फोटो क्लिक करके शेयर करें। वह ऐसा करने से रोक नहीं सकता। अगर रोकता है तो सतर्क हो जाएं या दूसरी टैक्सी करें।
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बैठने के बाद

सही सीट चुनें: ड्राइवर के सीधे पीछे की या दूसरी तरफ वाली सीट पर बैठने के बजाय पीछे सेंटर में बैठें। इससे ज़रूरत पड़ने पर किसी भी साइड आने में समय नहीं लगेगा और सामने वाले शीशे से देख सकेंगी कि गाड़ी सही रास्ते पर है या नहीं?
लाइव लोकेशन: बैठते ही अपनी लाइव लोकेशन करीबियों से शेयर करें, ताकि वे आपको ट्रैक कर सकें।
फोन पर बात (या एक्टिंग) करें: कैब में बैठते ही किसी अपने को फोन करें या फोन करने की ऐक्टिंग करें। फोन पर बोलें- हां, कैब में बैठ गई, इतने बजे तक पहुंच जाऊंगी।
चाइल्ड लॉक और शीशा: कम से कम दो उंगली जितना शीशा दोनों तरफ का हमेशा खुला रखें और चेक कर लें कि चाइल्ड लॉक तो ड्राइवर ने नहीं लगा रखा है।
रास्ते पर नज़र: अपनी निगाहें रास्ते पर रखें और अपने मोबाइल पर गूगल मैप भी ऑन रखें।
तुरंत पूछें: रात में जाम या बैरीकेडिंग की बात कह कर ड्राइवर दूसरे रास्ते से ले जाने लगे तो फौरन उसे टोकें। बदला रास्ता सही है या नहीं, कहीं आगे बहुत सुनसान तो नहीं हो जाएगा इसका भी ध्यान रखें।
SOS: Ola या Uber एप में दिए गए SOS बटन को ऐक्टिव रखें। इसे दबाते ही आपकी लाइव लोकेशन और ट्रिप की जानकारी पुलिस और आपके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट तक पहुंच जाती है।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल: अगर कोई खतरा दिखे तो ड्राइवर की फोटो, जानकारी या मैं खतरे में हूं (जैसे हालात हों वैसा करें) लिखकर अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म जैसे वाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसबुक के स्टेटस पर लगाएं। इसमें चंद सेकंड लगते हैं और आपके कॉन्टैक्ट में जितने लोग हैं, सब तक वह जानकारी पहुंच जाती है। उनमें से कुछ भी देख लेंगे तो आपकी मदद के रास्ते निकाल लेंगे।
---------------------------------------------------------..तो समझ जाएं ड्राइवर की नीयत है खराब
-अगर ड्राइवर बार-बार रियर व्यू मिरर (शीशे) से आपको देखे, अजीब इशारे करे या स्माइल करे, तेज़ आवाज में अश्लील गाने बजाए या गाने गुनगुनाए या फिर बहुत ज्यादा फ्रेंडली भाषा में बात करके क्लोज होना चाहे तो समझ जाएं कि इसका इरादा सही नहीं है। ऐसे में तुरंत गाड़ी रुकवाने की जगह भीड़-भाड़ या ऐसी जगह जहां कुछ लोग हैं, वहां कैब रोकने को कहें। जैसे-पेट्रोल पंप, रेड लाइट, किसी ढाबे या होटल आदि जगहों पर।
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अगर खतरे से हो जाए सामना तो...डरें नहीं, लड़ें
घबराएं नहीं: ऐसे हालात से निपटने का पहला ही नियम है, घबराएं नहीं, हिम्मत से काम लें।
चिल्लाएं: चिल्लाना और गुस्से यानी रौद्र रूप में ड्राइवर से बात करने पर वह घबरा जाएगा। (बेंगलुरु की प्रज्ञा के मामले में यही हुआ।)
मदद के लिए कॉल: तुरंत 112 या किसी अपने को कॉल करें। पूरे हालात बताएं और बचाने की मदद मांगें।
इस तरह पहनें चुन्नी या स्कार्फ: चुन्नी या स्कार्फ को सामने से पीछे की ओर डालने की जगह गर्दन के पीछे से आगे की ओर डालें, ताकि ज़रूरत पड़ने पर दोनों हाथों से पल भर में उसे उतारकर आगे की सीट पर बैठे ड्राइवर की गर्दन में डाल कर कस सकें।
चूड़ी या कड़े में रखें सेफ्टीपिन: पहले के समय में महिलाएं अपनी चूड़ियों में सेफ्टीपिन रखती थीं। यह ज़रूरत पर काम आने की भी चीज़ है और किसी मुसीबत में मदद करने वाला हथियार भी है।
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हैंडबैग की स्ट्रैप सहित अंदर ‘हथियारों’ का जखीरा
हैंडबैग की स्ट्रैप: इसे आगे बैठे ड्राइवर की गर्दन में डाल कर उसका गला दबाया या दबोचा जा सकता है।
सेफ्टीपिन, हेयर पिन या ऑलपिन: इससे उस पर सीधे वार किया जा सकता है।
परफ्यूम: आंखों में छिड़क देने से उसे संभलने में समय लगेगा और आप अपना अगर कदम उठा पाएंगी।
नेल कटर/पेन/कंघी/चाबियां/ नेल फाइलर: यह चाकू के रूप में काम आ सकता है और सही जगह पर वार करने पर उसे घायल कर सकता है।
छाता: अगर हैंडबैग में यह है तो इसे डंडे की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
पानी की बोतल: मजबूत पानी की बोतल से सिर पर वार करने से उसे बेहोश किया जा सकता है।
मोबाइल: कुछ नहीं तो कम से कम मोबाइल ज़रूर होगा। इसे हाथ में मजबूती से पकड़कर उसके सिर पर वार कर सकती हैं।
नोट: नुकीली चीज़ सिर्फ चुभाएं नहीं, उससे उसे चीर दें।
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कहां और कैसे करें वार
-किसी भी नुकीली चीज़ जैसे सेफ्टीपिन, हेयर पिन या ऑलपिन से उसके कान के पीछे, गर्दन आदि पर वार करें, इससे उसे संभलने का मौका नहीं मिलेगा। इन्हें केवल चुभाएं नहीं, बल्कि उसके उस अंग को चीर दें।
-अगर कैब से बाहर आ गए हैं तो उसकी आंखों में दोनों उंगुलियों से वी (V) बनाकर वार करने पर उसे कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाएगा।
-अपनी कोहनी, घुटने से उस पर हमला कर सकती हैं। नाक पर जोरदार पंच उसका दिमाग घुमा देगा।
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ये गलतियां कभी न करें
शराबी की कैब में न बैठें: महक से पता चल जाए कि ड्राइवर ने शराब पी रखी है तो भूल कर भी उस कैब से सफर न करें। भले ही वह कहे कि मैडम बहुत थक गया था या कल की पी हुई है, उसी की स्मेल है।
अपना मोबाइल मत दें: ‘मेरा डेटा खत्म है, सिग्नल नहीं आ रहा’ या कोई और बहाना मारकर आपका फोन मैप या कॉल के लिए मांगे तो न दें।
उसका दिया कुछ खाएं या पिएं न: ‘मैडम यह मिनरल वॉटर या कुकीज कंपनी की तरफ से दी गई हैं या मैडम बहुत प्यास लगी है, मैं दुकान से पानी ले लेता हूं, आपके लिए भी ले लेता हूं।’ ध्यान रहे, कैब में ड्राइवर की हुई कोई भी चीज़ न खाएं न पिएं।
उसके दिए नोट को सूंघें नहीं: अगर ऑनलाइन पेमंट की जगह नोट में पैसा दे रही हैं, तो ड्राइवर के दिए नोट को रखने के बाद उन उंगलियों को नाक के पास कभी न लाएं। उसमें बेहोश करने वाला केमिकल हो सकता है।
नोट: गर्मियों में बहुत प्यास लगने पर भी ड्राइवर का दिया पानी का कोई और ड्रिंक न लें। अगर वह किसी दुकान से लेकर दे रहा है तो भी न लें, दुकानदार भी मिला हो सकता है। प्यास पर काबू करने के लिए शीतली प्राणायाम का अभ्यास करें। यह शरीर के भीतर के तापमान को कम करके प्यास कम करने में मदद कर सकता है। बेहतर होगा अपने पानी की बोतल साथ रखें।

112 नंबर हमेशा रखें याद। पूरे देश में आपात स्थिति में पुलिस की मदद के लिए इस नंबर पर कॉल करें।

नोट: यहां बताईं सभी बातें आत्मरक्षा के लिए हैं। अकेले में खतरे की स्थिति में अपनाएं न कि किसी को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के लिए।

fans

29/05/2026

⚖️ सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक जांच प्रक्रिया में कानून के पालन को लेकर किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा है कि जब पुलिस क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर देती है, तो उसके बाद आगे की जांच (Further Investigation) शुरू करने के लिए संबंधित मजिस्ट्रेट की स्पष्ट अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना न्यायालय की अनुमति के की गई कोई भी आगे की जांच कानून की प्रक्रिया का उल्लंघन मानी जाएगी।

यह महत्वपूर्ण टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिश्वर सिंह शामिल थे, ने PALINISWAMY VEERARAJA & ORS. बनाम THE STATE OF KARNATAKA & ANR. मामले में सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस निर्णय को रद्द कर दिया, जिसमें बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के आगे की जांच को वैध ठहराया गया था।

सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि भले ही दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 173(8) में आगे की जांच के लिए अनुमति का स्पष्ट उल्लेख न हो, लेकिन समय के साथ विकसित हुए न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार अब यह एक अनिवार्य शर्त बन चुकी है कि ऐसी किसी भी जांच से पहले अदालत की अनुमति ली जाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि इस आवश्यकता को केवल औपचारिकता नहीं माना जा सकता, बल्कि यह न्यायिक निगरानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

इस मामले में अपीलकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया था कि बिना अनुमति के की गई आगे की जांच और उसके आधार पर दाखिल की गई चार्जशीट कानून की दृष्टि से गलत है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए यह भी माना कि हाईकोर्ट ने CrPC की व्याख्या में गलती की है। अदालत ने पहले के कई फैसलों जैसे Rama Chaudhary बनाम बिहार राज्य (2013), Vinay Tyagi बनाम Irshad (2013), Pitambaran बनाम केरल राज्य (2023) और Robert Lalsangthunga Chongthu बनाम बिहार राज्य (2025) का हवाला देते हुए यह दोहराया कि आगे की जांच और पूरक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए न्यायालय की अनुमति एक आवश्यक निहित शर्त है।

अदालत ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए यह भी पाया कि तीसरी बार आगे की जांच की अनुमति के लिए आवेदन तो दिया गया था, लेकिन किसी भी प्रकार का स्पष्ट आदेश रिकॉर्ड में मौजूद नहीं था, न ही यह साबित किया गया कि मजिस्ट्रेट से अनुमति ली गई थी। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने आगे की जांच और उसके परिणामस्वरूप दाखिल चार्जशीट को अवैध करार दिया और अपील को स्वीकार कर लिया।

अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में अभियोजन जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा और न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ होगा, क्योंकि पूरी आगे की जांच बिना न्यायिक अनुमति के की गई थी।

04/03/2026

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