Rudresh Kumar LL.M.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! ⚖️एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर पीडिता व आरोपियों दोनों पर पांच लाख का जुर्माना! इलाहा...
19/08/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला! ⚖️

एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग पर पीडिता व आरोपियों दोनों पर पांच लाख का जुर्माना! इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसे कानून और राज्य के साथ छल का उदाहरण माना।

अपना जीवनसाथी चुनना मौलिक अधिकार! अंतरधार्मिक विवाह करने वाले बालिग दंपती को कोर्ट की सुरक्षा– ⚖️
19/08/2026

अपना जीवनसाथी चुनना मौलिक अधिकार! अंतरधार्मिक विवाह करने वाले बालिग दंपती को कोर्ट की सुरक्षा– ⚖️

19/08/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ (न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संतान न होने पर पति-पत्नी के बीच हुई कहासुनी या बहस के दौरान पत्नी को 'बांझ' कहना असंवेदनशील और निंदनीय है, लेकिन केवल इसी टिप्पणी को IPC की धारा 498-A (क्रूरता) के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि दोनों पक्षों की ओर से हुई तीखी बयानबाजी और आपसी विवादों के चलते दर्ज कराए गए मुकदमे में पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ (न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला स...
18/08/2026

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ (न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल) ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संतान न होने पर पति-पत्नी के बीच हुई कहासुनी या बहस के दौरान पत्नी को 'बांझ' कहना असंवेदनशील और निंदनीय है, लेकिन केवल इसी टिप्पणी को IPC की धारा 498-A (क्रूरता) के तहत अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि दोनों पक्षों की ओर से हुई तीखी बयानबाजी और आपसी विवादों के चलते दर्ज कराए गए मुकदमे में पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया।

18/08/2026

आरोपी के खिलाफ विशिष्ट आरोप नहीं हैं तो केवल विस्तृत चार्जशीट के आधार पर आपराधिक कार्यवाही जारी नहीं रखी जा सकती:-
सुप्रीम कोर्ट

क्या आप जानते हैं कि कानूनन एक पति अपनी पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण (maintenance) देने के लिए बाध्य है? सुप्रीम कोर्ट के...
18/08/2026

क्या आप जानते हैं कि कानूनन एक पति अपनी पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण (maintenance) देने के लिए बाध्य है?

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार, यदि पति सक्षम है, तो वह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता—चाहे वह बेरोजगार ही क्यों न हो। परिवार की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा करना कानून की प्राथमिकता है।

अपनी कानूनी सुरक्षा के लिए जागरूक बनें। इसे अपनों के साथ शेयर करें!

18/08/2026

आवेदन की तिथि से ही मिलेगा गुजारा भत्ता पति की अर्जी ख़ारिज:-
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

18/08/2026

आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से पुलिस क्लियरेंस प्रमाणपत्र देने से इनकार नहीं किया जा सकता:-
केरल हाईकोर्ट

18/08/2026

अपीलीय अदालत के पास पर्याप्त साक्ष्य हो तो मामले को दोबारा निचली अदालत नहीं भेज सकती:-
सुप्रीम कोर्ट

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