14/11/2024
पुरानी IPC और नई BNS की तुलना:
(एक संक्षिप्त विश्लेषण)
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भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली में IPC और BNS के बीच मुख्य अंतर
भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860 में स्थापित हुई थी, जो समय के साथ कई बार संशोधित हुई। वर्तमान में अपराधों के लिए दंड को और प्रभावी बनाने हेतु भारतीय न्याय संहिता 2023(BNS) 1जुलाई 2024 से प्रभावी हो गई है।
IPC और BNS के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
1. वाहन दुर्घटना: IPC की धारा 279, 336, 304(A) आदि की जगह BNS में धारा 281, 125 का प्रावधान है।
2. चोट पहुंचाना: IPC की धारा 323-326 के स्थान पर BNS में 115(2), 352 जैसी धाराएँ शामिल हैं।
3. चोरी और डकैती: IPC की धारा 379, 392 आदि के स्थान पर BNS में 303(2), 331 आदि का प्रावधान है।
4. हत्या और आत्महत्या: IPC की धारा 302, 304 के मुकाबले BNS में धारा 103, 108 लाई गई है।
5. महिला उत्पीड़न: IPC की धारा 498(a) के बदले BNS में धारा 85, 80(2) है।
6. यौन उत्पीड़न और बलात्कार: IPC की 354 और 376 धाराओं की जगह BNS में 64-79 तक प्रावधान हैं।
7. अपहरण: IPC की धारा 363 के मुकाबले BNS में 137(2), 87 का प्रावधान है।
BNS का उद्देश्य अपराधों पर अधिक सख्त और आधुनिक दंड लागू करना है, जिससे समाज में कानून व्यवस्था सुदृढ़ हो।