All India Young Lawyers Association

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पालतू Dogs भी महसूस करते हैं—दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी।गोद लेने वाले मालिकों के साथ उनका रिश्ता कानूनी रूप से अहम ...
18/04/2026

पालतू Dogs भी महसूस करते हैं—दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी।
गोद लेने वाले मालिकों के साथ उनका रिश्ता कानूनी रूप से अहम माना गया।
यह फैसला animal rights के लिए एक बड़ा कदम है।
👉 अधिक जानकारी विस्तार से कमेंट बॉक्स में पढ़ें....

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में वोट डालने वाले उन ना...
16/04/2026

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को आदेश दिया है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में वोट डालने वाले उन नागरिकों को भी मतदान का अधिकार मिल सके, जिनकी वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर अपीलें अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा 21 अप्रैल या 27 अप्रैल, 2026 तक स्वीकार कर ली जाती हैं।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि अपीलीय ट्रिब्यूनल 21 अप्रैल (पहले चरण) या 27 अप्रैल (दूसरे चरण) तक किसी अपील पर फैसला सुना देता है और वोटर को सूची में शामिल करने का आदेश देता है, तो चुनाव आयोग को तुरंत एक सप्लीमेंट्री संशोधित मतदाता सूची जारी करनी होगी। इससे ऐसे वोटर 23 अप्रैल (पहले चरण) और 29 अप्रैल (दूसरे चरण) को अपना वोट डाल सकेंगे।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह व्यवस्था की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ अपील दायर कर देने भर से किसी को वोटिंग का अधिकार नहीं मिल जाएगा। केवल वे लोग ही मतदान कर पाएंगे, जिनकी अपील अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा मंजूर हो चुकी होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर अपील अभी लंबित है, तो ऐसे व्यक्तियों को अंतरिम रूप से वोट डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसा करने पर आपत्तिकर्ताओं की अपीलों पर भी समान व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया फिर से जटिल हो जाएगी।

कोर्ट का तर्क
खंडपीठ ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की सराहना की। कोर्ट ने दर्ज किया कि राज्य के न्यायिक अधिकारियों ने झारखंड और ओडिशा के अधिकारियों की मदद से मात्र कुछ दिनों में 60 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा किया, जिसे कोर्ट ने “अत्यंत कठिन कार्य” (Herculean Task) करार दिया।

अभी तक अपीलीय ट्रिब्यूनलों के सामने 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर हो चुकी हैं, जिनमें नाम गलत तरीके से हटाए जाने और गलत तरीके से जोड़े जाने दोनों तरह की शिकायतें शामिल हैं।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की आशंकाएं समय से पहले हैं, क्योंकि अपीलीय तंत्र सक्रिय है और जरूरत पड़ने पर राहत देने में सक्षम है।

महत्वपूर्ण निर्देश
अपील स्वीकार होने पर वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने और मतदान अधिकार से जुड़े सभी कदम स्वतः उठाए जाएंगे।
मुख्य बैच की अगली सुनवाई 24 अप्रैल 2026 को होगी।

मामला: Mostari Banu v. The Election Commission of India (WP(C) No. 1089/2025 और संबंधित याचिकाएं

हिंदुस्तान की सबसे मंहगी गाड़ियाँ एक साथ एक पार्किंग में देखनी है तो सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पार्किंग में आइये।
16/04/2026

हिंदुस्तान की सबसे मंहगी गाड़ियाँ एक साथ एक पार्किंग में देखनी है तो सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट पार्किंग में आइये।

 #जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा ✍🏻✍🏻 #महाभियोग की तलवार: इस्तीफा तब आया जब लोकसभा के 140 से अधिक सदस्यों ने उ...
11/04/2026

#जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा ✍🏻✍🏻
#महाभियोग की तलवार: इस्तीफा तब आया जब लोकसभा के 140 से अधिक सदस्यों ने उन्हें हटाने के लिए महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव का समर्थन किया था।
​इस्तीफा बनाम महाभियोग जस्टिस वर्मा के सामने अब कई बड़ी चुनौतियां हैं नए नियमों के अनुसार, यदि किसी अधिकारी के खिलाफ जांच चल रही है, तो उसका इस्तीफा आसानी से स्वीकार नहीं किया जाता। ऐसे में उन्हें महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है।
​यदि इस्तीफा मंजूर हो जाता है, तो उनके खिलाफ BNS (भारतीय न्याय संहिता) और 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' के तहत CBI जांच और FIR हो सकती है।

🚨 “एक अधिवक्ता की चेतावनी अनसुनी… और सिस्टम की चुप्पी ने ले ली जान!” 🚨मिर्जापुर की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि व्...
11/04/2026

🚨 “एक अधिवक्ता की चेतावनी अनसुनी… और सिस्टम की चुप्पी ने ले ली जान!” 🚨
मिर्जापुर की यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की घोर लापरवाही का दर्दनाक परिणाम है। अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह ने पहले ही अपनी जान को खतरा बताया था। उन्होंने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी… लेकिन अफसोस, उस गुहार को गंभीरता से नहीं लिया गया।
👉 अगर उसी समय पुलिस सतर्क हो जाती,
👉 अगर आवेदन पर तुरंत कार्रवाई होती,
तो शायद आज एक परिवार उजड़ने से बच जाता…
💔 दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि:
क्या अब चेतावनी भी बेअसर हो चुकी है?
क्या किसी की जान की कीमत सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?
⚖️ एक अधिवक्ता — जो न्याय की लड़ाई लड़ता है — जब खुद असुरक्षित हो जाए, तो यह पूरे न्याय तंत्र के लिए चिंता का विषय है। यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी बताती है कि लापरवाही और देरी कितनी घातक हो सकती है।
📌 हत्या के बाद प्रशासन की सक्रियता दिखाना पर्याप्त नहीं है।
👉 असली जिम्मेदारी तब होती है, जब खतरे की सूचना मिले — और उस पर समय रहते कार्रवाई हो।
📢 आज जरूरत है:
दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी
मामले की निष्पक्ष और तेज जांच
और उन अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की, जिन्होंने चेतावनी को नजरअंदाज किया
🔥 यह सिर्फ एक अधिवक्ता की लड़ाई नहीं है,
यह हर उस व्यक्ति की आवाज है जो सिस्टम से सुरक्षा की उम्मीद करता है।
अगर अब भी हम चुप रहे,
तो आने वाला कल और भी खतरनाक हो सकता है…
🔴

मुनाफा का लालच देकर निवेशकों के पैसे नहीं लौटाने  वाली सहारा समेत उसकी अन्य कम्पनी की प्रदेश भर के जिलों में दर्ज शिकायत...
11/04/2026

मुनाफा का लालच देकर निवेशकों के पैसे नहीं लौटाने वाली सहारा समेत उसकी अन्य कम्पनी की प्रदेश भर के जिलों में दर्ज शिकायतों के लिए सीआईडी ने 12 टीमें जिलों में भेजी है,,जिसमें कई जिलों में जाँच शुरू हो गयी है..
उम्मीद है जल्द सहारा निवेशकों का पैसा मिल सके!!

*विदित हो पहले से आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (E.O.W.) में 312 एकड़ जमीन के सौदे की जांच जारी है* !!

कहाँ है वकील एकता, दिल्ली के वकीलों को स्थानीय राजनीति में विभाजित करने वाले बार एसोसिएशन के नेताओं को मेरा सलाम।दिल्ली ...
11/04/2026

कहाँ है वकील एकता, दिल्ली के वकीलों को स्थानीय राजनीति में विभाजित करने वाले बार एसोसिएशन के नेताओं को मेरा सलाम।

दिल्ली की छोड़े यदि अन्य राज्यों से भी कोई वकील भाई भी दिल्ली की किसी भी कोर्ट में आता हैं तो उसे भी कोर्ट परिसर में पार्किंग का अधिकार है।
मैं के इस तुगलकी फरमान से सहमत नहीं हूँ । आपकी इस पर क्या राय हैं?

के इन अधिकारियों ने चुनावों में वोट माँगते समय तो ऐसी विभाजनकारी सोच दिल्ली के वकीलों के सामने नहीं रखी तो फिर आज ऐसी क्या मजबूरी आ गयी जो दिल्ली के वकीलों को बार एसोसिएशन के नाम पर विभाजित कर रही हैं ।….अनिल भार्गव की क़लम 🔏 से

11/04/2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित हाईकोर्ट परिसर शुक्रवार को उस वक्त छावनी और अखाड़े में तब्दील हो गया, जब एक महिला अपन...
11/04/2026

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित हाईकोर्ट परिसर शुक्रवार को उस वक्त छावनी और अखाड़े में तब्दील हो गया, जब एक महिला अपने कलेजे के टुकड़े को गोद में लेकर पांच मंजिला इमारत की छत पर जा चढ़ी। महिला चिल्ला-चिल्लाकर कह रही थी, 'मुझे न्याय नहीं मिला, मैं आज यहीं से कूदकर जान दे दूंगी।' करीब एक घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने वकीलों, सुरक्षाकर्मियों और फरियादियों की सांसें अटका दीं।

घटना शुक्रवार शाम करीब 4 बजे हाईकोर्ट के सी-ब्लॉक की है। महिला की पहचान रूपाली के रूप में हुई है। (केयर न्यूज)जानकारी के मुताबिक, रूपाली का उसके पति के साथ तलाक का मुकदमा चल रहा है। वह तीसरी बार कोर्ट में 'मेडिएशन' (सुलह-समझौता प्रक्रिया) के लिए पेश होने आई थी। बताया जा रहा है कि कोर्ट परिसर में ही किसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच तीखी कहासुनी हो गई। इसी बात से आहत होकर रूपाली गुस्से और हताशा में अपने छोटे बच्चे को लेकर सीधे बिल्डिंग की छत पर जा पहुंची।जैसे ही लोगों ने महिला को छत की रेलिंग के किनारे खड़ा देखा, नीचे भारी भीड़ जमा हो गई। वकील और आम लोग उसे नीचे उतरने की मिन्नतें करने लगे, लेकिन रूपाली रो-रोकर अपनी व्यथा सुना रही थी और बार-बार कूदने की धमकी दे रही थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सीआरपीएफ (CRPF) और पुलिस की टीम को बुलाया गया। एहतियात के तौर पर बिल्डिंग के नीचे सुरक्षा जाल बिछाया गया ताकि अनहोनी होने पर उसे बचाया जा सके।छत पर पहुंची महिला पुलिसकर्मियों ने रूपाली से बातचीत शुरू की। सुरक्षाकर्मियों ने उसे बातों में उलझाए रखा ताकि उसका ध्यान भटकाया जा सके। सीआरपीएफ के अधिकारी आर.के. तिवारी ने बताया कि टीम ने बहुत ही धैर्य से काम लिया। जब रूपाली भावुक होकर बोलने में व्यस्त थी, तभी एक महिला सिपाही ने फुर्ती दिखाते हुए उसे पीछे से कसकर पकड़ लिया और रेलिंग से नीचे खींच लिया।

करीब एक घंटे चले इस तनावपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद रूपाली और उसके बच्चे को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। पुलिस ने महिला को शांत कराया और उसे उचित कानूनी मदद और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्द्धमान में चुनावी सभा को संबोधित करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 'जो भी घुसपैठिए भारत में घुस...
11/04/2026

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्द्धमान में चुनावी सभा को संबोधित करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि 'जो भी घुसपैठिए भारत में घुसे हैं, वे अपना बोरिया-बिस्तर बांध लें, साथ ही जिन लोगों ने घुसपैठियों के लिए नकली कागज बनवाया, उन सबका भी पूरा हिसाब होगा'.

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमान...
11/04/2026

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमाने पर हो रहे मामलों की जांच के आदेश दिए

📌 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में पूरे देश में तेजी से बढ़ रहे उस गंभीर मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है, जिसमें रिहायशी इलाकों को बिना अनुमति कमर्शियल उपयोग में बदला जा रहा है। यह आदेश "Loganathan v. State of Tamil Nadu & Ors." केस में दिया गया, जिसकी सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर, महादेवन की बेंच ने की।

✅ कोर्ट ने साफ कहा कि यह प्रवृत्ति केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे उन नागरिकों के अधिकारों पर भी सीधा असर पड़ता है जिन्होंने अपने घर शांति और सुरक्षित आवासीय वातावरण की उम्मीद में खरीदे थे। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह के अवैध भूमि उपयोग से शहरी व्यवस्था, ट्रैफिक, पर्यावरण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ते

✅ सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में नगर निगम और संबंधित प्राधिकरण विस्तृत जांच करें और यह पहचान करें कि किन-किन रिहायशी क्षेत्रों को बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही इन सभी मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार कर हलफनामे के रूप में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें नगर आयुक्तों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।

✅ कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल सीमित क्षेत्रों तक नहीं रहेगा, बल्कि सभी रिहायशी कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और यहां तक कि उन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जो तकनीकी रूप से नगर सीमा के बाहर होने का दावा करते हैं, लेकिन व्यवहार में शहरी ढांचे का हिस्सा हैं। इस पूरे मामले में न्यायालय की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। साथ ही इस केस को 20 मई 2026 को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सूचीबद्ध किया गया है।

✅ यह आदेश भारत के शहरी नियोजन और रिहायशी क्षेत्रों के संरक्षण के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भविष्य में अवैध कमर्शियल कन्वर्ज़न पर बड़ी सख्ती का संकेत देता है।

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डीग में पेट्रोल के पैसे को लेकर विवाद, दुकानदार की पीट-पीटकर ह,त्याडीग जिला के सीकरी थाना क्षेत्र के टट्टा का बास गांव म...
11/04/2026

डीग में पेट्रोल के पैसे को लेकर विवाद, दुकानदार की पीट-पीटकर ह,त्या

डीग जिला के सीकरी थाना क्षेत्र के टट्टा का बास गांव में एक बेहद दुखद और सनसनीखेज घटना सामने आई है। मामूली पैसों के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें 55 वर्षीय दुकानदार की जान चली गई।

📍 क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, मृतक युसूफ अपने खेत के पास एक छोटी दुकान चलाते थे, जहां वे पेट्रोल भी बेचते थे।

घटना कल सुबह करीब 4 बजे की है, जब महेंद्र नाम का व्यक्ति बाइक में पेट्रोल खत्म होने के कारण दुकान पर पहुंचा। युसूफ ने उसकी बाइक में पेट्रोल डाल दिया, लेकिन जब उन्होंने पैसे मांगे तो आरोपी ने देने से इनकार कर दिया।

#विवाद ने लिया हिंसक रूप

पैसों को लेकर दोनों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो जल्द ही झगड़े में बदल गई। गुस्से में आकर महेंद्र ने पास पड़ी लाठी उठाई और युसूफ के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। गंभीर चोटों के चलते युसूफ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

#सुबह सामने आई घटना

सुबह जब युसूफ की पत्नी चाय लेकर दुकान पर पहुंचीं, तो उन्होंने अपने पति का खून से लथपथ शव देखा। यह दृश्य देखकर गांव में सनसनी फैल गई।

👮‍♂️ पुलिस की कार्रवाई

Sp कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल उससे पूछताछ जारी है।

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