11/04/2026
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमाने पर हो रहे मामलों की जांच के आदेश दिए
📌 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में पूरे देश में तेजी से बढ़ रहे उस गंभीर मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है, जिसमें रिहायशी इलाकों को बिना अनुमति कमर्शियल उपयोग में बदला जा रहा है। यह आदेश "Loganathan v. State of Tamil Nadu & Ors." केस में दिया गया, जिसकी सुनवाई जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर, महादेवन की बेंच ने की।
✅ कोर्ट ने साफ कहा कि यह प्रवृत्ति केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इससे उन नागरिकों के अधिकारों पर भी सीधा असर पड़ता है जिन्होंने अपने घर शांति और सुरक्षित आवासीय वातावरण की उम्मीद में खरीदे थे। अदालत ने यह भी माना कि इस तरह के अवैध भूमि उपयोग से शहरी व्यवस्था, ट्रैफिक, पर्यावरण और नागरिक जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर और दूरगामी प्रभाव पड़ते
✅ सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में नगर निगम और संबंधित प्राधिकरण विस्तृत जांच करें और यह पहचान करें कि किन-किन रिहायशी क्षेत्रों को बिना अनुमति कमर्शियल गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही इन सभी मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार कर हलफनामे के रूप में कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है, जिसमें नगर आयुक्तों के व्यक्तिगत हस्ताक्षर भी जरूरी होंगे।
✅ कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का दायरा केवल सीमित क्षेत्रों तक नहीं रहेगा, बल्कि सभी रिहायशी कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और यहां तक कि उन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जो तकनीकी रूप से नगर सीमा के बाहर होने का दावा करते हैं, लेकिन व्यवहार में शहरी ढांचे का हिस्सा हैं। इस पूरे मामले में न्यायालय की सहायता के लिए सीनियर एडवोकेट अजीत कुमार सिन्हा को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया गया है। साथ ही इस केस को 20 मई 2026 को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सूचीबद्ध किया गया है।
✅ यह आदेश भारत के शहरी नियोजन और रिहायशी क्षेत्रों के संरक्षण के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह भविष्य में अवैध कमर्शियल कन्वर्ज़न पर बड़ी सख्ती का संकेत देता है।
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