Adv Mukesh K Yadav

Adv Mukesh K Yadav I am Lawyer Criminal Cases and Family Cases and Recovery cases

14/09/2024
29/03/2022

CrPC (दंड प्रक्रिया संहिता की धारा ) की धारा 154 के अनुसार :-
संज्ञेय मामलों में इत्तिला–

(1) संज्ञेय अपराध के किए जाने से संबंधित प्रत्येक इत्तिला, यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को मौखिक दी गई है तो उसके द्वारा या उसके निदेशाधीन लेखबद्ध कर ली जाएगी और इत्तिला देने वाले को पढ़कर सुनाई जाएगी और प्रत्येक ऐसी इत्तिला पर, चाहे वह लिखित रूप में दी गई हो या पूर्वोक्त रूप में लेखबद्ध की गई हो, उस व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे जो उसे दे और उसका सार ऐसी पुस्तक में, जो उस अधिकारी द्वारा ऐसे रूप में रखी जाएगी जिसे राज्य सरकार इस निमित्त विहित करे, प्रविष्ट किया जाएगा:

(2) उपधारा (1) के अधीन अभिलिखित इत्तिला की प्रतिलिपि, इत्तिला देने वाले को तत्काल निःशुल्क दी जाएगी।

(3) कोई व्यक्ति जो किसी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के उपधारा (1) में निर्दिष्ट इत्तिला को अभिलिखित करने से इनकार करने से व्यथित है, ऐसी इत्तिला का सार लिखित रूप में और डाक द्वारा संबद्ध पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है जो, यदि उसका यह समाधान हो जाता है कि ऐसी इत्तिला से किसी संज्ञेय अपराध का किया जाना प्रकट होता है तो, या तो स्वयं मामले का अन्वेषण करेगा या अपने अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी द्वारा इस संहिता द्वारा उपबंधित रीति में अन्वेषण किए जाने का निदेश देगा और उस अधिकारी को उस अपराध के संबंध में पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी की सभी शक्तियां होंगी

16/01/2022

आज के इस आर्टिकल में मै आपको “ साक्षी पर डाक द्वारा समन की तामील | दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 69 क्या है | section 69 CrPC in Hindi | Section 69 in The Code Of Criminal Procedure | CrPC Section 69 | Service of summons on witness by post ” के विषय में बताने जा रहा हूँ आशा करता हूँ मेरा यह प्रयास आपको जरुर पसंद आएगा । तो चलिए जानते है की –

दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 69 | Section 69 in The Code Of Criminal Procedure
[ CrPC Sec. 69 in Hindi ] –
साक्षी पर डाक द्वारा समन की तामील–
(1) इस अध्याय की पूर्ववर्ती धाराओं में किसी बात के होते हुए भी साक्षी के लिए समन जारी करने वाला न्यायालय, ऐसा समन जारी करने के अतिरिक्त और उसके साथ-साथ निदेश दे सकता है कि उस समन की एक प्रति की तामील साक्षी के उस स्थान के पते पर, जहां वह मामूली तौर पर निवास करता है या कारवार करता है या अभिलाभार्थ स्वयं काम करता है रजिस्ट्रीकृत डाक द्वारा की जाए।

(2) जब साक्षी द्वारा हस्ताक्षर की गई तात्पर्यित अभिस्वीकृति या डाक कर्मचारी द्वारा किया गया तात्पर्यित यह पृष्ठांकन कि साक्षी ने समन लेने से इनकार कर दिया है, प्राप्त हो जाता है तो समन जारी करने वाला न्यायालय यह घोषित कर सकता है कि समन की तामील सम्यक् रूप से कर दी गई है

01/08/2021

धारा 506 का विवरण
भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के अनुसार,

जो कोई भी आपराधिक धमकी का अपराध करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे दो साल तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दंड या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।
यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट, आदि के लिए है - और यदि धमकी मौत या गंभीर चोट पहुंचाने, या आग से किसी संपत्ति का विनाश कारित करने के लिए, या मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या सात वर्ष तक की अवधि के कारावास से दंडनीय अपराध कारित करने के लिए, या किसी महिला पर अपवित्रता का आरोप लगाने के लिए हो, तो अपराधी को किसी एक अवधि के लिए कारावास जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, या आर्थिक दंड, या दोनों के साथ दंडित किया जा सकता है।

लागू अपराध
1. आपराधिक धमकी
सजा - 2 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों।
यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
2. यदि धमकी मृत्यु या गंभीर चोट पहुंचाने, आदि के लिए है।
सजा - 7 वर्ष कारावास या आर्थिक दंड या दोनों
यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

यह अपराध पीड़ित व्यक्ति के द्वारा समझौता करने योग्य है।

18/07/2021

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 211 की परिभाषा:-
कोई व्यक्ति किसी निर्दोष व्यक्ति पर उसको नुकसान या क्षति पहुचाने के उद्देश्य से दाण्डिक कार्यवाही संस्थित करेगा या झूठा आपराधिक आरोप लगाएगा इस धारा के अंतर्गत अपराध है।
【नोट:- यह अपराध तब घटित होता है जब झूठे आरोप पुलिस या मजिस्ट्रेट के पास लगाया गया है तथा वहीं से दाण्डिक कार्यवाही की जा रही हो। केवल संदेह करना झूठा आरोप नहीं माना जायेगा एवं झूठी सूचना देना मात्र भी इस धारा के अंतर्गत अपराध नहीं है।】

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 211 में दण्ड का प्रावधान:-
इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते है। इनकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट ओर सेशन न्यायालय दूआरा की जाती हैं।
सजा :- सजा की निम्न भागों में बांटा गया है:-
1. क्षति(नुकसान) करने के आशय से झूठा आरोप लगाने पर- दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
2. आरोप सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दण्डनीय है तब- सात वर्ष की कारावास और जुर्माना से दण्डनीय होगा।
3. आरोप मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय हैं तब- सुनवाई सेशन न्यायालय दूआरा एवं सात वर्ष की कारावास एव जुर्माना से दण्डनीय होगा।

07/06/2021

भारतीय दंड संहिता की धारा 120 के अनुसार, जो भी कोई उस अपराध का किया जाना, जो कारावास से दण्डनीय है, सुगम बनाने के आशय से या संभाव्यतः तद्द्वारा सुगम बनाएगा यह जानते हुए कि,
ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना के अस्तित्व को किसी कार्य या अवैध लोप द्वारा स्वेच्छा पूर्वक छिपाएगा या ऐसी परिकल्पना के बारे में ऐसा वर्णन करेगा, जिसका निराधार होना वह जानता है,

30/05/2021

धारा 311 का विवरण
भारतीय दंड संहिता की धारा 311 के अनुसार, जो भी कोई ठगी करेगा, उसे आजीवन कारावास से दण्डित किया जाएगा, और साथ ही वह आर्थिक दण्ड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

29/05/2021

धारा 144 का विवरण
भारतीय दंड संहिता की धारा 144 के अनुसार,

जो भी कोई किसी घातक आयुध, या किसी ऐसी चीज से, जिसे आक्रामक आयुध के रूप में उपयोग किए जाने पर मॄत्यु कारित होनी संभाव्य है, सज्जित हो कर किसी विधिविरुद्ध जनसमूह का सदस्य होगा, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है या आर्थिक दण्ड या दोनों से दण्डित किया जाएगा।

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