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15/10/2021
18/07/2021

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 211 की परिभाषा:-
कोई व्यक्ति किसी निर्दोष व्यक्ति पर उसको नुकसान या क्षति पहुचाने के उद्देश्य से दाण्डिक कार्यवाही संस्थित करेगा या झूठा आपराधिक आरोप लगाएगा इस धारा के अंतर्गत अपराध है।
【नोट:- यह अपराध तब घटित होता है जब झूठे आरोप पुलिस या मजिस्ट्रेट के पास लगाया गया है तथा वहीं से दाण्डिक कार्यवाही की जा रही हो। केवल संदेह करना झूठा आरोप नहीं माना जायेगा एवं झूठी सूचना देना मात्र भी इस धारा के अंतर्गत अपराध नहीं है।】

भारतीय दण्ड संहिता,1860 की धारा 211 में दण्ड का प्रावधान:-
इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते है। इनकी सुनवाई प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट ओर सेशन न्यायालय दूआरा की जाती हैं।
सजा :- सजा की निम्न भागों में बांटा गया है:-
1. क्षति(नुकसान) करने के आशय से झूठा आरोप लगाने पर- दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।
2. आरोप सात वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास से दण्डनीय है तब- सात वर्ष की कारावास और जुर्माना से दण्डनीय होगा।
3. आरोप मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय हैं तब- सुनवाई सेशन न्यायालय दूआरा एवं सात वर्ष की कारावास एव जुर्माना से दण्डनीय होगा।

31/05/2021

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*सुप्रभात*

भारतीय दंड संहिता की धारा 211 -क्षति करने के आशय से अपराध का झूठा आरोप। सजा - दो वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों। य...
29/05/2021

भारतीय दंड संहिता की धारा 211 -क्षति करने के आशय से अपराध का झूठा आरोप। सजा - दो वर्ष कारावास या आर्थिक दण्ड या दोनों। यह एक जमानती, गैर-संज्ञेय अपराध है और प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। ... यदि आरोपित अपराध सात वर्ष या उससे अधिक के कारावास से दण्डनीय है।

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