Adv Iftekhar Ahmad

Adv Iftekhar Ahmad Adv Criminal lawyer

17/01/2026

वकील की जिंदगी का चकर
जब कोई मुविवकल वकील साहब के चेंबर
आता है तो वह तीन चीज लेकर आता है...पैसा
फाइल और अपनासरदद....
फिर तीनों चीजे
की बात
वकील साहब तीनों अपने हाथ में ले
कर मुविवकल को आजाद करते है1 िफर तीनोंचीजें बट जाती है । पैसा वकील साहब की पतनीके पास चला जाता है फाइल अदालत में और, सरदद वकील साहब क पास यही है वकील की जिंदगी का जीवन चक, जो दूसरों के सिरददसभालने मे ही समास हो जाली है।

📢 🔴 बड़ा फैसला | बरेली जिला कोर्ट की सख्त टिप्पणी 🔥झूठे रेप केस में युवक बरी – आरोप लगाने वाली युवती को समान अवधि की सज़...
27/11/2025

📢 🔴 बड़ा फैसला | बरेली जिला कोर्ट की सख्त टिप्पणी 🔥
झूठे रेप केस में युवक बरी – आरोप लगाने वाली युवती को समान अवधि की सज़ा!

बरेली जिला कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और मिसाल बनने वाला फैसला सुनाते हुए कहा है कि —
👉 “अगर कोई महिला झूठा दुष्कर्म आरोप लगाकर किसी युवक की जिंदगी बर्बाद करती है, तो उसे भी उतनी ही सज़ा मिलनी चाहिए जितने दिन तक निर्दोष बच्चा जेल में रहा।”

यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो कानून का दुरुपयोग कर झूठे आरोप लगाकर किसी की इज़्ज़त और भविष्य नष्ट करने की कोशिश करते हैं।

⚖️ पूरा मामला क्या है?

📍 वर्ष 2019 में युवती की मां ने बरेली के एक युवक पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई।
🔹 पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
🔹 युवक 2 सितंबर 2019 से 8 अप्रैल 2024 तक कुल 1,653 दिन (लगभग 4.5 साल) जेल में बंद रहा।

बाद में—
✔️ युवती ने पहले पुलिस में, फिर कोर्ट में दुष्कर्म होने का बयान दिया।
✔️ लेकिन 8 फरवरी 2024 को अपने बयान से मुकर गई, और कहा कि पहले के बयानों पर उस पर दबाव था।

जांच में पूरा मामला झूठा और मनगढ़ंत सिद्ध हुआ।

⚖️ कोर्ट का कड़ा आदेश:

अपर सत्र न्यायाधीश ने निर्णय सुनाते हुए कहा—
➡️ युवक पूरी तरह निर्दोष है।
➡️ झूठा आरोप लगाने वाली युवती को 1,653 दिन की जेल की सज़ा दी जाती है — ठीक उतने दिन जितने युवक ने जेल में बिताए।
➡️ साथ ही युवती को युवक को ₹5,88,822 हर्जाना देने का आदेश।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा:

> “अपने अवैध उद्देश्यों को पूरा करने के लिए पुलिस और कोर्ट को माध्यम बनाना अत्यंत आपत्तिजनक है।
झूठे आरोप लगाकर किसी निर्दोष की जिंदगी बर्बाद करने वाली महिलाओं को पुरुषों के अधिकारों पर हमला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

💥 इस फैसले का बड़ा संदेश

🔸 झूठे रेप केस समाज और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं।
🔸 यह फैसला पुरुषों के अधिकारों के संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम है।
🔸 कानून का गलत उपयोग स्वयं एक अपराध है — और कठोर दंड योग्य है।
🔸 इससे भविष्य में झूठे मामले दर्ज कराने वालों पर लगाम लगेगी।

🙏 न्यायपालिका ने दिखाया साहस

इस निर्णय ने संकेत दिया है कि —
⚖️ “लैंगिक संवेदनशीलता का अर्थ यह नहीं कि पुरुषों के अधिकारों को दरकिनार कर दिया जाए। न्याय हमेशा सबके लिए समान है।”

📌 कानूनी दृष्टिकोण (Legal Perspective):

➡️ IPC की धारा 182, 211— झूठा केस दर्ज करवाना दंडनीय अपराध
➡️ कोर्ट झूठे आरोपों पर समान अवधि की सज़ा दे सकती है
➡️ हर्जाना एक नागरिक अधिकार है ताकि पीड़ित की हानि की भरपाई हो सके

🟠 निष्कर्ष:

यह फैसला न केवल कानून के दुरुपयोग पर करारा प्रहार है, बल्कि उन लाखों पुरुषों को शक्ति देता है जो झूठे आरोपों के कारण वर्षों तक संघर्ष करते हैं।

14/06/2025

साइबर धोखाधड़ी (Cyber fraud) एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) में विभिन्न धाराएँ लागू होती हैं। सजा की गंभीरता अपराध की प्रकृति और सीमा पर निर्भर करती है, जिसमें जुर्माना से लेकर कारावास (जेल) तक की सजा हो सकती है, और कुछ मामलों में आजीवन कारावास भी.
साइबर धोखाधड़ी से संबंधित कुछ प्रमुख धाराएँ और सजाएँ:
धारा 66D (IT Act):
कंप्यूटर या संचार उपकरण का उपयोग करके धोखाधड़ी करना। इसमें तीन साल तक की कैद या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
धारा 66B (IT Act):
चोरी किए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण को प्राप्त करना या रखना। इसमें तीन साल तक की कैद या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
धारा 417, 418, 419, 420 IPC:
धोखाधड़ी से संबंधित धाराएँ। 420 धारा में सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.
धारा 463, 465, 468, 469, 470, 471 IPC:
जालसाजी से संबंधित धाराएँ.
धारा 66F (IT Act):
साइबर आतंकवाद, जो देश की सुरक्षा को खतरा पहुंचाता है, उस पर आजीवन कारावास या अन्य दंड.
अन्य महत्वपूर्ण बातें:
गैर-जमानती अपराध:
कुछ साइबर अपराध, जैसे साइबर आतंकवाद, गैर-जमानती अपराध हैं, जिसका मतलब है कि आरोपी को जमानत मिलना मुश्किल हो सकता है.
जुर्माना:
कई मामलों में, अदालतें जुर्माना भी लगा सकती हैं, जो अपराध की गंभीरता पर निर्भर करता है.
सजा की अवधि:
सजा की अवधि अपराध की प्रकृति, आरोपी का इरादा, और अपराध से हुए नुकसान पर निर्भर करती है.
धारा 43 (c) IT Act:
यदि कोई व्यक्ति किसी कंप्यूटर या नेटवर्क को नुकसान पहुंचाता है, तो उसे क्षतिपूर्ति करनी पड़ सकती है.
निष्कर्ष:
साइबर धोखाधड़ी एक गंभीर अपराध है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। यदि आप साइबर अपराध का शिकार हुए हैं, तो तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं.

मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कर्नल सोफिय...
14/05/2025

मध्यप्रदेश के मंत्री विजय शाह के एक विवादित बयान को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए बयान पर स्वतः संज्ञान लेते हुए 4 घंटे के भीतर विजय शाह के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है.

जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि विजय शाह पर तत्काल FIR दर्ज होनी चाहिए. अदालत ने इस मामले में राज्य के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं और कहा कि किसी भी स्थिति में FIR दर्ज होनी चाहिए.

कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने एक सभा में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम लिए बिना पाकिस्तानी आतंकियों को लेकर कहा था कि 'हमने उनकी बहन भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवाई.'

09/05/2025

Agar police FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज नहीं करती है
, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अनुसार आपके पास निम्नलिखित और तरीके हैं:
* पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police - SP) को शिकायत भेजना (धारा 173(4)): आप अपनी शिकायत लिखित रूप में और डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक को भेज सकते हैं। यदि SP संतुष्ट होते हैं कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध (cognizable offense) का पता चलता है, तो वे स्वयं जांच कर सकते हैं या किसी अधीनस्थ पुलिस अधिकारी को जांच करने का आदेश दे सकते हैं।
* मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करना (धारा 175(3)): यदि SP भी कोई कार्रवाई नहीं करते हैं, तो आप क्षेत्राधिकार वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकते हैं। मजिस्ट्रेट आपकी शिकायत पर विचार कर सकते हैं, आवश्यकतानुसार पूछताछ कर सकते हैं, और पुलिस अधिकारी को इस संबंध में अपना पक्ष रखने के लिए कह सकते हैं। इसके बाद, मजिस्ट्रेट पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच करने का आदेश दे सकते हैं।
* उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करना (अनुच्छेद 226): यदि मजिस्ट्रेट भी कोई राहत नहीं देते हैं, तो आप उच्च न्यायालय (High Court) में रिट याचिका (writ petition) दाखिल कर सकते हैं, जिसमें पुलिस को FIR दर्ज करने और जांच करने के लिए निर्देश देने की प्रार्थना की जा सकती है।
* मानवाधिकार आयोग से संपर्क करना: यदि मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित है, तो आप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC) या राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission - SHRC) से मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं।
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक मामले की अपनी परिस्थितियाँ होती हैं, और आपके लिए सबसे अच्छा तरीका इन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। कानूनी सलाह लेना हमेशा फायदेमंद होता है।

आप की क्या राय है
20/03/2025

आप की क्या राय है

अधिवक्ता श्रीमती रेखा गुप्ता को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने की हृदयतल से हार्दिक बधाई एवं शुभकामना
20/02/2025

अधिवक्ता श्रीमती रेखा गुप्ता को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के शपथ लेने की हृदयतल से हार्दिक बधाई एवं शुभकामना

15/02/2025

पासपोर्ट अधिनियम, 1967

(1967 का अधिनियम संख्यांक 15)

भारत के नागरिकों तथा अन्य व्यक्तियों के भारत से प्रस्थान

करने का विनियमन करने के लिए पासपोर्ट और

यात्रा-दस्तावेज जारी करने का और उनसे

आनुषंगिक या सम्बद्ध विषयों का

उपबंध करने के लिए

अधिनियम

भारत गणराज्य के अठारहवें वर्ष में संसद् द्वारा निम्नलिखित रूप में यह अधिनियमित हो :-

1. संक्षिप्त नाम और विस्तार-(1) यह अधिनियम पासपोर्ट अधिनियम, 1967 कहा जा सकेगा ।

(2) इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है और यह भारत के उन नागरिकों को भी लागू है जो भारत से बाहर हैं ।
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25/10/2024

क़ुतुब मीनार 800 साल पहले भारत में दक्षिण दिल्ली शहर के महरौली भाग में स्थित, ईंट से बनी विश्व की सबसे ऊँची मीनार है। पहले दुनिया का सबसे ऊंची मीनारों में से एक थी। यह दिल्ली का एक प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है

*🌠सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी (Lady Justice) की मूर्ति में बदलाव किया गया है। इस बदलाव के तहत न्याय की देवी की मूर्त...
17/10/2024

*🌠सुप्रीम कोर्ट में न्याय की देवी (Lady Justice) की मूर्ति में बदलाव किया गया है। इस बदलाव के तहत न्याय की देवी की मूर्ति से आंखों पर बंधी पट्टी को हटा दिया गया है और हाथ में तलवार की जगह अब संविधान की किताब को स्थापित किया गया है।*

09/09/2024
20/08/2024

पुलिस ने एक मुफ्त यात्रा योजना शुरू की है, जहां कोई भी महिला जो अकेली है और उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच घर जाने के लिए वाहन नहीं मिल रहा हो , वह पुलिस हेल्पलाइन नंबर (1091 और 7837018555) पर संपर्क कर सकती है और वाहन का अनुरोध कर सकती है। वे 24x7 घंटे काम करेंगे. कंट्रोल रूम का वाहन या नजदीकी पीसीआर वाहन/एसएचओ वाहन उसे सुरक्षित उसके गंतव्य तक पहुंचाएगा. यह नि:शुल्क किया जाएगा। इस संदेश को अपने जानने वाले सभी लोगों तक पहुंचाएं।
अपनी पत्नी, बेटियों, बहनों, माताओं, दोस्तों और उन सभी महिलाओं को नंबर भेजें जिन्हें आप जानते हैं .. उन्हें इसे सहेजने के लिए कहें .. सभी पुरुष कृपया उन सभी महिलाओं के साथ साझा करें जिन्हें आप जानते हैं…।
आपातकालीन स्थिति में महिलाएं *खाली संदेश या मिस्ड कॉल* कर सकती हैं .. ताकि पुलिस आपका स्थान ढूंढ सके और आपकी मदद कर सके 🌹🌹
*पूरे भारत में लागू*

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847121

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