24/09/2026
⚖️ गिरफ्तारी के कारण बताना अनिवार्य — सुप्रीम कोर्ट
आरोपी को उसकी समझ की भाषा में लिखित रूप से बताना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी आरोपी को उसकी गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में तथा ऐसी भाषा में नहीं बताए जाते, जिसे वह समझता हो, तो उसकी गिरफ्तारी और उसके बाद की हिरासत असंवैधानिक हो सकती है।
न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी के कारण जानने तथा अपनी पसंद के अधिवक्ता से कानूनी सहायता लेने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत मौलिक अधिकार है।
🔹 सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण बिंदु
✔️ आरोपी को गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में बताए जाने चाहिए।
✔️ गिरफ्तारी के कारण ऐसी भाषा में बताए जाने चाहिए, जिसे आरोपी समझ सके।
✔️ यह जानकारी उसे यथाशीघ्र उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि वह अपनी गिरफ्तारी और हिरासत के विरुद्ध उचित कानूनी कदम उठा सके।
✔️ गिरफ्तारी के कारण न बताना केवल प्रक्रियात्मक कमी नहीं है। परिस्थितियों के अनुसार ऐसा उल्लंघन गिरफ्तारी तथा उसके बाद की हिरासत को असंवैधानिक बना सकता है।
✔️ अनुच्छेद 22(1) की यह संवैधानिक सुरक्षा गंभीर अपराधों के मामलों में भी लागू होती है। केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर इस मौलिक अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
📌 संवैधानिक सुरक्षा
अनुच्छेद 22(1), भारतीय संविधान:
गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने तथा अपनी पसंद के विधि-व्यवसायी से परामर्श और उसके द्वारा प्रतिरक्षा प्राप्त करने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।
⚖️ कानूनी जागरूकता संदेश
गिरफ्तारी के समय अपने संवैधानिक अधिकारों को जानना प्रत्येक नागरिक के लिए महत्वपूर्ण है।
डॉ. माधव शरण पाठक
कानूनी सलाहकार
True Law Associates Madhya Pradesh
📞 संपर्क नंबर: 7566322577
जरूरतमंद, गरीब एवं समाज के कमजोर वर्ग के व्यक्ति कानूनी सहायता के लिए संपर्क कर सकते हैं।