Akhil Bharat Hindu mahasabha Punjab

Akhil Bharat Hindu mahasabha Punjab हिन्दू राष्ट्र के लिए प्रयत्नशील एक प?

28/06/2022

एक दो अपवाद छोड़ दिया जाए तो हिन्दुओं के जितने भी संगठन हैं कोई भी हिन्दू हितों के लिए काम नहीं कर रहा केवल ऐसे हथकंडे अपनाते रहते हैं जिससे उनकी आमदनी होती रहे किसी हिन्दू को ज़रूरत पड़ती है तो सब एक दूसरे को दोष देते हुए कन्नी काट कर निकल जाते हैं पर किसी भी संगठन का कोई भी पदाधिकारी आगे नहीं आता है क्योंकि उन्हें पता है कि संगठन के अध्यक्ष से तो बस अपने फायदे से मतलब है अगर कोई पदाधिकारी गलती से अथवा भावुकतावश सड़क पर उतर पड़ा और मुसीबत में फंस गया तो संगठन के अध्यक्ष लोग तुरंत उससे यह कहते हुए किनारा कर लेते हैं कि इनका निजी मामला है संगठन की इनके इस मामले में कोई भी जिम्मेदार नहीं हैं अथवा इनके इस बयान से या जो कोई भी कार्य है उससे उसका कोई लेना देना नहीं है
इसलिए मैं अपने स्वयं के अनुभव से कह रहा हूं कि ऐ लोग केवल फेसबुक और व्हाट्स एप के लिए शेर हैं जमीनी हकीकत कुछ और ही है जिसे जानने के बाद ऐसे लोगों से नफ़रत सी होने लगती है बात जितनी कडुई है इसकी सच्चाई उससे भी अधिक भयावह है और यह बात इस्लामिक संगठन बहुत अच्छी तरह से जानते हैं पी एफ आई के एक सदस्य से इस विषय पर काफी बहस भी हुई
परंतु उसने जो कुछ कहा एक दम सच था उसने 2019के बाद दिल्ली राजस्थान बंगाल सहित दश ऐसे छोटे बड़े हिंदू मुस्लिम दंगों का हवाला देते हुए पूछा कि बताइए किसी भी दंगे के बाद कोई भी हिन्दू संगठन हिंदुओं की मदद के लिए आगे आया हो तो बताइए और आगे उसने कहा पी एफ आई सहित लगभग 7 इस्लामिक संगठन ऐसे थे जो दंगों के तुरंत बाद मुसलमानों की सहायता के लिए लगातार काम कर रहे थे
उसका कहना था हिंदू संगठनों ने हिन्दुओं से पैसे कमाने के सिवा कुछ नहीं किया है हकीकत तो यही जो उसने कहा कभी अपना शत्रु भी हित की बात कह जाता है

अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री नाथूराम गोडसे जी की जयंती पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं।जब तक "सिंधु नद...
20/05/2022

अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री नाथूराम गोडसे जी की जयंती पर हार्दिक बधाई शुभकामनाएं।
जब तक "सिंधु नदी" के "जल की धारा" "भारतीय भगवा ध्वज" के नीचे ना बहने लगे
तब तक मेरी "अस्थियां विसर्जित" मत करना....!
अन्तिम इच्छा
🙏नाथूराम विनायक गोडसे🙏
#गोडसे_अमर_रहे
#नाथूराम_गोडसे_जिंदाबाद

21/04/2022

45 साल के महात्मा गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में बिता कर। इससे 4 साल पहले 28 वर्ष का एक युवक अंडमान में एक कालकोठरी में बन्द होता है। अंग्रेज उससे दिन भर कोल्हू में बैल की जगह हाँकते हुए तेल पेरवाते हैं, रस्सी बटवाते हैं और छिलके कूटवाते हैं। वो तमाम कैदियों को शिक्षित कर रहा होता है, उनमें राष्ट्रभक्ति की भावनाएँ प्रगाढ़ कर रहा होता है और साथ ही दीवालों कर कील, काँटों और नाखून से साहित्य की रचना कर रहा होता है।
उसका नाम था- विनायक दामोदर सावरकर।
वीर सावरकर।

उन्हें आत्महत्या के ख्याल आते। उस खिड़की की ओर एकटक देखते रहते थे, जहाँ से अन्य कैदियों ने पहले आत्महत्या की थी। पीड़ा असह्य हो रही थी। यातनाओं की सीमा पार हो रही थी। अंधेरा उन कोठरियों में ही नहीं, दिलोदिमाग पर भी छाया हुआ था। दिन भर बैल की जगह खटो, रात को करवट बदलते रहो। 11 साल ऐसे ही बीते। कैदी उनकी इतनी इज्जत करते थे कि मना करने पर भी उनके बर्तन, कपड़े वगैरह धो देते थे, उनके काम में मदद करते थे। सावरकर से अँग्रेज बाकी कैदियों को दूर रखने की कोशिश करते थे। अंत में बुद्धि को विजय हुई तो उन्होंने अन्य कैदियों को भी आत्महत्या से विमुख किया।

लेकिन नहीं, महा गँवारों का कहना है कि सावरकर ने मर्सी पेटिशन लिखा, सॉरी कहा, माफ़ी माँगी..ब्ला-ब्ला-ब्ला। मूर्खों, काकोरी कांड में फँसे क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल ने भी माफ़ी माँगी थी, तो? उन्हें भी 'डरपोक' करार दोगे? बताओ। उन्होंने भी माफ़ी माँगी थी अंग्रेजों से। क्या अब इस कसौटी पर क्रांतिकारियों को तौला जाएगा? शेर जब बड़ी छलाँग लगाता है तो कुछ कदम पीछे लेता ही है। उस समय उनके मन में क्या था, आगे की क्या रणनीति थी- ये आज कुछ लोग बैठे-बैठे जान जाते हैं। कौन ऐसा स्वतंत्रता सेनानी है जिसे 11 साल कालापानी की सज़ा मिली हो। नेहरू? गाँधी? कौन?

नानासाहब पेशवा, महारानी लक्ष्मीबाई और वीर कुँवर सिंह जैसे कितने ही वीर इतिहास में दबे हुए थे। 1857 को सिपाही विद्रोह बताया गया था। तब इसके पर्दाफाश के लिए 20-22 साल का एक युवक लंदन की एक लाइब्रेरी का किसी तरह एक्सेस लेकर और दिन-रात लग कर अँग्रेजों के एक के बाद एक दस्तावेज पढ़ कर सच्चाई की तह तक जा रहा था, जो भारतवासियों से छिपाया गया था। उसने साबित कर दिया कि वो सैनिक विद्रोह नहीं, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। उसके सभी अमर बलिदानियों की गाथा उसने जन-जन तक पहुँचाई। भगत सिंह सरीखे क्रांतिकारियों ने मिल कर उसे पढ़ा, अनुवाद किया।

दुनिया में कौन सी ऐसी किताब है जिसे प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था? अँग्रेज कितने डरे हुए थे उससे कि हर वो इंतजाम किया गया, जिससे वो पुस्तक भारत न पहुँचे। जब किसी तरह पहुँची तो क्रांति की ज्वाला में घी की आहुति पड़ गई। कलम और दिमाग, दोनों से अँग्रेजों से लड़ने वाले सावरकर थे। दलितों के उत्थान के लिए काम करने वाले सावरकर थे। 11 साल कालकोठरी में बंद रहने वाले सावरकर थे। हिंदुत्व को पुनर्जीवित कर के राष्ट्रवाद की अलख जगाने वाले सावरकर थे। साहित्य की विधा में पारंगत योद्धा सावरकर थे।

आज़ादी के बाद क्या मिला उन्हें? अपमान। नेहरू व मौलाना अबुल कलाम जैसों ने तो मलाई चाटी सत्ता की, सावरकर को गाँधी हत्या केस में फँसा दिया। गिरफ़्तार किया। पेंशन तक नहीं दिया। प्रताड़ित किया। 60 के दशक में उन्हें फिर गिरफ्तार किया, प्रतिबंध लगा दिया। उन्हें सार्वजनिक सभाओं में जाने से मना कर दिया गया। ये सब उसी भारत में हुआ, जिसकी स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना जीवन खपा दिया। आज़ादी के मतवाले से उसकी आज़ादी उसी देश में छीन ली गई, जिसे उसने आज़ाद करवाने में योगदान दिया था। शास्त्री जी PM बने तो उन्होंने पेंशन का जुगाड़ किया।

वो कालापानी में कैदियों को समझाते थे कि धीरज रखो, एक दिन आएगा जब ये जगह तीर्थस्थल बन जाएगी। आज भले ही हमारा पूरे विश्व में मजाक बन रहा हो, एक समय ऐसा होगा जब लोग कहेंगे कि देखो, इन्हीं कालकोठरियों में हिंदुस्तानी कैदी बन्द थे। सावरकर कहते थे कि तब उन्हीं कैदियों की यहाँ प्रतिमाएँ होंगी। आज आप अंडमान जाते हैं तो सीधा 'वीर सावरकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट' पर उतरते हैं। सेल्युलर जेल में उनकी प्रतिमा लगी है। उस कमरे में प्रधानमंत्री भी जाकर ध्यान धरता है, जिसमें सावरकर को रखा गया था। सावरकर का अपमान करने का अर्थ है अपने ही थूक को ऊँट के मूत्र में मिला कर पीना।

हजारो झूले थे फंदे पर, लाखों ने गोली खाई थी
क्यों झूठ बोलते थे साहब, चरखे से आजादी आई थी....
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
Swami Ram Dass udasin #सावरकर

साल 1907 में सावरकर बंधुओं की पुश्तैनी जायदाद अंग्रेज सरकार ने जब्त कर ली। साल 1911 में सावरकर के श्वसुर की सारी संपत्ति...
08/04/2022

साल 1907 में सावरकर बंधुओं की पुश्तैनी जायदाद अंग्रेज सरकार ने जब्त कर ली। साल 1911 में सावरकर के श्वसुर की सारी संपत्ति भी अंग्रेज सरकार द्वारा जब्त कर ली गई। उसी वर्ष बंबई विश्वविद्यालय द्वारा सावरकर की बीए की डिग्री वापस ले ली गई। लंदन से वकालत की डिग्री पूरी करने के बावजूद उन्हें बार में स्थान नहीं दिया गया। इस तरह काला पानी से जिंदा लौटे सावरकर के पास मात्र 10वीं पास की शैक्षिक योग्यता रह गई थी। उनकी लिखी सारी किताबों पर पाबंदी थी इस तरह किसी प्रकार रॉयल्टी मिलने की संभावना भी नहीं थी।

बड़े भाई बाबा राव स्ट्रेचर पर जेल से रिहा हुए थे। तो ऐसे में पूरा परिवार सबसे छोटे भाई नारायण राव की डिस्पेंसरी पर निर्भर था। अहमदाबाद बम धमाके में पकड़े गए और नासिक षड़यंत्र केस में छह माह की जेल काट चुके नारायण राव पर और उनसे इलाज कराने आने वालों पर भी पुलिस की सख्त नजर रहती थी। ऐसे स्थिति में एक बार सावरकर को लगा कि इससे बेहतर स्थिति तो शायद काला पानी में ही थी कम से कम वहां रोटी का संकट नहीं था। इन तमाम परेशानियों के बीच केसरी के संपादक ने सावरकर परिवार की देखरेख के लिए एक अनुदान समिति का गठन किया। वहीं महाराष्ट्र के कई गणमान्य लोग ऐसी अनुदान समिति बनान के विरोध में खड़े हो गए। कड़ी पाबंदी झेल रहे सावरकर ने अपने एक भाषण में कहा कि ," अभी भी कुछ ऐसे रास्ते खुले हैं जहां मैं बेरोकटोक काम कर सकतू हूं, जैसे कि हिन्दू समाज को एकजुट करना, वैज्ञानिक और साहित्यिक रचनाएं लिखना परंन्तु अगर मैं इन क्षेत्रों में भी काम न कर सकू तो मैं उन युवाओं के पैर दबाने का ही काम कर लूंगा जो मातृभूमि का सेवा करके निढाल हो चुके हैं।"

केवल साढ़ चारे माह में सावरकर परिवार की सहायता के लिए स्थापित किए गए सहायता कोष ने महारष्ट्र भर से 12,757 रुपए और 210 रुपए विदेश से एकत्र कर लिए। अंग्रेज सरकार के बार-बार कार्यक्रम बदलवाने और भारी दबाव के बीच चांदी के कलश में 11,989 रुपए नगद और तिलक की गीता रहस्य की एक प्रति उन्हें भेंट की गई। 14 साल पहले जब सावरकर जेल गए थे तब भी उनके पास केवल एक ऐनक और एक आने की छोटी गीता ही बची थी।

ये आर्थिक सहायत स्वीकारते सावरकर ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि," मैं कैसे सोच सकता था कि ये बेड़ियां एक दिन फूल बन जाएंगी। युवाओं को केवल मेरी महिमामंडन न करके वीरता में मुझसे भी आगे निकलना चाहिए। मैं यह अनुदान आपसे बिना पूछे दी गई पिछली सेवाओं के लिए स्वीकार नहीं कर रहा हूं, बल्कि भविष्य में की जाने वाली राष्ट्र सेवा के लिए प्रोत्साहन स्वरूप स्वीकार कर रहा हूं " इस घटना के करीब 75 साल बाद विश्व की पहली क्राउडफंडिग करके बनाई गई फिल्म भी वीर सावरकर ही थी।

इधर अब 100 वर्षों के बाद राष्ट्रवादी धीरे-धीरे क्राउडफंडिंग की विधा में महारथ हासिल कर रहे हैं। हम ये जान गए है कि कि हमारे लिए फंडिंग करने के लिए कोई चर्च या वेटिगन नहीं बैठा है न साउदी से हमारे लिए भर-भर कर पैसा आना है। यहां तो हमें ही एक दूसरे का कंधा बनना है इसलिए दिल्ली दंगों के पीड़ितों के लिए 1 करोड़ रुपए जुटाना हो या झारखंड के रुपेश पांडेय के लिए 14 लाख रुपए इकट्ठा करना हो धीरे-धीरे समाज में अब ये समझ भी विकसित हो रही है।

जो कि बेहद आवश्यक है

Book Source- Savarkar: A Contested Legacy by Vikram Sampath
@अविनाश त्रिपाठी

देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर हमारी सेनाओं के वीर जवानों को मेरा सलाम एवं समस्त देशवासियों को "राष्ट...
04/03/2022

देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर हमारी सेनाओं के वीर जवानों को मेरा सलाम एवं समस्त देशवासियों को "राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस" की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। आइये साथ मिलकर देश की सुरक्षा में अपना योगदान दे।

काल स्वयं मुझसे डरा है मैं काल से नहीं कालेपानी का कालकूट पीकर काल के कराल स्तंभों को झकझोर करमैं बार बार लौट आया हूँऔर ...
26/02/2022

काल स्वयं मुझसे डरा है मैं काल से नहीं
कालेपानी का कालकूट पीकर
काल के कराल स्तंभों को झकझोर कर
मैं बार बार लौट आया हूँ
और फिर भी मैं जीवित हूँ
हारी मृत्यु है मैं नहीं
मृत्युंजयी सावरकर जी आपको नमन् 🌺🌹🌷

16/02/2022
ये वही लड़की ह जो कल स्कूल बुर्के में गयी थी और कैमरे पर मजहबी नारे लगा कर फेमस हो गयी और जिसे  यूपी के मौलाना ने मजहबी म...
09/02/2022

ये वही लड़की ह जो कल स्कूल बुर्के में गयी थी और कैमरे पर मजहबी नारे लगा कर फेमस हो गयी और जिसे यूपी के मौलाना ने मजहबी मान्यताएं मानने के लिए 5 लाख रु दे दिए इनाम में ।

बुरका ओर हिजाब केवल स्कूल में चाहिए बाहर तो फ़टी जीन्स ओर टीशर्ट भी चलेगी , मजहब केवल स्कूल में लागू करवाना ह ,अपने जीवन मे नही ।

अब इसे साजिश न कहु तो क्या कहूं ।

त्योहार में नहीं होता अपना-परायात्योहार है वही जिसे सबने मनायामिला कर गुड़ में तिलमीठे लड्डू संग मिलने दो दिल।मकर संक्रा...
14/01/2022

त्योहार में नहीं होता अपना-पराया
त्योहार है वही जिसे सबने मनाया
मिला कर गुड़ में तिल
मीठे लड्डू संग मिलने दो दिल।

मकर संक्रांति की शुभकामनाएं!

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