Amit Mehra Adv

Amit Mehra Adv Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Amit Mehra Adv, Lawyer & Law Firm, Bulandshahr.

13/07/2025

प्रयागराज

25/12/2021

🛑Drunk and Drive: क्या हैं ड्रंक एंड ड्राइव से जुड़े नियम, कितनी शराब पीकर गाड़ी चलाने से हो जाती है जेल

✅बहुत से लोगों को लगता है कि वह शराब पीने के बाद माउथ फ्रेशनर या ब्रश करके गाड़ी चलाएंगे तो पुलिस को चकमा दे देंगे। ऐसा सोचना उन्हें मुश्किल में डाल सकता है।
✅तकनीक के सहारे पुलिस काफी एडवांस हो गई है। भारत के बड़े या छोटे शहर हर जगह ट्रैफिक पुलिस द्वारा ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में एक खास तरह की मशीन (ब्रेथलाइजर ) इस्तेमाल की जाती है, जिसके जरिए वह आसानी से पता लगा सकते हैं कि कौन सा शख्स शराब पीकर गाड़ी चला रहा है और कौन सा नहीं।
✅खास बात ये है कि इस मशीन के जरिए व्यक्ति ने कितनी मात्रा में शराब पी है, इसकी भी पूरी जानकारी मिल जाती है।

🛑कानून में कितनी मात्रा में पीकर चलाई जा सकती है गाड़ी❓

भारत में प्रति वर्ष होने वाले सड़क हादसों पर नजर डालने के बाद तो सिर्फ यही कहा जा सकता है कि किसी भी हालत में शराब पीकर गाड़ी नहीं चलानी चाहिए। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, कोई शख्स शराब पीकर गाड़ी चला रहा है या नहीं इसका पता ब्रेथलाइजर की मदद से बल्क एल्कोहल कंटेंट (BAC) के जरिए किया जाता है।

यदि ड्राइवर के ब्लड में एल्कोहल कंटेंट की मात्रा 100 ml में 0.03 प्रतिशत यानी की 30 mg होती है तो यह सेफ है। यदि ड्राइवर इससे ज्यादा मात्रा में शराब पीकर गाड़ी चला रहा है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ब्लड स्ट्रीम में एल्कोहल दो चीजों से प्रभावित होता है। एक व्यक्ति का वजह और दूसरा शरीर में हाइड्रेशन या वाटर कंटेट की मात्रा।

🛑आमतौर पर रेग्युलर बीयर (300 ml या एक पाइंट) में 4 फीसदी एल्कोहल रहता है या टोटल 13.2 ml एल्कोहल होता है। वहीं, रेगुलर व्हीस्की (30 ml) में 43 फीसदी एल्कोहल या 12.9 ml एल्कोहल होता है। इसके अलावा, रेगुलर वाइन (100 ml) में 12 फीसदी या 12 ml एल्कोहल होता है।

🛑ड्रिंक एंड ड्राइव केस में फंसे तो होगी ये सजाः
भारत में कोई भी शख्स ड्रिंक एंड ड्राइव के केस में फंसता है तो उस पर मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 लगाई जाती है। इसमें लिखा है कि आपने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 का उल्लंघन किया है जिसके चलते आपका वाहन मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 207 के तहत जब्त किया जाता है। गाड़ी को जब्त किए जाने के बाद ड्राइवर को सभी दस्तावेजों को माननीय सी।जे।एम। कोर्ट में पेश करना होता है।

🛑सजा के तोर पे 10,000 का जुर्माना या/और 6 माह की जेल की सजा और दूसरी बार गलती करने पर 15,000 का जुर्माना और 2 साल की जेल की सजा हो सकती है.
............................................................
जानकार बनिए ,
सबको जानकार बनाइए ,
कोई प्रश्न हो ,
निःशंकोच पूछिए ,
क्यूंकि आप बढ़ेंगे - तो देश बढ़ेगा
https://twitter.com/DRNITINSHAKYA
https://www.instagram.com/drnitinshakya_sdm/
https://www.drnitinshakya.com
https://www.youtube.com/c/Innovativenitin
https://www.facebook.com/innovativenitinn

23/12/2021

जीरो FIR❓
तुरंत होती है जांच ----
जानिए क्‍या होती है जीरो एफआईआर, साधारण FIR से यह कितनी अलग है ❓

🔴 अपराध दो तरह के होते हैं:
असंज्ञेय और संज्ञेय।

✔︎असंज्ञेय अपराध मामूली होते हैं,मसलन मामूली मारपीट। ऐसे मामले में सीधे तौर पर एफआईआर नहीं दर्ज की जा सकती।

✔︎दूसरा मामला संज्ञेय अपराध का होता है। ये गंभीर किस्म के अपराध होते हैं जैसे गोली चलाना, मर्डर और रेप आदि। इनमें सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है।

🔴 अगर शिकायती के साथ किया गया अपराध उस थाने की जूरिस्डिक्शन में नहीं हुआ हो, जहां शिकायत लेकर शिकायती पहुंचता है, तो भी पुलिस को केस दर्ज करना होगा।

✔︎जब कोई शख्स किसी भी थाने में शिकायत लेकर पहुंचता है, तो पुलिस की पहली ड्यूटी होती है कि वह केस दर्ज करे।

✔︎मामला अगर संज्ञेय अपराध से जुड़ा हो, तो चाहे अपराध देश के किसी इलाके में क्यों न हुआ हो, किसी भी दूसरे इलाके में केस दर्ज हो सकता है।

✔︎पुलिस को अपराध के बारे में सूचना देने में देरी न हो, इसलिए जरूरी है कि उस शिकायत को दर्ज किया जाए।

🔴 सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था

✔︎ कि चाहे अपराध किसी भी इलाके में हुआ हो, पुलिस जूरिस्डिक्शन के आधार पर एफआईआर दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती।

✔︎पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बाद आनाकानी नहीं कर सकती।

✔︎मकसद यह है कि शिकायती की शिकायत दर्ज कर सबूतों को एकत्र किया जाए। अगर शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी, तो छानबीन नहीं होगी और सबूत नष्ट होते रहेंगे। लेकिन एक बार एफआईआर होने के बाद शिकायती का रोल खत्म हो जाता है और स्टेट केस हो जाता है। फिर पुलिस को छानबीन करनी होती है। इस लिहाज से जीरो एफआईआर का प्रावधान काफी कारगर है।

🔴 जब भी कोई शिकायत हो और मामला संज्ञेय हो, तो पुलिस न सिर्फ एफआईआर दर्ज करेगी, बल्कि वह शुरुआती जांच भी करेगी ताकि सबूत नष्ट न हों।
पुलिस इस तरह की जांच के बाद जांच रिपोर्ट और एफआईआर को संबंधित थाने को रेफर करती है।

🔴 कई बार रेप आदि की जब शिकायत की जाती है, तो तुरंत पीड़िता का मेडिकल आदि कराना जरूरी होता है। यही वजह है कि जीरो एफआईआर के बाद पुलिस छानबीन करती है और एमएलसी की रिपोर्ट आदि तैयार करती है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो सबूत नष्ट होने का खतरा रहता है।

कैसे दर्ज कराएं FIR ❓

✔︎एफआईआर दर्ज कराने के लिए खुद से भी जाने की जरूरत नहीं है। घटना का चश्मदीद या कोई रिश्तेदार भी प्राथमिकी दर्ज करा सकता है।
✔︎इमर्जेंसी की स्थिति में पुलिस फोन कॉल या ई-मेल के आधार पर भी प्राथमिकी दर्ज कर सकती है।
✔︎एफआईआर में घटना की तारीख और समय एवं आरोपी का भी उल्लेख करना होता है।
✔︎एफआईआर दर्ज होने के बाद शिकायतकर्ता को इसकी मुफ्त में एक कॉपी पाने का अधिकार होता है।
✔︎एफआईआर में लिखा क्राइम नंबर भविष्य में रेफरेंस के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
✔︎FIR की कॉपी पर थाने की मुहर व पुलिस अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए।
.............................................................
जानकार बनिए ,
औरो को भी जानकार बनाइये ,
कोई प्रश्न हो ,
निःशंकोच पूछिए ,
क्यूंकि आप बढ़ेंगे - तो देश बढ़ेगा
जय हिन्द
https://twitter.com/DRNITINSHAKYA
https://www.instagram.com/drnitinshakya_sdm/
https://www.drnitinshakya.com
https://www.youtube.com/c/Innovativenitin
https://www.facebook.com/innovativenitinn

23/12/2021

🛑पेट्रोल पंप पर ये 6 चीजें होती हैं फ्री, न दे तो करें शिकायत

लिखित शिकायत करने के लिए हर पेट्रोल पंप पर एक शिकायत बुक होती है, जिसे कोई भी मांग सकता है।

इसमें शिकायत लिखने के बाद यह सीधे पेट्रोलियम कंपनियों के पास जाती है, जिस पर बाद में जांच होती है और सही होने पर कार्रवाई भी की जाती है।

अगर पेट्रोल पंप वाला आपको शिकायत पुस्तका देने से मना करें तो आप आनॅलाइन भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। ऑनलाइन शिकायत करने के लिए आपको मंत्रालय की वेबसाइट पर जाना होगा। इसका पता है -
http://pgportal.gov.in/

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली पहली फ्री सेवा
इमर्जेंसी पड़ने पर आप पेट्रोल पंप से फ्री फोन कॉल की सुविधा ले सकते हैं। सड़क हादसे में जख्मी किसी शख्स के परिजनों को कॉल करना हो या फिर आपको अपने ही किसी परिचित को बीच रास्ते में ही जरूरी फोन करना हो तो आप इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली दूसरी फ्री सेवा
आपको लगता है कि पेट्रोल पंप पर फ्यूल की क्‍वालिटी अच्‍छी नहीं है, तो आप फिल्टर पेपर लेकर उसे चेक कर सकते हैं। यह फिल्‍टर पेपर से हर पेट्रोल पर होना जरूरी है। इससे पेट्रोल या डीजल की क्‍वालिटी को चेक किया जा सकता है। अगर आप क्वालिटी खुद नहीं चेक कर सकते हैं, तो इसके लिए पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मचारियों को भी कह सकते हैं।

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली तीसरी फ्री सेवा
अचानक अगर कोई हादसा हो जाता है, तो नजदीकी पेट्रोल पम्‍प पर जाकर आप फर्स्‍ट ऐड किट की मांग सकते हैं।

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली चौथी फ्री सेवा
हर पेट्रोल पंप पर शौचालय की मुफ्त सुविधा होना जरूरी है। यह सुविधा फ्री सर्विस के दायरें में आती है।

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली पांचवीं फ्री सेवा
पेट्रोल पंप पर वाहनों के टायरों की हवा भरने की सुविधा भी फ्री सेवा के दायरे में आती है।

✅पेट्रोल पंप पर मिलने वाली छठवीं फ्री सेवा
कोई भी किसी भी पेट्रोल पंप पर पीने का पानी ले सकते हैं। यही नहीं आप चाहें तो वहां लगे वाटर कूलर से अपनी पानी की बोतल भी भर सकते हैं।
............................................................
जानकार बनिए ,
सबको जानकार बनाइए ,
कोई प्रश्न हो ,
निःशंकोच पूछिए ,
क्यूंकि आप बढ़ेंगे - तो देश बढ़ेगा
https://twitter.com/DRNITINSHAKYA
https://www.instagram.com/drnitinshakya_sdm/
https://www.drnitinshakya.com
https://www.youtube.com/c/Innovativenitin
https://www.facebook.com/innovativenitinn

14/12/2021

पहली बार RTI दाखिल कर रहे हैं, रखें इन बातों का ध्‍यान, वरना पड़ सकते हैं मुसीबत में...!

भारत सरकार विभाग या राज्य के विभागों में
ऑनलाइन आरटीआई कैसे दायर की जाती है?

सूचना का अधिकार अधिनियम क्या है? ..............................................

🔴 ऑनलाइन आरटीआई कैसे दायर की जाती है ❓

सबसे पहले आपको www.rtionline.gov.in पर जाना होगा।
1 आपको "Submit Request" बटन पर क्लिक करना होगा।
2. क्लिक करने के बाद आपको मांगी गई जानकारियां भरनी होंगी।
3.वर्तमान में आवेदन के लिए 3000 कैरेक्टर्स निर्धारित किए गए हैं।
4.यदि आपके आवेदन का टेक्स्ट 3000 कैरेक्टर्स से अधिक है, तो आप “Supporting Document” कॉलम का उपयोग कर अपनी जानकारियों की फाइल अटैचमैंट के तौर पर अपलोड कर सकते हैं।
5.पहले पेज पर सभी जानकारियां भरने के बाद आपको “Make Payment” विकल्प पर क्लिक कर तय राशि का भुगतान करना होगा।
6.आप नेट बैंकिंग, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के ज़रिए यह भुगतान कर सकते हैं।भुगतान के बाद आप अपना आवेदन सब्मिट कर सकते हैं।
7. यदि आप बीपीएल कैटेगरी में आते हैं तो आपको ये भुगतान नहीं करना होगा। लेकिन इस दौरान आपको आवेदन के साथ इसके सर्टिफिकेट की कॉपी ज़रूर अपलोड करनी होगी।

✔︎ जैसे ही आपका आवेदन सब्मिट होगा, आपको एसएमएस या ईमेल के ज़रिए एक रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त होगा। इसकी मदद से आप भविष्य में अपने आवेदन की स्थिति जान सकेंगे।वेब पोर्टल के ज़रिए आपका आवेदन इलेक्ट्रॉनिकली संबंधित विभाग या मंत्रालय के नोडल अधिकारी को पहुंच जाता है। है ना आसान?

बस इस तरह से आप बिना किसी परेशानी के अपनी आरटीआई दायर कर सकते हैं।

🔴. DELHI GOVERNMENT ONLINE RTI LINK --
https://rtionline.delhi.gov.in
RAJASTHAN GOVERNMENT ONLINE RTI LINK --
https://rti.rajasthan.gov.in/

BIHAR ONLINE RTI LINK-
https://jaankari.bihar.gov.in/

UTTAR PRADESH ONLINE RTI LINK-
https://rtionline.up.gov.in/

TAMIL NADU ONLINE RTI LINK-
https://rtionline.tn.gov.in/

KARNATAKA ONLINE RTI LINK-
https://rtionline.karnataka.gov.in/

KERALA ONLINE RTI LINK-
http://rti.img.kerala.gov.in/RTI/index.jsp

OTHER STATES ONLINE WEBSITE LINK
https://rti.gov.in/rti/states.asp

🔴. ऑफलाइन तरीके से आरटीआई कैसे दायर की जाती है? ..........................................................
✔︎ सबसे पहले आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप जिस विषय पर आरटीआई दायर कर रहे हैं, वो किस विभाग के तहत आता है। क्या वह विभाग केंद्र सरकार के तहत आता है? राज्य सरकार के अधीन आता है? या फिर किसी लोकल अथॉरिटी के अधीन?

✔︎ जैसे ही इसकी पुष्टि हो जाए, आप अपना आरटीआई आवेदन लिख सकते हैं।

✔︎ अच्छी बात ये है कि आप हिंदी या अंग्रेज़ी के अलावा स्थानीय भाषा में भी अपनी आरटीआई दायर कर सकते हैं।

✔︎ यदि आपको इसमें किसी प्रकार की परेशानी हो रही है, तो आप जन सूचना अधिकारी (Public Information Officer) से भी आवेदन लिखने की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।आवेदन की शुरुआत में आपको संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी को संबोधित करना होगा।

✔︎ साथ ही विषय (subject line) में आपको यह बताना पड़ेगा कि आप आरटीआई ऐक्ट-2005 के तहत सूचनाएं चाहते हैं।

✔︎ इसके बाद आपको विस्तार से सारे सवाल लिखने होंगे, ताकि आपको सिलसिलेवार तरीके से जवाब मिल सके।

✔︎ आप चाहें, तो जानकारियों से संबंधित दस्तावेज़ भी मांग सकते हैं। हालांकि इसके लिए आप से 2 रुपये प्रति पेज के हिसाब से पैसे लिए जाएंगे।

✔︎ आवेदन के साथ आपको निर्धारित राशि का भुगतान करना होगा। अलग-अलग राज्यों में यह राशि 10 से 50 रुपये के बीच हो सकती है। ये भुगतान कैश, बैंक ड्राफ्ट या मनी ऑर्डर के ज़रिए किया जा सकता है।
यदि आप बीपीएल कैटेगरी में आते हैं, तो आपको ये भुगतान नहीं करना पड़ेगा। लेकिन आपको इस दौरान इसका प्रमाण भी देना होगा।

✔︎ आवेदन करते समय अपना नाम, पता, ईमेल और कॉन्टैक्ट डीटेल्स ज़रूर भरें। साथ ही अपने शहर की जानकारी और आवेदन की तिथि डालनी ना भूलें।आप चाहें, तो ईमेल के ज़रिए अपना आवेदन भेज सकते हैं या फिर संबंधित विभाग में जाकर व्यक्तिगत तौर पर भी इसे जमा कर सकते हैं।

✔︎ लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि आपके पास आवेदन की एक फोटो कॉपी और जमा करने के बाद मिलने वाली रसीद ज़रूर हों।

🔴 यदि आप डाक विभाग के जरिये आरटीआई भेज रहे हैं, तो आप चाहें तो सरकार द्वारा बनाए निर्धारित डाक विभागों में स्थित सूचना जन सहायक दफ्तर में इसे जमा कर सकते हैं। यहां डाक विभाग की जिम्मेंदारी होती है, कि वह संबंधित विभाग के संबंधित अधिकारी तक आपकी सूचना पहुंचाए।

🔴 याद रखें आपकी आरटीआई को RTI एक्‍ट 2005 की धारा 6 (3) के अंतर्गत कोई भी लेने से इंकार नहीं कर सकता और उसे मांगी गई जानकारी देनी ही होगी।

हां यदि किसी विभाग ने सूचना अधिकारी की नियुक्‍ति नहीं की है, तो आप अनुच्‍छेद 18 के अंतर्गत राज्‍य सूचना आयोग के पास शिकायत कर सकते हैं। ऐसे में संबंधित विभाग और अधिकारी पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लग सकता है।

🔴 याद रखें, कोई भी सूचना यदि किसी व्‍यक्‍ति की आजादी और स्‍वतंत्रता से संबंधित है, तो वह आपको 48 घंटे के भीतर मिल सकती है। .............................................................

जानकार बनिए ,
कोई प्रश्न हो ,
निःशंकोच पूछिए ,
क्यूंकि आप बढ़ेंगे - तो देश बढ़ेगा
https://www.facebook.com/innovativenitinn
https://twitter.com/DRNITINSHAKYA
https://www.instagram.com/drnitinshakya_sdm/
https://www.drnitinshakya.com
https://www.youtube.com/c/Innovativenitin

07/09/2021
वकील क्या हैं,दो मिनट का समय निकाल कर जरूर पढ़ें 🤵👩‍⚖️ Javed LL.B 1.  जब किसी दबंग व्यक्ति द्वारा आपके अधिकार का हनन किया...
28/07/2021

वकील क्या हैं,दो मिनट का समय निकाल कर जरूर पढ़ें 🤵👩‍⚖️ Javed LL.B

1. जब किसी दबंग व्यक्ति द्वारा आपके अधिकार का हनन किया जाता है तब आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है?

2. जब प्रशासन के किसी कर्मचारी द्वारा आप परेशान किये जाते हैं तब आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है?

3. जब प्रशासनिक अधिकारी आपकी बात जानबूझकर अनसुनी करते हैं तब आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है ?

4. जब कोई लेखपाल, कोटेदार, प्रधान या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आपका हक छीनने की कोशिश की जाती है तब आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है ?

5. जब घर के सदस्यों के बीच उनके अधिकारों को लेकर मतभेद होता है तब आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है?

6. जब आप समाज में व्याप्त बुराइयों को कानूनी तरीके से खत्म करने का संकल्प लेते हैं तो उस संकल्प को पूरा करने के लिए आपको एक वकील से मदद लेनी पड़ती है ?

7. जब आप अपने बच्चे को स्कूल भेजते हैं और वहां उसे अध्यापक या किसी अन्य बच्चे द्वारा मानसिक यातनाएं दी जाती हैं और स्कूल प्रशासन आपकी शिकायत अनसुनी कर देता है तब आपको एक वकील की मदद की लेनी पड़ती है ?

8. जब आप खेती करते हैं और किसी कारणवश आपकी फसल का नुकसान हो जाता है और प्रशासन मुआवज़ा देने से मना कर देता है तब आपको एक वकील की मदद लेनी पड़ती है ?

9. जब आपको किसी भी सरकारी योजना का फायदा नहीं मिल पाता, तब आपको अपना हक प्राप्त करने के लिए एक वकील की मदद लेनी पड़ती है ?

10. जब भी कोई घटना-दुर्घटना होती है तो सबसे पहले आपको वकील ही याद आते है ?

🔷 इसलिए आमजन से अपील है कि इन सवालों के जवाब स्वयं को दीजिये और फिर आपको वकील की अहमियत समझ आऐगी।

एक वकील जो न्यायव्यवस्था का एक स्तंभ है पीड़ित की मदद के लिए मानसिक और शारीरिक मेहनत करता है कभी तो पूरी रात जागकर, कभी धूप में, कभी बरसात मे भीगकर आपको न्याय उपलब्ध कराता है। एक वकील अपनी मेहनत और पुरूषार्थ से मान-सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा अर्जित करता है।

एक वकील के दिल से ✍️ 🤵👩‍⚖️

कानून अधिकारी और केंद्र सरकार के वकील अपने वाहनों में न्यायालय का नाम प्रदर्शित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्टकेरल हाईकोर्ट...
07/07/2021

कानून अधिकारी और केंद्र सरकार के वकील अपने वाहनों में न्यायालय का नाम प्रदर्शित नहीं कर सकते: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना कि राज्य के कानून अधिकारियों और केंद्र सरकार के वकील द्वारा अपने मोटर वाहनों के नाम-बोर्ड में अदालत का नाम प्रदर्शित करना मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनाए गए नियमों के विपरीत है।

अदालत ने आधिकारिक राज्य प्रतीकों के अनधिकृत प्रदर्शन और मोटर वाहनों पर नाम बोर्डों के अनधिकृत उपयोग को विनियमित करने के लिए कई निर्देश जारी करते हुए ऐसा कहा।

न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन ने मोटर वाहन नियमों के अनुपालन से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए परिवहन आयुक्त को आदेश दिया कि वह इस संबंध में जारी निर्देशों के अनुसरण में की गई कार्रवाई के संबंध में एक पूर्व निर्णय दिनांक 28.10.2019 को रिपोर्ट दाखिल करें।

  की धारा 482 के तहत दर्ज याचिका खारिज होने के बाद दूसरी याचिका दायर करने पर रोक नहीं लगाता है, अगर तथ्यों को उचित है। I...
05/07/2021

की धारा 482 के तहत दर्ज याचिका खारिज होने के बाद दूसरी याचिका दायर करने पर रोक नहीं लगाता है, अगर तथ्यों को उचित है।

IAS अधिकारी विनोद कुमार ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत एक रिट याचिका दायर करके अपने खिलाफ लगभग 28 मामलों को रद्द करने की मांग करते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उसे अनुच्छेद 32 के तहत इस याचिका पर विचार करने का कोई कारण नहीं दिखता है। याचिकाकर्ता, यदि ऐसा सलाह दी जाती है, तो व्यक्तिगत आपराधिक मामलों या शिकायतों को रद्द करने के लिए आपराधिक प्रक्रिया संहिता के तहत हमेशा उपयुक्त आवेदन दायर कर सकता है।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की सहभागिता वाली पीठ ने यह भी कहा।

इस दलील को संबोधित करते हुए कि उन्होंने संहिता की धारा 482 के तहत पहले के अवसरों पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था।

पीठ ने कहा:

"अधीक्षक और कानूनी मामलों के स्मरणकर्ता पश्चिम बंगाल बनाम मोहन सिंह और अन्य" में इस न्यायालय द्वारा आयोजित बिंदु पर कानून एससीसी (1975) 3 706 में रिपोर्ट किया गया कि यह स्पष्ट है कि पहले की 482 याचिका को खारिज करना धारा 482 के तहत बाद की याचिका दायर करने पर रोक नहीं लगाता है, यदि तथ्य उचित हैं। यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि जब कभी भी याचिकाकर्ता द्वारा संहिता के तहत किसी उपयुक्त आवेदन को प्राथमिकता दी जाती है, तो तत्काल रिट याचिका को खारिज किए बिना इसे पूरी तरह से अपने गुणों के आधार पर निपटाया जाएगा।

केस: विनोद कुमार IAS बनाम भारत सरकार [WP(Crl 255/2021]

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक वैवाहिक अपील को अनुमति देते हुए कहा कि कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे के खिलाफ निराधार और...
03/07/2021

केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को एक वैवाहिक अपील को अनुमति देते हुए कहा कि कि एक पति या पत्नी द्वारा दूसरे के खिलाफ निराधार और चरित्र हनन का आरोप लगाना मानसिक क्रूरता का गठन करेगा।

न्यायमूर्ति ए. मोहम्मद मुस्तक और न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ की खंडपीठ ने कहा किः

''प्रतिवादी उसके द्वारा लगाए गए उन आरोपों को साबित करने में बुरी तरह विफल रहा है कि अपीलकर्ता का किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध है और वह एक अपवित्र महिला है। पत्नी पर अपवित्रता और विश्वासघात जैसे घृणित आरोप लगाना, निस्संदेह मानसिक क्रूरता का सबसे खराब रूप है।''

अपीलकर्ता सबिथा उन्नीकृष्णन ने मावेलिक्कारा फैमिली कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी,जिसमें उसकी तलाक के लिए पति के खिलाफ दायर मूल याचिका को खारिज कर दिया गया था। फैमिली कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि वह क्रूरता साबित करने में विफल रही है।

दोनों पक्षकार ओमान में नौकरी करते थे। अपीलकर्ता के अनुसार, उनके सहवास के दौरान, प्रतिवादी ने उसके खिलाफ अपवित्रता के झूठे आरोप लगाए और इन्हें अपने रिश्तेदारों के साथ-साथ अपने कार्यस्थल पर भी फैला दिया, जहां अपीलकर्ता के पिता भी कार्यरत थे।

तदनुसार, अपीलकर्ता को यू.एस.ए. में रहने वाली प्रतिवादी की मौसी की ओर से उस पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए एक ईमेल प्राप्त हुआ। उक्त ईमेल में यह भी आरोप लगाया गया था कि अपीलकर्ता को उसके प्रेमी के साथ पुलिस ने पकड़ लिया था और उन दोनों को पुलिस स्टेशन भी ले जाया गया था।

अपीलकर्ता ने कहा कि प्रतिवादी द्वारा लगाए गए (उसके व्यभिचारी आचरण के) इन झूठे आरोपों ने सहकर्मियों सहित अन्य लोगों की नजर में उसकी प्रतिष्ठा को कम कर दिया। इस प्रकार उसने दावा किया कि अब उससे प्रतिवादी के साथ रहने की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उसने आगे यह भी आरोप लगाया कि प्रतिवादी उसकी वफादारी पर सवाल उठाते हुए अक्सर उससे झगड़ा करता था।

अपील में मार्च 2012 को प्रतिवादी द्वारा अपीलकर्ता पर शारीरिक हमला करने का भी उल्लेख किया गया है, जिसके बाद से वह अलग रह रहे हैं।

अपीलकर्ता की ओर से पेश होते हुए वकील नागराज नारायणन ने प्रस्तुत किया कि मौखिक और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजी साक्ष्य स्पष्ट रूप से साबित करते हैं कि प्रतिवादी ने अपीलकर्ता पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की क्रूरता का प्रयोग किया था।

हालांकि, प्रतिवादी की ओर से पेश हुए एडवोकेट जैकब पी. एलेक्स ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि वह अभी भी अपीलकर्ता के साथ रहने और अपने वैवाहिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिए तैयार है। इसलिए प्रतिवादी ने याचिका को खारिज करने की मांग की।

इसके अलावा, प्रतिवादी ने प्रस्तुत किया कि चूंकि उक्त ईमेल केवल एक अपुष्ट प्रति थी और इसके लेखक की जांच नहीं की गई थी, इसलिए उस पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है। यहां तक कि अगर यह स्वीकार किया जाता है कि ईमेल प्रतिवादी की मौसी द्वारा भेजी गई थी, फिर भी ईमेल में इस बात का उल्लेख नहीं है कि प्रतिवादी ने अपीलकर्ता की बेवफाई की जानकारी उनको दी थी। इसलिए उसने दावा किया कि उसे इस ईमेल की सामग्री के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराया जा सकता है।

डिवीजन बेंच ने वकीलों द्वारा उठाए गए तर्कों पर विचार करते हुए कहा कि साक्ष्य अधिनियम के पारिभाषिक शब्दों को फैमिली कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही के लिए आयात नहीं किया जा सकता है। फैमिली कोर्ट एक्ट की धारा 14 एक फैमिली कोर्ट को पेश किए गए उन सभी दस्तावेजों पर भरोसा करने के लिए अधिकृत करती है,जिनके संबंध में यदि अदालत इस बात से संतुष्ट है कि विवाद से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए वह अदालत की सहायता के लिए आवश्यक हैं।

इसके अलावा, कोर्ट ने कहा कि मामले की परिस्थितियों से संकेत मिलता है कि प्रतिवादी ने अपनी मौसी को बताया कि अपीलकर्ता को पुलिस ने उसके प्रेमी के साथ पकड़ा है। इस कारण से, कोर्ट ने कहा कि ईमेल की सामग्री पर सुरक्षित रूप से भरोसा किया जा सकता है। प्रतिवादी भी अपीलकर्ता की दलीलों को नकारने के लिए कुछ भी ठोस पेश करने में विफल रहा है।

अपीलकर्ता की कथित क्रूरता के आधार पर टिप्पणी करते हुए, पीठ ने कहा किः
''एक वैवाहिक अपराध के रूप में क्रूरता, वैवाहिक कर्तव्यों और दायित्वों के संबंध में एक आचरण है। यह तय किया गया है कि क्रूरता का गठन करने के लिए शारीरिक हिंसा बिल्कुल जरूरी नहीं है; एक क्रूरता की शिकायत मानसिक या शारीरिक हो सकती है। मानसिक क्रूरता जीवनसाथी के दिमाग की एक स्थिति और भावना है,जो दूसरे के व्यवहार या व्यवहार के पैटर्न के कारण बनती है और इसका निष्कर्ष उपस्थित तथ्यों और परिस्थितियों के संचयी रूप से निकाला जा सकता है।''

न्यायालय ने वर्तमान मामले में संभावनाओं की प्रधानता का विश्लेषण किया और पाया कि अपीलकर्ता द्वारा प्रतिवादी पर लगाए गए मानसिक क्रूरता के मुख्य आरोप का कारण अपीलकर्ता के खिलाफ लगाया गया अपवित्रता का झूठा आरोप था।

इसलिए, यह माना गया कि प्रतिवादी द्वारा लगाए गए आरोप इतने महत्वपूर्ण और प्रभावशाली थे कि अपीलकर्ता के मन में उचित आशंका पैदा हो गई कि उसके लिए वैवाहिक संबंध जारी रखना सुरक्षित नहीं है।

खंडपीठ ने दलीलों व सबूतों पर समग्र रूप से विचार करते हुए अपीलकर्ता को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (आईबी) के तहत क्रूरता के आधार पर विवाह को भंग करने की डिक्री प्रदान कर दी। इसी के साथ अपील को स्वीकार कर लिया गया और फैमिली कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया गया।

Address

Bulandshahr
203001

Telephone

+918171814876

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Amit Mehra Adv posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share