12/05/2022
#डीजीसी_साधना_शर्मा_हत्याकांड
मेरी सबकुछ एक कदम और न्याय की ओर...
#डीजीसी_साधना_शर्मा_हत्याकांड में #सुप्रीम_कोर्ट_ने_दिया_बड़ा_फैसला: #बनी_नज़ीर
●गैंगस्टर लगाने के लिए क्रिमिनल हिस्ट्री की आवश्यकता नहीं
●एक ही मुकदमे के आरोपी पर लग सकता है गैंगस्टर
●गैंगस्टर एक्ट मकोका और गुजरात के आतंकवाद निरोधक एक्ट से भिन्न
●साधना शर्मा की हत्या में शामिल चौथे नम्बर की बहन श्रद्धा गुप्ता की याचिका खारिज कर दिया SC ने ये फैसला
दिनांक 23.5.2016 को बदायूं कोर्ट से उझानी घर जाते समय तत्कालीन डीजीसी क्रिमिनल साधना शर्मा की हत्या टवेरा गाड़ी से कुचल कर कर दी गई थी जिसमें कुल 12 लोग विवेचना में प्रकाश में आए।
मुख्य आरोपी पीसी शर्मा के साथ उसकी पत्नी कमलेश शर्मा, उसके भाई धर्मेंद्र उर्फ कल्लू, उसके साले गिरीश मिश्रा तथा साधना शर्मा की चौथे नंबर की बहन श्रद्धा गुप्ता, बहनोई श्रवण गुप्ता व सुपारी लेकर हत्या करने वाले मस्ताना और अब्दुल नबी, यासीन उर्फ बाबा, राजू उर्फ रियाज, मोहब्बत उर्फ साजिद, इशरत, पिंटू उर्फ नरेंद्र के खिलाफ विवेचना क्राइम ब्रांच बरेली द्वारा अभी भी की जारी है।
उक्त मर्डर के एकमात्र मुकदमे में पहले 8 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया तथा आरोपी श्रद्धा गुप्ता, श्रवण गुप्ता तथा कमलेश शर्मा के खिलाफ विवेचना जारी रही।आठ आरोपियों के खिलाफ इस सिंगल मर्डर के मुकदमे पर 2017 में गैंगस्टर का मुकदमा कायम हुआ, जिसका गैंगलीडर पी सी शर्मा था।
इसके उपरांत जब आरोपी श्रद्धा गुप्ता, श्रवण गुप्ता व कमलेश शर्मा के खिलाफ हत्या के मामले में आरोप पत्र सीजीएम बदायूं के न्यायालय में 2019 में दाखिल हुआ तो मैंने एसएसपी बदायूं को प्रार्थना पत्र दिया की श्रवण गुप्ता, श्रद्धा गुप्ता और कमलेश शर्मा भी पीसी शर्मा के गैंग के सदस्य हैं। इन पर भी पूरक गैंग चार्ट बनवा कर गैंगस्टर की कार्रवाई की जाए। जिस पर तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक उझानी विनोद कुमार ने रिपोर्ट में कहा कि इस मर्डर के मुकदमे में पहले ही गैंगस्टर कायम हो चुका है बचे तीन आरोपियों में दो महिलाएं हैं जिन पर गैंगस्टर की कार्यवाही नहीं की जा सकती। SHO विनोद कुमार की विधिविरुद्ध रिपोर्ट की शिकायत मैंने एसएसपी बदायूं से की तब एसएससी बदायूं ने संयुक्त निदेशक अभियोजन बदायूं से विधिक राय ली जिसके अनुसार अग्रिम विवेचना के आदेश के साथ पूरक गैंग चार्ट को बनाते हुए बचे तीनों आरोपियों श्रद्धा, श्रवण व कमलेश के खिलाफ गैंगस्टर कायम किया जा सकता था।परंतु फिर भी जब बचे तीनों आरोपियों पर गैंगस्टर का मुकदमा कायम नहीं किया गया तो मैंने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ली। हाईकोर्ट के आदेश के उपरांत आनन-फानन में बचे तीनों आरोपियों कमलेश, श्रद्धा व श्रवण के विरुद्ध गैंगस्टर कायम किया गया और विवेचना दूसरे सर्किल में थाना अलापुर को दी गया।
इस गैंगस्टर की एफ आई आर को निरस्त कराने व अपनी गिरफ्तारी पर रोक हेतु #आरोपी_श्रद्धा_गुप्ता ने हाई कोर्ट में रिट की जो खारिज हुई। हाईकोर्ट ने के इस ख़रीजे के खिलाफ हत्यारोपी श्रद्धा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की जिसमें मेरी ओर से मेरे गुरु और सीनियर आदरणीय मनोज गोयल सर ने, जो सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता हैं, याचिका का विरोध किया गया व हत्या के मुकदमे में श्रद्धा के खिलाफ संकलित सभी साक्ष्यों को पेश किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर SC के मा० जस्टिस एमआर शाह व बीवी नागरत्ना की खंडपीठ ने
हाई कोर्ट के निर्णय को सही ठहराते हुए श्रद्धा की याचिका को खारिज कर दिया।
भगवती और बड़ी दीदी आपकी ही कृपा से सब सम्भव हो रहा है...
राक्षसों का समूल सर्वनाश हो...
*रावनु रथी बिरथ रघुबीरा।*
*देखि बिभीषण भयउ अधीरा।।*
*अधिक प्रीति मन भा संदेहा।*
*बंदि चरन कह सहित सनेहा।।*
और स्नेहपूर्वक कह रहे हैं...
*नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना।*
*केहि बिधि जितब बियर बलबाना।।*
हे प्रभु!न तो आप के पास रथ है न पग में जूता..न कवच...कैसे आप इतने बड़े बहादुर पर विजय प्राप्ति करेंगे...
तब श्री राम विभीषण से कहते हैं की हे मित्र तुम्हारी चिंता निर्मूल है...मनुष्य जिस रथ से विजय प्राप्त करता है वह काठ लोहे का नहीं..वह तो दूसरा ही है...
*सुनहु सखा कह कृपानिधाना।*
*जेहिं जय होइ सो स्यन्दन आना।।*
अब ऐसा रथ जिस पर बैठ पुरे संसार को विजयी किया जा सकता है...उस रथ का चक्का क्या है.. ध्वज पटक क्या है..रस्सी कैसी है...घोड़े कौन है...सारथी कौन...उसका श्री भगवान वर्णन कर रहे हैं...
*सौरभ धीरज तेहि रथ चाका।*
*सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका।।*
*बल बिबेक दम परहित घोरे।*
*छमा कृपा समता रजु जोरे।।*
*ईस भजनु सारथी सुजाना।*
*बिरति चर्म संतोष कृपाना।।*
*दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा।*
*बर बिग्यान कठिन कोदंडा।।*
शौर्य और धैर्य उस रथ के दोनों पहिये हैं...सत्य और शील(सदाचार) दृढ़ पताका और ध्वजा हैं..बल,बिबेक,दम(इन्द्रियों का वश में होना) और परोपकार..ये चार घोड़े हैं...जो क्षमा,दया और समतारुपी डोरी से रथ में जोड़े हुए हैं...
ईश्वर भजन ही उस रथ का चतुर सारथी है..
और बिरति(वैराग्य)ढ़ाल है और संतोष तलवार है..और लड़ाई किससे होगी तो दान फरसा है.. बुद्धि प्रचण्ड शक्ति...श्रेष्ठ विज्ञानं कठिन धनुष है...
और...
*अमल अचल मन त्रोन समाना।*
*सम जम नियम सिलीमुख नाना।।*
और..
*कवच अभेद विप्र गुर पूजा।*
*एहि सम बिजय उपाय न दूजा।।*
निर्मल(पापरहित/निश्छल)और अचल/स्थिर मन तरकस के सामान है.. शम, यम और नियम ये सब वाण हैं..
और गुरुजनों का पूजन अभेद्य कवच है..
और फिर प्रभु अंत में कह रहे हैं...
*सखा धर्ममय अस रथ जाकें।*
*जीतने कहँ न कतहुँ रिपु ताकें।।*
हे मित्र! ऐसा धर्ममय और दृढ़ रथ जिसके पास हो वह रावण तो क्या संसार रूपी किसी अजेय शत्रु को भी जीत सकता है...
जय माँ भगवती