27/07/2025
देश में दिग्गज वकीलों के देश विरोधी केस लड़ने के आरोप अक्सर लगते है। ये बाते राजनीति और भावनाओं से जुड़ी बात होती है। वकील का काम न्याय के पक्ष में पक्षपात रहित बहस करना होता है, चाहे वह केस किसी भी पक्ष से संबंधित हो। कई दिग्गज वकील ऐसे मामलों में भी पैरवी करते हैं जो विवादित या देश विरोधी माने जाते हैं, पर इसका मतलब यह नहीं कि वे अपने देश के खिलाफ हैं। उनका पेशेवर दायित्व है कि हर व्यक्ति या पक्ष को कानूनी सहायता दें, ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।
वहीं, कुछ मामलों में वकीलों ने आतंकवादियों, भ्रष्टाचारियों या कथित देश विरोधी आरोपियों का बचाव किया है, जैसे अफजल गुरु केस में। इसमें उनका उद्देश्य आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय दिलवाना होता है, न कि देश से विरोध करना। यह न्यायिक प्रणाली की मूल भावना है कि हर व्यक्ति को कानून के तहत समान अधिकार मिलें और बेबुनियाद आरोपों या सजा से बचाव हो सके।
कई राजनीतिक दलों के अधिवक्ताओं ने कई बार विपक्षी दलों या सरकार के खिलाफ केस लड़कर जनहित याचिका या संवैधानिक अधिकारों की रक्षा भी की है। उदाहरण के लिए कपिल सिब्बल ने कई संवेदनशील और हाईप्रोफाइल केस लड़े, जिनमें नैशनल हेराल्ड केस, 2जी स्पेक्ट्रम केस, तीन तलाक, नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ केस आदि शामिल हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि वे सिर्फ राजनैतिक या किसी एक पक्ष के हितैषी नहीं, बल्कि कानूनी दृष्टि से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय हैं।
कई दिग्गज वकील पर्यावरण संरक्षण, मानवाधिकार, भ्रष्टाचार के खिलाफ जनहित याचिका केस लड़ते हैं, जो देश के हित में होते हैं। प्रशांत भूषण जैसे वकील बिना फीस के ऐसे केस लड़कर न्याय प्रणाली में सुधार की दिशा में योगदान देते हैं। इसका यह मतलब नहीं कि वे देश विरोधी हैं, बल्कि वे देश की बेहतर न्याय व्यवस्था और कानून के शासन के पक्षधर हैं।
वकीलों की भूमिका सिर्फ पक्षपात नहीं होती, वे कानूनी दलीलें देते हैं, अदालती प्रक्रिया निभाते हैं और कभी-कभी समाज के कमजोर या विवादित पक्षों के लिए भी आवाज उठाते हैं। ऐसा करना देश की न्याय व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है ताकि कोई भी व्यक्ति बिना पक्षपात के न्याय पा सके। इसीलिए दिग्गज वकील कई बार ऐसे केस लड़ते हैं जो राजनीतिक या सार्वजनिक रूप से विवादास्पद होते हैं, लेकिन उनका काम है कानून का पालन सुनिश्चित करना।
अगर यह माना जाए कि दिग्गज वकील केवल देश विरोधी केस लड़ते हैं और देश हित के लिए कभी खड़े नहीं होते, तो यह उनकी पेशेवर जिम्मेदारी और लोकतंत्र के सिद्धांत के खिलाफ होगा। वकील का फर्ज होता है कि वे न्याय की दिशा में काम करें, चाहे मामला कितना भी संवेदनशील या विवादित क्यों न हो। देश हित के लिहाज से भी यह जरूरी है कि कानून का सम्मान हो और सभी पक्षों को न्याय मिले।
इसी वजह से देश में जो बड़े वकील हैं, वे भी कभी-कभी ऐसी विवादित या देशहित से अलग मामलों में पैरवी करते हैं, लेकिन उनका मकसद न्याय स्थापित करना होता है, न कि देश विरोध। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को बनाए रखना उनके लिए सर्वोपरि होता है। इसका अर्थ यह है कि वे केवल उन मामलों में खड़े रहते हैं जो कानूनी दायरे में आते हैं, न कि सीधे देश के खिलाफ होते हैं।
अंततः वकील की भूमिका का सही आकलन न्यायपालिका, लोकतंत्र और कानून की भावना को समझकर ही किया जा सकता है। देश के लिए काम करने और न्याय को सुनिश्चित करने के बीच में संतुलन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होती है, जो वे न्यायिक प्रक्रिया के तहत पूरी करते हैं। इसलिए यह मानना कि दिग्गज वकील केवल देश विरोधी केस लड़ते हैं, सही नहीं होगा। वे विविध पक्षों का प्रतिनिधित्व करते हुए कानून के शासन को मजबूत करते हैं।
#कानूनीजागरूकता